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पूर्व आइजीपी चन्द्र कुबेर खापुङ रोपाइमा व्यस्त

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पूर्व शिक्षामन्त्रीसमेत रहनुभएका महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटाको कविताको पङ्ति छ: 'उद्देश्य के लिनु उडी छुनु चन्द्र एक.....' शिक्षा मन्त्रालयको मुख्य लक्षित वर्ग विद्यार्थी हुन्। विद्यार्थीलाई कक्षादेखि लक्ष्यसम्म पुग्ने बाटो देखाउनु हाम्रो दायित्व हो। हामीले 'करियरका कुरा' भनेर संवाद सुरु गर्यौँ। ‘करियर काउन्सेलिङ’का लागि विशेष वेबसाइट पनि सार्वजनिक गरेका छौँ। हाम्रो वेवसाईट मा गएर यसमा के के सुधार गर्न सकिन्छ मन्त्रालयलाई सुझाव पनि दिनुस् है। वेबसाइटमा विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक र स्थानीय तहका लागि आवश्यक जानकारी छुट्टाछुट्टै ट्याबमा राखिएको छ। छात्रवृत्तिका विषयमा तथा उच्च एवं प्राविधिक शिक्षाका विषयमा आवश्यक जानकारी वेबसाइटमा राखिएको छ भने सरकारका विभिन्न निकायबाट विद्यार्थीका लागि प्राप्त हुने सूचना एकैठाँउबाट सार्वजनिक गर्ने प्रबन्ध गरिएको छ।

Sumana

73,677 просмотров • 2 лет назад

मैं शुरू से ही कह रहा हूँ कि आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी बच्चों इत्यादि पर ऐसा बोल नहीं सकते लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें घेर रखा है, उनसे ऐसा बुलवाया जा रहा है। जो लोग उनसे ऐसा बुलवा रहे है उनकी जानकारी के लिए बता दूँ कि :- 𝟏. महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चन्द्र बोस 𝟏𝟒 भाई-बहन थे। 𝟐. संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर 𝟏𝟒 भाई-बहन थे और वे अपने माता-पिता की अंतिम संतान थे। 𝟑. प्रखर विद्वान और भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति श्री वी.वी गिरी के 𝟏𝟒 बच्चे थे। 𝟒. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी 𝟕 भाई-बहन थे। 𝟓. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी स्वयं 𝟓 भाई-बहन हैं 𝟔. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी 𝟔 भाई-बहन हैं। 𝟕. प्रधानमंत्री मोदी के पिता दामोदर दास जी 𝟕 भाई-बहन थे। 𝟖. प्रधानमंत्री मोदी के चाचा नरसिंह दास जी के 𝟖 बच्चे है। 𝟗. गृहमंत्री अमित शाह 𝟕 भाई-बहन है। 𝟔 बहनों के बाद 𝟕वाँ नंबर इनका है। 𝟏𝟎. पटना साहिब के सांसद पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद 𝟕 भाई-बहन है। 𝟏𝟏: तेलंगाना के पूर्व 𝐂𝐌 के. चंद्रशेखर राव जी 𝟏𝟎 भाई बहन हैं 𝟏𝟐.राष्ट्रगान लिखने वाले रवीन्द्र नाथ टैगोर जी 𝟕 भाई-बहन थे। 𝟏𝟑. पूर्व प्रधानमंत्री श्री देवेगौड़ा जी के 𝟔 बच्चे है। 𝟏𝟒. पूर्व प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हा राव जी के 𝟖 बच्चे है। #TejashwiYadav #india #trending #bihar

