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पापा की परी पढ़ने आई लेकिन जंगल में पढ़ाई कर रही है । यही पढ़ाई हो रही है इनकी , जंगल में मंगल हो रहा है । पढ़ाई छोड़ के आज कल बच्चे सब कर रहे है न इनको समाज की चिंता है न अपने मां बाप की ।...

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भाजपा नेता जनता की सुनने के बजाय झालमुड़ी खाकर जश्न मना रहे हैं। ऐसा माहौल बना रहे हैं, जैसे अंता का चुनाव जीत लिया हो। हकीकत में राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव तक नहीं करवा पा रहे हैं। जनता त्रस्त है, न लोगों को पीने का पानी मिल रहा है, न बीमारों को समय पर इलाज मिल रहा है, न युवाओं को रोजगार मिल रहा है। बजरी माफिया खुलेआम पुलिसकर्मियों पर हमला कर रहे हैं, टोंक में पुलिसकर्मी की हत्या कर दी गई, बच्चियों के साथ आए दिन दरिंदगी की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन भाजपा सरकार झालमुड़ी खा रही है। हर दिन एक-दूसरे को नीचा दिखाने आज कैमरों के सामने एकजुटता का नाकट कर रहे हैं, जनता सब देख रही है।

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स्कूल शिक्षा विभाग की स्थिति बेहद ख़राब है. छत्तीसगढ़ में 16 जून से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया, लेकिन छात्रों को समय पर न तो स्कूल बैग मिले और न ही गणवेश. प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है लेकिन सरकार नई भर्ती नहीं कर रही है. इसका सीधा खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का नाम भी बदल दिया गया है. इतना ही नहीं, अब इन स्कूलों में फीस भी वसूली जा रही है. पहले गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे इन स्कूलों में निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन अब उनसे भी फीस ली जा रही है. दूसरी ओर अतिथि शिक्षक धरना प्रदर्शन कर रहे हैं.

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महाराष्ट्र में अचानक कुछ जिलों में औरंगजेब की औलादे पैदा हो गई है। जो औरंगजेब का फोटो दिखाते हैं, औरंगजेब का स्टेटस रखते हैं। इसके कारण समाज में एक दुर्भावना पैदा हो रही, तनाव भी निर्माण हो रहा है। सवाल यह उठता है कि अचानक औरंगजेब की इतनी औलादे कहां से पैदा हो गई? इसके पीछे कौन है? इसका असली मालिक कौन है? यह हम ढूंढ के निकालेंगे। महाराष्ट्र की कानून और व्यवस्था खराब हो और महाराष्ट्र का नाम खराब हो यह जानबूझकर करने की कोशिश कौन कर रहा है, यह भी हम ढूंढ के निकालेंगे। लेकिन मेरा इतना ही निवेदन है, कोल्हापूर में परिस्थिति पूर्ण नियंत्रण में है। कोई भी कानून को हाथ में न ले, यह मेरा सबसे निवेदन है। #कोल्हापुर #Kolhapur #महाराष्ट्र #maharashtra

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एक छोटी सी गांव सलेमपुर से पलक घर द्वार छोड़कर मां-बाप के नाम रोशन करने जाती है हैदराबाद पढ़ाई करने पढ़ाई में इतनी अच्छी थी कि गांव वाले उसके घर वाले सोचते थे कि मेरे गांव का नाम बहुत ऊंचा करेगी समय बिता गया वहां जाकर कुछ आवारा लड़का और लड़कियों के साथ दोस्ती कर लेती है जिसे उसे गंज दारू पिया पीने की लत लग जाती है इसके बिना वह एक पल भी राणा उसके लिए मुश्किल हो जाता है आरसी करने के लिए उसको पैसे की जरूरत पड़ती है यह लाइट एरिया में एरिया में काम करना शुरू कर देती है इससे वह 1 घंटे के कमा लेती है उसके पास पीने के लिए इतना पैसा आ जाता है 2 दिन भर नशे में दुखी रहती है
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