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न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खं न मंत्रो न तीर्थं न वेदा न यज्ञा:। अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता चिदानंद-रूपं शिवो-हं शिवो-हं॥ #HarHarMahadevॐ
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अहं निर्विकल्पो निराकार-रूपो विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम् । न चासंगतं नैव मुक्तिर्न मेय- श्चिदानन्दरूपःशिवोऽहं शिवोऽहम् ॥ हर हर महादेव 🙏

Har Har Mahadev

न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खं न मंत्रो न तीर्थं न वेदों न यज्ञः अहम् भोजनं नैव भोज्यम न भोक्ता चिदानंद रूप: शिवोहम शिवोहम न मैं पुण्य हूँ,न पाप,न सुख न दुःख,न मन्त्र,न तीर्थ,न वेद न यज्ञ, मैं न भोजन हूँ,न खाया जाने वाला हूँ,न खाने वाला हूँ, चैतन्य रूप हूँ, आनंद हूँ, शिव हूँ,

हर हर महादेव 🔱 🙏🙏🚩 शुभ संध्या ✨

यह श्लोक शिव की उपासना का एक अद्वितीय रूप है, जहां आत्मा की निर्विकार स्थिति को व्यक्त किया जाता है। शिव का स्वरूप अद्वितीय और सर्वव्यापी है, जो हर जगह विद्यमान है, और हमें अपने सच्चे स्वरूप को समझने के लिए इस ज्ञान की प्राप्ति करनी चाहिए।

Har har mahadev

श्री शिवाय नम: श्री शंकराय नम: श्री महेश्वराय नम: श्री सांबसदाशिवाय नम: श्री रुद्राय नम: ॐ पार्वतीपतये नम: ॐ नमो नीलकण्ठाय नम:

हर हर महादेव जय शिव शम्भू

हर हर महादेव। 🙏 शुभ संध्याकाल। 🙏🚩

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