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बांकीपुर के वार्ड नंबर 19 जहां से भाजपा के उम्मीदवार थे वो वार्ड भी भाजपा हार गई है।

45,871 Aufrufe • vor 1 Monat •via X (Twitter)

22 Kommentare

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Mahtab Ahmad ‍vor 1 Monat

Gazab mehnat kiye aap log ye jeet pure bihar ki hai jai bihar

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𝗠𝘂𝘇𝗮𝗳𝗳𝗮𝗿𝗽𝘂𝗿 𝗥𝗶𝘀𝗶𝗻𝗴vor 1 Monat

.

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Gulshan Singh🇮🇳vor 1 Monat

मेरे हीं कमरे पर @MaithilAnup ने जीत को लेकर और भोजपुरी गाने को लेकर बड़ा बयान दिया था आप लोग देख सकते हैं।

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रोहित कुशवाहाvor 1 Monat

Jai Bihar

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Sumit kumarvor 1 Monat

BJP ko ghamand ho gaya tha bankipur Se Lekar unhone Ek Byan diya tha ki kutta Bhilai ko bhi Khada kar denge To Ham Jeet Jaenge Khair vah chij Apne galat sabit Karva Diya Hai unko BJP ka ghamand todne ke liye ummid hai ki bankepur ki Janata Achcha kam ke liye Prashant Kishor ko jitane ja rhe h

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Ayush Singhvor 1 Monat

Tum jaisa admi se jai bihar bolwa die prashant Kishore, aur kya chahiye. Jai bihar bolte rho.

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Brijendra singh Yadavvor 1 Monat

Well done बिहार

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अखिलvor 1 Monat

Jai Bihar

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Samarthvor 1 Monat

अपडेट दीजिये

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Mukesh Kumarvor 1 Monat

बांकीपुर हीं हार रहे हैं तो वार्ड से क्या लेना देना

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Ashu Kumarvor 1 Monat

Loved this duo commentary..😅

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Anupvor 1 Monat

तब नितिन नवीन जी का इस्तीफा का करवाई शुरू की जाए लेटर टाइप हो रहा है और सम्राट चौधरी का भी

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अयोग्यvor 1 Monat

Sir pk ki strategy aur aap logo ki mehant really appreciable

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Jha Jivor 1 Monat

Ahankar nahi hona chahiye..1 se 100 tabhi ho Sakta hai jab ahankar Na dikhe... Chaliye EVM hake to Na hua Na

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The unknownvor 1 Monat

9th round ke batau

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Priye prakash Singhvor 1 Monat

Jai bihar

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Jha Jivor 1 Monat

Anup Ji definitely credit goes to you.

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Nitin Guptavor 1 Monat

Still NDA CM.

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Sonu Kumar Yadav (SKY) 🇮🇳vor 1 Monat

जय बिहार 🔥 ✌️ ✌️

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Ravi Anandvor 1 Monat

Ab bhajpa wale bole kutta bilai bhi jeet jaega

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Shyamjee Jhavor 1 Monat

इसका मतलब लोग प्रवर्त्तन चाहते थे??

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Sonu Kumar Yadav (SKY) 🇮🇳vor 1 Monat

जय बिहार 🔥 ✌️ 🔥 ✌️

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भाजपा ने निकाय चुनाव को सत्ता के खुले दुरुपयोग और धनबल का खेल बना दिया, जहां निवार्चन आयोग मूकदर्शक और सत्ता तानाशाह बनी हुई है। मालपुरा की महिला प्रत्याशी को सुनिए और समझिए कि आखिर चुनाव जीतने के लिए भाजपा सरकार के मंत्री, विधायक और बड़े नेता क्या-क्या हथकंडे अपना रहे हैं। मालपुरा कोई अकेला मामला नहीं है। पूरे प्रदेश में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों पर दबाव डालकर नामांकन वापस करवाने के गंभीर मामले हैं। जालोर वार्ड नंबर 18, बीदसर वार्ड नंबर 15, बांसवाड़ा वार्ड नंबर 12 और 34, तखतगढ़ वार्ड नंबर 22, आहोर वार्ड नंबर 18, सांभर वार्ड नंबर 12, सुजानगढ़ वार्ड नंबर 41, बाड़ी धोलपुर वार्ड नंबर 23 जैसे प्रदेश में सैकड़ों मामले हैं जहां भाजपा द्वारा सत्ता का दुरुपयोग कर डराने-धमकाने और नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाया। पाली के वार्ड नंबर 1 में भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशी के साथ क्या किया, पूरे प्रदेश ने देखा है। भाजपा को बताना चाहिए क्या वो इस तरह सत्ता और डर के दम पर नगर निकाय चुनाव जीतना चाहती है? मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma जी .. क्या भाजपा ऐसे जीतेगी चुनाव?

