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Ana Sayfaya Dön

नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की बनीं पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री ◆ राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने दिलाई शपथ, संसद भंग ◆ विरोध प्रदर्शनों के बीच कार्की को मिली बड़ी जिम्मेदारी #Nepal | Kathmandu | #SushilaKarki

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Benzer Videolar

#BREAKING नेपाल बोला हमने भारतीय जमीन पर कब्ज़ा किया है. लिपुलेख पर ब्रिटेन मध्यस्थ बने: बोले नेपाल के प्रधानमंत्री #Nepal के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत की जमीन पर कब्जा करने का दावा किया है. लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर संसद में उन्होंने ये बयान दिया. अब भारतीय जमीन पर कब्जा करने वाले बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. नेपाल के कई पूर्व राजनयिकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने बालेन शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. बालेन शाह ने प्रधानमंत्री बनने के दो महीने बाद पहली बार नेपाली संसद में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा: “प्रधानमंत्री बनने के बाद, मुझे पता चला कि सिर्फ़ भारत ने ही नेपाल की ज़मीन पर कब्ज़ा नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा किया हुआ है. दोनों पक्षों को बैठकर इस मामले को देखने की ज़रूरत है.” भारत-चीन के बीच लिपुलेख और लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापार पर शाह ने कहा कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी पर विवाद diplomatic बातचीत से सुलझाया जाएगा. नेपाल इस मुद्दे पर भारत को एक ऑफिशियल डिप्लोमैटिक नोट भेज चुका है और भारत का जवाब भी मिल उसे मिल गया है. शाह ने कहा, “भारत के जवाब में कहा गया है कि दोनों सरकारें इतिहासकारों, सर्वेयर और इलाके के जानकार एक्सपर्ट्स की टीमें बनाएंगी और आपसी बातचीत के ज़रिए समाधान निकालेंगी.” उन्होंने कहा कि नेपाल ने बॉर्डर विवाद को लेकर #China और #Britain के साथ भी डिप्लोमैटिक बातचीत की है. शाह बोले, “हमने न सिर्फ़ भारत और चीन से बल्कि UK सरकार से भी बात की है. हमारा मानना ​​है कि UK को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए, क्योंकि ये मामला उस समय का है जब ब्रिटिश इंडिया ने इस इलाके को छोड़ा था.”

Dibang

86,660 görüntüleme • 3 ay önce

राजस्थान में जब मुख्यमंत्री चुनने का मौका आया, तो भाजपा ने क्या महिला को आगे बढ़ाया? मोदी जी ने सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की। अगर BJP में नारी सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता होती, तो कम से कम एक बड़े राज्य में महिला नेतृत्व जरूर दिखता। जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस का इतिहास गवाह है। देश को स्व. इंदिरा गांधी जी जैसी सशक्त महिला प्रधानमंत्री मिली, मीरा कुमार जी लोकसभा अध्यक्ष बनीं और प्रतीभा पाटिल जी राष्ट्रपति पद तक पहुंचीं। स्व. शीला दीक्षित जी 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री के पद पर रहीं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी जी कांग्रेस अध्यक्ष भी रहीं। ये दिखाता है कि महिलाओं को सिर्फ BJP के नारे और ढोंग नहीं, बल्कि कांग्रेस की तरह वास्तविक अवसर देने की सोच होनी चाहिए।

Govind Singh Dotasra

18,218 görüntüleme • 4 ay önce

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिनेई की मौत पर जश्न मनाने वाले भूल रहे हैं , कि ईरान के राष्ट्रपति कभी भारत के मुख्य अतिथि हुआ करते थे। जिनका स्वागत और सम्मान भारत के राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साहब और बीजेपी प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने किया था। ईरान भारत का मित्र राष्ट्र रहा है,लेकिन एक नफ़रती जमात बस मुस्लिम देश होने पर ईरान का विरोध कर रही हैं ,जबकि हमें इस विशेष संकट में ईरान के साथ होना चाहिए। दुनिया जानती हैं कि ईरान ने हमला नहीं किया है,बल्कि इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर जबदस्ती युद्ध थोपा हैं। आज ईरान अपनी संप्रभुता और अखंडता के लिए दो बड़ी ताकतों लड़ रहा हैं ,जो हर राष्ट्र का अधिकार है ,भारत अगर आज सुरक्षित हैं। तो पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साहब, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की वजह से जिन्होंने सही समय पर परमाणु हथियार बना लिए । अन्यथा आज जो हमला ईरान पर हो रहा हैं,वो भारत पर भी हो सकता था क्योंकि अमेरिका एक तानाशाह मुल्क हैं । जो हमेशा तरक्की कर रहे देशों को कमजोर करने का काम करता हैं , जिससे कि उसका वर्चस्व और तानाशाही दुनिया में कायम रहे।

