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"बीजेपी किसी की सगी नहीं है। बीजेपी खुद बीजेपी की सगी नहीं है।" - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी

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26 条评论

Banshidhar Jaiswal 的头像
Banshidhar Jaiswal6 天前

भैय्याजी कहना क्या चाहते हैं? खुद उनके सिवा कोई नहीं समझ सकता 😛😝

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बाबा ब्रह्मोस6 天前

जो बाप का सगा नही हुआ, वो दूसरों के बारे में बोल रहा है खुद की पोल पट्टी,खुद से ही खोल रहा है।

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आशीष तिवारी 🇮🇳6 天前

इन महाशय के लिये इनके पिता जी ने भी कुछ ऐसा ही कहा था 🤪

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Prof.Sarita Sidh6 天前

अखिलेश यादव आज पूछ रहे हैं कि बीजेपी किसकी सगी है, लेकिन 2016-17 में समाजवादी पार्टी के भीतर पिता-पुत्र और चाचा-भतीजे का संघर्ष खुले मंच तक पहुंच गया था। अखिलेश खेमे ने मुलायम सिंह यादव को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना और शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया। जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने खड़ा किया, उसी की कमान बेटे ने अपने हाथ में ले ली। 1 जनवरी 2017 को अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, जबकि मुलायम सिंह यादव ने उस अधिवेशन को असंवैधानिक बताया था। चुनाव आयोग ने भी अखिलेश खेमे के पक्ष में फैसला दिया। अपने पिता के साथ सत्ता-संघर्ष में कौन-सा आदर्श स्थापित किया था? अक्टूबर 2016 में सपा की बैठक में अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच मंच पर तीखा विवाद हुआ और माइक को लेकर खींचतान तक हुई। परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेद सिर्फ कमरे तक सीमित नहीं रहे, सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए। बीजेपी को ‘किसी की सगी नहीं’ बताने से पहले अपने परिवार की राजनीतिक दरारों का आईना देखिए। जब साजिद राशिदी ने डिंपल यादव के ऊपर अश्लील टिप्पणी की, तब तुम एक पति के रूप में भी उनके सगे न हो सके। वोट की खातिर आँख, कान और मुंह बंद कर लिया। महिला के सम्मान का मुद्दा भी तुम्हारे लिए राजनीतिक सुविधा और वोट-बैंक से ऊपर नहीं था। आज दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले, तब कहां थे? अखिलेश यादव 2017 से लगातार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बीजेपी को संगठनात्मक रिश्तों का पाठ पढ़ाने वाले अखिलेश जी से जनता पूछ सकती है—सपा में नेतृत्व का अगला विकल्प कब और कैसे तय होगा? पार्टी की सर्वोच्च कमान एक ही परिवार और लंबे समय से एक ही नेतृत्व के आसपास केंद्रित रही है। अखिलेश जी, बीजेपी किसकी सगी है इसका फैसला जनता करेगी लेकिन सपा की राजनीति में परिवारवाद का इतिहास जनता के सामने है। दूसरों के रिश्ते गिनाने से पहले अपने राजनीतिक रिश्तों का हिसाब दीजिए। बीजेपी के ‘सगे’ कौन हैं, यह जनता तय करेगी; लेकिन सपा में सत्ता और संगठन किसके आसपास घूमता है, यह पूरा प्रदेश देख रहा है।

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🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳6 天前