Govind Singh Dotasra

22,838 Aufrufe • vor 25 Tagen

निकाय चुनावों ने भाजपा के बड़े-बड़े दिग्गजों की ज़मीन खिसका दी है। मुख्यमंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक एवं उप-मुख्यमंत्रियों, पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों तक सबके गढ़ में भाजपा बुरी तरह सिमट रही है, हालत पतली है। - प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जी के पाली में कांग्रेस 29 वार्ड, जबकि भाजपा 21 वार्ड रहे हैं। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है और मदन राठौड़ जी खुद अपने वार्ड में हार गए। - उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा जी के दूदू-फागी में कांग्रेस 20 वार्ड, भाजपा 17 वार्ड पर रही है। बैरवा जी के यहां दोनों बोर्ड में कांग्रेस बहुमत है। फागी में प्रभुलाल सैनी जी की बेटी भी चुनाव हार गई। - उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी जी के यहां जयपुर में कांग्रेस का वोट शेयर 37.5%, जबकि भाजपा का 36.2 है.. यानी यहां भी कांग्रेस पार्टी भाजपा से आगे है। - पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जी के झालावाड़ में भाजपा की हालत बहुत खराब है। 8 बोर्ड में से सिर्फ 3 में भाजपा को बहुमत है। कांग्रेस का वोट शेयर 45.4%, जबकि भाजपा 40.5% रहा है.. यानी कांग्रेस की 4.9% बढ़त है। - और जयपुर में तो भाजपा की महापौर पद की दावेदार, जो पहले सांसद का चुनाव लड़ चुकीं हैं, और महापौर भी रह चुकी हैं, उन्हें भी जनता ने बुरी तरह नकार दिया। - भाजपा के मंत्रियों का भी यही हाल है... • ओटाराम देवासी जी के क्षेत्र शिवगंज में: कांग्रेस 37 वार्ड जबकि भाजपा 28 वार्ड • गौतम दक जी के क्षेत्र बड़ी सादड़ी में कांग्रेस 25 वार्ड जबकि भाजपा 18 वार्ड • विजय सिंह जी के क्षेत्र कुचामन सिटी में कांग्रेस 17 वार्ड जबकि भाजपा 15 वार्ड • डॉ. मंजू बाघमार जी के क्षेत्र जायल में कांग्रेस 14 वार्ड जबकि भाजपा सिर्फ 3 वार्ड पर सिमट गई। यानी प्रदेश अध्यक्ष हों, उपमुख्यमंत्री हों या मंत्री... जनता ने सबको आईना दिखा दिया। शेखावाटी के झुंझुनूं में कांग्रेस 37+ और सीकर में 26+ सीटों की बढ़त ने भाजपा को पूरी तरह साफ कर दिया। डीग में निर्दलीय और कांग्रेस मिलकर 110 सीटें जबकि भाजपा 65 सीटों पर ही पिछड़ गई। संदेश बिल्कुल साफ है.. सत्ता का घमंड नहीं चलेगा, जनता की आवाज चलेगी। भाजपा की जमीन खिसक चुकी है, अब 2028 की बारी है!

