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Ana Sayfaya Dön

बड़े बनना है तो पद से नहीं, व्यवहार से बनो सम्मान देना सीखो, सम्मान मिलना अपने आप शुरू हो जाएगा। 🙌🏻❤️ Respect You for all Love & Support 😇 @themridul_ #themridul #mridul #wesupportmridul #trending #trendingreels #biggboss #biggbossmridul #mridulisboss

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वीडियो में पाकिस्तान के तीन मुस्लिम नौजवान बैठे हैं। रिपोर्टर उनसे पूछता है—क्या आप भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” सुना सकते हैं? ₹10,000 का इनाम रखा जाता है। दो लड़के कहते हैं—हमें नहीं आता। तीसरा कहता है—“मुझे आता है, लेकिन पक्का नहीं… कच्चा-पक्का आता है।” फिर जो हुआ, वह दिल छू लेने वाला है। तीनों सम्मान से खड़े होते हैं और वह नौजवान पूरे आत्मविश्वास के साथ “जन गण मन” गा देता है। ❤️🇮🇳 यह सिर्फ एक राष्ट्रगान गाने की बात नहीं है। यह उस बात की खूबसूरत मिसाल है कि सम्मान की कोई सीमा, धर्म या मजहब नहीं होता। भारत में हम भी पाकिस्तान के राष्ट्रगान का सम्मान करें, और पाकिस्तान में कोई भारतीय राष्ट्रगान का सम्मान करे—तो शायद यही वह छोटी-सी शुरुआत है, जिससे दोनों देशों के आम लोगों के बीच नफ़रत की जगह इंसानियत पैदा हो सकती है। लेकिन एक सवाल जरूर है— अगर पाकिस्तान का कोई मुस्लिम नौजवान खुलेआम भारतीय राष्ट्रगान “जन गण मन” गाए, तो उसके अपने देश में उसकी प्रतिक्रिया कैसी होगी? क्या उसे भी इसी तरह सम्मान मिलेगा? या राष्ट्रवाद के नाम पर उसे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया जाएगा? देश अलग हो सकते हैं, सरहदें अलग हो सकती हैं… लेकिन सम्मान और इंसानियत की कोई सरहद नहीं होती। ❤️ इस नौजवान को सलाम। 👏 #JanaGanaMana #IndiaPakistan #Humanity #Respect #Peace

Rajak Shaikh

86,861 görüntüleme • 1 ay önce

भाजपा सरकार के मंत्रियों का ये ‘मानमर्दन’ सुनने में कटु लगे जैसे ‘मुख्य-मुख’ के वचन मुख्यमंत्री जी पता करके बताएं जनमानस में आक्रोश का विषय बना ये वीडियो AI जेनरेटेड है या सत्य है। अगर ये सत्य है तो जवाब आपको ही देना होगा क्योंकि मंत्रियों का चयन तो आपने ही किया है। ये आपको चुनौती है मंत्रियों को नहीं, लेकिन आपके इन विशेष मंत्रियों के नामों की भी पर्ची अगर ऊपर से ही आई थी तो आप ये वीडियो ऊपर भी भेज सकते हैं। बच नहीं सकते, हर हाल में जवाब तो देना ही पड़ेगा क्योंकि ये दो समाज के मान-सम्मान का सवाल बन गया है। अगर कहनेवालों ने किसी एक व्यक्ति विशेष का नाम लिया होता तो बाद दूसरी थी परंतु एक ‘समाज विशेष’ और एक ‘दल विशेष’ का नाम लेकर दो बड़े समाजों के मान को सरेआम ठेस पहुँचायी गयी है। इन दलों के नेताओं को भी आगे आकर बोलना चाहिए। अगर उन दोनों समाज के मंत्री बने नेताओं ने कुछ नहीं किया तो मान लिया जाएगा कि उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर अपना मंत्री पद ज़्यादा प्यारा है, अपने समाज का मान-सम्मान नहीं। घोर आपत्तिजनक व निंदनीय!

Akhilesh Yadav

124,650 görüntüleme • 3 ay önce

कार पर खड़े होकर बोल रहे हैं या स्टूल पर? जनता द्वारा हराये जा चुके जो लोग, अपने चुनाव का आँकलन नहीं कर पाये, वो न ही बोलें तो उनका रहा-सहा मान-सम्मान बचा रहेगा। कृपा-दृष्टि से मर्सी पोस्टिंग पाये लोग जब बिन माँगे अपनी राय देते हैं तो उपहास का पात्र बन जाते हैं। अगर इतने ही बड़े राजनीतिक विशेषज्ञ हैं तो ख़ुद ही वो जगह बता दें जहाँ ये पीडीए की ताक़त देखने ख़ुद आना चाहेंगे, ये वचन है कि हम उन्हें ससम्मान कुर्सी पर बैठाएंगे। अगर रिश्ता अच्छा हो और इच्छा हो तो उनसे भी पूछ लें (अगर कभी उनसे मिलना होता हो तो) जो न तो अपने से बड़ों को नमस्कार करते हैं, न इनके नमस्कार का जवाब देते हैं। उनको भी हम प्लास्टिक की कुर्सी पर कहीं पीछे नहीं बल्कि सम्मान सहित आगे बैठाएँगे। आज के लिए इतना पर्याप्त, पोस्ट समाप्त!