अखिलेश यादव आज पूछ रहे हैं कि बीजेपी किसकी सगी है, लेकिन 2016-17 में समाजवादी पार्टी के भीतर पिता-पुत्र और चाचा-भतीजे का संघर्ष खुले मंच तक पहुंच गया था। अखिलेश यादव ने अपने पिता के हाथ से माइक छीन कर उन्हें डांटते और फटकारते हुए मंच से नीचे भगा दिया था अखिलेश खेमे ने मुलायम सिंह यादव को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना और शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया। जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने खड़ा किया, उसी की कमान बेटे ने अपने हाथ में ले ली। 1 जनवरी 2017 को अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, जबकि मुलायम सिंह यादव ने उस अधिवेशन को असंवैधानिक बताया था। चुनाव आयोग ने भी अखिलेश खेमे के पक्ष में फैसला दिया। अपने पिता के साथ सत्ता-संघर्ष में कौन-सा आदर्श स्थापित किया था? अक्टूबर 2016 में सपा की बैठक में अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच मंच पर तीखा विवाद हुआ और माइक को लेकर खींचतान तक हुई। परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेद सिर्फ कमरे तक सीमित नहीं रहे, सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए। बीजेपी को ‘किसी की सगी नहीं’ बताने से पहले अपने परिवार की राजनीतिक दरारों का आईना देखिए। जब साजिद राशिदी ने डिंपल यादव के ऊपर अश्लील टिप्पणी की, तब तुम एक पति के रूप में भी उनके सगे न हो सके। वोट की खातिर आँख, कान और मुंह बंद कर लिया। महिला के सम्मान का मुद्दा भी तुम्हारे लिए राजनीतिक सुविधा और वोट-बैंक से ऊपर नहीं था। आज दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले, तब कहां थे? अखिलेश यादव 2017 से लगातार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बीजेपी को संगठनात्मक रिश्तों का पाठ पढ़ाने वाले अखिलेश जी से जनता पूछ सकती है—सपा में नेतृत्व का अगला विकल्प कब और कैसे तय होगा? पार्टी की सर्वोच्च कमान एक ही परिवार और लंबे समय से एक ही नेतृत्व के आसपास केंद्रित रही है। अखिलेश जी, बीजेपी किसकी सगी है इसका फैसला जनता करेगी—लेकिन सपा की राजनीति में परिवारवाद का इतिहास जनता के सामने है। दूसरों के रिश्ते गिनाने से पहले अपने राजनीतिक रिश्तों का हिसाब दीजिए। बीजेपी के ‘सगे’ कौन हैं, यह जनता तय करेगी; लेकिन सपा में सत्ता और संगठन किसके आसपास घूमता है, यह पूरा प्रदेश देख रहा है।

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रामनिवास भाकर dusu6 天前

जो बाप का सगा नही हुआ, वो दूसरों के बारे में बोल रहा है #अखिलेश_यादव आप को एक सच्चा गरीब किसान जवान मजदूर का हितेषी जमीनी राजनेता मानता था पर आप तो सिर्फ मोकाफ्रस्ट व्यक्ति निकले खुद कुछ करना नहीं सिर्फ bjp को गाली देके सता प्राप्त नहीं कर पाओगे @yadavakhilesh

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Pooja Goswami 🇮🇳6 天前

अखिलेश यादव जी पूछ रहे हैं भाजपा किसकी सगी है? जनता पूछ रही है पहले सपा का हिसाब दीजिए। 2016-17 में पिता-पुत्र और चाचा-भतीजे का सत्ता-संघर्ष सड़क और मंच तक पहुंच गया। 1 जनवरी 2017 को मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर आपको अध्यक्ष चुना गया, जबकि नेताजी ने उस अधिवेशन को ही असंवैधानिक बताया था। जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने खड़ा किया, उसकी कमान परिवार के भीतर ही सत्ता-संघर्ष के जरिए तय हुई। आज भाजपा को रिश्तों का पाठ पढ़ाने से पहले सपा के परिवारवाद का आईना देखिए। भाजपा किसकी सगी है, यह जनता तय करेगी; लेकिन सपा में सत्ता और संगठन किसके इर्द-गिर्द घूमता है, यह पूरा प्रदेश देख रहा है। दूसरों के रिश्ते गिनाने से पहले अपने राजनीतिक रिश्तों का हिसाब दीजिए।

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मिशन विश्व गुरु भारत6 天前

भैया @yadavakhilesh अब आपको यह समझ आ जाना चाहिए की दुनिया गोल है। आप अपनी बात पब्लिकली रखे लेकिन यह बात हमेशा ध्यान मे रखे की सामने वाले जो आपकी बात सुन रहे है, पढ़ रहे है या देख रहे है वो मूर्ख कदापी नही है। उसके हर री एक्शन के लिए आपको तैयार रहना होगा।

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Vinod Kumar6 天前

सपा का सूपड़ा साफ हो गया माफिया गुंडा शासन अब नही कभी भी नही

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sanatan seva samiti6 天前

Samajwadi party sirf ek muslim party h sab jalidar gol topi pehnne wale hai

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Chandresh Parsaniya6 天前

Tu bhi bahot corrupted hai bhai. Ae bhi to bol.

