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Ana Sayfaya Dön

• प्रदर्शन का दमन बिलकुल ग़लत है • पुलिस पर ईंटा पत्थर फेंक कर ख़ूनोख़च्चर कर देना भी उतना ही ग़लत है

478,762 görüntüleme • 2 yıl önce •via X (Twitter)

9 Yorum

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PallaviCT2 yıl önce

प्रदर्शन का दमन बिलकुल ग़लत है प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन और टीयर गैस से हमला करना ग़लत हैं पर CONग्रेस ममता बैनर्जी सरकार पर मुँह नहीं खोलेगी 🤫🤫🤫 #KolkataDoctorCase पर बोलना उनके शहज़ादे के लिए एक DISTRACTION हैं 🤨🤨 #NabannaAbhiyan

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PallaviCT2 yıl önce

पत्थरबाज़ी करते वक़्त महिलाओं ने बुर्खा ना पहनना ग़लत है - हिज़बुल मुजाहिद्दीन

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PallaviCT2 yıl önce

सही कहा 👍👍

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Praveen Kumar2 yıl önce

लगता है ममता बनर्जी ने कांग्रेस की नकेल कस दी है, तभी गाली वाली चाची के मुंह से प्रवचन निकल रहा है, और बंगाल पुलिस का बचाव हो रहा है। जब दिल्ली में दंगे हो रहे थे तो चाची पुलिस को गालियां सुना रही थी!!

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Virat Chaudhary2 yıl önce

राजीव ने भारत के दलित ओबीसी और पिछड़े को छोड़ कर. . विदेशी महिला से शादी क्यो की. . . क्यों ????

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PallaviCT2 yıl önce

पुलिस पर ईंटे और पत्थर फेंकना ग़लत हैं ? पर आप की ही महान सांसद, पूर्व गृह मंत्री की बेटी प्रणाली शिंदे कहती हैं 👇🏻👇🏻- “Let there be civil war; let there be violent protests” क्या भारत में बांग्लादेश जैसे अराजकता लाने का ये टूलकिट हैं ? 🤨🤨

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Vishal Chaurasia2 yıl önce

यहाँ आपको कोई resistance नहीं दिखेगा। Democracy और dictatorship नहीं दिखेगी। क्योंकि आप selectively अंधी हो जाती हैं।

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Santosh Singh Parmar2 yıl önce

कोलकाता से आई इस वीडियो ने I.N.D.I Alliance को झकझोर कर रख दिया है। #JusticeForMoumita

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PallaviCT2 yıl önce

भाजपा नेता प्रयांगु पांडे को बंगाल बंध के दौरान गोली मारी गई क्या ये सही हैं या ग़लत ? कब तक बंगाल दीदी आमीन की तानाशी और भयंकर क़ानून व्यवस्था पर चुप रहेगा ? 🤫🤫 कब तक CONग्रेस चुप रहेगा? 🤫🤫

