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पत्रकाराने खरी पत्रकारिता दाखवली की आचार्य ची फाटली 😂 टीप = या 8JP च्या आचार्य ने ब्लॉक केलाय

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विधायक हो तो ऐसा हो…🔥 राजस्थान में हिंदू-मुस्लिम करने वाले BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य को कांग्रेस विधायक अमीन कागज़ी का करारा जवाब। दरअसल राजस्थान की राजधानी जयपुर में किशनपोल विधायक आमीन कागजी सरकारी परमिशन से दरगाह के आगे का निर्माण करवा रहे थे, उन्होंने विधायक कोटे से पैसे भी पास करवा दिए, लेकिन जैसे ही दरगाह का निर्माण कार्य शुरू किया, हवामहल BJP विधायक बालमुकुंद आचार्य दरगाह निर्माण को रोकने के लिए अपने समर्थको के साथ मौक़े पर पहुंच गए। तनाव बढ़ने पर पुलिस प्रशासन ने दखल देते हुए मामला सुलझाने को कहा, जिसके बाद किशनपोल विधायक आमीन कागजी ने भाजपा विधायक बालमुकुंदचार्य को खरी खोटी सुनाई, और कहा कि वो जयपुर का मलिक नहीं है।

Ashraf Hussain

44,792 просмотров • 7 месяцев назад

सुप्रसिद्ध व्यंगचित्रकार सतीश आचार्य यांना आज LAW ENFORCMENT AGENCY ने त्यांना त्यांच्या व्यंगचित्रांसाठी नोटीस बजावली. ही आता एक नवीन संस्था जन्माला आलेय, 'कायदा अंमलबजावणी संस्था!' म्हणजे, भारतात अद्याप कायद्याची अंमलबजावणी होतच नव्हती, असे या संस्थेच्या नावावरून दिसतेय. आल्या - आल्या त्यांनी अभिव्यक्ती स्वातंत्र्यावरच हल्ला केला. सतीश आचार्य यांच्या कुंचल्यातून साकारलेले व्यंगचित्र हे खूप बोलके असायचे. जसे म्हणतात ना, "जे ना देखे रवी, वे देखे कवी" तसेच आहे. एखादी गोष्ट अत्यंत प्रभावीपणे मांडण्याचे साधन म्हणजेच व्यंगचित्र! पण, घाबरवणारी परिस्थिती निर्माण करण्याचा सत्ताधाऱ्यांचा डाव दिसतोय. कालच मी पत्रकार परिषद घेत असताना, माझ्या घरातच माझ्या समोर एक माणूस शूटींग करीत होता. कालांतराने मला समजले की तो माणूस पोलीस होता. त्या पोलिसाला मी विचारले तर त्याने सांगितले, मला वरिष्ठांनी शुटींग करायला पाठविले होते. एकूणच व्यक्त होणारे जे काही कायदेशीर मार्ग आहेत ते बंदच करून टाकायचे; हा प्रयत्न सरकारचा दिसतोय. त्यामध्ये, लेखक, कवी , पत्रकार या सर्वांचा समावेश केला आहे. आता तर पत्रकारांना मंत्रालयाच्या तळमजल्याच्या वर जाताच येणार नाही. किंबहुना, गेटमधूनच आत येणे मुश्कील होणार आहे. पत्रकारांपासून लपवण्यासारखे मंत्रालयात काय आहे? अशा कुठल्या गुप्त गोष्टी घडणार आहेत की त्या पत्रकारांपासून लपविल्या पाहिजेत. हे जरा अतीच होतंय, इतकी दहशतीची परिस्थिती महाराष्ट्रात निर्माण करू नका. महाराष्ट्राने कायम अभिव्यक्ती स्वातंत्र्य आणि मूलभूत स्वातंत्र्याला महत्व दिले आहे. संविधानाचा इथे नेहमीच सन्मान केला गेला आहे. या संविधानात समावेश असलेल्या अभिव्यक्तिस्वातंत्र्याचा खातमा होईल , अशी कृती महाराष्ट्राच्या संस्कार आणि संस्कृतीला घातक असेल. कारण, सर्वात विद्रोही माणसे महाराष्ट्रात जन्माला आली आहेत. अभिव्यक्ती स्वातंत्र्यावर जेव्हा जेव्हा हल्ला झाला तेव्हा तेव्हा क्रांतीची आग भडकली आहे.

