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Ana Sayfaya Dön

प्यास लगने पर कुआँ खोदने बैठी सम्राट सरकार! भागलपुर के नवगछिया में गंगा नदी में पलटा नाव, खरीक प्रखंड के राघोपुर तटबंध के फ्लड फाइटिंग(कटाव रोकने) में लगे 22 मजदूरों से भरी नाव पलट गई। ज्यादातर मजदूर तैरकर बाहर निकलने में सफल रहे। कुछेक को SDRF ने बाहर निकाला।...

39,105 görüntüleme • 16 gün önce •via X (Twitter)

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फरक्का बैराज के विषय पर नीतीश कुमार के ऐसे नौसिखिए बोल रहे है जिन्हें इस मुद्दे और विषय का कोई इतिहास- भूगोल मालूम नहीं! कोई समझ नहीं? हमने संसद में और राज्य में हमारी सरकार ने हर मंच पर हमेशा फरक्का बांध का कड़ा विरोध किया क्योंकि हमारी दूरदृष्टि ने गंभीरता से इससे बिहार को होने वाले नुक़सान और खतरे को पहचान लिया था। नीतीश कुमार ने पार्लियामेंट में इस विषय पर कभी एक शब्द नहीं बोला, बोलेंगे भी क्यो? उन्होंने जीवन में कभी भी दीर्घकालिक नहीं बल्कि क्षणिक लाभ के लिए सदैव तात्कालिक मुद्दों की सहूलियत भरी राजनीति की है। नीतीश कुमार के खेवनहार बने नौसिखियों को ज्ञानार्जन के लिए जल संसाधन विभाग, बिहार जाकर गंगा नदी में जल उपलब्धता की कमी, बांग्लादेश के साथ अन्तरराष्ट्रीय संधि के दुष्प्रभाव और तत्कालीन राज्य सरकार के प्रयास एवं सिंचाई मंत्री जगदा भाई के केंद्र सरकार के साथ पत्राचार को पढ़ना चाहिए। #LaluYadav #Bihar #farakkabarrage

Lalu Prasad Yadav

87,230 görüntüleme • 20 gün önce

केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए गए आँकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष बिहार से लगभग 3 करोड़ लोग पलायन करते है। ये वो आँकड़े है तो श्रम विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत है। एक अनुमान के अनुसार बिहार से लगभग 5 करोड़ लोग प्रतिवर्ष अस्थायी नौकरी-रोजगार के लिए पलायन करते है। 20 वर्षों की नीतीश-बीजेपी सरकार में पलायन के आँकड़े भयावह है। 20 वर्षों में NDA सरकार ने बिहार में उद्योग-धंधे लगाने की दिशा में सकारात्मक कार्य नहीं किए। मुख्यमंत्री कहते है कि बिहार में समुद्र नहीं इसलिए हम उद्योग नहीं लगवा पाएंगे। लेकिन इच्छाशक्ति के बल पर हमारे 17 महीनों के कार्यकाल में राजद अधीन उद्योग विभाग ने निवेशकों से 50 हज़ार करोड़ के MoU साइन करवाए। लगभग 10 वर्षों से बिहार में डबल इंजन की सरकार है। बिहार ने NDA को 2014 में 31, 2019 में 39 और 2024 में 30 सांसद दिए उसके बावजूद बिहार को उसका वाज़िब हक़-अधिकार नहीं मिल रहा है। हमारी सरकार बनने पर बिहार के श्रमवीरों को बिहार में ही काम देंगे। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, औद्योगिक क्लस्टर एवं उद्योग-धंधे स्थापित करेंगे तथा सबको अपने गृह राज्य बिहार में ही काम मिलेगा। #Migration #Bihar #RJD

