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पत्रकार : यह पीढ़ी गांधी पर सवाल उठाती है, पिछली पीढ़ी की तरह नहीं। Khan Sir : जो लोग अपने सरपंच से सवाल नहीं कर सकते, उन्हें गांधी पर सवाल नहीं उठाना चाहिए। 🔥 आज Dubai, Iran और United States में जो लोग #WorldWar3 नहीं चाहते, वे Mahatma Gandhi...

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“जो सच बोलेंगे, मारे जाएँगे…” राजेश जोशी की इस कविता को शायद उत्तर प्रदेश में अब यूँ पढ़ना पड़े— “जो सच बोलेंगे, FIR के शिकार हो जाएँगे!” ‘ज़मीनी खबर’ के पत्रकार Amit Yadav (Journalist) पर हुई FIR इसी डरावनी प्रवृत्ति की एक और मिसाल है। सवाल यह है कि आख़िर उनका गुनाह क्या है? सरकारी स्कूलों की ख़स्ताहाल स्थिति कैमरे पर दिखा देना? बच्चों की शिक्षा और बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठा देना? या फिर क़लम, किताब और सच की बात करना? अगर स्कूलों की तस्वीर अच्छी है, तो कैमरे से डर कैसा? और अगर तस्वीर ख़राब है, तो उसे दिखाने वाले पत्रकार पर FIR क्यों? लोकतंत्र में पत्रकार का काम सरकार की वाहवाही करना नहीं, सत्ता से सवाल करना है। सच दिखाने वाले कैमरे और सवाल पूछने वाली क़लम पर मुक़दमे दर्ज होने लगें, तो यह केवल एक पत्रकार को डराने की कोशिश नहीं होती—यह हर उस आवाज़ के लिए संदेश होता है जो सत्ता से असहज सवाल पूछने की हिम्मत करती है। स्कूलों की बदहाली छिपाने से शिक्षा नहीं सुधरेगी। FIR से सवाल ख़त्म नहीं होंगे।

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