Uzma Parveen

26,581 görüntüleme • 5 ay önce

आधी रात का तख्तापलट: कैसे मोदी-शाह ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति पर कब्जा किया 1️⃣ सुप्रीम कोर्ट का फैसला – सुप्रीम कोर्ट ने यह अनिवार्य किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का चयन करने वाली समिति में प्रधानमंत्री (PM), विपक्ष के नेता (LoP) और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल हों। 2️⃣ सरकार की सत्ता हथियाने की कोशिश – मोदी सरकार ने एक नया कानून पारित करके CJI को हटा दिया और उनकी जगह प्रधानमंत्री के चुने हुए एक मंत्री को शामिल किया, जिससे न्यायिक निगरानी कमजोर हो गई। 3️⃣ कानूनी चुनौती – इस कानून को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिससे इसकी वैधता पर सवाल उठ गया। 4️⃣ सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तय – सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई की तारीख 19 फरवरी तय की, जो नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती थी। 5️⃣ सरकार की पूर्व-धारणात्मक कार्रवाई – खतरे को भांपते हुए, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पहले ही CEC चयन समिति की बैठक जल्दबाजी में बुला ली। 6️⃣ विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी का विरोध – विपक्ष के नेता ने स्थगन की मांग की और समिति से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने का आग्रह किया। 7️⃣ मोदी-शाह का अधिक्रमण – राहुल गांधी के विरोध को मोदी और शाह ने खारिज कर दिया, जिनके पास समिति में बहुमत था। 8️⃣ आधी रात की घोषणा – एक चौंकाने वाले कदम में, सरकार ने 17 फरवरी की आधी रात को, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से महज 2 दिन पहले, ज्ञानेश कुमार को नए CEC के रूप में घोषित कर दिया। 9️⃣ शाह का कनेक्शन – ज्ञानेश कुमार, जिन्हें अमित शाह का दाहिना हाथ माना जाता है, को 2024 के चुनावों की निगरानी के लिए चुना गया, जिससे भाजपा का चुनावी प्रक्रिया पर पकड़ और मजबूत हो गई। सुप्रीम कोर्ट को दरकिनार करने से लेकर आधी रात की नियुक्ति तक, मोदी और शाह ने दिनदहाड़े सबसे बड़े चुनावी तख्तापलट को अंजाम दिया।

Congress

138,127 görüntüleme • 1 yıl önce

इज़राइल की संसद में मोदी के रहते विरोध आगे पढ़िए👇 ▪️जब प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल की संसद में थे, तब वहाँ के पूरे विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया ▪️दरअसल, यह विरोध इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ था, क्योंकि उन्होंने न्यायपालिका के साथ चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष को आमंत्रित नहीं किया था ▪️लेकिन कमाल की बात यह है कि इज़राइल की विपक्ष ने यह कदम एक दूसरे देश के प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान उठाया ▪️पर अब तक हमें इज़राइली सरकार से ‘इज़राइल की छवि को ठेस’ पहुँचाने जैसी दलील सुनने को नहीं मिली है ▪️ना ही उनके टीवी एंकर इज़राइल की विपक्ष को देशद्रोही या राष्ट्र-विरोधी बुला रहे हैं ▪️अब एक सेकंड के लिए रुकिए और कल्पना कीजिए - अगर ऐसा भारत में होता तो क्या टिप्पणियाँ और प्रतिक्रियाएँ होतीं ▪️अब तक पूरी विपक्ष को देशद्रोही घोषित कर दिया गया होता. स्टूडियो में बैठे एंकर ‘देश की छवि खराब’ होने की दलील देकर चीखते 👉👉असहमति और मतभेद लोकतंत्र के लिए बेहद ज़रूरी हैं. यह किसी के आपके देश में आने या ना आने पर निर्भर नहीं करता है 👉👉विरोध ऐसी जगहों पर होते हैं जहाँ उन्हें नोटिस किया जाये, उनकी चर्चा हो, जिन मुद्दों को वह उठा रहें हैं उसपर धयान जाये. जैसे अब बहुत लोग इज़राइल में सरकार और न्यायपालिका के बीच क्या चल रहा है, इस बारे में जान गए हैं 👉👉काश मोदी, उनके चमचे और उनकी गोदी मीडिया में इतनी परिपक्वता होती कि वे इसे समझ पाते - बजाय हर बार विपक्ष के किसी भी मुद्दे को उठाने पर खुद की महामूर्खता साबित करें मुझे उम्मीद है कि ऐसा हो - लेकिन मुझे अच्छी तरह से पता है यह होना संभव ही नहीं है

Supriya Shrinate

71,622 görüntüleme • 6 ay önce

"संसद जनता का मंदिर या सत्ता की जागीर?" दुर्भाग्य की बात है कि देश की संसद, जो जनता की आवाज़ का मंच है, अब कुछ लोगों के लिए एक निजी जागीर बनकर रह गई है। जिस तरह राहुल गांधी के भाषण और 'राइट टू रिप्लाई' से ठीक पहले अचानक संसद स्थगित कर दी गई, और स्पीकर महोदय सदन छोड़कर चले गए, ये कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक पूर्व-नियोजित राजनीतिक भागीदारी थी। क्या स्पीकर को सदन चलाना नहीं आता? क्या प्रधानमंत्री को विपक्ष के सवालों का जवाब देने की हिम्मत नहीं? या फिर डर ये था कि राहुल गांधी एक बार फिर सत्ता के खोखलेपन को उजागर कर देंगे? असल में डर "ऑपरेशन सिंदूर" का है। जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को उन्होंने व्यापार की धमकी देकर रोका, तो ये सीधा संदेश था कि भारत की विदेश नीति आज आत्मसम्मान से नहीं, सरेंडर से चल रही है। मोदी सरकार जानती है कि राहुल गांधी जैसे नेता इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे, अमेरिका के सामने जो झुकाव हुआ, उसका जवाब क्या है? लेकिन जब जवाब न हो, तब भागने की परंपरा शुरू होती है। और यही हुआ, सदन स्थगित कर दिया गया। संसद को चुप करा दिया गया। ये संसदीय परंपरा की अवहेलना नहीं, लोकतंत्र की हत्या है। एक सवाल हम सबको पूछना चाहिए, जो सरकार संसद से भागती है, वो देश के लिए क्या लड़ेगी?