Dr.Jitendra Awhad

25,110 просмотров • 1 год назад

70 मुसलमानों ने त्यागा इस्लाम, यज्ञवेदी पर अपनाया सत्य सनातन हिंदू धर्म 🚩 यूपी के मुजफ्फरनगर में 10 परिवारों के 70 लोगों ने इस्लाम त्याग दिया और सनातन हिंदू धर्म में घर वापसी कर ली. योग साधना यशवीर आश्रम में के आचार्य मृगेंद्र सिंह ने शुद्धि यज्ञ कराकर उन लोगों को हिंदुत्व स्वीकार कराया. घर वापसी करने वाले जोगी बिरादरी के 10 परिवार के 70 लोग इस्लाम की जोगी बिरादरी के हैं. आचार्य मृगेंद्र सिंह ने बताया कि 10 साल पूर्व इन सभी 10 परिवारों का एक मौलवी और कुछ मुस्लिम नेताओं के द्वारा लालच देकर या डरा धमकाकर धर्म परिवर्तन कराया गया था, जिनकी आज आश्रम में सनातन धर्म के अनुसार शुद्धिकरण कराकर धर्म में वापस कराई गई है. इन 10 मुस्लिम परिवारों ने शनिवार सुबह आश्रम में आकर यह आग्रह किया कि हम 10 वर्ष पहले मुसलमान बन गए थे एवं हम जोगी बिरादरी से हैं जिनको उपाध्याय भी कहते हैं और अब पुनः सनातन धर्म में घर वापसी करना चाहते हैं. इसके बाद घर वापसी की प्रक्रिया शुरू कराई गई व सभी को हिंदुत्व स्वीकार कराया गया

Dr. Suresh Chavhanke “Sudarshan News”

314,083 просмотров • 3 лет назад

निशीकांत दुबे जी बख्शने के मूड में नहीं है 😂😂 आचार्य Acharya Kripalani कोई साधारण नेता नहीं थे। Congress Party के दिग्गज, स्वतंत्रता सेनानी, सिद्धांतों के पक्के। उनकी पत्नी Sucheta Kriplani उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। ❓ फिर सवाल है — उन्होंने कांग्रेस क्यों छोड़ी? क्योंकि जब Jawaharlal Nehru ने “हिंदी-चीनी भाई-भाई” के नाम पर पंचशील समझौता करने की तैयारी की, तब आचार्य कृपलानी ने खुलकर विरोध किया। उन्होंने साफ कहा था 👉 ⚠️ “तिब्बत को चीन के हवाले करना देश की सुरक्षा से खिलवाड़ है। एक दिन चीन भारत पर हमला करेगा।” क्या हुआ बाद में? 👉 1962 में चीन ने हमला कर दिया। यानी चेतावनी सच साबित हुई! लेकिन सच बोलने की सज़ा क्या मिली? ➡️ कांग्रेस से बाहर का रास्ता। इतिहास देखिए 📚 🔹 सेना प्रमुखों ने भी चेताया था कि हम तैयार नहीं हैं 🔹 सरकार ने नजरअंदाज किया 🔹 नतीजा – 1962 की हार फिर भी कांग्रेस ने अपनी गलती कभी नहीं मानी। इसके बाद 👉 Indira Gandhi ने 1981 में चीन से समझौते किए 👉 Rajiv Gandhi के समय 8 बार बॉर्डर मीटिंग हुई 👉 फिर भी समस्या जस की तस अगर नेहरू ने “एक इंच जमीन नहीं गई” कहा था, तो बार-बार चीन से बातचीत क्यों? 🤔 साफ है — सच्चाई कुछ और थी। आज हालात बदल रहे हैं 🇮🇳 👉 Narendra Modi की मजबूत नेतृत्व में 👉 S. Jaishankar की कूटनीति से 👉 LAC पर डिसएंगेजमेंट और समाधान की दिशा दिख रही है यानी जो दशकों में नहीं हुआ, वो अब हो रहा है। 💥 सवाल सीधा है: देश की सुरक्षा पर गलत फैसले किसने लिए? और आज सुधार कौन कर रहा है? इतिहास छुपाने से सच नहीं बदलता। देश पहले, राजनीति बाद में। 🇮🇳 सच कड़वा है… पर ज़रूरी है। इतिहास साफ कहता है ✍️ जो चेताते थे, उन्हें निकाला गया जो गलत थे, उन्हें महिमामंडित किया गया अब सच सामने आ रहा है। देश पहले 🇮🇳 राजनीति बाद में। आज का भारत झुकता नहीं… आँख में आँख डालकर बात करता है 💪 #History #IndiaChina #Congress #NationalSecurity #भारत

