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पटना से लखनऊ आ गया हूं, पटना में हर तरफ मानुष ही मानुष हैं, मतलब इतनी भीड़ देखकर मन अकच्च हो जाता है, मानो पूरा बिहार पटना में ही रहता है, लखनऊ में सुकून है, इसीलिए कहते हैं, मुस्कुराइये कि आप नखलऊ में हैं,

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प्रशांत किशोर का उन लोगों को जवाब, जो पटना और बिहार में विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं: 1. पहले पटना शाम 6 बजे तक लगभग बंद हो जाता था, अब 10 बजे तक खुला रहता है। कुछ लोग इसे ही विकास मानते हैं। उनका तर्क है कि अब 6 बजे के बाद घर से निकलो तो कोई गोली नहीं मार देगा। 😀 ऐसे लोगों को एक बार बेंगलुरु जाकर रात 10 बजे का ट्रैफिक देखना चाहिए। 😀 2. लोग कहते हैं कि पटना एयरपोर्ट कितना विकसित हो गया है। सच यह है कि जब बना था तब पटना एयरपोर्ट बेंगलुरु के किसी बस स्टैंड जैसा लगता था, और आज यह बेंगलुरु में बने एसएमवीटी रेलवे स्टेशन जैसा ही दिखाई देता है। 3. कुछ लोग सड़कों पर बढ़ती गाड़ियों की संख्या को बिहार के विकास का प्रमाण बताते हैं। लेकिन एक तथ्य जान लीजिए, देश में औसतन लगभग 8% लोगों के पास निजी वाहन हैं, जबकि बिहार में यह संख्या केवल 2% है। दक्षिण भारत के कई राज्यों में यह आंकड़ा 25% से भी अधिक है। सोचिए, जब सिर्फ 2% लोगों के पास वाहन होने पर पटना और बिहार के अन्य शहरों में ट्रैफिक की यह हालत है, तो अगर यह संख्या राष्ट्रीय औसत तक पहुंच जाए तो क्या होगा? असल समस्या यह है कि यहाँ के नेताओं ने हमें कुएँ का मेंढक बना दिया है। हमारी सोच इतनी सीमित कर दी गई है कि शाम 6 बजे के बाद घर से बाहर निकल पाना ही हमें विकास लगने लगा है। मेरे दोस्त, देश और दुनिया बहुत आगे निकल चुकी हैं। हम बहुत पीछे छूट गए हैं, अब जागने का समय आ गया है । जागो बिहार, जागो!

ThePoliTechs

23,333 просмотров • 3 месяцев назад

सिखों के मेले में एक व्यक्ति खिलौने बेच रहा था तभी कुछ वीर योद्धा लोग उसके पास जाते हैं और कहते हैं कि तुम बिहार से हमारे मेले में हमारे राज्य में क्यों आए हो उसे बिहारी कह कर अपमानित करते हैं फिर वह कहता है मैं बिहार से नहीं हूं मैं यूपी से हूं मुरादाबाद से हूं फिर उसको अपमानित करते हैं कि तू यूपी से हमारे यहां क्यों आया है और उसे तमाम गुरुओं के बारे में सिख धर्म के बारे में पूछने लगते हैं फिर पूछते हैं तुम्हारा नाम क्या है व्यक्ति कहता है नौशाद खान नौशाद खान सुनते ही वीर योद्धाओं का टोन बदल जाता है तुरंत पीठ सहलाने लगते हैं और ठंडा होकर चले जाते हैं अब आप समझ गए होंगे कि इनकी बहादुरी किन पर चलती है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

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