Alok Sharma

20,293 görüntüleme • 1 yıl önce

🚨 साल 2001... नरेंद्र मोदी जी #Gujarat के नए-नए Chief Minister बने थे। मुख्यमंत्री बनते ही उनके सामने पहली बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई। उनका लक्ष्य सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से गुजरात के विकास को नई गति देना और लाखों लोगों तक पानी व बिजली पहुँचाना था। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और उनके समर्थकों ने इस परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि इससे आदिवासियों का विस्थापन होगा और उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लंबे विरोध के बावजूद परियोजना आगे बढ़ती रही। ⚖️ फिर आया 2002। गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगे। मेधा पाटकर सहित कई सामाजिक और राजनीतिक समूहों ने उनका विरोध किया। उस समय यह भी माना जा रहा था कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाद के वर्षों में विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के बाद उन्हें राहत मिली और उनका राजनीतिक सफर गुजरात से निकलकर देश की राजनीति के केंद्र, दिल्ली तक पहुँच गया। 🔥 इसके बाद गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन ने जोर पकड़ा। हार्दिक पटेल के नेतृत्व में चले इस आंदोलन ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की। समय के साथ आंदोलन शांत हुआ और बाद में हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल हो गए। 🇮🇳 2019 में CAA और NRC को लेकर देशभर में तीखी बहस छिड़ गई। संसद से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन हुए। दिल्ली का शाहीन बाग इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल वहाँ पहुँचे, सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में हस्तक्षेप किया और अंततः आंदोलन समाप्त हुआ। 🚜 इसके बाद किसान आंदोलन ने सरकार की परीक्षा ली। कृषि कानूनों के विरोध में बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे। सिंघु और गाज़ीपुर बॉर्डर आंदोलन के प्रमुख केंद्र बने। राकेश टिकैत की भावुक अपील ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। 26 जनवरी 2021 की लाल किले की घटना ने भी व्यापक बहस छेड़ी। अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं तीनों कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे उनकी सरकार का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय माना। 🤼 इसके बाद पहलवानों का प्रदर्शन और अग्निवीर योजना के विरोध में भी आंदोलन हुए, लेकिन उनका राजनीतिक प्रभाव पहले के आंदोलनों जितना व्यापक नहीं माना गया। ⚡ अब एक बार फिर नया विवाद और नया आंदोलन चर्चा में है। हाल के घटनाक्रमों में सोशल मीडिया पर तेज़ बहस, विभिन्न संगठनों की सक्रियता और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों ने राजनीतिक माहौल को फिर गर्म कर दिया है। इस दौरान कई दावे और आरोप भी सामने आए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। ❓अब सबसे बड़ा सवाल यही है— 🇮🇳 क्या 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश या महत्वपूर्ण घोषणा करेंगे? या फिर सरकार विरोधियों की प्रमुख मांगों पर विचार करते हुए कोई नया फैसला लेगी? Narendra Modi Ji PMO India

अखण्ड भारत संकल्प

16,273 görüntüleme • 27 gün önce

बाबासाहेब डॉ अंबेडकर जी को सम्मान देने के लिये कांग्रेस ने जो किया ऐसा शायद दूसरा कोई नहीं कर सकता था। 🔹मुंबई से संविधान सभा में लाने के लिए कांग्रेस ने अपने सदस्य M.R. Jayakar का इस्तीफा कराया। 🔹गाँधी जी ने ही संविधान सभा के ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष के लिए बाबासाहेब डॉ अंबेडकर जी के नाम का सुझाव दिया था। भारत सरकार में बाबासाहेब को देश का पहला कानून मंत्री बनाने में भी गांधीजी ने अपना समर्थन दिया था। 🔹राज्य सभा में बाबासाहेब को दो बार बंबई से चुना गया। पहली बार 3 अप्रैल 1952 से 2 अप्रैल 1956 के बीच। दोबारा 3 अप्रैल 1956 को सदस्य बने, पर 6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हो गया। कांग्रेस पार्टी चाहती थी कि बाबासाहेब सम्मान सहित राज्य सभा पहुंचे, इसीलिए वो दो-बार निर्विरोध राज्य सभा का चुनाव जीते। 🔹बीजेपी के लोग यह झूठ फैलाने की कोशिश करते हैं कि कांग्रेस ने बाबासाहेब अंबेडकर जी की कोई प्रतिमा नहीं लगाई। 2 अप्रैल 1967 को कांग्रेस सरकार में बाबासाहेब के सम्मान में संसद भवन में उनकी सबसे बड़ी मूर्ति लगाई थी। उस समय डॉ एस राधाकृष्णन जी राष्ट्रपति थे और सरदार हुकुम सिंह जी, जो लोक सभा अध्यक्ष थे, उन्होंने ने प्रतिमा का अनावरण किया था। BJP-RSS व उनके पुरखों ने भारतीय तिरंगा, हमारे संविधान, हमारे अशोक चक्र, बाबासाहेब अंबेडकर और हमारे स्वतंत्रता संग्राम सबका विरोध किया। RSS ने 52 साल तक नागपुर में अपने headquarter पर देश का तिरंगा नहीं फहराया और कोर्ट के order के बाद उन्हें मजबूरन फहराना पड़ा। BJP-RSS व उनके पुरखों ने रामलीला मैदान में महात्मा गाँधी जी, पंडित जवाहरलाल नेहरू जी, बाबासाहेब डॉ अंबेडकर जी के पुतले फूँके और भारत के संविधान की प्रतियाँ जलाएँ थी। मैं उनको challenge करता हूँ कि इतिहास पढ़ें और बताएं कि राष्ट्रीय आंदोलन में उनकी क्या भूमिका थी? 📍बेलगावी, कर्नाटक

