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बड़ी खबर= नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्योंग पोर्ट के पास बांध टूटने से भारी तबाही मच गई है ये प्रलय नहीं महाप्रलय के संकेत हैं। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर के पास चीन द्वारा बनाए गए बांध के टूटने से फ़्लैश बाढ़ का और लाखों लोगों के जीवन पर खतरा बढ़ गया...

852,791 次观看 • 22 天前 •via X (Twitter)

39 条评论

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Prince yadav ( हिंदू )22 天前

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुख्य कारण ग्लेशियर/बर्फ-पत्थर के ढहने से बनी अचानक बाढ़ था, न कि चीन के बनाए किसी बांध का टूटना।

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Jeetu Besla22 天前

बांध भी टूटा है ग्लेशियर भी टूटे है दोनों ही कारण है आप फैक्ट् चेक कर सकते है

Prince yadav ( हिंदू ) 的头像
Prince yadav ( हिंदू )21 天前

बांध और ग्लेशियर—दोनों को एक ही बात बताना सही नहीं है। फैक्ट चेक करिए: शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक फ्लैश फ्लड का मुख्य कारण ग्लेशियर और चट्टान का टूटकर नदी में गिरना था। बात तथ्यों पर होनी चाहिए, अफवाहों पर नहीं।

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बाबा टिल्लू22 天前

सब साले, ट्रेडिंग के चक्कर में कुछ भी पोस्ट कर रहे हैं... थोड़ी शरम रखो यार...

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Anurag22 天前

Tum jaise logo ke liye tik tok hi theek tha. Fake videos and post dalte ho. Sharm nahi aati.

Jeetu Besla 的头像
Jeetu Besla22 天前

अच्छे से आंखें खोल कर देखना

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Anurag22 天前

ye video fake hai. Bewakoof aadmi.

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Jeetu Besla22 天前

साबित करना तो या बकता ही रहेगा बीरबल की औलाद

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Anurag22 天前

Pehle likhna seekh theek se.

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Irashad Ahamad22 天前

Fake video

Irashad Ahamad 的头像
Irashad Ahamad21 天前

@grok video sahi h

Grok 的头像
Grok21 天前

@JeetuBesla वीडियो असली तबाही का लग सकता है। 26 अगस्त को नेपाल की तरफ ग्लेशियर ढहने से मडस्लाइड/फ्लैश फ्लड आया, ग्योंग पोर्ट तबाह हुआ। चीन का कोई बनाया बांध नहीं टूटा। मलबे से प्राकृतिक बैरियर लेक बने जो ओवरफ्लो हुए। 30 अगस्त तक मुख्य लेक लगभग खाली हो चुका है।

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xp li21 天前

यह तरह के मूर्ख लोग अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा हैं। वास्तव में कोई मानव‑निर्मित बांध नहीं टूटा है। बड़ी प्राकृतिक आपदा के समय थोड़ी दया दिखानी चाहिए। भले ही मरने वाले लोग आपसे जुड़े न हों, कम‑से‑कम मानवता तो बनाए रखनी चाहिए।

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Ken22 天前

傻逼印度人,你们怎么还不死绝?又臭又脏的东西,天天只会到处拉屎,强奸动物

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A Mishra22 天前

@grok is this news true.

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GUDDU KUMAR22 天前

चीन हमारे देश के अरुणाचल प्रदेश में ऐसे ही फ्लैग डैम बन रहा है लेकिन भारत सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रहा है ऐसा ही विकट स्थिति भारत में भी में आएगी आप देख लीजिएगा.

Fadli Patopang 的头像
Fadli Patopang22 天前

Alhamdulillah,ga usah Islam turun tangan,cukup kuasa Allah buat menghancurkan Nepal,akibat perbuatan kalian menzolimi Islam,akhir Allah jadikan negara kau luluh lantak , selamat menikmati Nepal,Allah tuhan kami yg akan menjaga kami dari kezoliman kalian

白晓霞 (伪百合) 的头像
白晓霞 (伪百合)21 天前

Use your brain. Stop sending an AI video for everything.

Circular Time 的头像
Circular Time21 天前

你不关心死去的人民你只想得到流量一群吃人血馒头的畜牲。

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goj frt21 天前

连事实都不清楚,连到现场都没去过就敢发视频出来造谣

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TYJ21 天前

@grok 他这种造谣X平台不管管吗?

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Warlock21 天前

你个傻逼,别怪中国建设,主要原因全球变暖引起的冰川融化崩塌

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DaemonSet22 天前

5 दिनों से हर 2 घंटे में कोई न कोई ये ब्रेकिंग न्यूज का सेम वीडियो डालता है ।

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Sidd22 天前

Fake news ..

