Video wird geladen...
Video konnte nicht geladen werden
*बात मे तो 100 नही 500 % दम है भाई*,,, जरा गौर से सुने
10 Kommentare

अच्छा जी, अगर यह गलत है, तो आज भी किसी गांव में जाइए, वहां पे किसी ब्राह्मण को दलित के घर का पानी पिलवा के दिखाइए, तो माने ! शहर में भी बहुत से लोग सौ बार सोचते है, किसी दलित के घर कुछ खाने पीने में! यह बात माननी होगी कि छुआ छूत हमारे DNA में है, तभी सुधार होगा! उस समय भी, दलितों के भी अपने कुएं होते थे पर गलती से भी वो तथाकथित upper castes के कुएं से पानी लेने की जुर्रत नहीं कर सकते थे।

ज़्यादा शोध की जरूरत नहीं है बस प्रेमचन्द्र की लिखी दो कहानियां सारे प्रश्नों का उत्तर दे देती है १) ठाकुर का कुआं २) दूध का दाम जो भूतकाल में गलत हुआ उसे मानने में कोई हर्ज नहीं, और आगे न हो इसके लिए प्रण लेने में भी कोई हर्ज नहीं होना चाहिए।

सफ़ाई कर्मचारी हमेशा दलित ही क्यों, कोई ब्राह्मण क्यों नहीं दिखता अशिक्षा तथा गरीबी दलितों में क्यों अधिक है? दलित संपति क्यों नहीं अर्जित कर सके। अगर छुआछूत नहीं होता तो समाज में एकरूपता क्यों नहीं दिखता है।

छुआछूत अगर गलत था तो करोना पडितो के गले क्यो नही लगे जाकर। वहां नहीं छूआ क्योंकि खुद बिमार होने का खतरा था। वैसे ही उस पुराने समय मे भी चमडे उतारने व मल इक्कठा करने वालो के शरीर मे भी इनफेक्शन होता था जिसके लिए उनका शरीर इम्यून था जबकि कुलीन वर्ग उस इन्फेक्शन को नहीं झेल पाता था

आप ध्यान देंगे तो पाएंगे हमारे इतिहास को इस तरह से लिखा गया है कि हम लोग अपने संस्कृति और लोगो से नफरत करने लग जाए। उदाहरण के लिए NCERT, अर्थशास्त्र, chapter 1, पालमपुर गांव जो काल्पनिक है, भारत की आजादी से पहले किसी अंग्रेज लेखक की लिखी किताब से लिया गया है, लिखा गया है "अधिकांश भूमि उच्च जाति के लोगों के पास है" मतलब बचपन से ही बच्चों का मनोबल तोड़ने और जाति में बांटने की शिक्षा अब भी दी जा रही है @dpradhanbjp

अधकचरा ज्ञान हमेशा खतरनाक होता है.... जो गलत हुआ है उसे गलत मान लेने में कोई बुराई नहीं होती..

Baat 1000%shi h

बड़ी गहरी बात कह दी जिसमें 1% भी दम नहीं है ब्राह्मण सिर्फ अपना फायदा देखता था इसलिए उसने ऐसे टोटके अपनाए जिसमें उसको फायदा हो जहां उसे अपना फायदा नजर आया वहां उसने शूद्र को शूद्र नहीं समझा आज भी दान दक्षिणा लेने में कोई परहेज नहीं मगर उसे आगे बढ़ने का मौका नहीं देना चाहता

मैं आज भी अपने गाँव मे देखता हूँ दलितों को स्वर्णों के कुएं से पानी नहीं भरने दिया जाता है. जिसने भी फैलाई हो लेकिन ये आज भी कायम है.

Truth must prevail.
