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बिल्कुल! भाजपा जब INDIA गठबंधन पर सवाल उठाती है, तो उसे अपने पुराने “आशिकी के चिट्ठे” भी खोलकर देखने चाहिए। भाजपा की पुरानी ‘आशिक़ी’ और राजनीतिक अवसरवादिता 1.1999-2004: NDA में रहते हुए भाजपा के साथी राज्य में दुश्मन थे! •TMC (ममता बनर्जी) केंद्र में भाजपा की साथी थी, लेकिन...

57,541 Aufrufe • vor 1 Jahr •via X (Twitter)

11 Kommentare

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Devendra Sharma 🇮🇳vor 1 Jahr

आएगा तो मोदी ही 😎

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World Transformation Movementvor 2 Jahren

“Most important interview of all time” says leading psychiatrist as “it solves the human condition, ends suffering & turmoil at its source & finally makes sense of our lives!”

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vijendra Goswamivor 1 Jahr

और जब भाजपा "आशिकी के चिट्टे" कर रही थी तब तू भाजपा की ही झूठन चाट रही थी, और तब कांग्रेस की बुराई करती थी और आज कांग्रेसियों की झूठन चाट रही है तो भाजपा की बुराई कर रही है। अबे तुम जिहादियों का कोई स्टैंड भी होता है या नहीं।।

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Sanjay Kumarvor 1 Jahr

बीजेपी के साथ जिनका भी गठबंधन है वह अपने राज्य में अच्छी पार्टी है NDA का मतलब सबका साथ सबका विकास से है, बाकि INDIA गठबंधन स्वार्थ से बना हुआ गठबंधन है अब इसी गठबंधन से सब अलग होकर चुनाव लड़ रहे हैं।।

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HairyPoppins(IAS)vor 1 Jahr

मुस्लिमों को बेवकूफ बनाने के अलावा कांग्रेस ने क्या किया उनकी सुख समृद्धि शिक्षा के लिए,जबकि कोर वोटबैंक रहा सत्तर सालों से???😎

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S K Mauryavor 1 Jahr

तुम भी भाजपा में थी

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Devendra Sharma 🇮🇳vor 1 Jahr

आएगा तो मोदी ही

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Kanhaavor 1 Jahr

भाजपा को समझने में बीस जन्म लेने पड़ेंगे फिर भी नहीं समझ सकती

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VIvor 1 Jahr

ठीक है लड़ लो राज्य में क्या फ़रक पड़ता है ??? वोट तो anti Hindu कांग्रेस तथा उनके साथियों को कभी नहीं मिलेगा !!! कितना भी माथा फोड़ लो

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आनन्द चौहान वत्सगोत्रीvor 1 Jahr

मोहतरमा आपकी भी तो आशिकी भाजपा से थी ये भूल गई क्या..??₹

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🇮🇳 ৰুদ্ৰ | Rudra | रुद्र 🇮🇳vor 1 Jahr

Nighat ji kuch bhi bolo, apke rajnaitik mahatwakanksha ki watt lag gayi hai.