Mallikarjun Kharge

24,325 görüntüleme • 1 yıl önce

पाहलगाम आतंकी हमले के बाद राहुल गांधी ने पूछा: “किसने समर्थन किया हमें?” वे लगातार पाकिस्तान की घिसी-पिटी रट दोहराते रहते हैं कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेला पड़ गया है। आइए इस झूठ को पूरी तरह उजागर करें। पाहलगाम हमले के बाद पूरी सभ्य दुनिया भारत के साथ खड़ी थी। वॉशिंगटन से टोक्यो तक, पेरिस से कैनबरा तक — देशों ने इस कायराना हमले की एक स्वर में निंदा की और भारत के आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को बिना किसी झिझक के समर्थन दिया। संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसे “घृणित” हमला बताया और आतंकवाद विरोधी सहयोग को पूरी तरह दोहराया। ट्रंप प्रशासन ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (लश्कर-ए-तैयबा का मोहरा) को आतंकवादी संगठन घोषित किया — भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत। फ्रांस ने बिना किसी शर्त के समर्थन दिया। राष्ट्रपति मैक्रों ने हमले की कड़ी निंदा की — ठीक वैसे ही जैसे पुलवामा के समय की थी। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को कॉल कर संवेदना प्रकट की और एकजुटता का आश्वासन दिया। मॉस्को अब भी UNSC में भारत विरोधी प्रस्तावों को रोकता आ रहा है। ब्रिटेन ने G7 के साथ मिलकर इसे “शांति और मानवता पर हमला” बताया। संदेश स्पष्ट और एकजुट था। यहां तक कि चीन ने भी — अपनी पारंपरिक कूटनीतिक चालबाज़ी के बावजूद — “चौंकाने वाला” और “गंभीर रूप से निंदनीय” कहकर हमला किया। हालाँकि बीजिंग ने पाकिस्तान की “चिंताओं” का ज़िक्र कर कूटनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की, लेकिन उसने पाकिस्तान का झूठा प्रचार दोहराने की हिम्मत नहीं की। यही है UNSC के P5 देश — अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और यहां तक कि चीन — जिन्होंने या तो भारत का पूर्ण समर्थन किया या तटस्थ रहे। किसी एक भी देश ने भारत को दोष नहीं दिया। किसी ने नहीं कहा “दोनों पक्ष दोषी हैं।” और फिर भी राहुल गांधी इसे “अंतरराष्ट्रीय अलगाव” कहते हैं? यूरोपीय संघ ने भारत को स्पष्ट रूप से समर्थन दिया। जापान ने भारत की संयमित प्रतिक्रिया की प्रशंसा की और इंडो-पैसिफिक साझेदारी को दोहराया। ऑस्ट्रेलिया, इटली, जर्मनी, स्पेन, इज़राइल और अर्जेंटीना — सभी ने हमले की कठोर निंदा की और भारत को पूरा समर्थन दिया। यहां तक कि वे देश जो अक्सर तटस्थ रहते हैं — जैसे ईरान, फिलिस्तीन, और कई अरब राष्ट्र — सऊदी अरब, यूएई, मिस्र, जॉर्डन — इन्होंने भी भारत का खुला समर्थन किया। दक्षिण एशियाई पड़ोसी — श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मॉरीशस — हमारे साथ खड़े रहे। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश — इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम — एकजुटता में एकमत थे। दक्षिण कोरिया, यूक्रेन, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, ताइवान, पनामा और कई अन्य देशों ने भी संवेदना व्यक्त की। यूरोप के देश — ऑस्ट्रिया से लेकर नॉर्वे तक, पुर्तगाल से लेकर ग्रीस तक — सभी ने हमले की कड़ी निंदा की। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “कायरतापूर्ण और अमानवीय” कहा और जवाबदेही की मांग की। किसी ने पाकिस्तान की भाषा नहीं बोली। किसी ने भारत के जवाब देने के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया। लेकिन राहुल गांधी — जो सच्चाई से कटे हुए हैं और केवल अपनी प्रतिध्वनि मंडली के प्रति वफादार हैं — पूछते हैं: “किसने समर्थन किया?” जवाब साफ़ है: पूरी दुनिया ने किया। सिवाय उनके। और यह पहली बार नहीं है। उन्होंने लंदन में खड़े होकर कहा था कि भारतीय लोकतंत्र मर चुका है। गलवान संघर्ष के दौरान उन्होंने चीन की भाषा दोहराई। बालाकोट स्ट्राइक पर उन्होंने विदेश में खड़े होकर सवाल उठाया। और अब, जब निर्दोष नागरिक आतंकियों का शिकार बन रहे हैं — वे पूछते हैं कि कौन भारत के साथ खड़ा है? दुनिया खड़ी है। राहुल गांधी नहीं। वे भारत के साथ नहीं खड़े हुए। वे पाकिस्तान की ISPR (प्रोपेगंडा मशीन) की भाषा बोलते रहे। आज का भारत सम्मान की मुद्रा में है — वॉशिंगटन से लेकर मास्को तक, बीजिंग से ब्रासीलिया तक। हम दुनिया से दया नहीं मांगते। हम ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करते हैं, इंडो-पैसिफिक को दिशा देते हैं, और वैश्विक विमर्श तय करते हैं। हमने पाकिस्तान प्रायोजित आतंक को पहले भी कुचला है। फिर करेंगे — जब चाहें, जहां चाहें, जैसे चाहें।