Akhilesh Yadav

83,790 görüntüleme • 5 ay önce

पत्रकार- कोर्ट ने UGC मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया है आपके पक्ष में चीजें आ ही नहीं रही हैं चन्द्रशेखर आजाद- न्यायपालिका का सम्मान करना पड़ेगा, उम्मीद है न्यायपालिका कमजोर वर्गों के हितों का भी सम्मान रखेगी पत्रकार- समाज बंट जाएगा इस एक्ट से जो हिंदू एकजुट हो रहे थे? चन्द्रशेखर आजाद- मंडल कमीशन में भी यही कहा जा रहा था पर वो पिछड़े वर्ग के सशक्तिकरण के लिए था। अभी तो लड़ाई शुरू हुई है, अभी तो जनगणना होगी। हम तो पिछड़े वर्ग के लिए 27% से अलग 15% आरक्षण की मांग भी कर रहे हैं कुल मिलाकर Chandra Shekhar Aazad चन्द्रशेखर आजाद अपने विचारों व दृष्टिकोण के प्रति अडिग हैं और वो वहां से हिलने वाले नहीं हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि बहुजन समाज के अधिकारों की लड़ाई हर कीमत पर लड़ी जाएगी....!!

Priyanshu Kumar

18,151 görüntüleme • 6 ay önce

आम आदमी पार्टी को देखकर लगता है “देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई, इंसान कितना बदल गया।” अन्ना आंदोलन के मंच से केजरीवाल जी कहते थे आरोप लगते ही इस्तीफ़ा देना चाहिए, जाँच बाद में होनी चाहिए आज हाल ये है कि खुद जेल जाने के बाद भी पद पर टिके रहे। मनीष सिसोदिया से इस्तीफ़ा दिलवा दिया, लेकिन वही कसौटी खुद पर लागू नहीं की। जनलोकपाल, राइट टू रिजेक्ट और राइट टू रिकॉल की बातें करने वाले आज सत्ता से चिपके बैठे हैं। और कहते हैं हम सरकार गिरा नहीं पाए, 70 में से 63 सीटों वाला बहुमत अगर डर जाए, तो समझिए नींव कितनी खोखली थी। पप्पू यादव जी की बात में भी सच्चाई झलकती है जिसने कुर्सी एक बार छोड़ी, वह दुबारा छोड़ने की हिम्मत नहीं करता। यही डर है कि अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा ही नहीं है। लालू प्रसाद यादव जी ने पत्नी राबड़ी देवी पर तो विश्वास किया, पर किसी कार्यकर्ता पर नहीं। हमारे यहाँ आडवाणी जी ने आरोप लगते ही इस्तीफ़ा दिया और फिर सम्मान के साथ लौटे। यदुरप्पा जी ने भी इस्तीफ़ा देकर जनता से दुबारा विश्वास पाया, यानी डर नहीं, जवाबदेही हमारी राजनीति की परंपरा है। AAP में न लोकतंत्र है, न पार्टी संविधान का सम्मान। सिर्फ़ सत्ता की कुर्सी से चिपके रहने की राजनीति है। “बड़े मासूम लगते थे मेरे सनम, क्या से क्या हो गए देखते-देखते।”

Dr. Sudhanshu Trivedi

32,451 görüntüleme • 1 yıl önce

आदित्यनाथ जी खुद संत होते तो इस बात को समझते, वो तो भगवा कपड़े में हठी राजनैतिक व्यक्ति हैं, विशुद्ध सत्ता लोभी हैं, अपराधी और भ्रष्टाचारी संरक्षक हैं। आदित्यनाथ जी को संत समाज की बातें भला कहां से समझ में आएंगी? उन्हें तो कोडीन माफिया कैसे बचाना है, भ्रष्टाचार करके कैसे पैसा कमाना है, अपराधियों से अपराध करवाकर उन्हें कैसे बचाना है, बलात्कारियों को कैसे संरक्षण देना है, जो अपने खिलाफ सच्ची बात करे उसे पुलिस से उठवा लेना है, बुलडोजर से घर गिरा देना है, यही सब तो बस आता है, यही वे करते आए हैं, यही वे संत समाज के साथ भी कर रहे हैं " पुलिसिया व्यवहार" लेकिन ये पुलिसिया व्यवहार कब तक? सिर्फ सत्ता है जब तक? सत्ता तो अस्थाई है, लेकिन किए हुए कर्म तो इतिहास बन गए हैं, इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गए हैं, व्यक्ति के बाद उसके व्यवहार को ही याद रखा जाता है, ये भी याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी अपना दौर भूल गए हैं शायद? जब पुलिस के डर से रो पड़े थे, पुलिस किसी की सगी नहीं होती, आज तुम्हारी कल किसी और की। आज पूरा देश मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जी के इस व्यवहार को देख रहा है, जनता की लाठी में आवाज नहीं होती, बस या तो जनता बहुमत से दूर कर देती है या सत्ता छीन लेती है, जनता बस चुपचाप ये कर देती है, किस बात का घमंड? किस बात का अहंकार? ऐसे चलाएंगे आप सरकार?

