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बाप दादा की जमीन का कागज सिर्फ नाम से ही निकालें। . . . . #computers #nirjala_education #computador #nirjalaeducation #computer See less

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क्या यह नबी ﷺ या अहल-ए-बैत का तरीक़ा है! उनसे जब कहा जाता है कि अल्लाह ने जो अहकाम [ आदेश ] उतारे हैं उनकी पैरवी करो , तो जवाब देते हैं कि हम तो उसी तरीक़े की पैरवी करेंगे जिसपर हमने अपने बाप - दादा को पाया है । अच्छा , अगर उनके बाप - दादा ने अक़्ल से कुछ भी काम न लिया हो और सीधा रास्ता न पाया हो तो क्या फिर भी ये उन्हीं की पैरवी किये चले जाएँगे ? नोट : आज भी अहले - बिद्दत को समझाया जाए के इन बिदआत की दीन में कोई असल नहीं है तो वो भी जवाब देते है के ये रस्में तो हमारे बाप - दादा से चली आ रही हैं हालांकि बाप - दादा भी दीनी हिदायत से महरूम रहे , इस लिए दलाईल - ए - शरीयत के मुक़ाबले में बाप - दादा की पैरवी ग़लत है । अल्लाह ताअला मुसलमानों को गुमराही की इस दलदल से निकालें । (सुरह अल-बक़रा 2 : 170)

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बिहार के जमुई का यह मामला है जहां विशाल कुमार की माता जी के नाम 9 कट्ठा जमीन थी। माताजी बीमार चल रही थीं, इसलिए मरने से पहले बेटे के नाम ट्रांसफर करवाना चाहती थीं। तहसील में दलाल बोला – बेटे के नाम करोगी तो ज्यादा पैसे लगेंगे, बहू या बेटी के नाम करोगी तो सस्ता पड़ जाएगा। विशाल इकलौता बेटा था, बेटी नहीं थी। सोचा बहू ही सही… जमीन ममता कुमारी (पत्नी) के नाम कर दी। कागजात हाथ में आते ही अगले दिन बहू अपने जीजा के साथ भाग गई। साथ में एक लड़का और एक लड़की भी ले गईं। जमीन भी चली गई, बच्चे भी चले गए। अब विशाल SDM ऑफिस और अफसरों के चक्कर लगा रहा है। हाथ में सिर्फ कागज बचे हैं।

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