अखण्ड भारत संकल्प

16,098 просмотров • 7 месяцев назад

जन्माष्टमी: पुजारी की पीड़ा, "लोगों ने मूर्तिपूजा का मज़ाक बना दिया" क्या मूर्तिपूजा सही है या गलत? क्या मूर्ति के सामने पूजा और प्रार्थना आत्मज्ञान की दिशा में ले जा सकती है, या हम उसे अपनी इच्छाओं की पूर्ति का साधन बना लेते हैं? इस चर्चा में आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मूर्ति न अच्छी है, न बुरी। उसका उपयोग हमारी नीयत पर निर्भर करता है। मूर्ति का उद्देश्य स्वयं को देखने वाले दर्पण की तरह होना है, ताकि कृष्ण, राम, बुद्ध जैसे महापुरुषों के सामने खड़े होकर अपनी क्षुद्रता और अपनी उच्चतम संभावना को देखा जा सके। जन्माष्टमी के संदर्भ में वे समझाते हैं कि श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने खड़े होकर यदि गीता और निष्काम कर्म याद नहीं आते, तो मूर्तिपूजा का उद्देश्य ही चूक गया। मुख्य विषय: - मूर्तिपूजा सही है या गलत? - मूर्ति का सही उपयोग और दुरुपयोग - मूर्ति, अहंकार और Self-Deception - कृष्ण की मूर्ति और भगवद्गीता - जन्माष्टमी का वास्तविक अर्थ - गुरु, ग्रंथ और मूर्ति का उद्देश्य - धर्म और कामनाएँ - आत्मज्ञान और आत्म-अवलोकन