Amit Malviya

43,052 görüntüleme • 1 yıl önce

कल जो रात को जंतर मंतर पर अमित शाह की निरंकुश दिल्ली पुलिस ने किया वो कल्पना से परे है, खिलाड़ियों को पीटा गया, महिला खिलाड़ियों के साथ अभद्रता हुई. मोदी जी, कर्नाटका आ कर किस मुँह से नारी शक्ति की बात करते हैं आप? 13 दिन से ऊपर हो गये हैं देश के सबसे होनहार खिलाड़ी सड़कों पर बैठे हैं - न्याय की आस में. पर यह न्याय की उम्मीद उस सरकार से लगा रहे हैं जिसके अंदर ज़मीर और नैतिकता का अंश भी नहीं है भाजपा के बाहुबली सांसद और गंभीर आक्षेपों से घिरे कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह ने साफ़तौर से कह दिया “मोदी जी या अमित शाह कह दें तो तुरंत इस्तीफ़ा दे दूँगा” तो अब सवाल यह है कि मोदी जी कह क्यों नहीं रहे? क्या उनको इस देश की बेटियों की फ़िक्र नहीं? आख़िर उनके पास तो पहली शिकायत 2021 में ही पहुँच गई थी, यह ख़ुद विनेश फोगाट ने बताया है. कौन से मुहूर्त का इंतज़ार कर रहे हैं प्रधानमंत्री? अब आगे पढ़िए कैसे कितने चेहरे बेनक़ाब हो गये 🔹पहले तो अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बिना भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ FIR तक दर्ज नहीं की. और अब को घिनौना काम कल रात को किया है - क्या इसको गृह मंत्री अमित शाह का वरदहस्त प्राप्त है? 🔹क्या जिन खिलाड़ियों के साथ फोटो खींचा कर ख़ुद ही सारा श्रेय लेने में PM मोदी ने कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, जिस विनेश फोगाट को ‘मेरे घर की’ कहते हैं - उसके आँसूँ दिखाई नहीं दिये? क्या उनकी एक बार भी टोह ली मोदी जी ने? 🔹TV चैनल पर पुश अप करने से अगर फ़ुरसत मिल गई हो तो खेल कूद के मंत्री अनुराग गोली मारो ठाकुर - इन खिलाड़ियों की भी थोड़ी चिंता कर लेते, आप ही के खोखले आश्वासन पर खिलाड़ियों ने पहला अपना प्रदर्शन ख़त्म किया था 🔹भाजपा की महिला नेत्रियां ख़ासतौर से महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस पूरे मामले पर मौन धारण कर लिया है, वो गला केवल राहुल गांधी के नाम पर ही फाड़ेंगी 🔹राष्ट्रीय महिला आयोग की रेखा वर्मा ने हर बार की तरह आँखें मूँद ली हैं, वो सिर्फ़ विपक्ष के ख़िलाफ़ भाजपाई रंजिश के लिए ही खुलेंगी 🔹राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रियांक कानूनगो - POCSO के आरोप के बावजूद भक्त बने रहेंगे - साधना सिर्फ़ विपक्षियों को निशाना बनाते वक्त टूटेगी 🔹नामी गिरामी पूर्व खिलाड़ी, बड़े बड़े सिनेमा स्टार शायद ‘मन की बात’ सुनने में व्यस्त हैं - तभी बेचारों के पास दो मिनट का वक़्त नहीं है खिलाड़ियों के समर्थन में बोलने का. और कुछ ने तो उल्टा खिलाड़ियों को ही कोस डाला. जीवन में सच के साथ प्रबलता से खड़े रहने वाले ही असली हीरो होते हैं. नीरज चोपड़ा जैसों का क़द कुछ और बढ़ गया. वहीं कुछ बड़े सितारे थोड़े और धूमिल पड़ गए 🔹मीडिया की स्थिति दयनीय है. खिलाड़ियों के पक्ष में तो बोलना ही पड़ेगा - इतना तो जनता को दिखाना पड़ेगा. अब बाहुबली सांसद के ख़िलाफ़ भी बोलना पड़ रहा है - लेकिन मज़ाल है कि प्रधानमंत्री मोदी से उनकी चुप्पी और गृहमंत्री अमित शाह से उनकी पुलिस के बर्ताव पर एक सवाल कर लें 🔹लेकिन सबसे ज़्यादा तरस तो भक्तों पर आता है - अब बेचारों को ठेका दिया गया है इस देश की आन - इन बेटियों को कोसने का, इन लड़कियों को ‘नौ सौ चूहे खाने वाली’ बताने का. व्यक्तिगत आक्षेप लगाये जा रहे हैं. भक्त बनना आसान नहीं. क़ुर्बानी देनी होती है - अपने दिमाग़ और अपनी आत्मा दोनों की. पर मोदी जी, अब कल की घटना के बाद भी कब तक चुप रहिएगा? बृजभूषण शरण सिंह ने तो गेंद आपके पाले में डाल दी है - कब लीजिएगा इस्तीफ़ा या अभी भी सिर्फ़ संरक्षण ही दीजिएगा? कब पूछियेगा अमित शाह से कल रात की घटना के बारे में? क्योंकि यह देश देख रहा है कि अब न्याय और अन्याय के बीच की दहलीज़ पर आप खड़े हैं