Samajwadi Party Media Cell

15,684 görüntüleme • 8 ay önce

आइए, आपको दिल्ली की एक ऐसी घटना बताते हैं जो हमें सिर्फ ताकत नहीं, बल्कि इंसानियत और संस्कार की ताकत का मतलब समझाती है। भाई साहब अपने आपको ताकतवर समझ रहे थे 2 मिनट में रिक्शा वाले ने इनको सुधार दिया वीडियो में दिखाई देता है कि एक गरीब रिक्शावाला एक व्यक्ति को अपनी मेहनत से उसकी मंजिल तक पहुंचाता है। जब वह अपनी मेहनत का किराया मांगता है तो बात कहासुनी तक पहुंच जाती है और देखते ही देखते मामला हाथापाई में बदल जाता है। शायद सामने वाले को अपनी शारीरिक ताकत पर बहुत भरोसा था। शरीर बनाया जा सकता है, मांसपेशियां मजबूत की जा सकती हैं, लेकिन असली ताकत इंसान के आचरण, व्यवहार और संस्कारों में होती है। जिस रिक्शावाले को कमजोर समझा गया, वह भी आखिर मेहनत करने वाला इंसान है। दिन-रात सड़कों पर पसीना बहाकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता है। उसकी कमाई भले कम हो, लेकिन वह अपनी मेहनत की कमाई से जीता है और उसी मेहनत का हक मांगता है। इस घटना से एक बात जरूर सीखनी चाहिए पैसा आपको बड़ा बना सकता है लेकिन सम्मान आपको आपके व्यवहार से मिलता है। गरीबी इंसान को परिस्थितियों से मजबूर कर सकती है, लेकिन उसकी इज्जत नहीं छीन सकती। गरीब आदमी भी सम्मान का हकदार है। उसके साथ अच्छा व्यवहार करना कोई एहसान नहीं, बल्कि इंसान होने की पहचान है। इसलिए चाहे आप जिंदगी में कितने भी बड़े और ताकतवर क्यों न बन जाएं, अपने से कमजोर या गरीब समझे जाने वाले व्यक्ति का अपमान मत कीजिए। क्योंकि शरीर की ताकत कुछ मिनटों की होती है, लेकिन अच्छे आचरण की पहचान जिंदगी भर रहती है। मेरी नजर में इस वीडियो की सबसे बड़ी सीख यही है गरीब की मजबूरी को उसकी कमजोरी मत समझिए। वह भी मेहनत करता है, सपने देखता है और सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार रखता है। आप इस घटना को देखकर क्या सीखते हैं?

Shivam Samajvadi

214,089 görüntüleme • 1 ay önce

जया बच्चन जी आप निस्संदेह भारतीय सिनेमा की बेहतरीन अदाकाराओं में से एक रही है…अभिनय, संवाद, अभिव्यक्ति… सब कुछ लाजवाब लेकिन दिक्कत ये है कि कैमरे के बाहर आते ही आपका व्यवहार अक्सर अभिनय जैसा उम्दा नहीं रह जाता। आप कभी-कभी पत्रकारों के सामने नाराज़गी दिखाते-दिखाते यह भूल जाती हैं कि पत्रकार भी अपना काम कर रहे होते हैं, और वह भी उतनी ही मेहनत से जितनी आप अपनी फिल्मों के दिनों में करती थीं। पत्रकारों को “गंदी पैंट पहनने वाले” कह देना… यही बताता है कि समस्या दूसरों की पैंट में नहीं, बल्कि आपके नज़रिये में गंदगी खोजने की आदत में है। मज़े की बात यह है कि आप गर्व से बताती हैं कि आपके पिता जर्नलिस्ट थे। लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने रिपोर्टिंग करते हुए, सफ़र करते हुए, ग्राउंड पर काम करते हुए न जाने कितनी बार उनकी पैंट धूल-मिट्टी में सनी होंगी। लेकिन तब किसी ने उनके हुनर को कपड़ों से नहीं तोला। उनके शब्दों को पढ़ा गया, उनके काम को समझा गया, उनके व्यक्तित्व को सम्मान दिया । आपके पिता ने पत्रकारिता की मिट्टी में रहकर काम किया… और आपने पत्रकारों को उसी मिट्टी में काम करने के लिए अपमानित कर दिया। यह विडंबना नहीं तो और क्या है? जया जी, अभिनय की चमक हमेशा बनी रहती है, लेकिन व्यवहार की छाया उससे भी लंबी होती है। आप कभी पर्दे की मां बनीं, कभी नायिका बनीं, लेकिन असल जिंदगी में पत्रकारों के प्रति आपका व्यवहार देखकर यही लगता है कि शायद अब आपको अपने रियल-लाइफ़ रोल पर थोड़ा रिहर्सल कर लेना चाहिए। क्योंकि सम्मान दिए जाने से मिलता है छींटाकशी से नहीं। आशुतोष त्रिपाठी #JayaBachchan #Paparazzi #photographer #Bollywood #bollywoodnews

Ashutosh Tripathi

34,192 görüntüleme • 9 ay önce

कृति सेनन के मचे बवाल के तुरंत बाद, सेलिना जेटली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है l मुंबई में आयोजित एक रक्षाबंधन कार्यक्रम 'रक्षा एक पहचान' में सेलिना जेटली शामिल हुईं, इस मंच पर जब भाई-बहन के रिश्ते की बात आई, तो सेलिना अपने भाई को याद करके मंच पर ही भावुक हो गई, फिर उन्होंने अपने मुँहबोले भाई को राखी बांधी, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है, लेकिन इंटरनेट के एक बड़े वर्ग का ध्यान उनके आंसुओं से ज्यादा उनके उनके 'डीप-नेक गाउन' पर चला गया, कुछ लोगों को उनके 'इमोशनल मोमेंट' और 'बोल्ड कपड़ों' के बीच का तालमेल ठीक नहीं लगा, कुछ लोगों का कहना है, क्या वेस्टर्न कपड़े पहनने से किसी बहन का अपने भाई के लिए प्यार कम हो जाता है, आप लोग क्या सोचते है, कपड़ों से ऊपर उठकर किसी की भावनाओं और उसकी कला का सम्मान किया जाना चाहिए l
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कृति सेनन के मचे बवाल के तुरंत बाद, सेलिना जेटली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है l मुंबई में आयोजित एक रक्षाबंधन कार्यक्रम 'रक्षा एक पहचान' में सेलिना जेटली शामिल हुईं, इस मंच पर जब भाई-बहन के रिश्ते की बात आई, तो सेलिना अपने भाई को याद करके मंच पर ही भावुक हो गई, फिर उन्होंने अपने मुँहबोले भाई को राखी बांधी, जिसका वीडियो वायरल हो रहा है, लेकिन इंटरनेट के एक बड़े वर्ग का ध्यान उनके आंसुओं से ज्यादा उनके उनके 'डीप-नेक गाउन' पर चला गया, कुछ लोगों को उनके 'इमोशनल मोमेंट' और 'बोल्ड कपड़ों' के बीच का तालमेल ठीक नहीं लगा, कुछ लोगों का कहना है, क्या वेस्टर्न कपड़े पहनने से किसी बहन का अपने भाई के लिए प्यार कम हो जाता है, आप लोग क्या सोचते है, कपड़ों से ऊपर उठकर किसी की भावनाओं और उसकी कला का सम्मान किया जाना चाहिए l

