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नेतानगरी में इस हफ्ते देखिए - जीडीपी पहली तिमाही में 7.8 फीसदी रही या फिर 2.6? - सुभाष चन्द्र गर्ग जीडीपी वाले अपने दावे पर क़ायम हैं या पलट गए? - ⁠राहुल गांधी क्या बदले हुए नज़र आ रहे हैं? - ⁠दलित समुदाय की राजनीति करते हुए कांग्रेस की...

66,524 views • 16 days ago •via X (Twitter)

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राहुल गांधी बेहद ख़तरनाक राजनीति कर रहे हैं - बिहार में चुनाव है - RJD-कांग्रेस में सीट बंटवारे को लेकर जूतमपैजार हो रही है - लेकिन विदेश से आते ही Rahul Gandhi Bihar की जगह चंडीगढ़ गए हैं - और आत्महत्या करने वाले दलित IPS के परिवार से मिल रहे हैं RAGA का स्पष्ट एजेंडा है - बिहार हारें तो हार जाएं - बिहार के लालू यादव कांग्रेस को सीटें दें या न दें - लेकिन जातिगत जहरीली राजनीति होती रहनी चाहिए अब अगला मुद्दा CJI गवई साहब जूताकांड होगा जबकि CJI साहब जूता फेंकने वाले वकील को माफ कर चुके हैं इसका दुष्परिणाम क्या हो सकता है, राहुल गांधी को इससे मतलब नहीं है को अपना दांव खुलकर खेल रहे हैं, समाज में जातिगत वैमनस्यता बढ़ रही है, सोशल मीडिया जाति के आधार एक दूसरे को गालियां दी जा रही हैं, सवर्ण-दलित-OBC एक दूसरे के ख़िलाफ़ खुलकर जहर उगल रहे हैं और अपने पाप व अपराधों के कारण सत्ता से दूर हुए नेताओं को लग रहा है कि जातिगत जहर के मंथन से शायद ऐसा अमृत निकलेगा जो उन्हें सत्ता दिलाएगा फिर भले इस मंथन से निकला विष इस देश को तबाही के दलदल में धकेल जाए लोकतंत्र में नेता राष्ट्रनिर्माता होते हैं, उन्हें विभाजनकारी नहीं बल्कि निर्माणकारी राजनीति करनी चाहिए

Abhay Pratap Singh (बहुत सरल हूं)

154,914 views • 11 months ago

एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था बनाई जा रही है, जो यदि अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचती है, तो भारत को एक व्यक्ति, एक पार्टी और एक विचारधारा के चुनावी ढांचे की ओर धकेल सकती है. राहुल गांधी लगातार इस खतरे के प्रति आगाह करते रहे हैं. चाहे लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर चिंताएं हों, सामाजिक ध्रुवीकरण का मुद्दा हो, चंद पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्था का सवाल हो, या फिर परीक्षा घोटाले, बेरोज़गारी और निकोबार के जंगलों के विनाश पर उनका हालिया वीडियो हो. राहुल गांधी ने उन मुद्दों पर सवाल उठाने की कोशिश की है, जिन पर सार्वजनिक जीवन में कई लोग सवाल उठाने का साहस भी नहीं करते. और यहीं पर मैं अपने मित्र और सार्वजनिक चिंतक Ramachandra Guha से अलग राय रखता हूं. आज की राजनीति में राहुल गांधी का महत्व केवल चुनावी जीत-हार तक सीमित नहीं है. आज जिस स्थिति में भारतीय गणराज्य खड़ा है, उसे राहुल गांधी जैसे एक व्यक्तित्व की आवश्यकता है. ऐसे व्यक्ति की, जो संवैधानिक मूल्यों, बहुलतावाद और लोकतांत्रिक असहमति की आवाज़ उठाने को तैयार हो, भले ही ये मुद्दे उस समय लोकप्रिय न हों या राजनीतिक रूप से नुकसानदेह क्यों न लगें. राजनीति में नेतृत्व का आकलन केवल जीते गए चुनावों से नहीं होता. उसका आकलन उन सिद्धांतों से भी होता है, जिन्हें आप किसी भी कीमत पर छोड़ने से इंकार कर देते हैं. और शायद यही राहुल गांधी की सबसे बड़ी ताकत है. यही कारण है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी बिखरे हुए विपक्ष की अंतरात्मा की आवाज़ के रूप में अब भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, ऐसे विपक्ष की जिसे एक नैतिक आधार की बेहद आवश्यकता है. Rajdeep Sardesai

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)