Acharya Prashant

21,553 просмотров • 25 дней назад

🚨 क्या आप जानते हैं? आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) ने 2300 वर्ष पहले ही पशु क्रूरता के विरुद्ध कठोर कानून बनाने की बात कही थी। आज जब पशु अधिकारों की चर्चा आधुनिक विषय मानी जाती है, तब यह जानना आवश्यक है कि भारत के महान राजनैतिक दार्शनिक आचार्य चाणक्य अपने ग्रंथ अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में पशुओं की रक्षा को राज्य का कर्तव्य बताया था। 📜 चाणक्य के अनुसार : ⚖️ 1. पशु क्रूरता पर कठोर दंड यदि कोई व्यक्ति किसी श्वान या अन्य पशु को जानबूझकर चोट पहुंचाता था या उसका पैर-कान काटता था (Maiming), तो दंड स्वरूप उस व्यक्ति का अंग (जैसे अंगूठा) काट देने या भारी जुर्माना लगाने का नियम था। बिना वैध कारण किसी पशु की हत्या को अत्यंत गंभीर अपराध माना गया, जिसके लिए परिस्थितियों के अनुसार अत्यंत कठोर दंड का उल्लेख मिलता है। कुछ ऐतिहासिक व्याख्याओं में इसे मृत्युदंड तक बताया गया है। पशुओं को भूखा रखना, बीमार होने पर उपचार न कराना या उनकी क्षमता से अधिक काम लेना भी दंडनीय माना गया। यदि कोई मालिक या चरवाहा पशुओं को भूखा रखे, अत्यधिक श्रम करवाए, या बीमार होने पर उपचार न कराए, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाता था। 🌳 2. अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) की अवधारणा - चाणक्य ने वनों के कुछ भागों को अभयारण्य घोषित करने की व्यवस्था बताई। - इन क्षेत्रों में पशु-पक्षियों का शिकार, हत्या या पकड़ना पूर्णतः प्रतिबंधित था। - ऐसे अपराधों पर राज्य द्वारा कठोर दंड दिया जाता था। 🕉 3. मनुष्य और पशु में अंतर क्या है? संवेदनशीलता ही मनुष्य और पशु का अंतर है "आहारनिद्राभयमैथुनानि समानि चैतानि नृणां पशूनाम्। ज्ञानं हि तेषामधिको विशेषो ज्ञानेन हीनाः पशुभिः समानाः॥" अर्थ: भोजन, निद्रा, भय और संतान उत्पन्न करना मनुष्य और पशु दोनों में समान है। मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है उसका ज्ञान, धर्म और करुणा। जो दया और विवेक से रहित है, वह पशु के समान ही जीवन जीता है। मनुष्य में केवल 'ज्ञान' और 'धर्म' (सही-गलत को समझने की क्षमता और संवेदनशीलता) ही वह विशेष गुण है जो उसे पशु से श्रेष्ठ बनाता है। जो मनुष्य दूसरों के प्रति (जिसमें पशु भी शामिल हैं) दया और संवेदनशीलता नहीं रखता, वह साक्षात पशु के समान ही जीवन जी रहा है। 🦁 4. पशु हमारे शिक्षक हैं चाणक्य ने मनुष्य को पशुओं से श्रेष्ठ नहीं, बल्कि उनसे सीखने योग्य बताया। - 🦁 शेर से — एकाग्रता - 🐦 बगुले से — इंद्रिय संयम - 🐕 कुत्ते से — निष्ठा और वफादारी - 🫏 गधे से — परिश्रम और संतोष जिस जीव से हम जीवन के श्रेष्ठ गुण सीख सकते हैं, उसके प्रति क्रूरता करना धर्म, नीति और मानवता—तीनों के विरुद्ध है। 🙏आचार्य चाणक्य का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। "सच्चा राज्य वही है जहाँ न्याय केवल मनुष्यों के लिए नहीं, बल्कि मूक प्राणियों के लिए भी हो।" "राजधर्म केवल मनुष्यों की रक्षा नहीं, बल्कि समस्त जीवों की रक्षा है।" भारत की सनातन परंपरा केवल मानव कल्याण नहीं, बल्कि "सर्वभूत हित" की बात करती है। आज से लगभग 2300 वर्ष पहले जब विश्व के अधिकांश देशों में पशु अधिकारों की कोई चर्चा नहीं थी, तब भारत के महान आचार्य कौटिल्य पशु संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पशु क्रूरता पर कठोर दंड की व्यवस्था कर चुके थे। यदि 2300 वर्ष पहले भारत पशुओं की रक्षा के लिए कानून बना सकता था, तो आज हम क्यों नहीं? 🐾 करुणा ही संस्कृति है। 🐾 पशु संरक्षण ही सच्चा राजधर्म है। 🐾 अहिंसा ही सनातन धर्म की आत्मा है। ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥ यह श्लोक भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांत "वसुधैव कुटुंबकम्" (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) और सार्वभौमिक शांति की भावना को दर्शाता है। कृपया इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाएँ। 🇮🇳 भारत की प्राचीन करुणा-परंपरा को पुनः जागृत करना हम सबका दायित्व है। #AnimalCruelty #AmendPCA #ChanakyaNiti #AcharyaChanakya #ChanakyaQuotes #ChanakyaThoughts #AncientWisdom #NarendraModi #SanatanDharma #SaveIndianAnimals #ProtectCaregivers #Roar4Rights