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"कांग्रेस को कमजोर करके भाजपा से नहीं लड़ा जा सकता," : अजय माकन माकन ने कहा, "मुझे यह भी लगता है कि 2013 में कांग्रेस द्वारा आप (AAP) को समर्थन नहीं देना चाहिए था और न ही 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कोई गठबंधन होना चाहिए। लेकिन यह मेरी व्यक्तिगत राय है," अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कोषाध्यक्ष ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा। नए कांग्रेस मुख्यालय, कोटला रोड पर आयोजित पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में माकन, जो दिल्ली के निवासी हैं और यहीं राजनीति में सक्रिय रहे हैं (तीन बार के विधायक और दो बार के लोक सभा संसद भी रहे हैं), ने स्पष्ट किया कि वे अपनी पहले की टिप्पणी पर अब भी कायम हैं। उन्होंने पहले कहा था कि केजरीवाल "राष्ट्र-विरोधी" हैं और राजधानी में आप (AAP) का मजबूत होना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को ही फायदा पहुंचाता है। जब उनसे केजरीवाल के खिलाफ "राष्ट्र-विरोधी" टिप्पणी पर सवाल किया गया, तो माकन ने कहा, "मैंने अपनी व्यक्तिगत राय दी थी और मैं अब भी उस पर कायम हूं।" माकन ने कहा कि 2013 में आम आदमी पार्टी (AAP) को कांग्रेस के समर्थन और 2024 में केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ गठबंधन के कारण दिल्ली की जनता को नुकसान उठाना पड़ा। "जब दिल्ली की जनता को नुकसान हुआ, तो भाजपा को फायदा हुआ।" उन्होंने कहा। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस भविष्य में आप (AAP) के साथ गठबंधन करेगी, माकन ने कहा, "मुझे लगता है कि दिल्ली में केजरीवाल को बढ़ावा देना भाजपा को मदद करता है। भाजपा से लड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का मजबूत होना बेहद जरूरी है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नहीं है, तो भाजपा के खिलाफ लड़ाई कठिन हो जाएगी। "कांग्रेस को कमजोर करके भाजपा से नहीं लड़ा जा सकता," उन्होंने स्पष्ट किया। दिल्ली को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य करार देते हुए माकन ने कहा कि यह सर्वविदित है कि जो भी पार्टी राजधानी की लोकसभा सीटें जीतती है, वही केंद्र में सरकार बनाने में सफल होती है। "आप (AAP) दिल्ली में भाजपा के खिलाफ लड़ने में पूरी तरह विफल रही है," उन्होंने दावा किया। माकन ने बताया कि हरियाणा और दिल्ली दोनों में कांग्रेस आप (AAP) के साथ गठबंधन करना चाहती थी। लेकिन जेल से बाहर आने के तुरंत बाद केजरीवाल ने खुद घोषणा की कि उनकी पार्टी हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि "हम गठबंधन पर चर्चा के उन्नत चरण में थे।" उन्होंने कहा, "जहाँ तक दिल्ली का सवाल है, केजरीवाल ने खुद लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद घोषणा की कि वे दिल्ली का चुनाव अकेले लड़ेंगे।" माकन ने कहा कि जब दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी, जिसे मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने नेतृत्व दिया, तब पार्टी ने राजधानी की सभी सात लोकसभा सीटें जीतीं और भाजपा को यहाँ पराजित किया। उन्होंने कहा, "दिल्ली में उन्हें रोककर, हमने उन्हें केंद्र में सत्ता में आने से भी रोका क्योंकि जो भी दिल्ली की लोकसभा सीटें जीतता है, वही राष्ट्रीय स्तर पर सरकार बनाता है।" "लेकिन जब से आप (AAP) दिल्ली में सत्ता में आई है, स्थिति उलट गई है। भाजपा केंद्र में सरकार बना रही है क्योंकि उसने सभी सात लोकसभा सीटें जीती हैं- तो फिर भाजपा के साथ कौन है?" माकन ने सवाल उठाया।