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Aneet Yadav6 天前

बीजेपी उद्योगपतियों की सगी है और जुमलोबाजो की

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Rajnish kumar sinha 'Kashyap'6 天前

ये बात वो बोल रहा है जो अपने बाप का सगा नहीं हुआ।

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Amrit Khurana6 天前

ये नकटेढ़ा बाप के अपमान के बाद पत्नी का अपमान वो भीं मुल्ला से. आम जनता को बचाने वाली शख्ससियत नहीं है टोंटी चोर.

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Pooja Singh6 天前

अखिलेश यादव बीजेपी के रिश्तों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन पहले अपनी पार्टी का इतिहास देख लें। 2016-17 में सपा का पारिवारिक सत्ता-संघर्ष सार्वजनिक हो गया। मुलायम सिंह यादव को अध्यक्ष पद से हटाकर 1 जनवरी 2017 को अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, जबकि मुलायम सिंह ने इस प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया था। शिवपाल यादव के साथ विवाद भी सार्वजनिक मंच तक पहुंचा। आज अखिलेश जी दूसरों को संगठन और रिश्तों की राजनीति का पाठ पढ़ा रहे हैं, लेकिन 2017 से लगातार सपा की सर्वोच्च कमान उन्हीं के हाथ में है। सवाल यह है कि पार्टी में नेतृत्व का अगला विकल्प कब और कैसे तय होगा? बीजेपी किसकी “सगी” है, इसका फैसला जनता करेगी। लेकिन सपा में परिवार और नेतृत्व के इर्द-गिर्द सत्ता का केंद्रीकरण किसी से छिपा नहीं है। दूसरों के रिश्ते गिनाने से पहले अपने राजनीतिक रिश्तों का हिसाब देना ज्यादा जरूरी है।

Deepak Yadav ( पप्पू जमैथा ) 的头像
Deepak Yadav ( पप्पू जमैथा )6 天前

जय श्री अखिलेश भइया

Arun Singh Deoria(बुलडोजर बाबा 2)🚩🚩 的头像
Arun Singh Deoria(बुलडोजर बाबा 2)🚩🚩6 天前

अखिलेश जी, बीजेपी की ‘सगी’ खोजने से पहले सपा के घर का आईना देखिए। जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने खड़ा किया, उसी में पिता-पुत्र और चाचा-भतीजे की लड़ाई आपने पूरे देश के सामने ला दी। जिसे आज परिवारवाद पर बोलने में शर्म नहीं आती, उसकी पार्टी की कमान वर्षों से एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूम रही है। दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने राजनीतिक रिश्तों और सत्ता संघर्ष का हिसाब जनता को दीजिए। बीजेपी किसकी सगी है, फैसला जनता करेगी; लेकिन सपा किस परिवार की सगी है, यह पूरा उत्तर प्रदेश जानता है।