Vishal M. Yadav

110,791 görüntüleme • 27 gün önce

आज पीसीसी मुख्यालय पर मीडिया से बातचीत 'वोट चोर गद्दी छोड़ ' हर गांव तक बात पहुंच गई, हर गांव तक बात पहुंच गई कि भई वोटों की चोरी हो रही है इसलिए चुनाव जीते जा रहे हैं, ये बहुत खतरनाक है, डेमोक्रेसी के लिए खतरनाक है, डेमोक्रेसी में सबसे पहला काम होता है चुनाव आयोग का वो निष्पक्ष चुनाव करवाए ,कोई पार्टी जीते कोई उम्मीदवार जीते अलग बात है, फिर जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, राहुल गांधी जी ने एक क्वेश्चन रेज़ किया कि भई आप हमें मशीन रीडेबल दे नहीं रहे हो आप वर्ना हम फटाफट इस काम को कर सकते थे तो आप जो है हमें मजबूरी में छह महीने लगे, छह महीने में हमने नतीजे पर पहुंचे हम लोग, लगभग एक लाख फर्जी वोट निकले अगर इलेक्शन कमीशन जांच करवा देता उस वक्त, इलेक्शन कमीशन जांच करवा देता उस वक्त तो उसमें कितने वोट कहां गड़बड़ हुई कहां नहीं हुई स्पष्ट हो जाता, और कायदा ये होता आजतक आजादी के वक्त में जब आपको मालूम है हिंदुस्तान पाकिस्तान बना था तब कितने लोग हिन्दुस्तान आए होंगे कितने लोग पाकिस्तान गए होंगे तब भी इलेक्शन कमीशन ने चुनाव करवा दिए जबकि शिक्षा नहीं थी वक्त में, लोग चिन्ह को नहीं समझते थे पढ़ नहीं सकते उस से लगाकर आज तक का इतिहास है,चुनाव लगातार हो रहे हैं, चुनाव आयोग के जो चेयरमैन हैं न और उनके जो मेंबर हैं उनकी गलतियों से उनके व्यवहार से ये स्थिति बनी है देश के अंदर और ये इतना सीरियस प्वाइंट बन गया ,पहले शक था ईवीएम पर देशवासियों को क्योंकि अब अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी जापान सब जगह वोट बैलेट से होता है, पहले वहां भी मशीनें थी वो शक था ही पहले से ही, सुप्रीम कोर्ट तक लोग गए तो उन्होंने कहा वीवीपेट लगा दो, ये चल रहा था अब ये जो नया जो सर्वे हुआ है इधर आप दो महीने पहले चुनाव के आप एसआईआर करवा रहे हो ये डेढ़ साल पहले होता अगर आपको इंटेंसिव ये करना था आपको ये सर्वे वोटर लिस्ट का कम से कम एक डेढ़ साल पहले शुरू होता इतना बड़ा काम ये है, आपने दो महीने पहले डेढ़ महीने पहले ये शुरू कर दिया असंभव है कोई गलती बताए भी, उसकी अपील भी होती है, प्रोसेस पूरा होता है उसमें आप वो काम कर नहीं सकते,कब तो अपील करोगे, कब क्या करोगे कुछ पता नहीं पड़ता है ऐसी स्थिति में चलता है तो ऐसी स्थिति जब हम लोग इश्यू प्रारंभ हुआ है तो उसके अंदर तमाम तरह की गड़बड़ियां पैदा हुईं शक शुभा पैदा हुआ पूरे देश के अंदर और पता नहीं एसआईआर में क्या क्या करेंगे 65 लाख वोट काट दिए हैं कब तो उनकी अपील हो, कब अपील में सुनवाई हो तो डेढ़ महीने पहले चुनाव में एसआईआर करवाते हैं क्या , ये बेवकूफियों से सब कुछ हो रहा है इसलिए राहुल गांधी जी ने खड़गे साहब ने कहा है प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को आप तमाम लोगों से मीटिंग करो और आप सबसे साइन करवाओ कि वोट की चोरी किस प्रकार हो रही है और अगर वोट की चोरी होगी निष्पक्ष चुनाव कभी हो नहीं पाएंगे , निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे तो डेमोक्रेसी को खतरा है देश के अंदर मुख्य बात ये है और डेमोक्रेसी को बचाना हर नागरिक का अधिकार है क्योंकि अधिकार नहीं है कर्तव्य है, अगर वोट चोरी नहीं रुकी निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए चुनाव आयोग के तो आप बताइए वोट का अधिकार चला जाएगा। आम आदमी की जिम्मेदारी है अपने वोट के अधिकार को बचाने के लिए इस अभियान में हिस्सेदारी करे और वोट चोरी जो एक कैंपेन चल रहा है वो कामयाब करे।

