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पत्रकार पूछ रहे हैं “चूहा क्यों मार के खाते हैं”। जवाब आता है “खाने के लिए पैसा है नहीं तो क्या करें?” आस पास गंदगी है , साक्षरता दर 10% भी नहीं , 14 साल की बच्चियों को बच्चे हो रहे , घर नहीं , इंसानों की जिंदगी नहीं... show more
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मुफ्ती की मानें तो औरत सिर्फ देह है, सेक्स के लिए शरीर है और कुछ भी नहीं। बता रहे हैं कि जो बाहर निकलकर काम करती हैं वो सैकड़ों मर्दों की खिदमत करती हैं। घर में सिर्फ एक की खिदमत करती है। मर्द की सेवा/खिदमत से ऊपर ये औरत के वजूद को स्वीकार ही नहीं पा रहे।
Samar Raj
60,483 views • 8 months ago