Tejashwi Yadav

386,923 просмотров • 2 лет назад

विविध संवर्गातील ६२३ पदांसाठी MPSC परीक्षा २०२२ मध्ये झाली होती.जानेवारी २०२४ मध्ये मुलाखत आणि गुणवत्ता यादी आयोगाकडून जाहीर करण्यात आली होती. पूर्व परिक्षेपासून आजपर्यंत जवळपास दोन वर्षाचा कालावधी लोटला आहे. अजूनही अंतिम निकाल तसेच नियुक्ती होण्यास किती कालावधी जाईल याबाबत अनिश्चिता आहे. निवड झालेले बहुतांश अधिकारी हे नोकरीवर रुजू होण्याच्या प्रतीक्षेत असल्यामुळे गुणवत्ता यादीत येऊन ही बेरोजगार आहे. त्यामुळे त्यांना आर्थिक सामाजिक विवंचनेला आणि मानसिक त्रासाला सामोरे जावे लागत आहे. निवडणुकीपूर्वी बिल्डर, कंत्राटदार, आमदार तसेच जाहिरातीसाठी कोट्यवधी रुपयांचे शासन निर्णय काढण्यात व्यस्त असलेल्या सरकारने निराशेत असलेल्या अधिकाऱ्यांच्या बाबतीत विचार करावा आणि तातडीने त्यांना नियुक्ती द्यावी ही आमची सरकारकडे मागणी आहे.

Vijay Wadettiwar

10,270 просмотров • 1 год назад

"उजागर हुआ रविन्द्र सिंह भाटी का पाकिस्तान प्रेम!" आगरा के एक संस्थान में रविन्द्र सिंह भाटी ने पाकिस्तान के उस पूर्व सांसद राणा चन्द्र सिंह सोढ़ा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह वही राणा चन्द्र सिंह हैं जिनके पिता राणा अर्जन सिंह सोढ़ा ने अमरकोट रियासत—जिसमें 90% हिंदू आबादी थी—का भारत में विलय न कर, पाकिस्तान में विलय का निर्णय लिया था। इस निर्णय में चन्द्र सिंह की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। अमरकोट एकमात्र हिन्दू रियासत थी जो भारत के साथ गद्दारी कर पाकिस्तान में शामिल हुई तथा जिन्ना ने इस खानदान को जोधपुर जैसलमेर बीकानेर जयपुर ओर उदयपुर को पाकिस्तान में मिलाने के लिए प्रलोभन दिया था ओर विभाजन के बाद जैसलमेर पर पाकिस्तान के हमले में इस सोढ़ा खानदान की महत्वपूर्ण भूमिका थी इस निर्णय के कारण बड़ी हिंदू आबादी को पाकिस्तान में छोड़ा गया, जो आज भी वहां धार्मिक उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। बावजूद इसके, यह परिवार आज भी पाकिस्तान में 'हिंदू मुखौटा' बनकर पेश आता है और यह बताने की कोशिश करता है कि पाकिस्तान में हिंदू सुरक्षित हैं। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि यह परिवार अपने राज्य का मूल नाम तक नहीं बचा सका। पाकिस्तान ने अमरकोट से उमरकोट कर दिया ! गौरतलब है कि मुगल सम्राट अकबर का जन्म भी अमरकोट में हुआ था ऐसे इतिहास वाले परिवार को सार्वजनिक मंच से सम्मान देना और उनकी सहानुभूति लेना, विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की मंशा, विचारधारा ओर राष्ट्र के प्रति निष्ठा पर गहरे प्रश्न खड़े करता है उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी रविन्द्र सिंह भाटी पर विदेशी फंडिंग के आरोप लग चुके हैं।

Deependra Pal Singh Sau

14,320 просмотров • 1 год назад

BJP का 'भ्रष्टाचार मॉडल' कमीशन दो - काम लो मध्य प्रदेश में जमकर कमीशनखोरी चल रही है, बिना पैसे खिलाए कोई काम नहीं हो रहा। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद Digvijaya Singh जी ने पेंच नेशनल पार्क में मनरेगा मजदूरों से मुलाकात की। यहां ग्राम प्रधान और मजदूरों ने बताया 👇 ⦿ बिना कमीशन कोई काम नहीं मिलता ⦿ अधिकारी काम के लिए 10% कमीशन मांगते हैं ⦿ मजदूरों को तय मजदूरी से कम पैसे दिए जाते हैं ⦿ कई महीनों से मनरेगा मजदूरों को पैसा नहीं मिला ⦿ मजदूर रोजगार की तलाश में पलायन कर रहे हैं ये BJP के 'डबल इंजन' का करप्शन मॉडल है, जहां हर स्तर पर लूट-खसोट मची है। जनता परेशान है और नेता-अधिकारी मोटी मलाई खाने में व्यस्त। 📍 मध्य प्रदेश

