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बड़ा ही खामोश सा अंदाज है तेरा, समझ में नहीं आता कि फिदा हो जाऊँ के, फनां हो जाऊँ... 🎈♥️❣️

82,187 просмотров • 2 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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Singh2 лет назад

यादों के इस रास्ते पे कटेगी डगर अब अकेले! मन में वहम की कहीं मैं,तुझको न भूला करूँ!!

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Veeranna S Athani2 лет назад

GoodAfternoon 🌹Manjula🌹🌺🌹 HappyFriday 🌹❤️🌹👍🤝

Фото профиля वाह! जिंदगी!!
वाह! जिंदगी!!2 лет назад

क्या फ़ायदा इतनी सुंदर होने का...साहिबा जब तुम कभी वीडियो कॉल करती ही नही

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manjula2 лет назад

मैंने कब कहा कि मैं सुंदर हूं, आपको भी डरावनी चीज पसंद न होगी

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shri prakash2 лет назад

बड़ा ही खामोश सा अंदाज है तेरा, समझ में नहीं आता कि फिदा हो जाऊँ के, फनां हो जाऊँ... 🎈♥️❣️

Фото профиля Leo Banty Upadhyay ᥫ᭡፝֟፝֟
Leo Banty Upadhyay ᥫ᭡፝֟፝֟2 лет назад

बहुत खूब 👌💐 उस से चाहत हुई      तो समझ आया हमे ,,     की कैसे कोई एक सक्स      किसी के लिए          पुरी कायनात बन जाता है ,,,,,,

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parvin2 лет назад

pehele fida ho jaaiye phir fanna ho jaana

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Gautam...2 лет назад

फना हो जाओ...

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Gautam...2 лет назад

कोई उलझन नही, बस...

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vishal varshney2 лет назад

Jussy Milky figure darling

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ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कन्फ्यूजन उन लोगों के मन में है जो परमानेंटली कन्फ्यूज हैं जिनके मन का कन्फ्यूजन कभी दूर ही नहीं हुआ है। जब कोविड वैक्सीन आई तो उन लोगों ने ये कहा कि साहब ये तो इतनी जल्दी बन ही नहीं सकती, वो सेलुलर माइक्रोबायोलॉजी के एक्सपर्ट हो गए तो उसपर कन्फ्यूजन दिखाने लगे थे। जनवरी में जब अनाउंस हुआ तो उन्होंने कहा कि इतने कम समय में trial हो ही नहीं सकता हमें सैंपल दिखाइए स्टैटिकल फॉर्म्युलेशन कि कितने लोगों पर सर्वे किया है। स्टैटिक्स एक्सपर्ट हो गए थे। ये लोग राम मंदिर के समय कन्फ्यूज थे कि मुहूर्त ठीक नहीं है। चरम की Covid second wave के ख़तरनाक समय में अप्रैल, 2021 में दोनों भाई-बहन ने और हमारे दिल्ली में जो अभूतपूर्व थे और अब भूतपूर्व सीएम हो गए हैं उन्होंने भी बयान दिया था कि भारत ने बच्चों का वैक्सीन विदेश भेज दिया, जबकि अप्रैल 2021 तक भारत तो छोड़िए दुनिया में बच्चों की वैक्सीन ही नहीं बनी थी। समझाया उसे जा सकता है जो समझना चाहे। एक पुरानी लाइन है कि “समझ-समझ के समझाओ, उसको जिसके समझ है। जो समझ-समझ के भी ना समझे, समझो कि वो ना समझ है।”

Dr. Sudhanshu Trivedi

28,183 просмотров • 1 год назад

"एक अद्भुत ग्रंथ है भारत मैं। और मैं समझता हूं, उस ग्रंथ से अद्भुत ग्रंथ पृथ्‍वी पर दूसरा नहीं है। उस ग्रंथ का नाम है, विज्ञान भैरव तंत्र। छोटी सी किताब है। इससे छोटी किताब भी दुनियां में खोजनी मुश्किल है। कुछ एक सौ बारह सूत्र है। हर सुत्र में एक ही बात है। पहले सूत्र में जो बात कह दी है, वहीं एक सौ बारह बार दोहराई गई है—एक ही बात, और हर दो सूत्र में एक विधि हो जाती है। " पार्वती पूछ रहीं है शंकर से,शांत कैसे हो जाऊँ? आनंद को कैसे उपलब्‍ध हो जाऊँ? अमृत कैसे मिलेगा? और दो-दो पंक्‍तियों में शंकर उत्‍तर देते है। दो पंक्‍तियों में वे कहते है, बाहर जाती है श्‍वास, भीतर जाती है श्‍वास। दोनों के बीच में ठहर जा, अमृत को उपलब्‍ध हो जाएगी। एक सूत्र पूरा हुआ। बाहर जाती है श्‍वास, भीतर आती है श्‍वास, दोनों के बीच ठहरकर देख ले, अमृत को उपलब्‍ध हो जाएगा।"

Sw. Chaitanya Keerti ( Narain Das )

13,847 просмотров • 4 месяцев назад