Ashok Gehlot

13,084 görüntüleme • 1 yıl önce

आज वोट चोरी, बिहार चुनाव के मुद्दों पर मीडिया से बातचीत की : वोट चोरी का मतलब वोट चोरी एक तरह से नहीं होती है, अगर मान लीजिए आप जो है वोटर लिस्ट में बेइमानी करते हो वो भी चोरी है। अगर आप फाउल खेल के, प्रॉसेस नहीं करके आप एकतरफा सपोर्ट करते हो वो भी वोट चोरी है, अगर आप चुनाव करवा रहे हो और काउंटिंग में बेइमानी करो वो भी वोट चोरी है तो हमें जो है इस प्रकार से सोचना पड़ेगा वोट चोरी का मतलब क्या है,किसी भी रूप में निष्पक्ष चुनाव होने चाहिए, निष्पक्ष चुनाव, जिसके अंदर चुनाव आयोग नहीं देखे आगे पार्टी कौन है किसको फायदा मिल रहा है किसको नुकसान हो रहा है वो नहीं देखे, ईमानदारी के साथ में वो अपना काम करे, निष्पक्ष हो के चुनाव करवाए, वोटर लिस्ट भी ट्रांसपेरेंट हो, प्रक्रिया ट्रांसपेरेंट हो, पोलिंग ट्रांसपेरेंट हो, बेइमानी वहां पर नहीं हो, ईवीएम में छेड़छाड़ नहीं हो ये तमाम बातें आती हैं वोट चोरी के अंदर मतलब राहुल गांधी का मतलब ये है कि भई आप इसमें बेइमानी कैसे करने लग गए, हरियाणा के अंदर क्या हुआ आप सब को मालूम है और महाराष्ट्र ने तो इनकी खुद की पोल खोल दी पूरे देश ने देखा ये क्या हो गया क्योंकि हार जीत का देखो अंतर का फर्क पड़ता है , हार भी होती है जीत भी होती है, हरियाणा के अंदर हुआ प्वाइंटों में रह गया फर्क ,लोगों ने सहन कर लिया भई चलो माइक्रो मैनेजमेंट किया होगा कुछ किया होगा, कुछ गलती हम से हो गई होगी, सहन कर लिया,पर जिस प्रकार से महाराष्ट्र में हुआ, महाराष्ट्र में कांग्रेस शिवसेना एनसीपी जो बिग प्लेयर हैं वहां पर, मजबूत पार्टियां हैं, तीन महीने पहले शानदार विजय हासिल करी है पार्लियामेंट के अंदर और तीन महीने बाद में आप गायब ही हो जाओ वहां से, हमारी तीनों पार्टियां गायब टाइप हो गईं वहां पर, तब लोगों ने पूरे मुल्क ने कहा मामला बहुत बड़ा दिखता है, बहुत बड़ी बेइमानी हो रही है, बहुत बड़ी मिलीभगत चल रही दिखती है , कोई जवाब नहीं है, अगर राहुल गांधी जी कहते कि आप हमें आज तो डिजिटल का युग है मोबाइल इंटरनेट का युग है, आप हमें लिस्ट दे दीजिए अपना डेटा बेस , हम पता कर लेंगे कहां कहां डबल वोट है कहां बेइमानी हो रही है कहां नहीं हो रही है, आप देने को तैयार नहीं हो, पोथे ले ले कर राहुल गांधी बताते हैं मीटिंगों के अंदर लाखों पैरे होते हैं, लाखों पैरों में ढूंढना बड़ा मुश्किल काम होता है वो भी वोट चोरी है, तो मेरा मतलब न है इसलिए अवेयरनेस के लिए ये प्रोग्राम चलाया गया है , आँखें खुलें देश के अंदर, डेमोक्रेसी को बचाना है तो खाली राहुल गांधी ने खुद ने कहा खाली मैं अकेला कुछ नहीं कर सकता, पब्लिक को आगे आना पड़ेगा, कार्यकर्ताओं का कोई पार्टी का हो उनको आगे आना पड़ेगा तब जा के लोकतंत्र बचेगा, वरना ये जो व्यवहार कर रहा है चुनाव आयोग आपका वो बहुत खतरनाक व्यवहार कर रहा है, उनकी भाषा अच्छी नहीं है, व्यवहार अच्छा नहीं है, नेता प्रतिपक्ष किसे कहते हैं, प्रधानमंत्री अगर,प्रधानमंत्री पद है अलग गरिमा का पद है तो नेता प्रतिपक्ष पद भी कोई कम गरिमा का पद नहीं होता है आप उसके लिए व्यवहार देख लीजिए , देश देख रहा है, ये सब पोल खुल रही है इनकी, एसआईआर कर रहे हैं तो शक लोगो को हो रहा है, क्यों हुआ शक, आप ऑल पार्टी मीटिंग बुलाते, बात सबसे करते बताओ भई हम चाहते हैं एसआईआर करा के ट्रांसपेरेंसी हो जाए लिस्टों के अंदर, उसके अंदर आपकी सलाह क्या है, हर पार्टी अपनी सलाह देती, सबके सुझावों का समावेश करते,एसआईआर शुरू करवाते, सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है, सबजुडिस है, आपने एसआईआर शुरू कर दी 12 राज्यों के अंदर, तमाम तरह की बातें शक पैदा करती हैं, जहां शक शुभा होता है वहां पर विश्वास उठता है चुनाव आयोग पर और चुनाव आयोग पर विश्वास उठना मैं समझता हूं बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि पूरे चुनाव में डेमोक्रेसी तो टिकी होती है चुनाव आयोग पर टिकी होती है , ये बात है। एसआईआर के बाद पहला चुनाव बिहार में होने तथा मतदान बढ़ने पर प्रश्न का जवाब : तीन दशक में पहली बार इतना हुआ है, तीस साल हो गए कम से कम, तो ये भी शक पैदा करता है , तो इसलिए मैं समझता हूं कि हमारी जो मीटिंग हो रही है ये अपने आप में हमारे कार्यकर्ताओं को ग्रूम करने के लिए है, अवेयर करने के लिए है, आगाह करने के लिए है, हम चाहेंगे कार्यकर्ता भी पब्लिक भी, बेइमानी नहीं हो हमारे बीएलए बनें वो ट्रेंड बनें उनकी अच्छी ट्रेनिंग करवाएंगे, जिससे कि वो अपनी जिम्मेदारी समझें और बीएलओ बीएलए की दोनों की भूमिका इंपॉर्टेंट होती है वो मिलकर ऐसी लिस्टें बनवाएं जिससे कि तमाम तरह से निष्पक्ष हो के चुनाव हो सकें।