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Javed Mahuabari21 天前

@grok क्या सत्य वीडियो है

牢大我想你了😭 的头像
牢大我想你了😭21 天前

为了流量家里两位都不要了😂

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CappedSoldier22 天前

Pappu followers don't post the fake video

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Jeetu Besla22 天前

fact check kar lijiye bandh bhi tuta h aur glacier se bhi aapda aai h दोनों अलग अलग maitter हैं

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CappedSoldier22 天前

But aapne jo video upload Kiya h wo fake h!

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Mmamuluki21 天前

This no longer looks like a natural disaster, the dam looks like it had been blasted…💥 I hope it’s not a case of depopulation or another war stirring there

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Espartano21 天前

No es un colapso estructural por fatiga de material u otra razon infraestructural, es sabotaje, conspiracion,ataque,traicion, genocidio,exterminio a manos de los anglo-judios y gobiernos prostitutos del sionismo. NO TE SOMETAS A LEYES AMBIENTALISTA QUE TE EXIGEN DESTRUIR GRANJAS

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Anoop21 天前

सनकी चीन जो कर रहा है उससे दुनिया का विनाश तो होगा ही,खुद उसका भी नामों निशान मिट जाएगा।

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Mithun Kumar22 天前

@grok ये कब का घटना है?

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Ashok 🍃🍃🍃22 天前

महा प्रलय आने वाली है

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Kyle Howerton21 天前

I thought maybe the water would overflow the top first but it broke from the bottom all the way to the top I didn't know that was the science system I learned something today

NavinKumarPandey 的头像
NavinKumarPandey22 天前

अत्यंत दुखद। तभी कहा जाता है कि चीन के किसी सामान का कोई भरोसा नही है।

张献忠归来,笑看维尼图纸大业 的头像
张献忠归来,笑看维尼图纸大业21 天前

🤡

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liaojiale00721 天前

💩💩💩💩💩💩💩💩💩💩

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yuanshsh200021 天前

Grok上的解释:该帖由印度国大党成员Jeetu Besla发布,称尼泊尔-西藏边境“ग्योंग पोर्ट”(吉隆口岸)附近中国建造的大坝破裂引发洪灾,造成严重破坏,并附视频展示洪水冲刷道路、车辆和建筑的场景。 实际事件系8月26日左右冰川崩塌引发冰岩雪崩和泥石流,并非人造大坝破裂,导致吉隆口岸被毁,尼泊尔和中国西藏合计数百人死亡、数千人失踪。 帖子将自然地质灾害归因于中国大坝可能存在误导。

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यह एक बेहद दुर्लभ और डरावना वीडियो है.तिब्बत के इसी जिझांग ग्लेशियल लेक के फटने से नेपाल में भीषण बाढ़ आई... Nyalam काउंटी में स्थित जिझांग ग्लेशियल लेक के मोराइन डैम के अचानक टूटने और भीषण जलप्रलय की यह घटना कैमरे में कैद हो गई. चीन ने भारत और नेपाल से सटे तिब्बत बॉर्डर और ऊंचे पर्वतीय इलाकों में रिमोट सेंसिंग स्टेशन,ऑटोमेटेड ड्रोन आदि तक इक के साथ काफी हाई-टेक निगरानी नेटवर्क बनाया हुआ है. झील के पास लगे सेंसर जो जलस्तर बढ़ते ही कंट्रोल रूम और ड्रोन सिस्टम को अलर्ट भेज देते हैं. चीन का Tibet Autonomous Region Authorities और स्थानीय वैज्ञानिक टीम इन झीलों पर लगातार नजर रखती है. वे समय-समय पर ऑटोमेटेड ड्रोन उड़ाकर या झीलों के पास स्थापित कैमरोंऔर ड्रोन स्टेशन से झील का जलस्तर, दरारें और ग्लेशियर पिघलने की स्थिति रिकॉर्ड करते हैं. चीन की एजेंसियों और वैज्ञानिक शोधकर्ताओं को इस बात की खबर पहले से थी कि यह झील High Risk और खतरनाक स्थिति में है. लेकिन चीन की तरफ से नेपाल को Real-time warning बहुत देरी से मिली जिसकी वजह से निचले इलाकों में भारी तबाही हुई. हालांकि दोनों देशों के बीच आपदा डेटा साझा करने के समझौते हैं,लेकिन नेपाली अधिकारियों का कहना है कि झील टूटने के दौरान तुरंत सटीक जानकारी या वॉटर-लेवल अलर्ट नहीं भेजा गया. हालांकि International Centre for Integrated Mountain Development ने पहले से चेतावनी दी गई थी कि यह झील कभी भी फट सकती है. लेकिन इस तरह की "सामान्य चेतावनी" और बाढ़ आने के 1-2 घंटे पहले मिलने वाले "लाइव अर्ली वार्निंग" में फर्क होता है, जो नेपाल को समय पर नहीं मिल सका. पूर्व सूचना के अभाव में नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका नहीं मिला. #nepalflood

