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पंचायत सहायकों की बात सुने सरकार, अन्यथा सपा सरकार बनने पर पूरी होगी मांग

12,167 просмотров • 9 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 21

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Sangeeta9 дней назад

पंचायत सहायकों की मांगों पर सरकार नियमों के तहत गंभीरता से विचार और समाधान की दिशा में काम कर रही है। सपा के सत्ता में आने के दावे से पहले जनता अपने शासनकाल का रिकॉर्ड भी जरूर याद रखेगी।

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Lakshmi9 дней назад

₹6,000-₹9,000 के मानदेय की जगह पंचायत सहायकों के लिए जीवनयापन योग्य व कुशल न्यूनतम मजदूरी के आधार पर ₹30,000 प्रति माह मानदेय की व्यवस्था।

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Anshika9 дней назад

बजट और मानदेय के हर महीने समय पर सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गारंटी।

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Anika9 дней назад

बजट और मानदेय के हर महीने समय पर सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गारंटी।

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Abhishek Tiwari9 дней назад

पंचायत सहायकों की समस्याओं पर सरकार से संवाद और नियमों के तहत समाधान की मांग लोकतांत्रिक तरीका है। सपा सरकार का दावा करने से पहले अपने कार्यकाल का रिकॉर्ड भी जनता के सामने रखना चाहिए। योगी सरकार में मांगों पर संवाद और पात्रता के अनुसार समाधान की प्रक्रिया जारी रहती है। धमकी की राजनीति नहीं, तथ्य और नीति के आधार पर समाधान जरूरी है।

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Vasu ❣️9 дней назад

ज़रूरत और सुविधा के अनुसार स्पष्ट स्थानांतरण नीति लागू करना ताकि कर्मियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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Reena thakur9 дней назад

योगी सरकार में मांगों पर संवाद और पात्रता के अनुसार समाधान की प्रक्रिया जारी रहती है। धमकी की राजनीति नहीं, तथ्य और नीति के आधार पर समाधान जरूरी है।

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Vijay🇮🇳8 дней назад

बस यही वजह है कि आप का समर्थन नही कर पाता ये भर्ती परीक्षा से क्यों नहीं हो जाती

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Toqeer Pathan8 дней назад

बेरोजगार दिवस की शुभकामनाएं

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sufiyan8 дней назад

9000 me nahi hoga yar

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Aarzu9 дней назад

वर्षों से सेवाएं दे रहे पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए संविदा व्यवस्था को समाप्त कर नियमित कर्मचारी का दर्जा देने की स्पष्ट नीति बनाना।

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𝐇𝐚𝐫𝐢𝐨𝐦 𝐃𝐮𝐛𝐞𝐲9 дней назад

ये पक्का सपाई है 😅😅

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Deeksha Thakur9 дней назад

सपा सरकार का दावा करने से पहले अपने कार्यकाल का रिकॉर्ड भी जनता के सामने रखना चाहिए। योगी सरकार में मांगों पर संवाद और पात्रता के अनुसार समाधान की प्रक्रिया जारी रहती है। धमकी की राजनीति नहीं, तथ्य और नीति के आधार पर समाधान जरूरी है।

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Tarun Pandey (तरुण पाण्डेय)9 дней назад

2017 से पहले आपकी सरकार में जब भी कोई भर्ती निकलती थी तो योग्यता नहीं बल्कि सिफ़ारिश और कट-मनी चलती थी। कोर्ट-कचहरी में भर्तियों का अटकना ही सपा का असली प्रशासनिक मॉडल था।

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VIVEK KUMAR7 дней назад

उ•प्र• शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा असिटेंट प्रोफेसर और प्रवक्ता पद पर अनुसूचित जनजाति कोटे की निर्धारित 2% आरक्षण को शून्य करते वो सीट EWS को दिया जा रहा हैं इस पर भी आवाज़ उठाइये 🙏🙏🙏

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Shahid A.9 дней назад

बीवी का मेकअप तो 30 में भी नहीं हो पाएगा भैया जी @grok 🤣

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Mahi beuty8 дней назад

पंचायत सहायकों के साथ भाजपा सरकार है और उनके लिए लगातार कार्य कर रही है सपा तो सिर्फ उनको भ्रमित कर अपने जातिवाद एवं तुष्टिकरण की राजनीति को सेट करने में लगी हुई है

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Shalini tiwari9 дней назад

महिला कर्मचारियों के लिए संवैधानिकी मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और सुरक्षा लाभ लागू करना।

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Vijay Kumar9 дней назад

सपा को चिंता करने की जरूरत नहीं। पंचायत सहायकों की मांगें सुनने के बाद योगी सरकार ने मानदेय ₹6,000 से बढ़ाकर ₹9,000 कर दिया है, साथ में सेवा सुरक्षा, DBT और कैशलेस उपचार जैसी सुविधाएं भी दी हैं। जनता को सिर्फ वादे नहीं, काम चाहिए।

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Mahsoob Hussain8 дней назад

ये इसके पहले कितना कमाता था

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hindu8 дней назад

30000

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न्यूनतम मजदूरी की बात करने वाली सरकार पंचायत सहायकों के हक़ पर मौन क्यों है? क्या पंचायत सहायक मनरेगा मजदूर से भी कमतर हैं? क्या उनका घर-परिवार नहीं है? क्या महंगाई उनके लिए नहीं बढ़ती? क्या उनके बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और परिवार की जिम्मेदारियाँ सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखते? पंचायतों का काम चाहिए, जिम्मेदारी चाहिए, जवाबदेही चाहिए—लेकिन जब बात सम्मानजनक मानदेय, नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण की आती है तो सरकार चुप्पी साध लेती है। आज पंचायत सहायक अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक करने को मजबूर हैं। सवाल साफ़ है—जिस व्यवस्था को इनका श्रम चाहिए, वह इनके श्रम की सम्मानजनक कीमत देने से क्यों भाग रही है? पंचायत सहायक भीख नहीं माँग रहे, अपने श्रम का सम्मान और अपना हक़ माँग रहे हैं। सरकार इनकी आवाज़ सुने और मांगों पर तत्काल फैसला करे।

Dr. Laxman Yadav

16,409 просмотров • 11 дней назад

यूपी के पंचायत सहायक प‍िछले 8 द‍िन से लखनऊ में धरना दे रहे हैं. यूपी में पंचायत सहायकों को 6 हजार रुपए महीना म‍िलता है, वो भी 5-7 महीने देर से आता है. सोच‍िए - महीने के स‍िर्फ 6 हजार रुपए. अगर आपने पंचायत सीरीज देखी है, तो उसमें विकास का जो किरदार है वो पंचायत सहायक का है. उस क‍िरदार की तस्‍वीर लगाई है, ताक‍ि आप समझ सकें. पंचायत सहायकों की मांग है क‍ि इनका मानदेय 30 हजार रुपए क‍िया जाए, क्‍योंक‍ि इस महंगाई में 6 हजार से कुछ होता नहीं है. साथ ही इन्‍हें हर साल कॉन्‍ट्रेक्‍ट बनवाना होता है, इस न‍ियम को भी खत्‍म क‍िया जाए. पंचायत सहायकों की मांग जायज है, लेक‍िन BJP सरकार सुने तब तो. फ‍िलहाल इन्‍हें लखनऊ के बाहर इको गार्डन में छोड़ रखा है, जहां से धरने की आवाज वहीं दब जाती है.

Ranvijay Singh

59,446 просмотров • 11 дней назад