Congress

18,823 просмотров • 7 месяцев назад

यमुना घाट पर एक दिल दहला देने वाली घटना — भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और वर्तमान मंडल प्रभारी कुलदीप नैलवाल जी यमुना में डूब गए। 👉 उसी समय मुख्यमंत्री जी उसी घाट से नौका यात्रा करते हुए गुजरीं, 👉 लेकिन NDRF की टीम मुख्यमंत्री की अगवानी में व्यस्त रही, 👉 और डूबते व्यक्ति को बचाने कोई नहीं पहुँचा! 6 घंटे तक इंतज़ार, लेकिन सरकारी मदद नहीं आई। आखिरकार पैसे देकर निजी गोताखोरों से शव निकाला गया। सोचिए... जब मुख्यमंत्री की सुरक्षा और स्वागत में तैनात टीमें जनता को बचाने की बजाय फोटो-ऑप में लगी रहें, तो आम आदमी की जान की कीमत क्या रह जाती है? यह घटना दिखाती है कि इस सरकार के लिए जनसेवा नहीं, दिखावा प्राथमिकता बन चुकी है। 🙏 कुलदीप नैलवाल जी को श्रद्धांजलि। सरकार जवाब दे — क्या आपकी “अगवानी” एक व्यक्ति की जान से ज्यादा कीमती थी?

Sanjeev Jha

24,728 просмотров • 11 месяцев назад

असम में मुसलमानों के साथ हो रही हेमंता सरकार की प्रताड़ना के खिलाफ कल जिस प्रोग्राम में हिंदू सेना वाला विष्णु गुप्ता और खुद को कसरेवा मुजफ्फरनगर का प्रधान बोलने वाला परवेज़ आलम ने अपने गुंडों के साथ गुंडागर्दी करते हुए प्रोग्राम में हमला किया गया था अब उनके खिलाफ संसद मार्ग थाने पर आधिकारिक तौर पर कंप्लेन दर्ज करवा दी गयी है। अब सारा मामला दिल्ली पुलिस के हाथ में है कि वो इन गुंडों पर मुकदमा दर्ज कर के सख्त करवाई करने का कष्ट करे! वैसे आपको पता होना चाहिए ये परवेज आलम वही है जिसको असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने सोशल मीडिया के जरिये से खूब प्रोत्साहित करते है। साथ में याद रखिये यही वो परवेज है जो अभी कंस्टीटूशन क्लब के चुनाव में मुज़फ्फरनगर के पूर्व सांसद संजीव बालियान के पक्ष में प्रचार करने में व्यस्त था। तस्वीरें सोशल मीडिया पर मौजूद है। अब आप खुद अंदाजा लगा लो इस प्रोग्राम पर हमला करने वालों का कनेक्शन कहाँ से जुड़ा हुआ है!

Ansar Imran SR

23,357 просмотров • 1 год назад

विश्वकर्मा समाज की युवती की संदिग्ध मृत्यु के बाद, विश्वकर्मा समाज के पूर्व मंत्री व सपा के डेलीगेशन पर हमले के बाद अब अत्याचार के ऊपर अत्याचार करते हुए पीड़ित पक्ष के लोगों को पुलिस उठाकर ले गयी है। जो पीड़ित घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती थे, उनको भी डिस्चार्ज कराकर अज्ञात जगह पर ले जाना घोर अन्याय है। ऐसा लगता है कि भाजपा के प्रश्रय प्राप्त लोगों को इतनी छूट दे दी गयी है कि पुलिस पर हमला करने के बावजूद भी प्रशासन द्वारा हमलावारों का ही पक्ष लिया जा रहा है। ये घोर अन्याय, घोर निंदनीय है। सामान्य पुलिसावलों को आगे करके ईंटें-पत्थर खाने के लिए छोड़ दिया जा रहा है और उच्चाधिकारी सत्ता पक्ष की चाटुकारिता में व्यस्त हैं। अन्य घायलों की तरह, घायल पुलिसकर्मियों के भी अच्छे-से-अच्छे इलाज की हम पुरज़ोर माँग करते हैं। 2027 में वर्चस्ववादियों की अत्याचारी सत्ता को पीडीए की एकजुटता हमेशा के लिए समाप्त कर देगी। भाजपा का अंत निश्चित है। भाजपा का समय पूरा हुआ लेकिन इतिहास भाजपा को जगह देकर अपना इतिहास ख़राब नहीं करेगा। पीडीए एकता ज़िंदाबाद!