Rana Yashwant

316,589 次观看 • 25 天前

यह एक बेहद दुर्लभ और डरावना वीडियो है.तिब्बत के इसी जिझांग ग्लेशियल लेक के फटने से नेपाल में भीषण बाढ़ आई... Nyalam काउंटी में स्थित जिझांग ग्लेशियल लेक के मोराइन डैम के अचानक टूटने और भीषण जलप्रलय की यह घटना कैमरे में कैद हो गई. चीन ने भारत और नेपाल से सटे तिब्बत बॉर्डर और ऊंचे पर्वतीय इलाकों में रिमोट सेंसिंग स्टेशन,ऑटोमेटेड ड्रोन आदि तक इक के साथ काफी हाई-टेक निगरानी नेटवर्क बनाया हुआ है. झील के पास लगे सेंसर जो जलस्तर बढ़ते ही कंट्रोल रूम और ड्रोन सिस्टम को अलर्ट भेज देते हैं. चीन का Tibet Autonomous Region Authorities और स्थानीय वैज्ञानिक टीम इन झीलों पर लगातार नजर रखती है. वे समय-समय पर ऑटोमेटेड ड्रोन उड़ाकर या झीलों के पास स्थापित कैमरोंऔर ड्रोन स्टेशन से झील का जलस्तर, दरारें और ग्लेशियर पिघलने की स्थिति रिकॉर्ड करते हैं. चीन की एजेंसियों और वैज्ञानिक शोधकर्ताओं को इस बात की खबर पहले से थी कि यह झील High Risk और खतरनाक स्थिति में है. लेकिन चीन की तरफ से नेपाल को Real-time warning बहुत देरी से मिली जिसकी वजह से निचले इलाकों में भारी तबाही हुई. हालांकि दोनों देशों के बीच आपदा डेटा साझा करने के समझौते हैं,लेकिन नेपाली अधिकारियों का कहना है कि झील टूटने के दौरान तुरंत सटीक जानकारी या वॉटर-लेवल अलर्ट नहीं भेजा गया. हालांकि International Centre for Integrated Mountain Development ने पहले से चेतावनी दी गई थी कि यह झील कभी भी फट सकती है. लेकिन इस तरह की "सामान्य चेतावनी" और बाढ़ आने के 1-2 घंटे पहले मिलने वाले "लाइव अर्ली वार्निंग" में फर्क होता है, जो नेपाल को समय पर नहीं मिल सका. पूर्व सूचना के अभाव में नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का मौका नहीं मिला.