Dilthi Gujarati

10,907 просмотров • 2 месяцев назад

लवासा प्रोजेक्ट बंद पडून १४ वर्षे झाली. आज तिथे फक्त पहिल्या फेज मधील काही बांधकामे पूर्ण दिसत असली तरी एकंदरीत वापर फारच मर्यादित आहे. दुसऱ्या, तिसऱ्या आणि चौथ्या टप्प्यातील विकसन, बांधकामे हे सगळे अर्धवट सोडून दिलेले असून केवळ कच्चे रस्ते, इमारतींचे गंजून काळवंडलेले सांगाडे असे भेसूर दृश्य आहे. जुलै २०२३ मध्ये ज्या डार्विन रिऍलिटीने हा प्रकल्प NCLT च्या रिसोल्युशन प्लॅन नुसार विकत घेतला त्यांना पूर्तता करता आलेली नाही. डार्विनला हा प्रकल्प १८१४ कोटी रुपयांना मिळाला होता. हे पैसे पुढील आठ वर्षात भरायचे होते. तसेच सदनिका आणि बंगलेधारकांना वाढीव दराने पैसे घेऊन बांधकाम करून द्यायचे होते. सुरुवातीला भरायचे काही कोट रुपये देखील भरण्यात आले नाहीत. त्यामुळे सप्टेंबर २०२४ मध्ये NCLT ने त्या व्यवहाराला स्थगिती दिली असून अनेक नवीन बिडर लिलावात आले आहेत. वालोर इस्टेट ची सर्वात मोठी बोली (केवळ) ७७१ कोटीची आहे. बोली मागवण्यासाठी बँकांनी मुदतवाढ घेतली आहे. लवासा दिवाळखोरीत गेल्यामुळे बँकांचे तब्बल ५,७१३ कोटी रुपयांचे नुकसान झालेले आहे. म्हणजेच भारतीय नागरिकांचे एवढे पैसे हजामतीमध्ये गायब झालेले आहेत (haircut). हे जे नुकसान झाले ते कोणाचे? अजित गुलाबचंद यांचे? पर्यावरणवाद्यांचे की जनतेचे? एक जागतिक दर्जाची लेक सिटी वेळेत होऊ शकले नाही, हे नुकसान कोणाचे? ते असो .. पण लवासा बंद पाडण्यामागे तेथील आदिवासी आणि गरीब शेतकऱ्यांच्या प्रश्नांसाठी लढणाऱ्या जनआंदोलनाचा आणि पर्यावरणवाद्यांचा मोठाच सहभाग आहे. लवासा कंपनीने हम करे सो कायदा या न्यायाने महसूल, नगर नियोजन, कमाल जमीन धारण कायदा आणि पर्यावरण विषयक कायद्यांचे उघड उघड उल्लंघन केले. लवासासाठी चार पदरी रस्ता बांधून त्याचा भुर्दंड सामान्य प्रवासी नागरिकांना पडू लागला. या सगळ्या प्रकारांमुळे या प्रकल्पाविरुद्ध तीव्र जनमानस तयार झालं. तसेच विविध कायदेशीर प्रकरणांमध्ये न्यायालयाने हा प्रकल्प बंद करण्याचे आदेश दिले. कालांतराने कंपनी नुकसानीत आणि नंतर दिवाळखोरीत गेली. नादारी आणि दिवाळखोरी IBC कायदा तर सरळ सरळ कर्जबुडव्या उद्योगपतींच्या फायद्यासाठीच बनवलेला आहे. कंपनी कायदा न्यायाधीकरण NCLT, प्रकल्पाची मालमत्ता लिलावाने विकून, येतील तेवढे पैसे घेऊन नवीन कंपनीला प्रकल्प हस्तांतरित करण्यासाठीच काम करते. बँका त्यांच्याकडची थकीत कर्ज तिसऱ्याच कंपनीकडे हस्तांतरित करून स्वतःचे ताळेबंद स्वच्छ करतात. यामध्ये कर्ज देणाऱ्या बँका आणि वित्त संस्थांचे करोडो रुपयांचे नुकसान होते ज्याला हेअर कट असा चकचकीत शब्द वापरला जातो. हे नुकसान देशातल्या जनतेचे आणि सामान्य नागरिकांचे असते कारण त्यांचा कष्टाचा पैसा सर्वांच्या संगनमतने बुडालेला असतो. प्रकल्प आला की त्याला विरोध. जनआंदोलन हा लोकशाही हक्क आहेच पण ज्याप्रमाणे पर्यावरणवादी कोणत्याही प्रकल्पाला विरोध करताना सोशल अँड इकॉलॉजिकल इम्पॅक्ट असेसमेंट ची मागणी करतात तसे इकॉनॉमिक इम्पॅक्ट असेसमेंट त्यांनी स्वतःच्या आंदोलनाचेही केले पाहिजे. आंदोलन केल्यानंतर नक्की काय होईल, त्याचा एकंदरीत अर्थव्यवस्थेवर काय परिणाम होईल, काय फायदा होईल याचा विचार करून विरोध केला पाहिजे. केवळ हे बंद पाडा, ते बंद पाडा यामुळे काहीच साध्य होणार नाही. चळवळींनी आणि पर्यावरणवाद्यांनी पर्यायी विकास नीती काय याची सुद्धा मांडणी केली पाहिजे. त्याशिवाय आंदोलन करून प्रकल्प बंद पाडण्याचा त्यांना कोणताही नैतिक अधिकार नाही. #लवासा #LAVASA #पर्यायी_विकास_नीती ॲड. संदीप ताम्हनकर. पुणे.