Akhilesh Yadav

62,269 просмотров • 5 месяцев назад

"आगरा के पूर्व एआरटीओ के घर से मिला सोने-चांदी और कैश का जखीरा.. 13 किलो सोने की ईंटें और बिस्किट, 9 किलो चांदी की ईंटें और बार.. सवा करोड़ रुपए नकद.." एआरटीओ ललित कुमार साहब बड़े धन कुबेर निकले.. साहब खूब जमकर रुपया काट रहे थे.. सरकार की नजर पड़ गई.. साहब के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हो गया.. विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी.. विजिलेंस की टीम ने कल अलीगंज की चन्द्रलोक कॉलोनी में ललित कुमार के घर पर छापा मारा तो आँखें फट गईं.. साहब के घर में जगह-जगह रुपयों के पैकेट छिपाकर रखे गए थे.. कुल एक करोड़ 62 लाख रुपए कैश मिले.. सोने-चांदी की ईंटें, सिल्लियां, बिस्कुट और जेवर का वजन 22 किलो था.. साहब के घर से सब मिलाकर 20 करोड़ से अधिक का माल मिला.. यही नहीं, साहब के पास अलीगंज में आलीशान मकान के अलावा अलीगंज में ही दो बड़े प्लॉट, मोहनलालगंज और बालकगंज में एक-एक प्लॉट और मोहनलालगंज में खेती की जमीन भी मिली है.. जमीनों की कीमत भी करोड़ों रुपए बताई जा रही है.. साहब पर लक्ष्मी बरस रही थीं.. अब कानून का डंडा चलेगा.. #ARTO #Agra #Vigilance #Police #Lucknow #Raid #Recovery #Gold #Silver #Cash

Vivek K. Tripathi

86,627 просмотров • 2 месяцев назад

सब के सब फंस गए:– भाजपा, कांग्रेस, RLP, BAP एक बार फिर ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा दिए गए “होमवर्क” को कांग्रेस पार्टी पूरा करने में जुट गई है। पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने 30 मार्च के स्थान पर भविष्य में राजस्थान दिवस को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाने की घोषणा की थी। जब राजस्थान की स्थापना की जा रही थी, तब राजप्रमुख सवाई मान सिंह द्वितीय ने आग्रह किया था कि “राजस्थान शक्ति और शौर्य की धरा है, अतः इसका स्थापना दिवस शक्ति के महापर्व नवरात्र के प्रथम दिवस पर ही होना चाहिए।” इस विचार को सरदार पटेल ने स्वीकार किया और राजस्थान की स्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत् 2006 को की गई। आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का अवसर है। शक्ति की इस भूमि राजस्थान का कण-कण शक्ति उपासना में लीन है, किन्तु प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने आज राजस्थान दिवस पर बधाई देना उचित नहीं समझा। हम जिस प्रदेश में रहते हैं, वहाँ विवाह, त्योहार, उत्सव तथा अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम भारतीय पंचांग के अनुसार ही निर्धारित किए जाते हैं। अधिकांश नेता भी चुनावी हलफनामा दाखिल करने से पूर्व ज्योतिष के अनुसार तिथि, समय, काल, ग्रह और नक्षत्र की जानकारी अवश्य लेते हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि यदि कांग्रेस पुनः सत्ता में आती है, तो क्या वह राजस्थान दिवस को तिथि के स्थान पर फिर से 30 मार्च की निश्चित तारीख पर ले जाएगी? तिथि परिवर्तन के साथ उत्सव के प्रति उत्साह में यह कमी आखिर क्यों दिखाई देने लगी है? केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि हनुमान बेनीवाल और राजकुमार रोत जैसे नेताओं ने भी राजस्थान दिवस पर बधाई नहीं दी। यही नहीं, प्रदेश भाजपा भी अपने केंद्रीय नेतृत्व तक सही जानकारी पहुँचाने में असफल रही प्रतीत होती है। अभी तक प्रधानमंत्री, गृह मंत्री तथा भाजपा शासित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से भी बधाई संदेश सामने नहीं आए हैं। खैर, प्रदेश इन दिनों मानो उत्साह और आनंद से दूर, नीरो की तरह बंशी बजाने में व्यस्त दिखाई देता है।

