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पढ़ने लिखने के समय में बड़का रंगदार बन रहे थे,अब जब पंजाब में धान रोपना पर रहा है तो गान फट रहा है। वैसे यह काम बिहार में भी कर सकते थे।लेकिन इन्हें तो पंजाब जाना है कमाने।

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अरविंद केजरीवाल की नीचता देखिए यह कह रहा है कि पहले पंजाब में ड्रग्स पाकिस्तान से आती थी अब पंजाब में ड्रग्स गुजरात में आ रही है अब पंजाब में सारा चिट्टा गुजरात से सप्लाई हो रहा है एक झटके में इसने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दिया फिर यह 2021 में मुंद्रा में पकड़ी गई ड्रग्स का उदाहरण दे रहा है अबे धूर्त मुंद्रा में ड्रग्स पकड़ी गई थी भारत की एजेंसीयों ने पकड़ा था मतलब कि इसको इस बात से भी समस्या है कि भारत की एजेंसीयां इतनी सतर्क क्यों है कि ड्रग्स पकड़ रही हैं और इसे गुजरात में चुनाव लड़ना है फिर भी यह गुजरात को इस तरह से गाली दे रहा है अब केजरीवाल को सही ठहरने के लिए इसके रंगा बिल्ला यानी गोपाल इटालिया और यीशुदान गढवी कहेंगे केजरीवाल जी बिल्कुल सही कह रहे हैं हम लोग खुद पंजाब में ड्रग सप्लाई कर रहे हैं अबे अगर गुजरात से ड्रग आ रही है तो फिर पंजाब पुलिस क्या कर रही है ? जितने भी चेक पोस्ट है वहां पंजाब पुलिस के जवान क्या कर रहे हैं ? मतलब केजरीवाल के अनुसार पंजाब पुलिस इतनी शानदार है कि वह पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स को रोक दे रही है लेकिन वह गुजरात से आने वाली ड्रग्स को नहीं रोक पा रही ??? जबकि उसके लिए कुछ रेलवे स्टेशन और कुछ चेक पोस्ट पर सिक्योरिटी ही बढ़ानी है

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

10,127 views • 2 months ago

मेरा भाई सरकारी कर्मचारी है। उसका विभाग अलग है, लेकिन उसे भी दर्जनों BLO के साथ काम करने और उनके सुपरविजन का काम दिया गया है। कल रविवार था और हमारे परिवार में बुआ के बेटे की शादी में भात में जाना था, लेकिन वह कल भी नौकरी पर था और शाम को ही शादी में शामिल हो पाया। पिछले कई रविवार से यही चल रहा है—सुबह 7:00 बजे निकल जाता है और शाम को 8–9 बजे तक लौटता है। कल जब मिला तो मैंने उससे बताया कि वर्क-प्रेशर तो है, और 7 साल की नौकरी में पहली बार इतनी मेहनत करनी पड़ रही है… लेकिन एक-दो हफ़्ते की बात और है। उसने कहा , “भैया, हम किसान लोग हैं—सारी रात ट्यूबवेल चलाकर खेतों में पानी भराते थे, दिन में जानवरों के लिए चारा लाते थे, फिर स्कूल जाते थे, शाम को फिर उतना ही काम करते थे और पढ़ते भी थे। इसका तो चौथाई भी वर्क-प्रेशर नहीं है।” यह काम करने का तरीका होता है—और कुछ निकम्मे लोग ज़रा-सा काम बढ़ा तो घबराकर आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे लोगों से कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए।

𝙼𝚛 𝚃𝚢𝚊𝚐𝚒

32,361 views • 9 months ago