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“फ़ितूर होता है हर उम्र में जुदा जुदा, खिलौने, माशूका, रुतबा औऱ ख़ुदा।”
21,503 次观看 • 3 个月前 •via X (Twitter)
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फितूर होता है हर उम्र में जुदा, खिलौना, माशूका, रुतबा और फिर खुदा!
The Poetic House
209,034 次观看 • 2 年前
0:24
Sensitive content
देखिये जन्मदिन पर भी वहशीपन की पराकाष्ठा का स्तर.. खुशी मनाने का ये कैसा तरीका है...? यदि काफिर का सर तन से जुदा करने का दाव न लगे तो खिलौने का ही सही... ठीक से खड़ा नहीं हुआ जा रहा.... हाथ कांप रहे हैं... कब्र में जाने की उम्र में भी इंसानी खिलौने के सर को धड़ से अलग कर अपना जन्मदिन मनाते इस कट्टर इस्लामिक दोगले जावेद अख्तर को ही देखिए...! ये असुर प्रजाति है ही ऐसी, "सर तन और सर धड़ से जुदा" करना हर मोमीन का सबसे बड़ा ख्वाब होता है, जिसे किसी न किसी तरह पूरा करने में वो जिंदगी भर लगा रहता है... जिनको मुगालता है वो ये जान लें कि... क्या ये पढ़े लिखा नहीं है...? क्या ये संपन्न वर्ग से नहीं है...? क्या बुद्धिजीवी समझे जाने वाले ऐसे लोगों की गिनती देश के एलीट वर्ग में नही होती...? फिर भी इन लोगों को आत्मीय खुशी कैसे कर्मों से मिलती है...? काफ़िर(हिंदू) न सही..., आत्म संतुष्टि के लिए खिलौने का गला रेतकर ही सही, बस धड से जुदा करके ही इन्हें पूर्ण सुख और तृप्ति मिलती है... और इस वहशीपने पर खिलखिलातीं इन सुपर्णखाओं को देखिए...
Yogi Devnath 🇮🇳
145,895 次观看 • 1 年前