Ajay Maken

90,261 Aufrufe • vor 1 Jahr

निकाय चुनावों में आमतौर पर सत्ताधारी दल को बढ़त मिलती है, लेकिन 2026 के नतीजों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर और जनआक्रोश का संकेत दिया है। भाजपाई सत्ता, प्रशासनिक मशीनरी और मुख्यमंत्री के रोड शो की पूरी ताकत लगाने के बावजूद कांग्रेस से वोट शेयर में महज 1% की बढ़त हासिल कर सकी। यानी जिस भाजपा को कभी कांग्रेस पर 8.12% की बढ़त थी, वो 2026 में ये अंतर सिमटकर सिर्फ 1% रह गई है। 2023 विधानसभा के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर 7% और 2024 लोकसभा के मुकाबले 15% नीचे आ गया है। शहरी और कस्बों में जिन्हें भाजपा अपना मजबूत आधार मानती है, ये गिरावट भजनलाल सरकार के ढाई साल के कुशासन और जनविरोधी नीतियों के प्रति जनता की बड़ी नाराजगी का संकेत है। बोर्ड के आंकड़े भी भाजपा की कमजोरी उजागर करते हैं। कुल 309 निकायों में भाजपा को केवल 86 बोर्डों यानी 28.2% में ही स्पष्ट बहुमत मिला। अधिकांश निकायों में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है, और उसे निर्दलीयों के सहारे की जरूरत पड़ेगी। वार्ड परिणाम में भी तस्वीर साफ है। अब तक घोषित करीब 10,063 वार्डों में से 5,966 वार्डों करीब 60% में भाजपा उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सके। ये आंकड़ा बताता है कि शहरी निकायों के बड़े हिस्से में जनता ने भाजपा को समर्थन नहीं दिया। कांग्रेस और भाजपा के बीच वार्डों का अंतर सिर्फ 500 वार्ड का है, लेकिन परिसीमन में हुई मनमानी और वार्डों के स्वरूप में किए गए बदलावों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाए तो कांग्रेस का वास्तविक प्रदर्शन कहीं अधिक मजबूत भाजपा से 1000 से ज्यादा वार्डों में जीत दिखाता है। भाजपा सत्ता के दुरुपयोग, सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल, मुख्यमंत्री के रोड शो और प्रशासनिक दबाव के बावजूद 35.35% वोट शेयर पर सिमट गई और जबकि कांग्रेस 34.31% तक पहुंच गई। ये सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं, भजनलाल सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का राजनीतिक संकेत है। राजस्थान की जनता ने निकाय चुनाव में बता दिया है कि 2028 की तस्वीर अभी से बिल्कुल साफ हो चुकी है।

Govind Singh Dotasra

41,552 Aufrufe • vor 15 Tagen

बीते दिन लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने तमिलनाडु पहुंचते ही भाजपा और डीएमके के साथ बड़ा खेल कर दिया। उधर चंद्रबाबू नायडू अपना अलग खेल दिखाने की कोशिश में हैं। दरअसल भाजपा पिछली बार जब डिलिमिटेशन बिल लेकर आई थी तो उसे राज्यसभा और लोकसभा में मुँह की खानी पड़ी थी। लेकिन इस बार उद्धव ठाकरे गुट के सांसद और टीएमसी के 19 सांसदों को और कुछ राज्यसभा सांसदों को तोड़ कर संख्या बल के पास पहुंच रही है। इन सबके बीच उसे उम्मीद थी कि तमिलनाडु की डीएमके इंडिया गठबंधन से बाहर होने के बाद उसे समर्थन कर सकती है। लेकिन राहुल गांधी तमिलनाडु पहुंचते ही डीएमके को इशारे इशारे में कहा कि , “ जो भी व्यक्ति परिसीमन बिल का समर्थन करता है वो तमिलनाडु के लोगों के साथ विश्वासघात कर रहा है। भाजपा और आरएसएस को तमिलनाडु के लोगों और उसके भविष्य पर हमला करने की अनुमति दे रहा है ,, राहुल गांधी ने तमिलनाडु की जनता के बीच ये संदेश दे दिया है की अगर डीएमके बीजेपी का साथ देती है तो ये तमिलनाडु के लोगों के साथ धोखा करेगी। अब डीएमके फंस गई है।