Supriya Shrinate

331,212 görüntüleme • 3 yıl önce

विश्व स्तर पर प्रसिद्ध बाल विवाह रोकथाम की नायिका जिनेवा के ग्लोबल यूथ ह्यूमन राइट्स चैंपियन अवार्ड सम्मानित Dr.Kriti Bharti जी से कल मेरे घर पर लंबे समय बाद बहुत ही सार्थक ओर प्रेरणादायक मुलाकात हुई। आपने भारत का पहला बाल विवाह निरस्त करवाया था। साल 2012 में कृति भारती जी ने लक्ष्मी सरगरा के मामले को सामने लाकर इतिहास रच दिया था, लक्ष्मी सरगरा भारत की पहली ऐसी महिला बनीं, जिनका बाल विवाह कानूनी रूप से निरस्त हुआ। इस ऐतिहासिक फैसले ने न केवल समाज में जागरूकता बढ़ाई, बल्कि उन हजारों लड़कियों के लिए भी उम्मीद जगाई, जो बचपन में ही बाल विवाह जैसी जंजीरों में जकड़ दी जाती हैं। कृति भारती जी को अपने इस नेक कार्य के लिए अनगिनत बार धमकियों का सामना करना पड़ा। कुछ कट्टरपंथी विचारधारा के लोग, जो बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं को सही ठहराते हैं, उन्होंने भारती को नाक काटने और सामूहिक बलात्कार की धमकियाँ दीं। लेकिन इन धमकियों ने उन्हें कभी कमजोर नहीं किया। आप अपने संकल्प पर अडिग रहीं और समाज सुधार के अपने मिशन को जारी रखा। आज, सारथी ट्रस्ट ने 25000 बच्चियों ओर महिलाओं को पुनर्वासित किया है। 2011 में अपनी स्थापना के बाद से, कृति जी और उनकी टीम 52 बाल विवाह निरस्त करवा चुकी हैं और 2100 से अधिक बाल विवाह होने से रोक चुकी हैं। साथ ही 50000 हजार हम जैसे लोगों को बाल विवाह नहीं करने की शपथ भी दिलाई है। यह आँकड़े न केवल उनके अथक प्रयासों को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि अगर सही दिशा में मेहनत की जाए, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। डॉक्टर कृति भारती जी खासकर ग्रामीण क्षेत्र में उन बेटियों के लिए एक वरदान बनी है, जिनका जीवन बाल विवाह जैसी कुप्रथा में जकड़ा हुआ है। बाल विवाह निरस्त की साहसिक मुहिम के लिए डाॅ.कृति भारती का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकाॅर्ड्स,एशिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड रिकाॅर्ड्स इंडिया सहित 9 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स में शामिल हो चुका है। डॉ कृति भारती दीदी हमारे परिवार का एक अमूल्य हिस्सा है। मुझे आपसे बहुत प्रेरणा मिल रही है, मैं भी जातीय उत्पीड़न के खिलाफ इतनी बड़ी लड़ाई लड़ रहा हू। शुक्रिया डॉक्टर कृति भारती जी।✍️💐🙏

Ashok Meghwal

20,794 görüntüleme • 1 yıl önce

▪️मध्यप्रदेश के बरौदिया में BJP नेताओं ने एक दलित बेटी का यौन उत्पीड़न किया ▪️फिर उसे धमकाया कि वह इस बारे में किसी से कुछ ना कहे ▪️बहुत हिम्मत जुटा कर बेटी ने यह बात अपने परिवार को बताई और बड़ी मुश्किल से FIR हुई ▪️मुख्य आरोपी BJP के नेता हैं. अंकित सिंह BJP युवा मोर्चा ग्रामीण मंडल का अध्यक्ष था और दूसरा आरोपी कोमल सिंह BJP विधायक और मंत्री भूपेन्द्र सिंह का करीबी था ▪️यह BJP नेता दलित परिवार पर समझौते का दबाव बनाने लगे ▪️जब समझौते के लिए परिवार राजी न हुआ तो लड़की के भाई की पीट-पीटकर हत्या कर दी ▪️यही नहीं बीच-बचाव करती लड़की की माँ को भी निर्वस्त्र किया ▪️फिर दलित बेटी के चाचा को तीन दिन पहले समझौते के लिए बुलाया और उनकी भी हत्या कर दी ▪️हैवानियत यहाँ ख़त्म नहीं होती है, वह दलित पीड़िता अपने चाचा की लाश को पोस्टमार्टम के बाद एंबुलेंस में लेकर गांव आ रही थी ▪️और अचानक रास्ते में एंबुलेंस से गिरकर उस बेटी की भी मौत हो गई ▪️पहले एक साल के अंदर ही दो हत्याएँ और फिर संदिग्ध परिस्थिति में पीड़िता, जिसने BJP के नेताओं पर यौन शोषण का आरोप लगाया था उसकी ख़ुद की मौत ▪️नरेंद्र मोदी आपके लोग इस देश की बेटियों के साथ इतनी दरिन्दगी करने की हिम्मत भी आख़िर कैसे करते हैं? ▪️इसका सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कारण है, आप हर बार आरोपी को संरक्षण देते हैं ▪️असल में जब आप ख़ुद चुनावी मंच से मुजरा जैसा शब्द बार बार बोलते हैं तो इन आदमख़ोरों को लगता है औरत का कोई अस्तित्व ही नहीं है - उसका दर्जा दोयम है ▪️इस देश का दुर्भाग्य है कि आप इस देश के प्रधानमंत्री रहे. आपके दस साल आधी आबादी और खास तौर से दलित बेटियों के लिए अभिशाप से ज़्यादा कुछ नहीं ▪️मीडिया, महिला मंत्री और महिला आयोग ने हर बार की तरह इस बार भी आँखों पर पट्टी बांध कर मौनव्रत का संकल्प ले लिया है