Ashok Gehlot

26,587 görüntüleme • 10 ay önce

डॉ नरेश त्रेहन और डॉ सोइन, मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम. इंसानियत बची हो तो सुन कर सुधार लाइएगा- आप मेरे दोस्त के इस परिवार की आवाज़ को सुनिएगा ज़रूर, क्योंकि समय पर सही तरीक़े से सुना होता तो आज ये अपने को खोने का दर्द नहीं झेल रहे होते. एक अच्छा ख़ासा व्यक्ति अपने पैरों पर चलकर आपके अस्पताल पहुंचता है लेकिन लापरवाही के कारण अब वो नहीं रहे. लखनऊ के वासुदेव डेम्बला लीवर ट्रासप्लांट के लिए 22 दिसंबर को मेदांता गुरूग्राम में भर्ती हुए. उनके परिवार वालों के मुताबिक़ यह बताया गया कि 5 दिनों में सर्जरी का आश्वासन दिया गया था. इससे पहले ILBS की टीम ने इनका चेक अप कर 3 महीने बाद सर्जरी प्लान करने के लिए कहा था और घर जाने के लिए कहा था. लेकिन परिवार को लगा कि मेदांता जाकर अभी जल्दी लीवर ट्रांसप्लांट करा लें. लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनका अनुभव सबसे बुरा होगा. लेकिन मेदांता में 22 दिसंबर से 1 मार्च तक सिर्फ और सिर्फ इंफ़ेक्शन का इलाज होता रहा. परिवार वालों का आरोप है कि इलाज के दौरान कई स्तर पर लापरवाही बरती गई. जब भी कोई शिकायत की जाए तो उसे दूर करने पर ज़ोर नहीं दिया गया. शिकायतों की लंबी श्रृखंला है. लीवर का इलाज तो बहुत दूर की बात हो गई थी, इलाज तो कुछ और ही चलने लगा. डॉ त्रेहन जी मैंने आपको कई बार फ़ोन किया, आपको जानने वाले लोगों ने भी आपको फ़ोन किया और सिर्फ यही कहा गया कि इलाज और देखभाल सही करा दीजिए. लेकिन कोई ख़ास फ़र्क़ आपके ऊपर नहीं पड़ा. परिवार परेशान रहा और डॉ सोइन जब 28 फ़रवरी को परिवार से मिले तो उनका रवैया किसी भी एंगल से उनके पद और गरिमा के अनुकूल नहीं रहा. आम लोगों के द्वारा बिल और पैसे की बात उठाना ही बेकार की बात है, क्योंकि बड़े अस्पताल इसे तो अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानने लगे हैं. सही समय पर सच्चाई दिखाने के लिए ज़रूर साझा किया जाएगा. मानवता मर चुकी है, संवेदनाएं और डर ख़त्म हो गया है. क्योंकि देश की जानी मानी हस्तियों का इलाज इन जैसे बड़े अस्पतालों में होता है, उन्हें पूरी अच्छी व्यवस्था दी जाती है. तो फिर डर कैसा ? किसी से मत डरिए लेकिन भगवान से ज़रूर डरिए ! मैं अपने दोस्त से क्षमाप्रार्थी हूँ कि जाने अनजाने में मैंने डॉ त्रेहन या उनकी टीम के द्वारा दिए गए इंटरव्यू को कभी भी किया हो और उस वजह से उनकी “असली” छवि पर पर्दा लगा हो, हमारे प्रचार प्रसार की वजह से बड़े अस्पताल की ओर जाने को समाज मजबूर होता है, तो मैं माफ़ी माँगता हूँ. आगे से मैं ऐसा नहीं करूँगा. डॉक्टर सच में भगवान होते हैं, मैं बहुत से डॉक्टर को जानता हूँ जो सच में भगवान जैसा काम करते हैं लेकिन कुछ बड़े अस्पतालों के बड़े नामों ने निराश कर दिया है. मैं सभी से यही अनुरोध करूँगा कि जिस डॉक्टर या अस्पताल को आप लंबे समय से जानते हैं, सिर्फ़ वहीं जाइए. बड़े ब्रांड और बड़े नाम की तरफ़ मत भागिए.

