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Ana Sayfaya Dön

नेहरू जी की शख्सियत ही कुछ और थी

24,925 görüntüleme • 1 yıl önce •via X (Twitter)

9 Yorum

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Rapunzel1 yıl önce

Leaders like Nehru not just invested in Nation but invested in the future of every single child of India, really grateful to him 😍

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Abhishek Singhi1 yıl önce

और आज वाला साहब जहरू है 😂

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Pradeep Saxena1 yıl önce

@nandtara He was a class apart

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Abhishek Singhi1 yıl önce

@nandtara Yes sir

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parineeta Chowdhari1 yıl önce

Our PM❤️

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Bharathi1 yıl önce

We need many many people like him today.

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SECULAR HOTDOG1 yıl önce

What a man !!

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okIamdone1 yıl önce

Nehru was such a stout and tall leader no one can compare to what he has done for India and here today we have to deal with chai walas who know nothing but to exploit from the poor and give it to the rich

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raz Thakur1 yıl önce

चाचा नेहरू 🌹🙏

Benzer Videolar

वोट चोरी RSS सभी को वोट के अधिकार के ख़िलाफ़ थी।लेकिन नेहरू जी सभी व्यस्क नागरिकों के लिए वोट के अधिकार को मौलिक अधिकार बनवाने में सफल हो गए। तब RSS की पत्रिका Organiser में लिखा गया कि ‘नेहरू अपने इस फैसले पर बहुत पछताएगें’। लेकिन नेहरू सफल रहे। दरअसल RSS और महात्मा गाँधी-नेहरू की विचारधारा का टकराव RSS के जन्म से ही शुरू हो गया था। भविष्य के भारत की परिकल्पना से जुड़ी तीन ऐसी बातें थी, जो अलग अलग थी: गाँधी-नेहरू भारत के सभी नागरिकों लिए संवैधानिक बराबरी चाहते थे। RSS आज भी सभी नागरिकों को बराबर नहीं मानना चाहती। गांधी-नेहरू की कांग्रेस 1931 के कराची अधिवेशन से ही अभिव्यक्ति की आज़ादी के पक्ष में मुखर थी। लेकिन RSS के जन्म से लेकर संविधान बनने तक, पच्चीस सालों में इस संगठन ने कभी अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात नहीं की। और तीसरा, गाँधी-नेहरू की कांग्रेस 1928 से ही सबको वोट का बराबर अधिकार की बात करने लगी थी। लेकिन RSS कभी ऐसा नहीं चाहती थी। वो universal adult franchise के ख़िलाफ़ थी। अब तय कीजिए कि आपको आगे कैसा भारत चाहिए। गाँधी-नेहरू का या RSS का!

Gurdeep Singh Sappal

16,903 görüntüleme • 1 yıl önce

सोनिया गांधी जी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भाजपा, नेहरू जी की लेगेसी को मिटाना चाहती है। मैं सोनिया जी से ससम्मान कहना चाहूंगा कि केवल नेहरू को, नेहरू की स्मृति और नेहरू की तथाकथित लेगेसी को जीवित रखने के लिए कांग्रेस पार्टी ने न जाने कितने महानुभावों की लेगेसी को समाप्त किया है। इसमें सबसे बड़ा उदाहरण हैं सरदार वल्लभभाई पटेल। सरदार वल्लभभाई जी को समाप्त करने की कोशिश की गई। और तो और, अगर सही डेमोक्रेटिक तरीके से कांग्रेस पार्टी के अंदर वोटिंग प्रणाली को फॉलो किया जाता, तो शायद न नेहरू की कोई लेगेसी होती और न ही पंडित नेहरू देश के प्रधानमंत्री बनते। - डॉ. Sambit Patra पूरा देखें:

BJP

17,378 görüntüleme • 9 ay önce