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बराबरी का मतलब यह नहीं कि पब्लिक में पति का अपमान हो हिंसा चाहे महिला पर हो या पुरुष पर गलत हमेशा गलत है आज सवाल ये है कि पुरुष पर अत्याचार करना कहां तक सही है?

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पत्नी ने अपमान किया मारने की धमकी..🚨 तो पति खुद को चप्पल मारने लगा...🥹 1.👉“जब पत्नी के शब्दों ने पति को इस हद तक तोड़ दिया कि वह खुद को ही मारने लगा…” 2.👉“रेलवे स्टेशन पर तमाशा नहीं,एक टूटे हुए इंसान की चीख है ये…” 3.👉“ये गुस्सा नहीं,अपमान से टूटा हुआ आत्मसम्मान है” 4.👉“मर्द रोता नहीं कहा जाता है,लेकिन आज ये मर्द खुद को सज़ा दे रहा है” 5.👉“जब रिश्ता बोझ बन जाए और इंसान खुद से हार जाए” 6.👉“बीच स्टेशन,भीड़ के सामने,एक पति पूरी तरह टूट चुका है” रेलवे स्टेशन पर पति-पत्नी का झगड़ा,लेकिन ये सिर्फ झगड़ा नहीं है,पति की आंखों में थकान,चेहरे पर बेबसी और शब्दों में टूटा हुआ आत्मसम्मान साफ दिख रहा है, पत्नी के अपमान से इतना आहत कि पति चप्पल उतारकर खुद को मारने लगता है और कहता है, “अब मुझसे नहीं होगा,मार लो मुझे…” ये वीडियो बताता है कि रिश्तों में लगातार तिरस्कार और मानसिक दबाव किसी इंसान को किस हद तक तोड़ सकता है,घरेलू हिंसा सिर्फ मार-पीट नहीं होती, मानसिक अपमान भी उतना ही खतरनाक होता है.. मर्द हो या औरत,सम्मान के बिना कोई भी रिश्ता जिंदा नहीं रह सकता,,

KUNDAN PATEL

127,925 views • 7 months ago

अब तो उल्टा ये कहना पड़ेगा कि चुनाव आयोग का कोई झंडा हो तो वो भाजपाइयों के घर पर लगा दे। अब बस यही बचा है कि चुनाव आयोग भाजपाइयों के घर पर बूथ बना दे और भाजपाइयों को पीठासीन अधिकारी। क्या चुनाव आयोग ने भाजपा को ठेके पर अपना काम दे दिया है या भाजपा ने चुनाव आयोग को संविदा पर रख लिया है। प्रशासनिक पर्यायवाची कोश में ‘चुनाव आयोग’ को ‘भाजपा’ के पर्यायवाची के रूप में जोड़ देना चाहिए। भ्रष्ट-भाजपा शासनकाल में आश्चर्य ये नहीं है कि सरेआम वोट काटने-बढ़ाने का अपराध हो रहा है, आश्चर्य ये है कि संवैधानिक संस्थाओं को ये नज़र नहीं आ रहा है। आज वोट छीनेनवाले कल को जनता का बाक़ी सब भी छीन लेंगे। बाक़ी सब में भाजपाई भी शामिल होंगे, कोई बचेगा नहीं। भाजपाई भी याद रखें : ठगों का रिश्ता, सिर्फ़ ठगी से होता है और किसी से नहीं। इस कहते हैं: अंधेर नगरी, चौपट आयोग!

Akhilesh Yadav

38,929 views • 8 months ago