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पंजाबी में कहावत है कि "चिड़िया बेचारी क्या करे ठंडा पानी पी मरे" वो ही बात बलात्कारी गुरमीत राम रहीम पर लागू होती है कि "बाबा बेचारा क्या करे जब अंडभक्तणि खुद गुफा में जपनाम करने की ज़िद करे" 🤦

72,252 просмотров • 4 месяцев назад •via X (Twitter)

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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो -दुष्यंत कुमार ग़ाज़ीपुर में परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद विद्यालय का बदलने वाली ख़बर के बाद सोशल मीडिया पर चौतरफ़ा उठने वाली आवाज़ से मजबूर होकर शिक्षा विभाग ने विद्यालय का नाम फिर से शहीद वीर अब्दुल हमीद के नाम पर रख दिया है। मैं लगातार परिजनों के सम्पर्क में हूँ, उनका कहना है कि ये घटना पूर्व में भी एक बार हो चुकी है, मेरी सरकार से मॉंग है कि बार बार एैसा करने वाले ज़िम्मेदारों पर कार्यवाही सुनिश्चित करे ताकि भविष्य में भारत के वीर सपूतों की शहादत का कोई अपमान करने की हिमाक़त ना करे।

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दलित दूल्हे की सुरक्षा में 200 पुलिसकर्मियों को गांव में तैनात किया गया हैं , ना तो इस गांव में मुग़ल हैं , ना पाकिस्तानी और ना ही चीनी ना तो बांग्लादेशी , इस गांव में रहने वाले सभी लोग HINDU होने का दावा करते हैं , लेकिन बात घोड़ी पर चढ़ने की आती है तब HINDU EKTA फुस हो जाती है , AJMER के लवेड़ा गांव में अगड़ी जाति के लोगों ने धमकी दी कि दलित दूल्हा घोड़ी नही चढ़ना चाहिए , परिवार ने पुलिस में शिकायत की और सुरक्षा की मांग की , HINDU जाति के नाम पर दूसरे HINDU पर हमला ना करे , इसलिए भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर बारात को सुरक्षित निकाला गया , कौन है वो लोग जो बोलते है देश में जातिवाद नही है जातिवाद एक बीमारी है जो कभी खत्म ही नहीं होगी। अभी भी लोगों को लगता है कि दलितों का आरक्षण नहीं मिलना चाहिए ? जब तक जातिवाद है तब तक आरक्षण रहना चाहिए।।

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उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में डौकी थाने की कबीश पुलिस चौकी में देवेन्द्र सविता की संदिग्ध मौत ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों द्वारा लगाए गए पुलिस टॉर्चर के आरोपों ने न केवल प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि योगी सरकार की कार्यशैली पर भी करारा प्रहार किया है। प्रदेश में पुलिस बर्बरता की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं, कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के नाम पर ऐसी घटनाएं प्रदेश की जनता के विश्वास को ठेस पहुंचा रही हैं। क्या यह Government of UP की जिम्मेदारी नहीं है कि वह पुलिस तंत्र में जवाबदेही तय करे और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे? यह घटना योगी सरकार की विफलता को उजागर करती है, जहां कानून के रक्षक ही कानून के भक्षक बनते जा रहे हैं। इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई करना न केवल जरूरी है, बल्कि यह सरकार की विश्वसनीयता की परीक्षा भी है। POLICE COMMISSIONERATE AGRA UP POLICE

Chandra Shekhar Aazad

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स्थानीय में मुस्लिम घरों में डायरेक्ट घुसी पुलिस, महिलाओं के आरोपों के अनुसार पुलिस ने छापेमारी के नाम पर मुस्लिम बहुल इलाक़ों में घरों में प्रवेश किया, तोड़फोड़ की और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया, कई घरों में खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया गया, आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में एक-एक कर घरों में घुसे, यहाँ तक कि एक विधवा महिला के घर को भी नहीं छोड़ा गया। कानून के नाम पर अगर पुलिस ही गुंडागर्दी करे तो आम नागरिक जाए कहाँ? महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों से बदसलूकी, घरों में तोड़फोड़, क्या यही “राज्य की शक्ति” है? मुस्लिम इलाक़ों को निशाना बनाकर डर फैलाना कानून-व्यवस्था नहीं, सामूहिक उत्पीड़न है, दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह साफ़ संदेश जाएगा कि ज़ुल्म को संरक्षण मिला हुआ है।

Karishma Aziz

17,974 просмотров • 9 месяцев назад