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नीलेश प्रभु की पूरी राजनीति एक अस्थायी तस्वीर पर टिकी है। वे खाली जमीन दिखाते हैं, लेकिन यह नहीं दिखाते कि यहीं पर नए टावर बनेंगे। वे आज की धूल दिखाते हैं, लेकिन कल मिलने वाले नए घर नहीं दिखाते। अगर हर रीडेवलपमेंट को इसी तरह रोका जाता, तो...

43,507 次观看 • 3 个月前 •via X (Twitter)

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डोल का बाड़ को कौन बचाएगा??? कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते जयपुर जैसे शहर के 100 एकड़ क्षेत्र में पनपे जंगल को सरकार समतल जमीन और फिर उस पर कंक्रीट का जंगल बनाने पर आमादा है। दमदार तर्क है कि जमीन सरकारी है लेकिन इस पर पनपा जंगल सरकार ने नहीं उगाया है। सरकार जंगलों को लगाना और बचाना नहीं जानती, उजाड़ना जरूर जानती है। सरकार के पास ताकत भी है और वह उजाड़ ही देगी। कुछ ही लोग इस जंगल को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, वे धन्यवाद के पात्र हैं। उनको आपका साथ चाहिए। लोकतंत्र में सिर गिने जाते हैं। प्रदर्शनकारी कह रहे हैं कि आज पांच आए हैं कल 500 आएंगे और परसों 5000 आएंगे लेकिन जयपुर की आबादी तो बहुत बड़ी है उसमें पांच, 500 और 5 हजार कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन इतने लोग जुटें तो सही। यकीन मानिए, अगर आप आज चाहेंगे तो यह जंगल खड़ा रहेगा। आप आज चुप रहे तो यह जंगल भी कट जाएगा। आज से अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा की गई है। धरना देने के लिए बहुत सारे लोगों की जरूरत होती है। यह धरना किसी एक व्यक्ति, किसी एक परिवार, किसी एक समाज के लिए नहीं है। जंगल सबको समान रूप से शुद्ध हवा देता है। पक्षियों को आश्रय देता है। जिम्मेदारी सबकी है। निभाइए...

Arvind Chotia

30,544 次观看 • 1 年前

यहीं पर अभिनय सर ने पूरे नैरेटिव की पोल खोल दी 🔥 शालिनी: क्या भारत सच में ताकतवर बन रहा है? अभिनय सर: हमारे ज़माने का सबसे बड़ा पाखंड। हम कहते हैं कि हम भगवान राम को ले आए, लेकिन ट्रंप की इजाज़त के बिना रूस से तेल भी नहीं ला सकते। शालिनी: सरकार कहती है कि पहले के प्रधानमंत्रियों पर भी इस बात का दबाव था कि भारत क्या खरीद सकता है। अभिनय सर: मेरे पिता मुझे नए कपड़े देने से सिर्फ इसलिए मना नहीं कर सकते, क्योंकि उनके पिता को कभी वे कपड़े नहीं मिले थे। शालिनी: लेकिन मनमोहन सिंह को तो 'खामोश प्रधानमंत्री' कहा जाता था। अभिनय सर: उस आदमी ने 170 प्रेस कॉन्फ्रेंस की थीं। हमारे प्रधानमंत्री ने तो एक भी नहीं की। लोग इस पर नाराज़ भी क्यों नहीं हैं?

Altaf Ansari ( الطاف )

95,919 次观看 • 3 个月前

स्त्री ने कभी यह घोषणा ही नहीं की कि मेरे पास भी आत्मा है । वह चुपचाप पुरूष के पीछे चल पड़ती है । युधिष्ठिर जैसा अद्भुत आदमी द्रौपदी को जुए में दाँव पर लगा देता है ! फिर भी कोई यह नहीं कहता कि हम कभी युधिष्ठिर को धर्मराज नहीं कहेंगे । नहीं, कोई यह नहीं कहता ! बल्कि कोई कहेगा तो हम कहेंगे कि अधार्मिक आदमी है । नास्तिक आदमी है, इसक़ी बात मत सुनो ! स्‍त्री को जुए पर, दाँव पर लगाया जा सकता है, क्योंकि भारत में स्‍त्री सम्पदा है, सम्पत्ति है । हम हमेशा से कहते रहें हैं, स्‍त्री सम्पत्ति है और इसीलिए तो पति को स्वामी कहते हैं । स्वामी का मतलब आप समझते हैं, क्या होता है ? अगर हिन्दुस्तान की स्‍त्री में थोड़ी भी अक्ल होती तो एक—एक शब्द से उसे ‘#स्वामी’ निकाल बाहर कर देना चाहिए । कोई पुरुष कोई स्‍त्री का स्वामी नहीं हो सकता । स्वामी का क्या मतलब होता है ? स्‍त्री दस्तखत कर देती है अपनी चिट्ठी में ‘ #आपकी_दासी ’ और पति देव बहुत प्रसन्न हो कर पढ़ते हैं । बड़े आनन्दित होते हैं कि बड़ी प्रेम की बात लिखी है । लेकिन इसका पता है कि स्वामी और दास में कभी प्रेम नहीं हो सकता । प्रेम की सम्भावना समान तल पर हो सकती है । स्वामी और दास में क्या प्रेम हो सकता है ? इसलिए हिन्दुस्तान में प्रेम की सम्भावना ही समाप्त हो गयी । हिन्दुस्तान में स्‍त्री—पुरुष साथ रह रहे हैं और साथ रहने को प्रेम समझ रहे हैं ! वह प्रेम नहीं है । हिन्दुस्तान में प्रेम का सरासर धोखा है । साथ रहना भर प्रेम नहीं है । किसी तरह कलह कर के 24 घण्टे गुजार देना, प्रेम नहीं है । ज़िन्दगी गुजार देनी प्रेम नहीं है । प्रेम की पुलक और है । प्रेम की प्रार्थना और है । प्रेम की सुगन्ध और है । प्रेम का सँगीत और है । लेकिन वह कहीं भी नहीं ! असल में गुलाम और दास में, मालिक में और स्वामी में, कोई प्रेम नहीं हो सकता । लेकिन हमारे खयाल में नहीं है यह बात कि पूरब की स्‍त्री नेहु विशेष कर भारत की स्‍त्री ने अपनी आत्मा का अधिकार ही स्वीकार नहीं किया है । आत्मा की आवाज भी नहीं दी है । उसने हिम्मत भी नहीं जुटायी कि वह कह सके कि ‘#मैं_भी_हूँ !

