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Ana Sayfaya Dön

बड़ा आदमी वही है जो अपने पास बैठे व्यक्ति को छोटा महसूस न होने दे।

421,009 görüntüleme • 3 yıl önce •via X (Twitter)

10 Yorum

Hindi Urdu Poetry profil fotoğrafı
Hindi Urdu Poetry3 yıl önce

कोई भी शख़्स दुनिया में तुम्हें छोटा नज़र न आए तुम अपने सोचने का दायरा इतना बड़ा कर लो

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Jaiky Yadav3 yıl önce

गुड 👍

Rofl Bhaiya 🏹 profil fotoğrafı
Rofl Bhaiya 🏹3 yıl önce

@JaikyYadav16 Bada account holder wahi h jo chote account holder ki help kare 😜 Samaj to gaye hoge 🙃

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Rimpa Sharma3 yıl önce

हम ऐसे बदनसीब समाज का हिस्सा है, जहां सुंदरता का पैमाना "गौरा रंग" है और बुद्धिमत्ती का पैमाना "अंग्रेजी भाषा" है |

विनय कुमार profil fotoğrafı
विनय कुमार3 yıl önce

Yahi to seekhna hota hai, baaki to sab inbuilt hai.

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Amir Subhani3 yıl önce

और मेरे देश मे एक फेकू है फोटो खिचवाने के लिए मंत्री तक को सामने खड़ा नहीं होने देता

आत्मबोध । Aatmbodh profil fotoğrafı
आत्मबोध । Aatmbodh3 yıl önce

फोटो खिंचवाकर उसने ख़ुद को छोटा और गाड़ी व गाड़ीवाले को बड़ा बना दिया। सतह सतह पर आपकी लिखी बात वीडियो से मेल खा सकती है परंतु गहराई में उतरिए असली बात कुछ और है। @Aatmbodh

Abhay Yadav profil fotoğrafı
Abhay Yadav3 yıl önce

"कैमरा मैन जल्दी फोकस करो" इज ऑलवेज एपिक।🤣

Rajeev profil fotoğrafı
Rajeev3 yıl önce

बड़ा आदमी वो है जो एक कैमरा वाले को साथ लेके घूमे और अपनी बडप्पन को तुरंत कैमरे मे कैद करके सोशल मीडिया मे पोस्ट करे

km shivani profil fotoğrafı
km shivani3 yıl önce

Super ❤

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बड़ा व्यक्ति वह नहीं होता जो स्वयं को बड़ा बताने का कोई अवसर न छोड़े. बड़ा व्यक्ति वह होता है जो अपने से छोटों को भी बड़ा बनाने का कोई अवसर न छोड़े. बड़ा व्यक्ति वह नहीं होता जो लोकप्रियता की लालसा व उसकी चकाचौंध में अपनों को ही भूल जाए, बड़ा व्यक्ति वह होता है जो अपनी लोकप्रियता के आलोक से अपने छोटों को भी आलोकित कर दे. हाल में, वायरल हुई इस क्लिप में यदि एक अत्यंत लोकप्रिय कलाकार व प्रतिष्ठित साहित्यकार, अपने से बहुत छोटे रचनाकार का नाम न भी लेते तो क्या फ़र्क़ पड़ना था ? पर उन्होंने, उस रचनाकार की अनुपस्थिति में भी, जिस आत्मीयता व आदर से उसका ज़िक्र किया, वह उस रचनाकार को नहीं, बल्कि स्वयं उन्हें और बड़ा बनाता है. Moral Of The Story : हमारे व्यक्तिगत संबंध कितनी ही प्रगाढ़ता या बेतकल्लुफ़ी से भरे क्यों न हों, पर हम किसी सार्वजनिक मंच पर दूसरों से किस भाव, भावना, भाषा व तहज़ीब से पेश आते हैं, यही बात हमको सही अर्थों में बड़ा और सुसंस्कृत बनाती है. हर हर महादेव. ❤️🙏

Aalok Shrivastav

14,818 görüntüleme • 6 ay önce

रेड कार्पेट से रेड बत्ती तक छटपटाता लोकतंत्र. एक आम आदमी अक्सर जल्दबाज़ी में यह भूल जाता है कि वह “केवल एक मतदाता” है वही मतदाता, जो अपने एक वोट से किसी साधारण व्यक्ति को वीआईपी बना देता है। विडंबना यह है कि वीआईपी शब्द में इतना दंभ भर जाता है कि वही व्यक्ति समय-समय पर आम आदमी को उसकी औकात याद दिलाने लगता है। अब कहा जा रहा है कि एक आम आदमी को अपने घर या किसी ज़रूरी काम के लिए जल्दी है, लेकिन उसी दौरान उन्हीं के वोट से वीआईपी बने किसी नेता का काफिला गुजर रहा है। नतीजतन, आम आदमी छटपटा रहा है, झुंझला रहा है। आम आदमी को यह समझना चाहिए कि बड़े लोगों के पास ट्रैफिक में गंवाने के लिए समय नहीं होता। उन्हें तो अपना कीमती समय बचाकर आप लोगों के विकास में लगाना होता है। ऐसे में यदि आम आदमी अपने हित में कुछ देर का यह दर्द सहन नहीं कर सकता, तो इसमें गलती व्यवस्था की नहीं, बल्कि उसी आम आदमी की मानी जाएगी।

Dinesh Bohra

59,145 görüntüleme • 7 ay önce