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“पाखंडी रहै छाँव मां, घामै मां जरी हम। जलपान करै नेता, भुगतान करी हम” वाह सादानी साहब, आज भी मौज़ू हैं आपके मिसरे…
9 Kommentare

Udaibhan verma उदयभान वर्मा ادے بھان ورماvor 2 Jahren
गेहूं रखो तुम भूसा धरी हम ई न होई....💐

Ashutosh Kumar Srivastavavor 2 Jahren
@officeofprincu यदि श्री रफानी जी के और वीडियो उपलब्ध हो तो उन्हें भी शेयर करियेगा बहुत बढ़िया और शानदार 🙏🙏

Ashutosh Kumar Srivastavavor 2 Jahren
@officeofprincu 👌👌👍👍🙏🙏 बहुत बढ़िया 👍

Panchanan Mishravor 2 Jahren
अपनी बोली में शायरी/कविता सुनना कितना सुकून दे सकता है बहुत दिनों बाद ये फिर महसूस किया। संजय जी साझा करने के लिए धन्यवाद। कितना सादा पर उतना ही रसीला और रोचक संवाद था ये। इसकी सख्त ज़रूरत है।

Kushagra Singhvor 2 Jahren
Wah... Full unnao vali language.. 😄

🇮🇳 अजीत অজীত Ajit అజిత్ અજીત اجیت अजितvor 2 Jahren
सत्यवादिता और उपहास के पुरोधा रफीक शादानी साहब को सादर नमन। बचपन के अवध ले गए। शेरो शायरी के RK लक्ष्मन थे शादानी साहब। जबरदस्त।

BLESsEdvor 2 Jahren
Awadhi kitani pyaari language hai ❤❤❤❤

Pankajj Singhvor 2 Jahren
गेहूं का रखय दिल्ली भूसा का रक्खी हम 😂 माने मजा मारय गाजी मियां धक्का सहयं डफाली

Arun Tiwarivor 2 Jahren
लाजवाब।🤣🙏