Govind Singh Dotasra

49,407 Aufrufe • vor 15 Tagen

परिसीमन की बेईमानी और सत्ता में होने के बावजूद भाजपा निकाय में अधिकांश जगह पिछड़ती नजर आई। परिसीमन के नाम पर भाजपा सरकार ने ऐसा खेल रचा कि कहीं 4 हजार की आबादी का वार्ड, तो कहीं 35 हजार का वार्ड। कहीं 600 मतदाता तो उसी शहर में 2,900 मतदाताओं का वार्ड! भाजपा ने वोट काटने और सत्ता कब्जाने की साजिश की, फिर भी जनता ने आईना दिखा दिया। - वार्ड 31 की आबादी 13,499, जबकि वार्ड 135 की आबादी 32,272 यानी एक ही नगर निगम में दो वार्डों की आबादी में 2.4 गुना का अंतर! - सवाल सीधा है.. अगर परिसीमन निष्पक्ष था तो इतनी बड़ी असमानता क्यों? - कांग्रेस के मजबूत इलाकों को बड़े-बड़े वार्डों में बांटकर वोटों का प्रभाव कम किया गया और भाजपा के पक्ष वाले इलाकों में छोटे वार्ड बनाकर वोटों को ज्यादा प्रभावी बनाया गया—क्या ये सुनियोजित वोट मैनेजमेंट नहीं था? इस बेईमानी का असर देखिए.. 4,097 वार्डों में से 1,316 में भाजपा की जीत का अंतर 100 से भी कम रहा। इनमें 772 वार्ड ऐसे हैं जहां जीत का अंतर 50 वोट से भी कम रहा। और सबसे चौंकाने वाली बात... 13 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा ने महज 1 वोट के अंतर से जीत हासिल की.. क्या ये सत्ता का खेल नहीं? बावजूद इसके भाजपा का वोट शेयर निकाय चुनाव में लोकसभा चुनाव से करीब 15% कम और विधानसभा चुनाव से करीब 7% कम रहा। ये अंतर अचानक इतना कैसे बदल गया? जयपुर, टोंक और करौली जैसे जिलों में कांग्रेस का वोट शेयर भाजपा से अधिक रहा, फिर भी सीटें भाजपा को ज्यादा मिलीं। वोट कांग्रेस के ज्यादा, लेकिन सीटें भाजपा की ज्यादा.. आखिर ऐसा क्या खेल है?

Govind Singh Dotasra

29,331 Aufrufe • vor 15 Tagen

मुख्यमंत्री जी का माहौल बनाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी, रोड शो और प्रचार की ताकत झोंक दी गई, लेकिन राजस्थान के मतदाताओं ने बता दिया कि मुख्यमंत्री जी की कोई लोकप्रियता नहीं है.. और प्रदेश सिर्फ भाजपा का कुशासन है। जिन 10 नगर निगमों में मुख्यमंत्री जी गए उसमें सिर्फ 4 में भाजपा को बहुमत है... निकाय चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया कि भजनलाल सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता-विरोधी माहौल है। जहां-जहां मुख्यमंत्री ने रोड शो किए, वहां जनता ने भाजपा के प्रदर्शन का हिसाब कर दिया। - अजमेर में 80 सीटों में से कांग्रेस 37, निर्दलीय 11, भाजपा 32 वार्ड में जीती, यानी 36 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है। भाजपा के गढ़ में स्पीकर वासुदेव देवनानी जी और वरिष्ठ नेता अनिता बघेल जी के क्षेत्र में भाजपा को करारी शिकस्त मिली, यहां मुख्यमंत्री ने रोड शो किया था। - पाली में 65 सीटों में से कांग्रेस 29, निर्दलीय 15 और भाजपा 21 सीटों पर जीती। यानी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ जी के गृह जिले में कांग्रेस की सबसे बड़ी जीत हुई। राठौड़ जी अपने वार्ड में भी हार गए। मुख्यमंत्री ने यहां 3 वार्डों में रोड शो किया था। - बीकानेर की 80 सीटों में से कांग्रेस 42, निर्दलीय 10 और भाजपा को 27 सीटें मिली। कांग्रेस का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा, वर्तमान भाजपा मेयर भी चुनाव हार गईं और 15 साल बाद कांग्रेस का बोर्ड बनेगा। - जोधपुर की 100 सीटों में से कांग्रेस 44, निर्दलीय 10, भाजपा 44 सीटों पर रही। वोट शेयर कांग्रेस 42.7% और भाजपा 39.8% है.. यानी कांग्रेस स्पष्ट रूप से आगे है। - जयपुर में भी कांग्रेस का वोट शेयर भाजपा से ज्यादा है। परिणामों को रोककर रखने और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर सवालों के बावजूद अभी तक के आंकड़ों में कांग्रेस को करीब 6 हजार वोट अधिक मिले हैं। - मुख्यमंत्री जी के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में कांग्रेस का वोट शेयर 38.8% और भाजपा का 35.9% यानी कांग्रेस का करीब 3% वोट ज्यादा है। - और सबसे बड़ा झटका भरतपुर में.. जो मुख्यमंत्री जी का गृह जिला है। जहां 65 सीटों में से निर्दलीय 36, भाजपा 20, और कांग्रेस 7 सीटों पर रही है। मुख्यमंत्री के गृह जिले में भाजपा की करारी हार। मुख्यमंत्री के अपने जिले में भाजपा सिर्फ 20 सीटों पर सिमट गई। जहां-जहां मुख्यमंत्री जी गए, वहां-वहां भाजपा को जनता ने आईना दिखाया। जहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का गृह जिला है, वहां भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। ये निकाय चुनाव भजनलाल सरकार के खिलाफ जनता का बड़ा जनादेश है।