तृप्त ...🖤

210,828 次观看 • 2 年前

प्रधानमंत्री कोई भगवान नहीं होते, वे संविधान की शपथ लेकर काम करने वाले जनप्रतिनिधि होते हैं। आज कोई पद पर है, कल नहीं रहेगा लेकिन देश हमेशा रहेगा। इसलिए व्यक्तिपूजा लोकतंत्र की सबसे बड़ी कमजोरी है। कुछ समय पहले तक भारत के कई टीवी चैनल डोनाल्ड ट्रंप को भारत का सबसे बड़ा मित्र, यहां तक कि “सनातन समर्थक” बताकर महिमामंडित कर रहे थे। माहौल ऐसा बनाया गया मानो ट्रंप हमारे सबसे बड़े रक्षक हों। लेकिन आज वही ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मंचों से भारत पर तीखी टिप्पणियाँ कर रहा हैं, व्यापारिक और रणनीतिक मुद्दों पर दबाव बना रहा हैं, और हमारी सरकार उसके सामने खामोश दिखाई देती है। सवाल यह है कि जब विपक्ष सवाल उठाता है, तो उसे देशद्रोही कह दिया जाता है, लेकिन जब कोई विदेशी नेता भारत के सम्मान पर टिप्पणी करता है, तो सरकार का आत्मसम्मान कहाँ चला जाता है? सरकार की आलोचना करना राष्ट्रविरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक कर्तव्य है। देश किसी एक व्यक्ति से बड़ा है। नेता बदलते रहते हैं, लेकिन भारत की गरिमा और संप्रभुता सर्वोपरि है। अगर सरकार मजबूत है, तो उसे चुप्पी नहीं, स्पष्ट और ठोस जवाब देना चाहिए।

Alok Sharma

67,327 次观看 • 6 个月前

शायद अलकनंदा नदी कुछ समय बाद विलुप्त हो जाए, तो हमें आश्चर्य नहीं होगा। श्रीनगर गढ़वाल में अलकनंदा की जो हालत हो चुकी है, वह बेहद दुखद और चिंताजनक है। अवैध खनन ने नदी के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। दिन-रात जेसीबी और ट्रकों ने लगातार खुदाई कर नदी को भीतर से खोखला कर दिया है। जहाँ कभी जल की अविरल धारा बहती थी, आज वहाँ सूखी रेत और गड्ढे दिखाई देते हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संतुलन, जलस्तर और जैव विविधता पर गहरा असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की आजीविका और भविष्य भी खतरे में है। हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी पूरी तरह मौन हैं। सब जानते हैं कि यह चुप्पी किसके हित में है। नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यह सरकार की नाकामी और उदासीनता को साफ दर्शाता है। प्राकृतिक संसाधनों का यह दोहन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। अब हर जागरूक नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है कि वह आवाज़ उठाए और सरकार को जवाबदेह बनाए।

Manjeet Negi

21,600 次观看 • 7 个月前

विशाल मिश्रा नाम है मेरा और उन्नाव से हूं कभी-कभी ऐसा लगता है कि जितनी भी मेहनत कर लो, सफलता हाथ नहीं आती. बार-बार रिजेक्शन मिलते हैं, लोग ताने मारते हैं, और लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो एक बार विशाल मिश्रा की कहानी जरूर जानिए. विशाल मिश्रा, उन्नाव का एक लड़का, जिसने बचपन से ही ठान लिया था कि वह अपने संगीत से दुनिया को दीवाना बना देगा. लेकिन सफर आसान नहीं था. न जाने कितनी बार रिजेक्ट हुए, न जाने कितनी बार लोगों ने कहा – “कुछ और कर ले, ये तेरे बस की बात नहीं!” लेकिन विशाल कहां हार मानने वाले थे. उन्होंने अपने सपने को पकड़े रखा, मेहनत जारी रखी और खुद पर भरोसा बनाए रखा. आज जब हम विशाल मिश्रा के गाने सुनते हैं, तो वो सीधे दिल में उतर जाते हैं. उनकी आवाज में एक जादू है, जो कभी रुला देती है, तो कभी प्यार में डूबा देती है. उनके गाने सिर्फ गाने नहीं, बल्कि एक अहसास हैं. अगर आपको भी ऐसा लग रहा है कि बार-बार कोशिश करने के बाद भी कुछ नहीं हो रहा, तो एक बात याद रखिए – विशाल मिश्रा भी कभी आपकी ही तरह रिजेक्शन झेल रहे थे. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, और आज उनका नाम हर किसी की जुबान पर है. तो अगर आप भी अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं, तो बस लगे रहिए, मेहनत करते रहिए, और सबसे जरूरी – खुद पर भरोसा रखिए. सफलता जरूर मिलेगी. पता है नहीं क्यूं, भाई की सक्सेस वीडियो को देख, मेरी आंखों में आंसू आ गए थे! Vishal Mishra 💕🧿 #VishalMishra #Music #Bollywood

Ravi Prashant

13,889 次观看 • 1 年前