Dinesh Bohra

46,308 просмотров • 6 месяцев назад

पराक्रम को पत्थर लगवाने की इतनी जल्दी? पिछले गेट से निकलने की नौबत क्यों आई? सुजानगढ़ में कल रात जो कुछ हुआ, वह टाला भी जा सकता था। राजस्थान के कद्दावर नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के पुत्र पराक्रम राठौड़ चूरू विधायक हरलाल सहारण के साथ स्टेडियम के जीर्णोद्धार का उद्घाटन करने पहुंच गए। उद्घाटन पट्टिका पर स्थानीय विधायक मनोज मेघवाल, सांसद राहुल कस्वां और तत्कालीन नगर परिषद सभापति नीलोफर गौरी का नाम नहीं होने से कांग्रेसी कार्यकर्ता भड़क गए। काले झंडे दिखाते हुए नारेबाजी और पथराव के बीच चूरू विधायक हरलाल सहारण और भाजपा के जिला मंत्री पराक्रम राठौड़ को पिछले गेट से सुरक्षित रास्ता ढूंढना पड़ा। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। लाठी चार्ज की नौबत आ गई। ऐसा क्यों हुआ? विधानसभा के पिछले सत्र में ही विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने यह व्यवस्था दी थी कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र में उद्घाटन के काम स्थानीय विधायक ही करेंगे भले ही वे किसी भी पार्टी के क्यों नहीं हों। यह व्यवस्था देते हुए उन्होंने खुद अपनी पीड़ा भी बताई थी। फिर सुजानगढ़ में वो कौन लोग हैं जो सरकार की फजीहत करवा रहे हैं? विधानसभा अध्यक्ष की हालिया व्यवस्था के खिलाफ काम कर रहे हैं? पराक्रम राठौर राजस्थान के बड़े नेताओं में शुमार राजेंद्र राठौड़ के इकलौते वारिस हैं। राजेंद्र राठौड़ ने अपनी 40-45 साल की राजनीति बेहद ही सावधानी और चतुराई से चलाई है। हरलाल सहारण उनके चेले जरूर हैं लेकिन राजनीतिक परिपक्वता के मामले में उनके आसपास अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं। पराक्रम ने तो अभी ठीक से राजनीति में कदम रखा भी नहीं है और उसके पहले ही ऐसी गैर जरूरी विवादित घटनाओं का हिस्सा बनना उन्हें कहां लेकर जाएगा? यह सोचने वाली बात है। पत्थरों पर नाम खुदवाने की ऐसी जल्दबाजी समझ से परे है। राजेंद्र राठौड़ फिलहाल पश्चिम बंगाल के चुनाव में व्यस्त हैं। इसके बावजूद यह संभव नहीं है कि उनकी जानकारी के बिना यह सब हुआ होगा। बहरहाल, जो कुछ भी हुआ है, वह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम है। जिम्मेदार नेताओं को ऐसे विवादों से बचना चाहिए। Arvind Chotia