Tejashwi Yadav

104,039 görüntüleme • 1 yıl önce

एक दशक बाद आई भीषण बाढ़ में जब बिहार सरकार का खजाना खाली है, राजकोषीय तनाव चरम पर है तब मुझे मेरा सड़क से सदन तक का संघर्ष याद आ रहा है। लालू यादव जितना पक्ष-विपक्ष में रहकर बिहार और बिहारियों के हक के लिए लड़ा है उतना आज तक कोई नहीं लड़ा। अटल जी की कैबिनेट में एक दर्जन कैबिनेट मंत्री बिहार से थे लेकिन राज्य में मेरी सरकार थी तो इन नकारे नकारात्मक सांप्रदायिक भाजपाइयों ने बिहार को उसके हिस्से का बजट कभी नहीं दिया, कुछ नहीं दिया और ना ही देने दिया। पंचवर्षीय योजना तक में रोक लगा देते थे कि बिहार को पैसा ना मिले। उस वक्त राज्य सीधे उधार भी नहीं ले सकते थे। 𝟐𝟎𝟎𝟒 में जब हम राजद के 𝟐𝟒 सांसदों के साथ रुआब के साथ 𝐔𝐏𝐀-𝟏 में रेल मंत्री बने तो बिहार को उन पाँच वर्षों (𝟐𝟎𝟎𝟒-𝟎𝟗) में अपने प्रभाव और राजनीतिक ताक़त के बल पर 𝟏 लाख 𝟒𝟒 हज़ार करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि तत्कालीन प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी और श्रीमती सोनिया गांधी जी से विकास कार्यों के लिए दिलाई। हमने जो कहा उन्होंने किया। हमारे उसी पैकेज की धनराशि से 𝟐𝟎𝟎𝟓 से नीतीश ने रगड़-रगड़ कर अपना चेहरा चमकाया। अटल जी के मंत्रिमंडल में रहते नीतीश समेत बिहार से एक दर्जन कैबिनेट मंत्रियों ने हमें बदनाम और विफल करने के लिए केंद्र से कभी कोई सहायता नहीं दिलाई लेकिन हम तो सकारात्मक दृष्टिकोण से बिहार हित में सदैव राजनीति करते रहे और बिहार को बहुत फंड दिलाया तो 𝐁𝐉𝐏 के दुलारे नीतीश जैसों ने व्यक्तिगत स्वार्थ में हमेशा बिहार को दंड दिलाया। एनडीए से 𝟑𝟎 सांसदों के बावजूद आज दिल्ली में बिहार की सुनने वाला कोई नहीं? नेपाल से आने वाली बाढ़ और उसके स्थायी समाधान के लिए हमेशा प्रयासरत रहा। लालू सत्ता के लिए अपना चरित्र, चेहरा, चाल और विचार नहीं बदलता। संसद का वीडियो है ध्यान से सुनिए, 𝟐𝟎𝟏𝟏 का है तब केंद्र में 𝐔𝐏𝐀-𝟐 की सरकार थी, बिहार में नीतीश-बीजेपी की सरकार थी लेकिन लालू दिल्ली में बिहार के लिए 𝐔𝐏𝐀 से भी लड़ता था। अब दिल्ली में 𝐍𝐃𝐀 -𝟑 है, बिहार में 𝐍𝐃𝐀-𝟓 है लेकिन निकम्मे, नकारे और नौसिखिए लोग बहाने बनाने से बाज नहीं आते। 👉 नदियों के रख रखाव के लिए नेपाल सरकार से दो टूक बात हो, कर्पूरी ठाकुर जी ने भी इस मुद्दे को उठाया था। 👉 चुनाव और बाढ़ आने पर मुफ्तखोरी का घोषणा और फ्री 𝟐 किलो अनाज का लालच देना बंद करो, स्थाई समाधान दो। 👉 नदियों के रखरखाव पर खर्च होने वाला एक पैसा बिहार को नहीं मिला 👉 बिहार का लोग अपना घर परिवार छोड़ देश विदेश पलायन करता है। वहां से खून पसीना का कमाई लाकर यहां जमा करता है, लेकिन उसके अनुपात में उनपर खर्च नहीं होता 👉 हम भीख नहीं मांग रहे हैं, क्रेडिट के अनुरूप पैसा बिहार को दो। 👉 बिहार का 𝐂𝐃𝐑 (Credit Deposit Ratio कम क्यों है? आज भी देश में साख-जमा अनुपात बिहार का सबसे कम है?

