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Ana Sayfaya Dön

फस गया बखेड़ा... प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद पत्रकार जब सवाल पूछ रहे और वहीं सामने ऑनलाइन वेबसाइट पर देखकर चपरासी का फैक्ट-चेक कर दे रहे। अब कितनी फजीहत अपनी कराएगा 10 जनपथ का गुलाम Pawan Khera 🇮🇳? पत्रकारों के सवालों का जवाब देने की बजाय इधर-उधर की बातें कर...

17,348 görüntüleme • 4 ay önce •via X (Twitter)

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दल्लनटॉप जब अलग-अलग तरह की conspiracy theories चलाकर मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma जी के खिलाफ नैरेटिव सेट करने की कोशिश कर रहा था, उसी वक्त India Today NE के एडिटर खुद बता रहे हैं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ ही घंटों के भीतर उनकी टीम ने चपरासी पवन खेड़ा द्वारा दिखाए गए दस्तावेज़ों को जांच की थी तो पासपोर्ट से लेकर कंपनी के कागज़ तक फर्जी थे और कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले हुआ था। जब मीडिया में सब जगह यह साफ था कि दस्तावेज़ फर्जी हैं, तब भी The Lallantop की टीम ने जांच पड़ताल क्यों नहीं की? क्यों बिना फैक्ट चेक के एक परिवार और बच्चों को, जो राजनीति में भी नहीं है, उसे मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। पत्रकारिता का धर्म है फैक्ट चेक कर तथ्यों को सामने लाना, लेकिन यहाँ तो उल्टा ही चल रहा है, फर्जी नैरेटिव को हवा और फिर मुख्यमंत्री जी के भाषा पर ज्ञान देने।

Manish Mishra

52,830 görüntüleme • 4 ay önce

बाहें समेट कर आप कुंभ पहुंच रहे वहां प्रशासन की खामियां बताने के बावजूद आप एक गंजेडी को मलंग बता रहे ,तान्या मित्तल को यूपी और मप्र का ब्रांड एंबेसडर बता कर और इंटरव्यू लेकर धकाधक रीच बटोर रहे, प्रशासन की खामियों से जब घटना घट रही तब मफलर ओढ़ के गिद्ध की तरह वहां रीच बटोर रहे, आप प्रशासन सरकार से सवाल पूछने के बजाए विक्टिम से सवाल बहुत पूछते हैं ताकि जब आंसू गिरे तो रीलें बढ़िया कटेंऔर वायरल हों, राजस्थान चुनाव कवर करते टाइम एक विधायक प्रत्याशी के पीछे पूरी संस्था के माइक कैमरे और रिसोर्सेज लगा दे रहे, नोएडा में घटना घटी तो प्रशासन के अधिकारियों का इंटरव्यू करने के बजाए मजदूर के घर वालों के साथ रो रहे ,UPSC के कई टॉपर थे लेकिन जानबूझ कर 301 वाली आकांक्षा का बिना फैक्ट चेक किए इंटरव्यू ले रहे और उससे ऊल जुलूल सवाल पूछ कर रीच ले रहे, जब हमने फैक्ट चेक किया तो वीडियो डिलीट कर रहे लेकिन ये कह कर पल्ला झाड़ रहे कि न्यूज वेरिफाई करना मीडिया का काम नहीं, फर्जी वायरल चीजों पर ज्ञान पेल कर रीच ले रहे और पत्रकार बनने का ढोंग धतूरा कर रहे, इससे बढ़िया तो खुद को कंटेंट क्रिएटर कहिए, जिस बात के लिए आप चित्रा त्रिपाठी और रुबिका को गरिया रहे थे वही तो आप भी कर रहे, फैक्ट चेक न्यूज वेरिफाई ये मीडिया का काम नहीं तो किसका काम है? अब तो साहब आप UPSC टॉपर्स का इंटरव्यू लेने के बहाने धकाधक कोचिंगों की हिडेन मार्केटिंग भी कर रहे, ये कर सको तो समझो राजा हो, जब फंसो तो इमोशनल और विक्टिम कार्ड खेल दो, दूसरों को अनपढ़ गंवार बोलो और खुद फर्जी खबरों को हवा दो और मंद मंद मुस्काओ, राजा यही तो करता है।

