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बाढी पछि त्रिशुली नदि करिडोरको भयावह हेलिकप्टर दृश्य।😴

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यतिका दिन पछी पनि मुगलिङ नारायणघाट खण्डको सिमतालमा पहिरोमा बगेका बस फेला परेका छैनन । हाम्रो प्रार्थना ती बसमा रहेका र तिनको परिवारजनका साथमा छ । म बुझ्न सक्छु उनीहरुको पिडा । किनभने मैले त्यसतै खालको बेदना कतिब ३७ बर्ष अघि नजिकबाट महसुस गरेको थिए । पृथ्वी राजमार्गको जोगीमारामा एउटा यात्रुबाहक बस खसेर त्रिशुली नदीमा खसेको थियो ।कयौ दिनसम्म न यात्रु फेला परे न बस । ती दिनमा हामी नेपाल टेलिभिजनका लागी काम गर्थ्यौ । मोबाइल दुनियामा आएकै थिएन । जोगीमारा करिब ९१ किलोमिटर पर्छ काठमाण्डौबाट । क्यामेरापर्सन एवम मेरा मित्र लक्ष्मण उप्रेती भोर बिहानीको अन्धकारमा काठमान्डौबाट निस्कन्थ्यौ । दिउसो बस खोजीका समाचार खिच्थ्यौ । राती दौडादौड गरेर काठमाण्डौ फर्कन्थ्यौ । छायाङकन, एडिटिङ उपकरण अहिलेको तुलनामा धैरै अपठ्यारा र भारी हुन्थे । नेपाल टेलिभिजनमा राती प्रसारण भए पछी हामी मुश्किलले निदाउथ्यौ ।किनभने भोली पल्ट बिहान ४ बजे फेरी जोगीमारा तर्फ लाग्थ्यौ । एवम क्रमले तिन चार दिन बिते । एक रात चाही हामी नसकेर त्यतै बास बस्यौ । हुन त जोगीमाराको दुर्घटाना अघि र त्यस पछी पनि बस दुर्घटना भै नै रहे । तर टेलिभिजनमा प्रसारण भएको यो 'जोगीमारा रिपोर्टहरु' ले सबैको ध्यानाकर्षण भयो । त्यस अवस्थामा संम्बन्धित निकाय सबैलाई छिटो काम गर्न दबाब पनि भयो । हामीलाई लाग्छ नेपालको टेलिभिजन रिपोर्टिङ ईतिहासमा यो रिपोर्टिङ एक कोशे दुङा थियो । मैले जीवनमा धेरै बिषयमा स्थलगत रिपोर्टिङ गरे , कार्यक्रम बनाए । कुन विषयमा रिपोर्टिङ गरे भन्नु भन्दा पनि , कुन बिषयमा गरिन भनेर सोच्ने पर्ने हुन्छ । कालान्तरमा मैले आफ्नो पहिलो किताब खुसी मा यसरी लेखे ; सिसुवा बेलहीमा झुपडी जलेर सारा गाउ खरानी भएको समाचार आयो । पाकेको भात छाडेर राति आठ बजेक्यामरापर्सन विमल राणाका साथ त्यो गाउँ खोज्दै मधेसतर्फ हानिएँ । विमलले चलाएको हाइस्पिड कार पन्चरभएर पल्टियो । आगलागीको समाचार खिच्न गएका हामी आफैं झन्डै खरानी भएका ! पृथ्वी राजमार्गको जोगीमारा भीरबाट गुल्टेर एउटा बस वर्षायामको त्रिशुलीमा कता हो कता हरायो । मानिसकोलाससमेत फेला परेन । म तीन दिनसम्म बाढीले उर्लेको त्रिशुली नदीमा कहाँनेर फेला पर्छ भनेर जलप्रवाह हेरेर बसें। दृश्य खिच्ने र रिपोर्टिङ गर्ने ठाउँसम्म पुग्न हामीलाई डोरीको सहारा लिनुपथ्र्यो । तीन दिन भीरमा बसेर बगेकोपानी हे¥याहे¥यै गरेपछि, कैयांै दिनसम्म मलाई जुन बेला पनि रिङटा लाग्ने भयो । नेपालीले बस फेला पार्न नसकेपछि बङ्गलादेशबाट गोताखोर ल्याइए । नदीमा पस्नुअघि शरीरमा तेल र मुहारमाफूर्ति लगाए बङ्गाली गोताखोरले । पानीमा पसेका मात्र के थिए, त्रिशुलीको भेलले तिनलाई बगाएर आधाकिलोमिटर पर थचारिदियो । ‘यो बङ्गालको जस्तो सजिलो पानी होइन’ भन्दै लजाए गोताखोर । फेरि पानीमा पसेनन् । आगो, पानी, भुइँचालो मात्र होइन शीतलता, न्यानोपन र करूणाका भावनासित पनि टेलिभिजनले मलाईनजिकैबाट परिचय गरायो । तीन दशकमा मैले कुनकुन विषयको कार्यक्रम गरें भन्नुभन्दा, कुन विषयको पो गरिनँभनेर सोच्नुपर्ने हुन्छ । ‘जीवनलाई चारैतिरबाट हेरें, आगोमाथि पनि मैले नाचिहेरें’ भन्ने गीत गाउँदै हिँड्थें म । ' आज दसकौ पछी फर्केर हेर्दा हामीले बिताएका ती सुखद र दुखद दिनहरुको याद ताजा भएर आउछ । मैले यु मैटिक लो ब्यान्ड क्यामेरा युगबाट काम सुरु गरे । भारी गरुङा क्यामेरा हुन्थे । आज क्यामेरा युनिटको जुन भार हुन्छ , तीभन्दा दसौ गुना भारी , अपठ्यरा , असजिला थिए । तर ती भारी , अपठ्यरा र असजिला क्यामेरा र एडिटिङ मसिनहरुबाटै , हामीले नेपाली टेलिभिजन इतिहासको , नेपाली श्रव्यद्रश्य इतिहासका कतिपय कायजयी क्षणहरुलाई क्मारेरामा कैद गर्यौ । म कृतज्ञ छु मेरा सबै प्राविधिक मित्रहरु प्रति , जसले हामीले बिताएका तिता वा मिठा वा पट्यारलाग्दा तिनै थरि सम्झनालाई सदाका लागी जीवन दिए ।