Govind Singh Dotasra

24,351 Aufrufe • vor 15 Tagen

निकाय चुनावों में आमतौर पर सत्ताधारी दल को बढ़त मिलती है, लेकिन 2026 के नतीजों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और जनआक्रोश का संकेत दिया है। भाजपाई सत्ता, प्रशासनिक मशीनरी और मुख्यमंत्री के रोड शो की पूरी ताकत लगाने के बावजूद कांग्रेस से वोट शेयर में महज 1% की बढ़त हासिल कर सकी। यानी जिस भाजपा को कभी कांग्रेस पर 8.12% की बढ़त थी, वो 2026 में ये अंतर सिमटकर सिर्फ 1% रह गई है। 2023 विधानसभा के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर 7% और 2024 लोकसभा के मुकाबले 15% नीचे आ गया है। शहरी और कस्बों में जिन्हें भाजपा अपना मजबूत आधार मानती है, ये गिरावट भजनलाल सरकार के ढाई साल के कुशासन और जनविरोधी नीतियों के प्रति जनता की बड़ी नाराजगी का संकेत है। बोर्ड के आंकड़े भी भाजपा की कमजोरी उजागर करते हैं। कुल 309 निकायों में भाजपा को केवल 86 बोर्डों यानी 28.2% में ही स्पष्ट बहुमत मिला। अधिकांश निकायों में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है, और उसे निर्दलीयों के सहारे की जरूरत पड़ेगी। वार्ड परिणाम में भी तस्वीर साफ है। अब तक घोषित करीब 10,063 वार्डों में से 5,966 वार्डों करीब 60% में भाजपा उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सके। ये आंकड़ा बताता है कि शहरी निकायों के बड़े हिस्से में जनता ने भाजपा को समर्थन नहीं दिया। कांग्रेस और भाजपा के बीच वार्डों का अंतर सिर्फ 500 वार्ड का है, लेकिन परिसीमन में हुई मनमानी और वार्डों के स्वरूप में किए गए बदलावों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाए तो कांग्रेस का वास्तविक प्रदर्शन कहीं अधिक मजबूत भाजपा से 1000 से ज्यादा वार्डों में जीत दिखाता है। भाजपा सत्ता के दुरुपयोग, सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल, मुख्यमंत्री के रोड शो और प्रशासनिक दबाव के बावजूद 35.35% वोट शेयर पर सिमट गई और जबकि कांग्रेस 34.31% तक पहुंच गई। ये सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं, भजनलाल सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का राजनीतिक संकेत है। राजस्थान की जनता ने निकाय चुनाव में बता दिया है कि 2028 की तस्वीर अभी से बिल्कुल साफ हो चुकी है।

Govind Singh Dotasra

41,552 Aufrufe • vor 15 Tagen

उत्तराखंड भाजपा कार्यालय में नेताओं का नृत्य प्रदर्शन जारी है, पंचायत में बड़ी जीत बता रहे है, वो और बात है कि आंकड़े कुछ और कहानी सुना रहे है। सवाल ये नहीं है कि भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहा ? सवाल यह है कि भाजपाई दिग्गजों के परिजन पराजित हुए हैं ? चमोली में पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी रजनी भंडारी हार गई। चमोली भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल तो चौथे स्थान पर रहे। लैंसडाउन से भाजपा विधायक महंत दिलीप की पत्नी नीतू रावत जहरीखाल से चुनाव हार गई। सल्ट से भाजपा विधायक महेश जीना का बेटा करण धराशायी हो गया। नैनीताल भाजपा विधायक सरिता आर्य के बेटे रोहित आर्य को करारी शिकस्त मिली। नैनीताल की निवर्तमान जिप अध्यक्ष व भाजपा प्रत्याशी बेला तौलिया भी चुनाव हार गई। Mahendra Bhatt Karan Mahara

Ajit Singh Rathi

44,772 Aufrufe • vor 1 Jahr