खुरपेंच

64,259 görüntüleme • 5 ay önce

कई लोग ध्यान नहीं दे रहे, लेकिन बीजेपी ने नोटिस किया है — अखिलेश यादव का सियासी स्टाइल अब पूरी तरह बदल चुका है। 2027 की तैयारी में वो हर मोर्चे पर बीजेपी को घेर रहे हैं — हर प्रेस कॉन्फ्रेंस में PDA का ज़िक्र, हर भाषण में विकास की बात। जहां पहले उन पर बाहुबल और परिवारवाद के आरोप लगते थे, वहीं अब वो मर्यादा, समझदारी और स्मार्ट पॉलिटिक्स की मिसाल बन रहे हैं। बीजेपी की अंदरूनी रिपोर्टें भी मान रही हैं — अखिलेश, यूपी में 2027 का गेम बिगाड़ने की पूरी तैयारी में हैं। अगर ये सिलसिला ऐसे ही रहा, तो प्रदेश को राजनीति की भाषा में एक ‘अचंभित कर देने वाला’ कार्यकाल मिल सकता है। #AkhileshYadav #UttarPradesh #PDA #UPElections2027

Vineeta Yadav

116,018 görüntüleme • 1 yıl önce

BIG BREAKING 🚨 चीफ़ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार अपनी आख़िरी प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़ कर भागे पत्रकारों ने ऐसे कंटीले सवाल पूछ लिए के चुनाव आयुक्त के पसीने छूट गए और भयंकर बेइज्जती हुई देश का दुर्भाग्य है कि हमें ऐसे गड़बड़ होटलों के मसीहा और मोदी के चरण चुंबक चुनाव आयुक्त मिले जिन्होंने सवालों के जवाब देने की बजाय शायरी सुना कर हर सवाल से पल्ला झाड़ लिया। ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए, राजीव कुमार ने कहा, “सब सवाल की अहमियत रखते हैं, जवाब तो बनता है. आदतन क़लम-बंद जवाब देते रहे, आज रूबरू भी बनता है. क्या पता कल हो ना हो, आज जवाब तो बनता है.” दूसरी ‘शायरी’ तब आई जब कुमार चुनाव परिणामों के बाद मतपेटी (बैलेट बॉक्स) में धांधली के आरोप लगाने वाले राजनीतिक नेताओं के बारे में बात कर रहे थे। “कर ना सके इकरार तो कोई बात नहीं, मेरी वफ़ा का उनको ऐतबार तो है। शिकायत भले ही उनकी मजबूरी हो, मगर सुनना, सहना, सुलझाना हमारी आदत तो है।” चुनाव आयोग के काम पर शक करने वालों पर अपनी तीसरी ‘शायरी’ सुनाते हुए, राजीव कुमार ने कहा, “आरोपों और इल्ज़ामात का दौर चले, कोई गिला नहीं। झूठ के गुब्बारों को बुलंदी मिले, कोई शिकवा नहीं। हर परिणाम में प्रमाण देते हैं पर वो बिना सबूत शक की नई दुनिया रौनक करते हैं। और शक का इलाज तो हकीम लुकमान के पास भी नहीं।” 👉 क्या इतने बड़े बड़े पत्रकारों के गंभीर सवालों के शायराना जवाब देकर अपनी पीठ थपथपा सकते हैं? इनकी निष्पक्षता हमेशा से सवालों के घेरे में रही है।लोकतंत्र की हत्या करने वालों की लंबी कतार में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार का नाम सबसे आगे है। Election Commission of India #ModiDisasterForIndia #RahulGandhiVoiceOfIndia #FarmersProtest2024

𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣

32,202 görüntüleme • 1 yıl önce

यह जो राहुल गांधी से बातचीत कर रहा है यह बांग्लादेश में तख्तापलट का मास्टरमाइंड मोहम्मद यूनुस है इसे ही अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री बनाया जा रहा है यह बांग्लादेश के श्रमिक फंड में 2.2 मिलियन का घोटाला करके लंदन भाग गया क्योंकि इसके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए गए थे उसके बाद यह लंदन और पेरिस में रहकर अमेरिका और ब्रिटेन के साथ मिलकर रॉकफेलर फाउंडेशन और जॉर्ज सोरेस के साथ मिलकर पाकिस्तान की ISI के साथ 1 साल से प्लानिंग करके बांग्लादेश सरकार का तख्ता पलट कर दिया राहुल गांधी जो कैमरे पर बातचीत कर रहे हैं आप उसे सुनिए कितनी खतरनाक बातचीत कर रहे हैं और यह तो कैमरे के सामने हैं आप कल्पना करिए जब कैमरे के सामने इतनी खतरनाक बातचीत हो रही है फिर पर्दे के पीछे राहुल गांधी और मोहम्मद यूनुस में कितनी खतरनाक बातें हुई होगी लेकिन राहुल गांधी भारत में इसलिए नहीं सफल हो सकते क्योंकि भारत में यह वामपंथी मानसिकता के लोग तख्तापलट नहीं कर सकते

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

311,474 görüntüleme • 2 yıl önce

जब 157वीं रैंक वाला 'सिस्टम' नंबर-1 रैंक वाले देश में प्रेस का सामना करता है, तो क्या होता है, 43 साल बाद ओस्लो (नॉर्वे) की धरती पर विश्वगुरु का डंका बज रहा था, तभी एक पत्रकार हेले लिंग (Helle Lyng) ने विश्व गुरु जी से पूछ लिया- "आप दुनिया के सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं लेते " जवाब में हमेशा की तरह वही चिर-परिचित खामोशी थी और विश्व गुरु बिना जवाब दिए मंच छोड़कर चले गए। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे पहले स्थान पर है और हम 157वें पर, शायद यह फासला सवालों से घबराने के लिए काफी था। लेकिन असली कहानी इसके बाद शुरू हुई! जब इसी पत्रकार ने विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रेस ब्रीफिंग में मानवाधिकारों पर सीधा सवाल दागा, तो हमारे सचिव महोदय (सिबी जॉर्ज) भड़क गए। सवाल मानवाधिकार और प्रेस की आज़ादी का था, लेकिन जवाब में उन्होंने 'योग, शतरंज, ज़ीरो, कोविड वैक्सीन और हज़ारों साल की सभ्यता' का पूरा इतिहास सुना दिया। विदेशी रिपोर्ट्स को उन्होंने 'अज्ञानी NGOs' का कूड़ा बता दिया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि "कब, कैसे और कहाँ जवाब देना है, ये मेरा विशेषाधिकार है।" और इसके बाद जो हुआ, वह हमारी व्यवस्था का पेटेंट तरीका है— जो पत्रकार सिर्फ अपना काम कर रही थी, उन्हें इंटरनेट पर हमारी ट्रोल आर्मी ने 'विदेशी जासूस' और 'चीनी एजेंट' घोषित कर दिया, जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वह सिर्फ एक पत्रकार है और सवाल पूछना उनका कर्तव्य है। क्या विदेशी धरती पर मीडिया को इग्नोर करना और तीखे सवालों के जवाब में 'योग और शतरंज' गिनाना एक 'विश्व गुरु और पांच ट्रिलियन की इकोनॉमी बनने का दावा करने वाले देश' की निशानी है, कूटनीति के नाम पर प्रेस से यह कैसी घबराहट है ‌। #PressFreedom #PressFreedomIndex

Naveen Sharma Sikandrabad

12,799 görüntüleme • 3 ay önce