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पहले दुल्हन रोते हुए विदा होती थी अब जमाना बदल गया है 😍❤️
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रोने का कारण ट्रांसपोर्ट; कम्युनिकेशन और कनेक्टिविटी का नहीं होना था! एक बार दूसरे परिवार में जाने के बाद क्या व्यवहार होगा; इसकी आशंका बनी रहती थी! दुबारा कब मिलना होगा; उसकी अनिश्चितता बनी रहती थी! विज्ञान ने मुश्किल आसान कर दी और आंसू पोंछ दिए! इसलिए तार्किक बनें! 😊

ये मैडम नाचते गाते हंसते मुस्कुराते हुए विदाई ले रही है तो मतलब ये है कि ससुरालियों की खैर नहीं अब वो रोएंगे

यू ही नहीं कोर्ट में मेंटेनेंस रकम की डिमांड दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

ये आईपीएस नहीं बनी सुसराल जा रही है जब वापिस आएगी तब देखना

अब जो बिदा करवा के गया है वह ज़िंदगी भर रोयेगा😎😅

संस्कारों का पतन होता जा रहा है

पुरुषों को नौकरियों में बहुत कम अवसर प्राप्त होंगे उनकी नौकरियां महिलाएं अतिक्रमण कर लेंगी, तब एक और ट्रेंड चलेगा महिलाएं विवाहित होकर अपने ससुराल नहीं जाएंगी, बल्कि ऐसे ही युवक से विवाह करना पसंद करेंगी जो उसी के घर में घर जमाई बनकर उसके साथ गृहस्थी व्यवसाय में हाथ बंटाएं।

ये नौटंकीबाज generation हैं, क्या मिलता है इन गधियों को इतना drama दिखाके 🤢

Bechara ladka aur uske ghar wale Abhi 4 din baad #1CroreAlimony magegea

बदलना चाहिए। इस ब्राह्मणवादी व्यवस्था को तोड़ना चाहिए। जातिवाद व छूआछूत खत्म होना चाहिए। अंतर्जातीय विवाह में 50 लाख रुपए मिलना चाहिए।
