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Ana Sayfaya Dön

पसंद नापसंद तो अमीरों के होते हैं साहब , हमें जो मिलता है उसी में खुशी ढूंढ लेते है ।। 🤗🤗🤗

21,556 görüntüleme • 3 yıl önce •via X (Twitter)

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⁉️ #Trump को जो मीडिया संस्थान पसंद नहीं उसकी बुराई उसी के सवाल के जवाब में उसी की माइक पर करते हैं। 🗣️ एबीसी न्यूज रिपोर्टर के सवाल जवाब में ट्रंप ने कहा " एबीसी BBC से भी ख़राब है" 📌लेकिन इस मतभिन्नता का भी अमेरिकी डेमोक्रेसी में वाइडर स्पेस है. इस तरह के सवाल जवाब भी प्रेजीडेंशियल फ्लाइट में होते हैं। और उस मीडिया संस्थान और रिपोर्टर को पब्लिक स्पेस में ट्रंप के फॉलोअर से कोई खतरा उत्पन्न नहीं होता, बल्कि सवाल जवाब का दायरा बना रहता है। ऐसा नहीं कि ट्रंप ने उस चैनल को नापसंद कहा तो उनके फॉलोअर सड़कों पर उस चैनल के रिपोर्टर की लिंचिंग करने लगेगें.

Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार

11,091 görüntüleme • 18 gün önce

यह वीडियो मेरठ का है। उसी मेरठ में सेंट्रल मार्केट के व्यापारी सेंट्रल मार्केट तोड़े जाने के संभावित खतरे के मद्देनज़र धरना पर बैठे हुए थे। अब इस आंटी को सुनिए! यह कह रही है कि पहले हमें सुबह पांच बजे नमाज़ सुनाई देती थी, उनके भौंपू बज जाते थे। अब हमें मंदिर के हनुमान चालीसा सुनाई देते हैं। यानी दूसरे धर्म की इबादत की आवाज़ आए तो भौंपू और अपने धर्म की आरती की आवाज़ आए तो खुशी से लहालोट हो जाना। इतनी दोगलापंथी आपको सिर्फ उसी वर्ग में मिलेगी जिसे 2014 के बाद ही आज़ादी मिली है। यह आंटी कह रही है कि पहले रोडों पर नमाज़ होती थी, जाम लगा रहता था। मालूम नहीं इतना कूपंडूकपन किसी और वर्ग में भी है! रोड पर नमाज़ साल में एक आध बार एक आध घंटे के लिए होती होगी। लेकिन जो दूसरे धार्मिक आयोजन रोड पर होते हैं, उनका क्या? इस वर्ग ने अपने मुकद्दर में कुंठा, नफ़रत और सांप्रदायिकता लिख ली है। धिक्कार है।

Wasim Akram Tyagi

43,624 görüntüleme • 4 ay önce