Saurabh Koratkar

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साथियों, मुझे नहीं लगता सुसाइड के अलावा मेरे पास कोई ऑप्शन बचा हुआ है । मैंने बहुजन समाज की आवाज उठाई तो मेरे फ़ोन को छीनने की कोशिश की गई। चमार बोला गया। फिर भी मैंने कहा रुचि तिवारी भटकी हुई है और इसे माफ कर दिया जाना चाहिए । आपने सारी वीडियोज़ देखी। इस लड़की ने झूठा नैरेटिव गढ़ा। कहा ब्राह्मण होने की सजा दी गई। जब मैंने पत्रकारिता की डिग्री मांगी तो 6 दिन बाद फ़र्जी आरोप लगा रही है नवीन ने इसके कपड़े में हाथ डाला 😂😂 अब ये बताए कहा हुआ ऐसा, कौन कौन गवाह है और दिल्ली पुलिस से सीसीटीवी निकालने की मांग मैं कर रहा हूँ और मेरा और रुचि का नार्को टेस्ट कराया जाए । रुचि तिवारी के सारे हथकंडे फेल होने के बाद अब सबसे घटिया हरकत पर उतर आई है। Chandra Shekhar Aazad Mayawati आप लोग कुछ बोलेंगे या नहीं ।मेरा मनोबल अब टूट रहा है । मुझे झूठे केस में फंसाया जा रहा है । जबकि मैं दूध की तरह साफ़ हूँ । सैकड़ों लोग गवाह हैं कि नवीन कुमार नंदन पूरी तरीके से सही है ।
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Naveen Kumar Nandan

78,984 просмотров • 7 месяцев назад