Supriya Shrinate

129,001 görüntüleme • 2 yıl önce

▪️मध्यप्रदेश में BJP नेताओं ने एक दलित बेटी का यौन उत्पीड़न किया ▪️फिर उसे धमकाया कि वह इस बारे में किसी से कुछ ना कहे ▪️बहुत हिम्मत जुटाकर बेटी ने यह बात अपने परिवार को बताई और बड़ी मुश्किल से FIR हुई ▪️मुख्य आरोपी BJP के नेता हैं. अंकित सिंह BJP युवा मोर्चा ग्रामीण मंडल का अध्यक्ष था और दूसरा आरोपी कोमल सिंह BJP विधायक और मंत्री भूपेन्द्र सिंह का करीबी था ▪️यह BJP नेता दलित परिवार पर समझौते का दबाव बनाने लगे ▪️जब समझौते के लिए परिवार राजी न हुआ तो लड़की के भाई की पीट-पीटकर हत्या कर दी ▪️यही नहीं बीच-बचाव करती लड़की की मां को भी निर्वस्त्र किया ▪️फिर दलित बेटी के चाचा को तीन दिन पहले समझौते के लिए बुलाया और उनकी भी हत्या कर दी ▪️हैवानियत यहां ख़त्म नहीं होती है, वह दलित पीड़िता अपने चाचा की लाश को पोस्टमार्टम के बाद एंबुलेंस में लेकर गांव आ रही थी ▪️अचानक रास्ते में एंबुलेंस से गिरकर उस बेटी की भी मौत हो गई ▪️पहले एक साल के अंदर ही दो हत्याएं और फिर संदिग्ध परिस्थिति में पीड़िता, जिसने BJP के नेताओं पर यौन शोषण का आरोप लगाया था उसकी मौत ▪️नरेंद्र मोदी आपके लोग इस देश की बेटियों के साथ इतनी दरिन्दगी करने की हिम्मत आख़िर कैसे करते हैं? ▪️इसका सिर्फ़ और सिर्फ़ एक कारण है, आप हर बार आरोपी को संरक्षण देते हैं ▪️असल में जब आप ख़ुद चुनावी मंच से 'मुजरा' जैसा शब्द बार बार बोलते हैं तो इन आदमख़ोरों को लगता है औरत का कोई अस्तित्व ही नहीं है- उसका दर्जा दोयम है ▪️इस देश का दुर्भाग्य है कि आप इस देश के प्रधानमंत्री रहे. आपके दस साल आधी आबादी और खास तौर से दलित बेटियों के लिए अभिशाप से ज़्यादा कुछ नहीं ▪️मीडिया, महिला एवं बाल विकास मंत्री और महिला आयोग ने हर बार की तरह इस बार भी आँखों पर पट्टी बांध कर मौनव्रत का संकल्प लिया है : Supriya Shrinate जी

Congress

44,918 görüntüleme • 2 yıl önce

कांग्रेस के प्रवक्ता आलोक शर्मा ने एक टीवी चैनल पर धमकी देनी शुरू की कि लोगों को याद रखना चाहिए कि श्रीलंका में क्या हुआ, कैसे लोग राष्ट्रपति के घर में घुस गए, सामान लूट लिया, बांग्लादेश में क्या हुआ, लोग प्रधानमंत्री के घर घुस गए और प्रधानमंत्री को दिल्ली में शरण लेना पड़ा। ये सब भारत में भी हो सकता है। न्यूज़ एंकर चित्रा त्रिपाठी थी, उन्होंने तुरंत आलोक शर्मा को न केवल रोका बल्कि उसको तुरंत भगा दिया अपने डिबेट से। अब आलोक शर्मा के बारे में सुनिए, यह कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना फिरता है और मोदी जी को धमकी दे रहा है कि यह उनसे सत्ता छीन लेगा, वह भी श्रीलंका और बांग्लादेश के तर्ज पर, यानी संसद और कोर्ट को बाईपास करके देश में अराजक स्थिति पैदा करके विद्रोह कराएगा, इस लंपट को कांग्रेस ने सभासद यानी नगर निगम पार्षद का टिकट दिया था 2017 में, इसमें भी यह लंपट बुरी तरह हार गया। सभासद का चुनाव जीतने की औकात नहीं और बातें कर रहा है कि भारत से लोकतंत्र को समाप्त कर देगा। इन लोगों में अचानक जान इसलिए लौटी है क्योंकि अमेरिका और भारत के संबंध खराब हो गए हैं। इनको लगता है कि डीप स्टेट इनके साथ आयेगा और ये भारत में अराजकता फैला कर सत्ता पर क़ब्ज़ा बना सकते हैं। जो थोड़ा भी गहराई से राजनीतिक समझ रखता है वह जानता है कि अमेरिका का डीप स्टेट ऐसे मूर्ख पाड़े पर दाव नहीं लगाता जिसे पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा घोषित तौर पर बेवक़ूफ़ बता चुके हैं। इस पर दाव लगाने वाला केवल एक देश था और वह था चीन, उसी लालच में इसने नार्थ ईस्ट से अपनी भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी, भारत चीन विवाद के समय चीनी राजदूत से मिलता था, नेपाल जाकर म्यांमार के चीनी समर्थक राजनयिक की बेटी के साथ फंक्शन अटेंड करता था। यदि अमेरिकन डीप स्टेट को यह पाड़ा इतना ही पसंद होता तो आम आदमी पार्टी का उदय होता? उसका विस्तार होता? इतनी जबरदस्त फंडिंग होती उनसे जुड़े मामलों में? इतने आसानी से खालिस्तानी उनसे संपर्क साधते? इन सबको लग रहा है कि कुछ अन्ना आंदोलन टाइप का होगा और लाखों लोग सड़क पर आयेंगे और वह संसद में घुसकर अराजकता पैदा कर राष्ट्रपति प्रधानमंत्री सुप्रीम कोर्ट को रौद डालेंगे। ये सब जब ऐसा सपना देखते हैं तो इनको यह समझ नहीं आता कि जब तुम लोग ये करोगे तो क्या मोदी, संघ, भाजपा, एनडीए के लोग तमाशा देखेंगे? क्या सरकार और सुप्रीम कोर्ट तमाशा देखेगी? ये लोग जो सपना देख रहे हैं, इनको मालूम नहीं कि यदि उसको उन्होंने ज़मीन पर उतारने की सोची तो इन्हें भारत में दफ़न होने को भी जगह नहीं मिलेगी। भारत देश एक स्थिर लोकतांत्रिक देश इसलिए नहीं है क्योंकि कुछ लोगों ने मिलकर यहाँ लोकतांत्रिक व्यवस्था दी, इसका लोकतंत्र इसलिए इतना मज़बूत है क्योंकि यहाँ का बहुसंख्यक हिंदू समाज असहमति को नैसर्गिक मानता है। यहाँ के जनता को इस देश के संविधान में, इस देश की संसद में, इस देश के सुप्रीम कोर्ट में विश्वास है। हो सकता है कि ये व्यवस्थाएँ उसकी उतनी आशाये पूर्ण न भी कर पा रही हों जितनी आशा रखते है, बावजूद इसके वह इसे अपने सीने से लगाकर रखता है। यदि किसी को यह लगता है कि वह सड़क पर अराजकता फैलाकर संसद पर क़ब्ज़ा कर सकता है तो उसे याद रखना चाहिए कि ऐसे लोगों की इस देश की जनता ऐसा बुरा हाल करेगी जिसकी उनको कल्पना भी नहीं होगी। विपक्ष का काम है आरोप लगाना, धरना देना, प्रदर्शन करना, लेकिन यह काम कतई नहीं है कि वह ये धमकी दे कि वह सड़क पर भीड़ जुटाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कोर्ट सब पर क़ब्ज़ा कर लेंगे। यदि विपक्ष ऐसा करता है तो वह विपक्ष नहीं नक्सल गिरोह है। उनके साथ उसी अंदाज़ में तब देश निबटेगा। डॉ भूपेंद्र सिंह