Vishal Pandey

257,441 görüntüleme • 1 yıl önce

मदन राठौड़ जी के आज के बयान में किये गए निराधार दावो का सच..... पहला आरोप: मदन राठौड़ जी दावा कर रहे है कि मेरी गाड़ी पर वो लोग डंडे मार रहे थे..... सच : जब वो लोग पानी बिजली की समस्याओं को लेकर भागकर तख्तीयां लहरा रहे थे, जैसा कि आप वीडियो में देख सकते हो... ध्यान से देखने के लिए मैंने वीडियो को स्लो मोशन में लगाया है....अगर उनका दूसरा मोटिव होता तो तख्तीयाँ थोड़ी लहराते.... किसी ने भी डंडा उनकी तरफ भी नहीं किया,... उनके हाथ में डंडे तो थे ही नहीं सिर्फ छड़िया थी... हाँ लाठियाँ बरसाई गई लेकिन पुलिस की तरफ से, प्रदर्शन करने वालों के ऊपर.... लेकिन काल्पनिक आधार पर मुकदमे लगा दिए....कि मैं उतरता तो ये हो सकता था वो हो सकता था... दूसरा दावा : मैं आदर्श व्यवहार करना चाहता हूँ, बराबर नहीं होना चाहता हूँ.. सामने वाले से आदर्श की अपेक्षा भी करूँ.... सच : ये बातें महोदय सुप्रीम कोर्ट के वकील द्वारा 19 पन्नों के नोटिस के बाद बोल रहे है... क्योंकि पहले तो श्री मान ये बोल रहे थे कि हनुमान जी का सामाजिक बहिष्कार करो... ये तो वही बात हो गई “सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली” क्या ये आदर्श वाली बातें आपके प्रभारी और अन्य नेताओं पर लागू नहीं होती जो किसी नेता को चूहा, बहुरुपिया, खुला सांड बोल देते है? ? अपने आप में सुधार करो पहले मदन जी.... दावा : हनुमान जी जो राजनीती कर रहे है उसको आदर्श मानते हो क्या? सच : हनुमान जी ने जो कहा सच ही बोला,उन्होंने कोई अपशब्द नहीं बोला लेकिन जिस प्रकार आप प्रदर्शन करने वालों पर इनाम घोषित कर रहे हो वो कहीं से भी आदर्शवादी नहीं है.... एक हाथ से ताकि नहीं बजती अध्यक्ष महोदय.... दावा : आप कह रहे हो कि मैंने तो सिर्फ बहिष्कार करने की प्रार्थना की थी और वाक्य के अंत में चाहिए लगाया था.... सच : मान लीजिये कि कोई व्यक्ति किसी के खिलाफ कोई हत्या की साजिश करवाता है और बाद में बोल दे कि साहब मैंने तो इस व्यक्ति से प्रार्थना कि थी की फलां आदमी की हत्या होनी चाहिए.... इसमें प्रार्थना और चाहिए दोनों शब्द है...तो आप मुझे बताओ कि क्या इससे उसका अपराध कम हो जाएगा.... उसी तरह आप इस प्रकार पल्ला नहीं झाड़ सकते कि मैंने प्रार्थना की थी... ठीक यही रहेगा कि आप अपने शब्द वापिस ले..... दावा : आप कह रहे हो कि हनुमान जी ने जो शब्दावली इस्तेमाल की वो सही नहीं है.... सच : हनुमान जी ने कोई भी असंवेधानिक शब्द का प्रयोग नहीं किया.... मुर्खाधिराज वेद पुराणो से निकला हुआ शब्द है.... लेकिन हाँ उसी दिन आपके मंत्री का ऑडियो वायरल हो रहा था और उसमें उन्होंने 3 मिनट में 17 गालियां निकाल दी... वो शब्दावली बहुत घटिया थी लेकिन आपको वो गालियां तो सही लगी और आपने क्लींन चीट दे दी और हनुमान जी का आओ सामाजिक बहिष्कार करवाना चाहते है..... इतना दोगलापन क्यों? ?? दावा : इस प्रदेश में लोग ओछी राजनीती पसंद नहीं करते और ना ही कांग्रेस भाजपा का कोई नेता ऐसा करता है.... सच : तो क्या विरोध करने पर आप राजकार्य में बाधा डालने, हत्या के आरोपी लगाने को ओछी राजनीती नहीं बोलोगे? 5 महीने पुराने मामलों में अब द्वेषता से FIR करवाना ओछी राजनीति नहीं है? ? पुतला जलाने पर जेल में ठूंस देना ओछी राजनीती नहीं है? ? कार्यकर्ताओं की गाड़ियाँ जब्त कर लेना ओछी राजनीति नहीं है? दावा : आप कह रहे हो कि हमारी गलती बताओ हम सुधार करेंगे... सच : आपकी पार्टी ने संतो के सम्मान में रैली करने के बदलने में जो दमनकारी नीति अपने वो बिल्कुल सही नहीं है....आपने हनुमान जी के सामाजिक बहिष्कार की बात कही वो सही नहीं है....उसमें सुधार करो, माफ़ी माँगो.... Madan Rathore HANUMAN BENIWAL

Shekhar Choudhary

11,137 görüntüleme • 3 ay önce

अध्यापक भर्ती लेवल -2 पुनः परिणाम पर किसी प्रकार का अब स्टे नहीं है जो यें स्टे आया हुआ था वो भी बोर्ड अध्यक्ष के ट्वीट करके जो रायता फैलाया गया था उसकी वजह से आया था अब पुनः बोर्ड अध्यक्ष ही बहाना बनाना शुरू का रहें है इसलिए ध्यान से पूरा वीडियो सुने और ट्वीट को पढ़े !! कोई भी चयनित बाहर नहीं हो ,मूल पद ,वेटिंग ,प्रोविज़नल परिणाम और पुनः परिणाम जारी करवाना है जिनका भी चयन होगा उनका चयन हों जाएगा लेकिन भर्ती को पूरा करवाना है वरना नई भर्ती सामने है अब किसी को भी भटकना नहीं मैं सबके कहने पर साथ आया हूँ लड़ेंगे और जीतेंगे !! गलती एक्सपर्ट और कर्मचारी चयन बोर्ड की हैं इसलिए बोर्ड ही अपने स्तर पर सरकार से बात करके जल्दी से जल्दी समाधान निकाले!! 20 dec तक सभी साथी बोर्ड की तरफ़ से परिणाम की अपडेट को लेकर इंतज़ार करें !! बोर्ड द्वारा अपडेट नहीं देने पर 20 dec कों आंदोलन की डेट के साथ घोषणा करूँगा !! नोट:- अगर आप लोग दिशाविहीन कार्य करते हों ,भटकाव वाला कार्य करते हों तो फिर मेरे से उम्मीद मत रखना इसलिए कोई भी गलती नहीं करके सभी ग्रुप से लेकर अपने साथियों तक सूचना शेयर करे मिलकर इस लड़ाई को जीतने का समय आ गया है !! #हनुमान किसान