Lalu Prasad Yadav

52,034 görüntüleme • 3 gün önce

चुनावी वर्ष में देशभर के भाजपाई राजनीतिक पर्यटन के लिए अब बिहार आएंगे-जाएंगे, झूठी घोषणाएं करेंगे, लंबे-चौड़े दावे और वादे करेंगे लेकिन यह नहीं बतायेंगे कि:- 𝟏. केंद्र सरकार ने विगत 𝟏𝟏 वर्षों में गुजरात को विकास कार्यों के लिए कितनी धन राशि दी और बिहार को कितनी? 𝟐. विगत 𝟏𝟏 वर्षों में गुजरात में कितने लाख करोड़ के उद्योग-धंधे स्थापित किए, प्रॉजेक्ट स्वीकृत किए तथा गुजरात की तुलना में बिहार को क्या दिया? 𝟑. 𝟐𝟎 वर्षों की सरकार ने पलायन रोकने के लिए क्या किया? 𝟒. बिहार में कितने नए विश्वविद्यालय स्थापित किए? 𝟓. बिहार के कितने युवाओं को नौकरी-रोजगार दिया? 𝟔. 𝟐𝟎 वर्षों की 𝐍𝐃𝐀 सरकार और 𝟏𝟏 वर्षों की केंद्र सरकार ने बिहार में कितनी चीनी मिल शुरू कराई? 𝟕. बाढ़ नियंत्रण, बचाव और राहत के लिए क्या किया? 𝟖. बिहार को बेरोजगारी, गरीबी, पलायन के गर्त में क्यों धकेला? 𝟗. बिहार इनको केवल चुनावों में ही याद क्यों आता है? 𝟏𝟎. बिहार नीति आयोग के विकास सूचकांकों और लक्ष्यों में सबसे फिसड्डी क्यों है? 𝟏𝟏. नीतीश-भाजपा की 𝟐𝟎 वर्षों की सरकार की क्या उपलब्धियां है? 𝟏𝟐. डबल इंजन सरकार ने बिहार में कितने नए उद्योग-धंधे लगाए और कितने पूर्व संचालित उद्योग-धंधे, चीनी मिल, जूट मिल, पेपर मिल इत्यादि बंद कराए? हिम्मत है तो अनर्गल नकारात्मक बयानबाजी की बजाय तार्किक और तथ्यात्मक सवालों के तथ्यात्मक जवाब दें? #TejashwiYadav #Bihar #RJD

Tejashwi Yadav

89,016 görüntüleme • 1 yıl önce

यह अत्यंत चिंता का विषय है कि दिवालिया हो चुकी बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में उदासीन है। आपदा राहत की राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए था किन्तु इस वर्ष राज्य की आकस्मिक निधि एवं अन्य वित्तीय संसाधनों का उपयोग नियमित सरकारी खर्चों में इस प्रकार हुआ है कि आपदा के समय राहत के लिए धन की अत्यंत कमी हो रही है। मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिख आग्रह किया है कि केंद्र सरकार:- 1. बिहार की विनाशकारी बाढ़ को “राष्ट्रीय आपदा” घोषित करे। 2. बिहार की मदद के लिए तत्काल 𝟓 हजार करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए विशेष बाढ़ राहत पैकेज उपलब्ध कराए। 3. भीषण बाढ़ से प्रभावित एवं सड़क संपर्कहीन क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त नाव, बोट एवं अन्य संसाधनों की तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। 4. बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सेना एवं वायुसेना के हेलीकॉप्टरों का सहयोग सुनिश्चित किया जाए। 5. भोजन, पेयजल, दवा, पशुचारा एवं अस्थायी आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 6. किसानों, मजदूरों, पशुपालकों एवं प्रभावित परिवारों के लिए विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। 7. राज्य की वित्तीय एवं आपदा-प्रबंधन तैयारियों तथा राज्य की आकस्मिक निधि के उपयोग व लेन-देन की स्वतंत्र समीक्षा/ CAG परीक्षण कराई जाए। #TejashwiYadav #RJD #Bihar #flood

Tejashwi Yadav

47,813 görüntüleme • 4 gün önce

बिहार में कई नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गंगा, सोन, पुनपुन, गंडक, बुढी गंडक, बागमती, कोसी इत्यादि नदियों में बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के कारण लोगों में दहशत है। 15 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में है लेकिन एनडीए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों की अभी तक कोई तैयारी नहीं की है। सरकार की ओर से आमजन की सुरक्षा और बाढ़ प्रभावितों को किसी प्रकार की कोई सुविधा प्रदान नहीं की गई है। ना ही कोई जागरूकता अभियान चलाया गया है। दियारा क्षेत्रों के बाढ़ के कहर और कटाव से किसानों की मक्का और हरी सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई है। घरों, सड़कों, स्कूलों और खेतों में पानी भर गया है। दियारा क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण ग्रामीणों को अंधेरे के साथ-साथ पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क टूटने के कारण राशन और जरूरी सामान की कमी होने लगी है। हमारी सरकार से माँग है कि दियारा क्षेत्रों को अविलंब बाढ़ग्रस्त घोषित किया जाए। सरकार की तरफ़ से बाढ़ राहत शिविर, सामुदायिक किचन और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। राहत शिविर नहीं होने से लाइफ जैकेट, दवाएं और सांप-बिच्छू काटने जैसी आपात स्थितियों के लिए प्रशासन संचालित नावें और इमरजेंसी बोट की तत्काल व्यवस्था होनी चाहिए।

Tejashwi Yadav

50,286 görüntüleme • 8 gün önce