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

20,607 görüntüleme • 1 yıl önce

आज AICC General Secretaries और Incharges की बैठक में मेरे शुरूआती वक्तव्य के कुछ अंश - हमें काँग्रेस पार्टी की ideology के COMMITTED ऐसे लोगों को आगे बढ़ाना चाहिए जो विपरीत माहौल में भी चटटान की तरह हमारे साथ खड़े हैं। मैं यहां एक सबसे जरूरी बात Accountability के बारे में भी आप सभी से कहना चाहूंगा। आप सभी अपने प्रभार वाले राज्यों के संगठन और भविष्य के चुनाव परिणामों के लिए Accountable होंगे। आप सभी जानते हैं कि हमारा “संविधान बचाओ अभियान” चल रहा है। जय बापू, जय भीम, जय संविधान कार्यक्रम बेलगांव में हमने तय किया था। ये अगले एक वर्ष तक चलेगा। इसके तहत पदयात्रा, संवाद, Corner meetings जैसी गतिविधियां चलायी जा सकती है। लेकिन ऐसे हर programme का लक्ष्य होना चाहिए संगठन का सशक्तिकरण ! इस बीच हमारे सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। आप जानते हैं कि इन दिनों चुनाव में Voter List Manipulation का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। इसके बारे में लोक सभा में Rahul Gandhi जी ने भी सवाल उठाया। आप सभी को महसूस होगा कि आज कल हमारे समर्थकों के नाम voter list से काट दिए जाते हैं। या नाम हटाकर बगल के booth से जोड़ दिया जाता है। BJP की तरफ़ से नए नाम चुनाव के ठीक पहले जोड़े जाते हैं। इस धांधली को हर हाल में रोकना होगा। Supreme Court के आदेश से Chief Election Commissioner (CEC) की Selection Committee में Chief Justice को भी जोड़ा गया था। मोदी जी ने उन्हें भी बाहर कर दिया। सरकार को देश के Chief Justice की निष्पक्षता पर भी भरोसा नहीं है। Supreme Court में आज इस मामले की सुनवाई होने वाली थी, सरकार ने इसके पहले नए CEC की घोषणा कर दी। राहुल जी ने कहा भी कि ऐसे Selection Committee का क्या फायदा, जहाँ आप LOP का इस्तेमाल सिर्फ़ certification के लिए कर रहे हैं? इन बातों के साथ देश के सामने अनगिनत चुनौतियाँ हैं। महँगाई और बेरोज़गारी स्थायी मसला बना हुआ है। मोदी सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल रही है। मोदीजी की यात्रा के बावजूद अमेरिका पहले की ही तरह भारतीय नागरिकों को हथकड़ी लगा कर वापिस भेज रहा है। Vegetarian यात्रियों को non veg खाना दिया गया । हमारी सरकार इस अपमान का ठीक तरीके से विरोध जताने में भी विफल रही। आर्थिक मामलों में भी अमेरिका हम पर गहरी चोट कर रहा है। हम पर उलटा Tariff लगा दिया, पर प्रधानमंत्री ने इसका विरोध तक नहीं किया। वे हम पर जबरदस्ती घाटे का सौदा थोप रहे हैं, जिसे हमारी सरकार चुपचाप मान ले रही है। ये साफ़-साफ़ हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के लोगों का अपमान है। अगला 5 साल हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम जनता के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष और जन आंदोलन करके मुख्य विपक्ष की भूमिका में उभरने का प्रयास करें। इससे ही हम लोगों की पहली पसंद बनेंगे।

Mallikarjun Kharge

107,538 görüntüleme • 1 yıl önce