Ruby Arun रूबी अरुण

1,249,693 次观看 • 25 天前

🚨 अभी आपने जो देखा वह ट्रेलर था... 🚨 असली तबाही अभी रास्ते में है... नेपाल की ओर बढ़ रहा एक और बड़ा जल प्रलय ! तिब्बत में दो नदियों के संगम के पास एक ऐसी भयावह बैरियर लेक बन गई है, जिसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि झील पहले से ओवरफ्लो हो रही है और अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास यह बड़ा बैरियर लेक बना है। पानी का दबाव बढ़ने से इसके फटने का खतरा बेहद गंभीर बताया जा रहा है। अगर यह झील टूटती है तो इसका पानी नेपाल की ओर जिस रफ्तार और तबाही के साथ बढ़ेगा, वह पहले से सामने आई आपदा से भी कहीं भयावह हो सकता है। अभी संकट टला नहीं है। ⚠️ क्यों इतना बड़ा खतरा है ? शोधकर्ताओं के अनुसार हिमालय की करीब 5,000 झीलों में अस्थिर मोरेन मौजूद हैं, जिनसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनदी झील फटने से अचानक बाढ़ का खतरा है। इनमें पूर्वी हिमालय दूसरे क्षेत्रों की तुलना में करीब तीन गुना अधिक संवेदनशील माना जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। लाखों गैलन पानी रोकने वाली प्राकृतिक चट्टान और बर्फ की दीवारें कमजोर हो रही हैं। यही कारण है कि पहाड़ों में बनी ये झीलें धीरे-धीरे टाइम बम बनती जा रही हैं। इसका उदाहरण अक्टूबर 2023 में सिक्किम की दक्षिण ल्होनक झील का टूटना है। तीस्ता घाटी में अचानक आई बाढ़ में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज्यादा लोग लापता हुए थे। 🌊 भारत के लिए भी खतरा कम नहीं है.... हिमालय में लगभग 7,500 ग्लेशियल झीलें हैं। इनमें से 190 को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने उच्च जोखिम वाली झीलों के रूप में चिन्हित किया है। भारत करीब 200 खतरनाक झीलों पर पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित कर रहा है और जोखिम कम करने के लिए कुछ झीलों का जलस्तर घटाया जा रहा है। ISRO और सेना की टीमें दूरदराज के इलाकों में इस तीन साल के मिशन पर काम कर रही हैं। नेपाल भी पहले 2016 में ऐसी आपदा को रोकने के लिए माउंट एवरेस्ट के पास इम्जा त्शो झील का पानी कम कर चुका है। 🇮🇳 भारत के हिमालयी राज्यों में स्थिति... भारत में 669 ग्लेशियल झीलें पहचानी गई हैं, जिनमें से 88 पर सीधे तौर पर फटने का खतरा बताया गया है। 🔴 जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - 62 खतरनाक झीलें भारत में सबसे ज्यादा जोखिम यहीं बताया गया है। कश्मीर घाटी की पांच झीलों को Very High Susceptibility श्रेणी में रखा गया है, जिनमें शोपियां की भागसर झील प्रमुख है। किश्तवाड़ में अकेले 197 ग्लेशियल झीलें हैं, जिनसे चिनाब नदी बेसिन और पकल डुल तथा कीरू जैसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर खतरा है। 🔴 सिक्किम - 17 खतरनाक झीलें पूर्वी हिमालय का यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। अक्टूबर 2023 में दक्षिण ल्होनक झील के टूटने से तीस्ता नदी में भयंकर तबाही हुई थी। क्षेत्र की कई अन्य झीलें भी लगातार निगरानी में हैं। 🔴 उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे क्षेत्र पहले भी ऐसी आपदाओं की मार झेल चुके हैं। 2013 की केदारनाथ आपदा में चोराबाड़ी झील और 2021 की चमोली आपदा इसके उदाहरण हैं। नंदा देवी ग्लेशियर के आसपास के क्षेत्र भी अत्यधिक संवेदनशील माने जाते हैं। हिमाचल के लाहौल-स्पीति और किन्नौर में सतलुज और चिनाब के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बनी झीलें लगातार खतरा बनी हुई हैं। 🔴 अरुणाचल प्रदेश - 12 खतरनाक झीलें तवांग और ऊपरी सुबनसिरी जिलों में तिब्बत से आने वाली नदियों के मुहाने पर भी खतरा बना हुआ है। और सबसे बड़ी चिंता यह है कि ग्लेशियल झीलें पहाड़ों में फटती हैं, लेकिन उनका मलबे से भरा पानी नीचे मैदानों तक पहुंचकर बड़े पैमाने पर बाढ़ ला सकता है। आज तिब्बत में बनी इस नई झील को सिर्फ नेपाल का संकट समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हिमालय में एक झील टूटती है तो उसका असर सीमाओं को नहीं मानता। 🚨 अगले तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। ईश्वर नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले सभी लोगों की रक्षा करे। 🙏

Mr. Mishra

158,987 次观看 • 24 天前

बिहार प्रशासन और उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिला प्रशासन को अभिलंब तिब्बत से बहकर आई इन विशाल कैटफिश मछलियों के इंसानों के खाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए यह विशाल कैटफिश तिब्बत की झीलों जलधाराओं तलहटी में रहती है और यह मुर्दा खाती हैं तिब्बत के बहुत से एरिया में लोग अंतिम संस्कार के लिए अपने परिजनों के शव को झीलों में डाल देते हैं और उन झीलों की यह विशाल कैटफिश इंसानी मांस खाकर उन्हें नष्ट कर देती है ये कई कुंतल की हो जाती हैं झील टूटने से यह विशाल कैटफिश उत्तर प्रदेश के कुशीनगर तथा बिहार के इलाकों में पहुंची है और मछुआरे यह सोच रहे हैं की बड़ी मछली मिली है और ऐसे में कई वीडियो देख रहा हूं जिसमें नावो में भर भर के विशाल कैटफिश मछुआरे उठा रहे हैं उसमें से यह मछलियां कोई पांच क्विंटल की है तो कोई 10 क्विंटल की है इन मछलियों को खाने से इंसानों को गंभीर बीमारी गंभीर संक्रमण हो सकता है कृपया इन मछलियों को ना खाएं

🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳

37,073 次观看 • 21 天前