नौकरी पाने के लिए किस हद तक जाना पड़ता है 💔 उफफफफ ये जिंदगी....😔
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जब इनको पता है ये चीजें allow नहीं है तो क्यों पहन के ही क्यों जाते हैं ये सब करना ही नहीं पड़ेगा अगर घर से ही उतार कर आएं। नियम तो नियम होते हैं।

सरकार पेपर लीक रोकने के लिए क्या क्या ड्रामा करती है और जबकि पेपर प्रेस से या बोर्ड अधिकारियों की मिलीभगत से लीक होते है। नुकसान इन बच्चों को भुगतना पड़ता है

@alokrajRSSB @BadhalDr @BhajanlalBjp @ABPNews निवेदन है 🙏🏻 कृपया विवाहित स्त्रियों की चूड़ियां, पांव के बिछिए एग्जाम समय पर ना उतरवाएं,हिंदु धर्म में पति की मृत्यु पर ऐसा किया जाता,बोर्ड इतनी नाकामयाब नहीं होनी चाहिए की बिछिए,कंगन जेसी चीजों की गहनता से जांच ना कर सके।कृपा करें

Berojgari bhut buri hai hai

जबकि हकीकत सबको पता है जो होना होता है वह पहले ही हो चुका होता है यह फालतू का नाटक करवाने से क्या मतलब है

आज के समय का सबसे जानदार, शानदार शब्द है, इसको पाने के लिए कुछ भी किया जा सकता है।

@ashokgehlot51 @VasundharaBJP @BhajanlalBjp @GovindDotasra भगवान आप नेताओं को कीड़ो की कुंड नसीब में दे। आपके घर परिवार तबाह हो जाये। पेपर तो आप पहले ही बिकवा देते हो फिर भी ये सुहागनें अपने हाथों से इस कदर चूड़ियां उतारती हैं।

@alokrajRSSB जी यह कहां तक उचित है 🙄🙄💔💔

सरकार ऐसा करके पेपर आउट होने से बचा ले तो भी अच्छा होता है क्योंकि सरकार कुछ भी कर ले परन्तु पेपर आउट को रोकने में बहुत मुश्किलें आएंगी

ये तो नौटंकी है!