Arvind Chotia

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कल जो रात को जंतर मंतर पर अमित शाह की निरंकुश दिल्ली पुलिस ने किया वो कल्पना से परे है, खिलाड़ियों को पीटा गया, महिला खिलाड़ियों के साथ अभद्रता हुई. मोदी जी, कर्नाटका आ कर किस मुँह से नारी शक्ति की बात करते हैं आप? 13 दिन से ऊपर हो गये हैं देश के सबसे होनहार खिलाड़ी सड़कों पर बैठे हैं - न्याय की आस में. पर यह न्याय की उम्मीद उस सरकार से लगा रहे हैं जिसके अंदर ज़मीर और नैतिकता का अंश भी नहीं है भाजपा के बाहुबली सांसद और गंभीर आक्षेपों से घिरे कुश्ती संघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह ने साफ़तौर से कह दिया “मोदी जी या अमित शाह कह दें तो तुरंत इस्तीफ़ा दे दूँगा” तो अब सवाल यह है कि मोदी जी कह क्यों नहीं रहे? क्या उनको इस देश की बेटियों की फ़िक्र नहीं? आख़िर उनके पास तो पहली शिकायत 2021 में ही पहुँच गई थी, यह ख़ुद विनेश फोगाट ने बताया है. कौन से मुहूर्त का इंतज़ार कर रहे हैं प्रधानमंत्री? अब आगे पढ़िए कैसे कितने चेहरे बेनक़ाब हो गये 🔹पहले तो अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बिना भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ FIR तक दर्ज नहीं की. और अब को घिनौना काम कल रात को किया है - क्या इसको गृह मंत्री अमित शाह का वरदहस्त प्राप्त है? 🔹क्या जिन खिलाड़ियों के साथ फोटो खींचा कर ख़ुद ही सारा श्रेय लेने में PM मोदी ने कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, जिस विनेश फोगाट को ‘मेरे घर की’ कहते हैं - उसके आँसूँ दिखाई नहीं दिये? क्या उनकी एक बार भी टोह ली मोदी जी ने? 🔹TV चैनल पर पुश अप करने से अगर फ़ुरसत मिल गई हो तो खेल कूद के मंत्री अनुराग गोली मारो ठाकुर - इन खिलाड़ियों की भी थोड़ी चिंता कर लेते, आप ही के खोखले आश्वासन पर खिलाड़ियों ने पहला अपना प्रदर्शन ख़त्म किया था 🔹भाजपा की महिला नेत्रियां ख़ासतौर से महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस पूरे मामले पर मौन धारण कर लिया है, वो गला केवल राहुल गांधी के नाम पर ही फाड़ेंगी 🔹राष्ट्रीय महिला आयोग की रेखा वर्मा ने हर बार की तरह आँखें मूँद ली हैं, वो सिर्फ़ विपक्ष के ख़िलाफ़ भाजपाई रंजिश के लिए ही खुलेंगी 🔹राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रियांक कानूनगो - POCSO के आरोप के बावजूद भक्त बने रहेंगे - साधना सिर्फ़ विपक्षियों को निशाना बनाते वक्त टूटेगी 🔹नामी गिरामी पूर्व खिलाड़ी, बड़े बड़े सिनेमा स्टार शायद ‘मन की बात’ सुनने में व्यस्त हैं - तभी बेचारों के पास दो मिनट का वक़्त नहीं है खिलाड़ियों के समर्थन में बोलने का. और कुछ ने तो उल्टा खिलाड़ियों को ही कोस डाला. जीवन में सच के साथ प्रबलता से खड़े रहने वाले ही असली हीरो होते हैं. नीरज चोपड़ा जैसों का क़द कुछ और बढ़ गया. वहीं कुछ बड़े सितारे थोड़े और धूमिल पड़ गए 🔹मीडिया की स्थिति दयनीय है. खिलाड़ियों के पक्ष में तो बोलना ही पड़ेगा - इतना तो जनता को दिखाना पड़ेगा. अब बाहुबली सांसद के ख़िलाफ़ भी बोलना पड़ रहा है - लेकिन मज़ाल है कि प्रधानमंत्री मोदी से उनकी चुप्पी और गृहमंत्री अमित शाह से उनकी पुलिस के बर्ताव पर एक सवाल कर लें 🔹लेकिन सबसे ज़्यादा तरस तो भक्तों पर आता है - अब बेचारों को ठेका दिया गया है इस देश की आन - इन बेटियों को कोसने का, इन लड़कियों को ‘नौ सौ चूहे खाने वाली’ बताने का. व्यक्तिगत आक्षेप लगाये जा रहे हैं. भक्त बनना आसान नहीं. क़ुर्बानी देनी होती है - अपने दिमाग़ और अपनी आत्मा दोनों की. पर मोदी जी, अब कल की घटना के बाद भी कब तक चुप रहिएगा? बृजभूषण शरण सिंह ने तो गेंद आपके पाले में डाल दी है - कब लीजिएगा इस्तीफ़ा या अभी भी सिर्फ़ संरक्षण ही दीजिएगा? कब पूछियेगा अमित शाह से कल रात की घटना के बारे में? क्योंकि यह देश देख रहा है कि अब न्याय और अन्याय के बीच की दहलीज़ पर आप खड़े हैं

Supriya Shrinate

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