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बात तो सही है!🙏🔥
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शुक्ला जी मै क्षत्रिय परिवार हू, लेकिन हिन्दू नही जिसके घर मे पूजा पाठ और संस्कार सदियो से होते चले आ रहे है वह लोग धर्माचार्य ब्राह्मण देव व पंडित जी का अपमान नही करते है, 1- आओ आपको समझाने का प्रयास करते है आज समस्या कहा है पहले पंडित जी पूजा पाठ उन्ही कुल वंश परंपरा के परिवारो मे पूजा करने जाते थे जिनके गोत्र, प्रवर, निश्चित एवं यथावत थे, पहले ब्राह्मण अपने स्वधर्म ब्राह्मण धर्म का पालन किया करते थे, 2- बाहरी आक्रांताओ के भारत मे प्रवेश किए क्षत्रिय हजार वर्षो तक लड़ते रहे धन का अभाव क्षत्रिय का कमजोर होना ,ब्रह्मत्व का कमजोर हो जाना" बाहरी आक्रांताओ के द्वारा सभी सनातनीयो को नाम दिया गया हिंदू और उस नाम की स्वीकृति ब्राह्मणो के द्वारा हिंदू धर्म के रूप मे दे दी गई, आगे चलकर हिंदू धर्म के रूप मे स्वीकृत और आज लोकतांत्रिक रूप से हिंदू लिख भी जाता है 3- सनातन (संज्ञा) कुल धर्म को समझने का प्रयास करते है सनातन मे चार कुल धर्म है इन सभी कुल धर्म के रहन-सहन खान पान स्वभाव भिन्न है ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र परंतु आज राजनीतिक पंडित चारो स्वधर्मों को एक करना चाहते है, 4 :- मेरा सभी ब्राह्मणो से निवेदन रहेगा कुलीन लोगे के यहा पूजा पाठ करने बिल्कुल ना जाए, और जिन ब्राह्मणो को हिंदुत्व मजबूत करना है तो वह लोग मगरमच्छ के आंसू ना बहाये की हमारा अपमान हो रहा है, जैसा खाओगे अन्य तेसा होगा मन, विचार अपने अपने, राम राम सीता-राम जय क्षात्र धर्म 🚩

ये परंपरा बंद होनी चाहिए....पंडित भिकारी की तरह भिक्षा मंगता है दान लेता है.

ब्राह्मण....

धर्म के नाम पर भीख मांगना इसे ही कहते है

बिल्कुल देंगे बिल्कुल देंगे 1000 रूपए, पहले पंडित बनने का अधिकार प्रत्येक जाती के लोगो को दो, केवल ब्राह्मण ही धंधा नहीं करेंगे , सब करेंगे

शर्म आनी चाहिए, जो ऐसे message भेजता या फैलाता है। पंडित को बुलाने वाला, या पंडित घर में आ जाएं, तो भी बिना पूजा पाठ के भी, उनका सम्मान और सत्कार किया जाता है। ऐसे फर्जी और नकारात्मक message न फैलाएं। जो सम्मान दे, उसी को गाली ? जिसे सम्मान नहीं देना है, वह कभी नही देगा।

भीख मांगने को दक्षिणा नहीं भीख ही कहते हैं। अगर भीख ही मांगनी है तो धर्म के नाम पर क्यों, पेट के नाम पर मांगों?

"बाल काटना नाई का धर्म नहीं, धंधा है। चमड़े की सिलाई करना मोची का धर्म नहीं, धंधा है। इसी प्रकार पूजा -पाठ करना ब्राह्मण का धर्म नहीं, धंधा है..." - महात्मा ज्योतिबा फुले (11 अप्रैल 1827- 28 नवंबर 1890)

मतलब 52 वेदो का आध्यन 500 और 1000 rs पाने के लिए करता है मुझे तो लगा था भगवान् के प्रति प्यार होगा वरना पैसे का क्या है किसी के घर मे कथा करके के बाद कमाने भी जा सकता है इससे ये तो पता लग गया ये एक रोजगार का साधन है

भाई हमने जीवन भर phy che math पढ़ी हैं अगर तुम प्रति दिन 500rs हमे न दे सको तो कैसे हिन्दू हो तुम।