Abhishek Tiwari 的头像
Abhishek Tiwari6 天前

अखिलेश यादव आज पूछ रहे हैं कि बीजेपी किसकी सगी है, लेकिन 2016-17 में समाजवादी पार्टी के भीतर पिता-पुत्र और चाचा-भतीजे का संघर्ष खुले मंच तक पहुंच गया था। अखिलेश खेमे ने मुलायम सिंह यादव को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाकर अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना और शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव पारित किया। जिस पार्टी को मुलायम सिंह यादव ने खड़ा किया, उसी की कमान बेटे ने अपने हाथ में ले ली। 1 जनवरी 2017 को अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया, जबकि मुलायम सिंह यादव ने उस अधिवेशन को असंवैधानिक बताया था। चुनाव आयोग ने भी अखिलेश खेमे के पक्ष में फैसला दिया। अपने पिता के साथ सत्ता-संघर्ष में कौन-सा आदर्श स्थापित किया था? अक्टूबर 2016 में सपा की बैठक में अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच मंच पर तीखा विवाद हुआ और माइक को लेकर खींचतान तक हुई। परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेद सिर्फ कमरे तक सीमित नहीं रहे, सार्वजनिक मंच पर दिखाई दिए। बीजेपी को ‘किसी की सगी नहीं’ बताने से पहले अपने परिवार की राजनीतिक दरारों का आईना देखिए। जब साजिद राशिदी ने डिंपल यादव के ऊपर अश्लील टिप्पणी की, तब तुम एक पति के रूप में भी उनके सगे न हो सके। वोट की खातिर आँख, कान और मुंह बंद कर लिया। महिला के सम्मान का मुद्दा भी तुम्हारे लिए राजनीतिक सुविधा और वोट-बैंक से ऊपर नहीं था। आज दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले, तब कहां थे? अखिलेश यादव 2017 से लगातार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बीजेपी को संगठनात्मक रिश्तों का पाठ पढ़ाने वाले अखिलेश जी से जनता पूछ सकती है—सपा में नेतृत्व का अगला विकल्प कब और कैसे तय होगा? पार्टी की सर्वोच्च कमान एक ही परिवार और लंबे समय से एक ही नेतृत्व के आसपास केंद्रित रही है। अखिलेश जी, बीजेपी किसकी सगी है इसका फैसला जनता करेगी लेकिन सपा की राजनीति में परिवारवाद का इतिहास जनता के सामने है। दूसरों के रिश्ते गिनाने से पहले अपने राजनीतिक रिश्तों का हिसाब दीजिए। बीजेपी के ‘सगे’ कौन हैं, यह जनता तय करेगी; लेकिन सपा में सत्ता और संगठन किसके आसपास घूमता है, यह पूरा प्रदेश देख रहा है।

𝐇𝐚𝐫𝐢𝐨𝐦 𝐃𝐮𝐛𝐞𝐲 的头像
𝐇𝐚𝐫𝐢𝐨𝐦 𝐃𝐮𝐛𝐞𝐲6 天前

भरी सभा में खुले मंच से बाप का अपमान किसने किया था सब जानते हैं चाचा को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के लिए किसने प्रस्ताव लाया? खैर मैं किसे बता रहा हूं..

सनातन ही सत्य है 的头像
सनातन ही सत्य है6 天前

ये बात बो कह रहा जो अपने बाप का सगा नही हुआ भरी सभा मे अपने बाप को बेज्जत कर पार्टी छीन ली जो अपने बाप का सगा ना हुआ बो प्रदेश की जनता का सगा क्या होगा

Sangeeta 的头像
Sangeeta6 天前

बीजेपी को रिश्तों का आईना दिखाने से पहले अखिलेश जी को सपा के परिवारवाद और 2016-17 के सत्ता संघर्ष का इतिहास देखना चाहिए। जनता तय करेगी किसकी राजनीति जनहित की है और किसकी राजनीति परिवार तक सीमित है।

Mahi beuty 的头像
Mahi beuty6 天前

जातिवाद एवं तुष्टिकरण की राजनीति सपा में भी लोग सिर्फ दही बेचने का कार्य करते हैं और मलाई काटने का कार्य तो सपा के कुनबे की राजनीति में पहले से ही है

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Indian6 天前

जो अपने पिता, चाचा का सगा नहीं हुआ वो पार्टी में सगा होने पे ज्ञान दे रहा है😂😂 धन्य है MY वालों

rajnish Tiwari 的头像
rajnish Tiwari6 天前

दूसरों को रिश्तों और नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले सपा को अपने परिवारवाद और पुराने राजनीतिक संघर्षों का आईना देखना चाहिए। भाजपा किसकी सगी है, इसका फैसला जनता करेगी, लेकिन सपा की परिवार-केंद्रित राजनीति किसी से छिपी नहीं है।

The India Project 的头像
The India Project6 天前

ये चुनाव लड़ना चाहता है कि गली मोहल्ले की जनानियो वाली चुगली?

Master Aadmi 的头像
Master Aadmi6 天前

और सपा सिर्फ कतुओ को सगी है

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