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संजय रॉय कोलकता का दरिंदा. जिसने एक डॉक्टर के साथ वो दरिन्दगी की जिससे देश भर में लड़कियाँ सिहर उठीं उसने कहा उसे अपने किए पर कोई अफ़सोस नहीं, जो सज़ा देनी है दे दो संजय नागरिक स्वयंसेवक कर्मचारी था और संविदा पर काम करता था संजय को शराब की लत थी, और हिंसक पॉर्न देखने का आदी था. इस वहशी ने 4 शादियाँ कीं, पहली 3 पत्नियाँ छोड़ कर चली गयीं. चौथी की कैंसर से मौत है गई संभवतः यह अपनी पत्नियों के साथ भी यही क्रूरता यही दरिन्दगी करता था तो संजय रॉय जैसे जानवरों को यह क्यों लगता है कि वो एक औरत के साथ कुछ भी कर सकते हैं? उनको क्यों लगता है कि एक औरत का दमन, एक औरत का शोषण, एक औरत के शरीर को नोचना, एक औरत के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती उनका जन्मसिद्ध अधिकार है? हम क्यों नहीं वो नज़ीर बना पाते जहां ऐसे लोगों की रूह काँप जाये? औरत किसी भी धर्म, जाति, तबके, वर्ग की हो - उसके साथ ग़लत करने की हिम्मत कहाँ से आती है इन दरिंदों में? और ग़लती सिर्फ़ रेप नहीं है - गलती है एक लड़की का पीछा करना, गलती है लड़की को देख कर सीटी बजाना, गलती है एक लड़की के दुपट्टे को खींच देना, गलती है सड़क चलती लड़की पर फबतियाँ कसना, गलती है मोहब्बत के इज़हार के ठुकराने के बाद भी लड़की की नाक में दम करके रखना, ग़लत है पत्नी से जबरन सेक्स करना, ग़लत है बेटी को चुप रहने की हिदायत देना, ग़लत है एक लड़की के साथ हुई ज़्यादती के बाद शर्म का सारा बोझ उसके सिर पर लाद देना, गलती है अगर औरत आवाज़ उठाए तो उसके चरित्र पर सवाल उठा देना, ग़लत है कम महिलाओं का दफ़्तरों में होना, ग़लत है ऑफिस में औरतों के साथ भेदभाव करना. ग़लतिया बहुत सारी हैं क्या इस देश की आधी आबादी के ख़िलाफ़ गुनाह कभी थमेंगे नहीं? क्या औरत को कभी आज़ादी मिलेगी - वहशियों से, दरिंदों से, समाज के जानवरों से?
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संजय रॉय कोलकता का दरिंदा. जिसने एक डॉक्टर के साथ वो दरिन्दगी की जिससे देश भर में लड़कियाँ सिहर उठीं उसने कहा उसे अपने किए पर कोई अफ़सोस नहीं, जो सज़ा देनी है दे दो संजय नागरिक स्वयंसेवक कर्मचारी था और संविदा पर काम करता था संजय को शराब की लत थी, और हिंसक पॉर्न देखने का आदी था. इस वहशी ने 4 शादियाँ कीं, पहली 3 पत्नियाँ छोड़ कर चली गयीं. चौथी की कैंसर से मौत है गई संभवतः यह अपनी पत्नियों के साथ भी यही क्रूरता यही दरिन्दगी करता था तो संजय रॉय जैसे जानवरों को यह क्यों लगता है कि वो एक औरत के साथ कुछ भी कर सकते हैं? उनको क्यों लगता है कि एक औरत का दमन, एक औरत का शोषण, एक औरत के शरीर को नोचना, एक औरत के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती उनका जन्मसिद्ध अधिकार है? हम क्यों नहीं वो नज़ीर बना पाते जहां ऐसे लोगों की रूह काँप जाये? औरत किसी भी धर्म, जाति, तबके, वर्ग की हो - उसके साथ ग़लत करने की हिम्मत कहाँ से आती है इन दरिंदों में? और ग़लती सिर्फ़ रेप नहीं है - गलती है एक लड़की का पीछा करना, गलती है लड़की को देख कर सीटी बजाना, गलती है एक लड़की के दुपट्टे को खींच देना, गलती है सड़क चलती लड़की पर फबतियाँ कसना, गलती है मोहब्बत के इज़हार के ठुकराने के बाद भी लड़की की नाक में दम करके रखना, ग़लत है पत्नी से जबरन सेक्स करना, ग़लत है बेटी को चुप रहने की हिदायत देना, ग़लत है एक लड़की के साथ हुई ज़्यादती के बाद शर्म का सारा बोझ उसके सिर पर लाद देना, गलती है अगर औरत आवाज़ उठाए तो उसके चरित्र पर सवाल उठा देना, ग़लत है कम महिलाओं का दफ़्तरों में होना, ग़लत है ऑफिस में औरतों के साथ भेदभाव करना. ग़लतिया बहुत सारी हैं क्या इस देश की आधी आबादी के ख़िलाफ़ गुनाह कभी थमेंगे नहीं? क्या औरत को कभी आज़ादी मिलेगी - वहशियों से, दरिंदों से, समाज के जानवरों से?

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319,277 görüntüleme • 2 yıl önce