Vijay Kumar Panday

45,798 次观看 • 2 年前

उत्तराखंड में इस वर्ष आई भीषण अतिवृष्टि और भूस्खलन ने इतने गहरे घाव दिए हैं, जिन्हें भरने में बहुत समय लगेगा। कल शाम आपदा प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन का एक भयावह दृश्य आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं। यह दृश्य स्वयं बता रहा है कि हमारा उत्तराखंड इस समय कितनी भीषण प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है। मैं बाबा केदारनाथ से सभी लोगों के सुरक्षित जीवन, अच्छे स्वास्थ्य एवं खुशहाली की मंगलकामना करता हूं। आपदा की इस घड़ी में जन जन की सेवा में लगे सभी अधिकारियों, NDRF – SDRF के जवानों, प्रशासन और कठिन परिस्थितियों में भी सड़कों से मलबा हटाने वाले कर्मचारियों के सेवाभाव की सराहना करता हूं।

Anil Baluni

114,198 次观看 • 11 个月前

दृश्य अत्यंत भयावह है एक ही हादसे में 18 लोगों की मौत कोई मामूली घटना नहीं है। क्या लापरवाही रही होगी और क्या स्पीड रही होगी, शायद तुरंत सटीक जानकारी नहीं मिल पाए लेकिन गाड़ियों की भिड़ंत के वक्त जितनी ज्यादा स्पीड होती है, नुकसान की आशंका उतनी ही अधिक होती है। यह खड़े ट्रोले, खड़े ट्रक वाले कितने लापरवाही से खड़े होते होंगे? डिपर भी ऑन नहीं करते होंगे। बहुत जगह देखते हैं और ड्राइविंग की यह बेसिक ट्रेनिंग और प्रैक्टिस होनी चाहिए लेकिन फिर भी लापरवाही रह जाती है और नतीजे में आती है बेहिसाब चीखें, अकल्पनीय, अपूर्णीय नुकसान और दर्द। फिलहाल जितना भी बचाव हो सके, उतना ही ठीक है।

Arvind Chotia

11,540 次观看 • 9 个月前

इन्दौर ब्ला*"स्ट का खौफनाक दृश्य ; पल भर में मलबे में बदले आशियाने ! मध्य प्रदेश के इन्दौर के शीतल नगर में हुए गैस पाइपलाइन ब्लास्ट का एक बेहद रोंगटे खड़े कर देने वाला लाइव वीडियो सामने आया है। इस सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि कैसे गैस पाइपलाइन में लीक होने के बाद अचानक एक जोरदार धमाका होता है और पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह जाता है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पल भर में पूरा इलाका धुएं और मलबे के गुबार में तब्दील हो गया। इस हादसे से मलबे के नीचे दबने से एक युवक और एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। यह लाइव वीडियो इस बात की गवाही दे रहा है कि यह हादसा कितना भयावह और जानलेवा था।

Pushpraj sharma

334,371 次观看 • 2 个月前

अमावस की रात 29 जनवरी की रात मैं संगम नोज पर था. वहां इतना भयावह दृश्य था कि कभी नहीं भूल सकता. असंख्य लोगों की भीड़ थी. और लगातार चली आ रही थी. घाट भरे हुए थे. जो लोग पहले आ गए थे वो वहीं बिछा के सो गए थे. कुछ लोग नागाओं का स्नान देखने के लिए घाट पर डेरा डाले हुए थे. प्रशासन लगातार लोगों से स्नान कर घाट छोड़ने के लिए कह रहा था. लेकिन घाट भरे हुए थे. इधर सारी भीड़ संगम की ही ओर चली आ रही थी. कहीं किसी दूसरे घाट की ओर कोई डायवर्जन नहीं. हर चीज की एक सीमा होती है. संगम घाट की भी है. कितने ही लोग आ पाएंगे. अंतत: वही हुआ जिसका डर था. पीछे कुछ औरतें गिरीं. उन्हें उठाने की कोशिश की. चार-पांच लोग मेरे हाथ पर चढ़ गए. मैं भी गिर गया. मेरी किस्मत अच्छी थी कि मेरे ऊपर कोई नहीं गिरा. हल्की चोट आई, पूरा शरीर पसीने से भीग गया था. मेरे सामने कई महिलाओं को चोट लगी. लगा अब यहां से वापस नहीं लौट पाऊंगा. मेरे साथ के सारे लोग कहीं नहीं दिख रहे थे. वहां से निकलने के बाद भी बहुत समय तक कुछ समझ ही नहीं आ रहा था. आकर परेड ग्राउंड में बैठा. 2.45 से तीन बजे के आसपास अचानक सायरन की आवाज गूंजने लगी. एक के बाद एक लगातार एम्बुलेंस आ-जा रही थी. वीडियो भी शेयर किया था मैंने इसका. समझ गया अनहोनी हो गई है. चार दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी भी वही सब सारा दृश्य घूम रहा है. ये वीडियो 29 की सुबह संगम से लौटने के बाद बनाया था. पोस्ट करने की हिम्मत नहीं थी. लेकिन साथियों का कहना है जो देखा है वो बताओ. देखिए #MahakumbhStampede

Gaurav Shyama Pandey

65,795 次观看 • 1 年前