HANUMAN KISAN

41,941 görüntüleme • 1 yıl önce

आज फ्रेंडशिप डे है।❤️ मैं हमेशा कहता हूँ कि इंसान की असली दौलत बैंक बैलेंस नहीं होती… उसके दोस्त होते हैं। दोस्ती बिल्कुल टेप रिकॉर्डर के पॉज़ बटन जैसी होती है। महीनों बाद मिलो, सालों बाद मिलो… बस बटन दबता है और बात वहीं से शुरू हो जाती है जहाँ छोड़ी थी। न कोई हिसाब, न कोई शिकायत, न कोई औपचारिकता।🤓 दोस्त सिर्फ़ हँसाते नहीं हैं… वो आपको मज़बूत बनाते हैं। आपको सुकून देते हैं। ये एहसास देते हैं कि अगर कभी ज़िंदगी में कुछ भी हो जाए, तो कुछ लोग हैं जिन्हें आप बिना सोचे फ़ोन कर सकते हैं। शायद इसी एहसास का नाम दोस्ती है। और सच कहूँ… दोस्त सिर्फ़ ज़िंदगी को खुशहाल नहीं बनाते, मन को भी शांत रखते हैं। उनकी वजह से हिम्मत मिलती है, भरोसा मिलता है, और एक अजीब-सी सुरक्षा महसूस होती है। आज फ्रेंडशिप डे पर मैं अपने हर दोस्त को दिल से धन्यवाद कहना चाहता हूँ। और दुनिया के हर उस इंसान को शुभकामनाएँ देना चाहता हूँ जिसके पास एक भी सच्चा दोस्त है। क्योंकि अगर आपके पास एक सच्चा दोस्त है… तो यक़ीन मानिए, आप दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं।🥹 हैप्पी फ्रेंडशिप डे! ढेर सारा प्यार।❤️🥹❤️❤️ #HappyFriendshipDay

Anupam Kher

85,359 görüntüleme • 1 ay önce

जनता अब भाजपाइयों का भाषण सुनने के मूड में नहीं है। अंहकार विवेक हर लेता है। जो दूर से ये धारणा बनाये बैठे थे कि ‘कोई’ ईमानदार है; भ्रष्ट नहीं है; जन-सेवा में निस्वार्थ भाव से लगा है; भौतिक-लालच से परे है, अब तथाकथित माननीय का ‘म्यूट कर दिया गया वो वीडियो’ देखकर, उनका भी सारा भ्रम टूटकर चकनाचूर हो गया है। जो व्यक्ति सैकड़ों कैमरों के सामने किसी माँ की गोद उजड़ जाने के सबसे बड़े दुख के क्षण में भी एक दुखी परिवार को सांत्वना देने की जगह धमकी भरे लहजे में, अपने कठोर हाव-भाव के साथ बोल रहा हो, वो कितना हृदयहीन, संवेदना शून्य, निष्ठुर और निर्मम होगा, अब ये बात सबके सामने खुल गई है। इसे ही क्रूर-व्यवहार कहते हैं, ये बेहद अमानवीय है। अब इनके झूठे नायकत्व का सारा मायाजाल तार-तार हो गया है। सबसे ज़्यादा ठेस इनके सबसे बड़े उन प्रशंसकों और समर्थकों को लगी है जो इनकी ‘मिथ्या दिव्यता’ के गुणगान करते नहीं थकते थे। वो अब अपने घर की महिलाओं को ही मुँह दिखाने लायक नहीं बचे, अन्य महिलाओं का सामना करने की तो बात ही बहुत दूर है। वो जब ये सोचकर देख रहे हैं कि कहीं ऐसी दुखद घटना उनके परिवार के साथ घटती और उनके घर की किसी ‘माँ’ के साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता तो क्या होता, ये विचार करके ही वो काँप जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि वो किस पाताली कूप में कूदकर अपनी शर्मिंदगी छिपाएं। याद रखा जाए इनकी कटु-वचन वाणी का ये पहला उदाहरण नहीं है। पत्रकार से लेकर अधिकारी तक पहले भी सरेआम इनका शिकार हो चुके हैं। जिसके लोक व्यवहार में खोट होता है, वो अकेले में कैसा व्यवहार करता होगा, जनता ये समझ गई है। अब क्या तथाकथित माननीय ये कहेंगे कि पूरी दुनिया में फैल चुका उनका वीडियो AI जेनरेटेड है। सच तो ये है कि अगर जनता चाहे तो AI से होंठों को पढ़कर ये बता सकती है कि ‘वास्तव में उन्होंने किन अपशब्दों का इस्तेमाल किया था’। जिसका अपने वचन-व्यवहार पर नियंत्रण नहीं वो प्रदेश पर क्या नियंत्रण करेगा और दिल्ली पर राज के सपने क्या देखेगा। इनके इस कुकृत्य की वजह से अब प्रदेश, देश, दुनिया की कोई महिला चाहे वो माँ हो या बहन, वो अब भाजपा का पूर्ण बहिष्कार करेगी। इस घटना ने संपूर्ण विश्व में भाजपा की दिखावटी, सजावटी, बनावटी छवि को मिट्टी में मिला दिया है। अब भाजपा इनको पद से हटा भी देगी तो भी ‘आधी आबादी’ के वोट नहीं पायेगी क्योंकि ‘बात जब माँ की आती है तो हर सरहद मिट जाती है।’ जनता ने भाजपाइयों का ‘नारी वंदन’ का सच कैमरे के सामने देख लिया है। भाजपा और उनके संकीर्ण सोच के संगी-साथी सभी लोगों की सामंती सोच में जब नारी के लिए ही कोई स्थान नहीं है तो नारी के मान-सम्मान के लिए क्या होगा। अभूतपूर्व निंदनीय! भाजपा हटाओ, संवेदना बचाओ! माँ का दर्द कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

171,772 görüntüleme • 3 ay önce