10,485 views • 3 months ago

राहुल गांधी संसद में संवाद और चर्चा नहीं, बल्कि हर दिन नया मुद्दा उठाकर सदन को बाधित करने की राजनीति कर रहे हैं। पहले उन्होंने NEET पर चर्चा की मांग की। जब सरकार चर्चा के लिए तैयार हुई, तो राम मंदिर का विषय उठा दिया गया। फिर जंतर-मंतर की घटना पर गृहमंत्री जी के बयान की मांग की गई। अब जब जंतर-मंतर के विषय पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है, तो राहुल गांधी चर्चा से ही भाग रहे हैं और जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल ये है कि जब गृहमंत्री हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं, तो राहुल गांधी चर्चा से क्यों भाग रहे हैं? हमारा इतिहास गवाह है कि हर विषय पर संसद में चर्चा के लिए हम तैयार रहे हैं। SIR पर भी विपक्ष ने चर्चा मांगी, चर्चा हुई और जब हम जवाब देने आए, तो राहुल गांधी सदन से भाग गए। यह इनकी राजनीति का रिकॉर्ड है- मुद्दा उठाओ, भ्रम फैलाओ और फिर भाग जाओ। दूसरी ओर, राहुल गांधी के इशारे पर झारखंड में छात्रों की आवाज दबाने के लिए कंटीले तार, लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल हो रहा है। क्या राहुल गांधी को झारखंड के युवाओं की आवाज सुनाई नहीं दे रही या फिर इसलिए खामोश हैं क्योंकि वहां उनकी सहयोगी सरकार सत्ता में है? कांग्रेस का काम है- अराजकता फैलाओ, भ्रम पैदा करो और जिम्मेदारी से भाग जाओ। हम राहुल गांधी को चैलेंज करते हैं कि आप सदन में आइए, हम चर्चा के लिए तैयार हैं और आपको मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। - श्री Jagat Prakash Nadda

BJP

52,995 views • 1 month ago

बीजेपी की तरफ झुके हुए पत्रकारों ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए 38 सेंकड की क्लिप शेयर की और फिर वैलेंसवादी पत्रकारों ने उसी क्लिप को शेयर करना शुरू कर दिया कि राहुल गांधी को ऐसा नहीं करना चाहिए...मुझे समझ नहीं आता कि राहुल गांधी की जब भी आलोचना की जाती है तो सिर्फ कुछ सेकंड की क्लिप ही क्यों शेयर की जाती है पूरी बात शेयर क्यों नहीं की जाती जबकि पूरी बात सिर्फ 1 मिनट 38 सेकंड में पूरी हो गई है। आप भी सुनिए और खुद फैसला कीजिए कि राहुल गांधी ने क्या गलत कहा...और मौसमी जो बेहद काबिल रिपोर्टर हैं लेकिन उनके सवाल पर भी गौर करने की जरूरत है... मौसमी कहती हैं कि कई बार जेपीसी की मांग करते हैं तो संसद ठप्प हो जाती है जनता का पैसा बर्बाद होता है तो क्या जेपीसी के अलावा सड़क का रास्ता अपना सकते हैं? अब सोचिए अगर विपक्ष सड़क पर आवाज उठाता है तो यही लोग कहते हैं कि आप सांसद हैं संसद में आवाज उठाइए...सड़क पर आम जनता को परेशानी हो रही है मतलब बस विपक्ष पर सवाल उठाना है? अब राहुल गांधी का जवाब भी सुनना चाहिए...राहुल गांधी इस फिजूल सवाल पर जवाब देते हैं कि अब संसद में हालात बदल गए हैं अब हमारी संख्या ज्यादा है इसलिए जेपीसी की मांग कर रहे हैं इसमें जनता का पैसा बर्बाद करने की बात कहां से आ गई? जनता का पैसा तो सत्ता पक्ष भी बर्बाद कर रहा है संसद में चर्चा ना करके उस पर सवाल कौन पूछेगा? लगता है बैलेंसवादी पत्रकारों को बहुत जल्दी रहती है राहुल गांधी की आलोचना करने की तो जैसे ही कुछ मिला तुरंत शुरू हो जाते हैं फिर चाहे वो 38 सेकंड की अधूरी क्लिप ही क्यों ना हो...

Saurabh

229,101 views • 2 years ago

केरल का चुनाव सिर्फ़ एक राज्य का चुनाव नहीं था… ये आने वाले भारत की एक चेतावनी भी है। ⚠️ सोचिए… जिस राज्य में हिंदू आबादी 50% से ज़्यादा हो, वहाँ सरकार चलाने की ताकत उन दलों के हाथ में जा रही है जिनके ज़्यादातर विधायक सिर्फ़ एक खास वोटबैंक से आते हैं। कांग्रेस आज अपनी इस जीत का जश्न मना रही है… लेकिन सवाल ये है कि ये जीत विकास की है या तुष्टिकरण की राजनीति की? 🤔 केरल में कांग्रेस ने उसी मुस्लिम लीग के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, जिसकी राजनीति हमेशा धर्म आधारित रही है। आज हालात ये हैं कि 35 में से 30 विधायक एक ही खास वर्ग से बताए जा रहे हैं। क्या यही “सेक्युलरिज्म” है? राहुल गांधी और कांग्रेस को हिंदू भावनाओं की कितनी परवाह है, ये देश पहले भी देख चुका है। गाय का सिर काटकर प्रदर्शन करने वाले नेता पर कार्रवाई दिखावे की हुई… बाद में वही नेता फिर सम्मान के साथ पार्टी में वापस लाया गया। केरल की बदलती डेमोग्राफी और वोटबैंक की राजनीति अब खुलकर दिखाई देने लगी है। आज केरल में जो हो रहा है, कल वही मॉडल पूरे देश में लागू करने की कोशिश होगी। समय रहते पहचानना होगा कि “धर्मनिरपेक्षता” के नाम पर आखिर खेल क्या चल रहा है। वरना… “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत…” 🚩

अखण्ड भारत संकल्प

10,705 views • 4 months ago