I.N.D.I.A गठबन्धन

53,469 Aufrufe • vor 1 Monat

राजस्थान के निकाय चुनावों में जनता ने भाजपा के खिलाफ अपना स्पष्ट जनादेश एवं संदेश दिया। अधिकांश निकायों में जनता ने भाजपा को नकारते हुए कांग्रेस पार्टी को बहुमत एवं समर्थन दिया। लेकिन बोर्ड बनाने के दौरान जिस तरह भाजपा ने सत्ता के दबाव, पुलिस-प्रशासन के दुरुपयोग, पार्षदों की हिरासत, दबाव और खरीद-फरोख्त की, उसने न सिर्फ लोकतंत्र को शर्मसार किया है, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को कलंकित करने का काम किया है। पहली बार राजस्थान में सत्ता का ऐसा तांडव देखने को मिला, जहां जनादेश के विपरित भाजपा ने बेईमानी, बेशर्मी, सत्ता और मशीनरी के दम पर अपने बोर्ड बनाए। जहां-जहां जनता ने भाजपा को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया, वहां सत्ता, धनबल एवं बाहुबल के सहारे जनादेश को पलटने की बेहद खतरनाक परंपरा स्थापित की गई। लोकतंत्र की हत्या करके जनादेश लूटा गया। ये राजस्थान के हर मतदाता का अपमान और उसके वोट के साथ अन्याय है, जिसने भाजपा को खारिज करते हुए कांग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधि को चुनकर भेजा। राजस्थान की जनता ने पिछले एक हफ्ते में सत्ता की जो साज़िशें देखी हैं, वो कभी नहीं भूलेगी। सत्ता चाहे किसी की हो, जनादेश की चोरी और लोकतंत्र का अपमान राजस्थान की कभी स्वीकार नहीं करेगा। निकाय चुनाव में भाजपा ने जिस तरह से बेईमानी की, उसके बाद इस बात की पूरी आशंका है कि पंचायत चुनाव में भी भाजपा बेईमानी और सत्ता के दुरुपयोग का ये खेल खेलेगी। भाजपा को याद रखना चाहिए...कि पुलिस के पहरे में बोर्ड तो बनाया जा सकता है, लेकिन जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। सत्ता के दम पर कुर्सी हासिल की जा सकती है, जनादेश नहीं जीता जा सकता। निकाय चुनाव में सत्ता के अहंकार में जिस तरह से लोकतांत्रिक मर्यादाओं को कुचला गया, तानाशाही की गई, उसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक मजबूती से लड़ेगी।

Govind Singh Dotasra

23,641 Aufrufe • vor 8 Tagen

यूपी के इटावा में पिछड़ी यादव जाति के कथावाचक एवं उसके साथी दलित जाति के सहयोगियों के साथ अपमानजनक दुर्व्यवहार करने के बाद जब भाजपा सवालों के घेरे में है तो अब कथावाचक के ऊपर अनर्गल, झूठे लांछन लगाकर मामले की लीपापोती करने का कुत्सित प्रयास भाजपा कर और करवा रही है और ये बेहद निंदनीय है। दलित पिछड़ा जाति के आधार पर पहले तो कथावाचक को अपमानित किया गया, उसके साथ लूट और दुर्व्यवहार किया गया और जब पूरे देश ने वो शर्मनाक वीडियो देख लिए और भाजपा सत्ता की पोल खुल गई तो अब भाजपाई मीडिया के साथ मिलकर कथावाचक को बदनाम कर रहे हैं। मीडिया भाजपा की बिकाऊ है और भाजपाई कृत्य को छिपाने और दलितों पिछड़ों को बदनाम कर रही है।

Samajwadi Party Media Cell

22,875 Aufrufe • vor 1 Jahr

जब बच्चे तक न उठा सकते आवाज़ तो कैसे कहें कि ये वतन है आज़ाद? आज भाजपा के कट्टर समर्थक भी शर्मिंदा हैं और पश्चाताप और प्रायश्चित की आग में जल रहे हैं, उनका भी तो परिवार है और परिवार में बच्चे भी हैं, और उन बच्चों का भी वर्तमान और भविष्य है। अब कोई भाजपा से भविष्य की क्या उम्मीद करे, जब वर्तमान में ही जनता भाजपा से पूरी तरह नाउम्मीद हो गई है। आज हर उम्र के लाखों लोगों ने बेख़ौफ़ होकर जिस तरह भाजपा के विरोध में एकजुटता दिखाई है, सच तो ये है कि उस जन-आक्रोश को देखकर भाजपाई और उनके संगी-साथी बेहद डर गये हैं। ये वो आम जनता है जिसे सरकार की किसी भी एजेंसी का भय नहीं है। भाजपा ख़त्म!

Akhilesh Yadav

352,021 Aufrufe • vor 2 Monaten

ये वीडियो भाजपा के उन कार्यकर्ताओं और समर्थकों को देखकर अपने ऊपर शर्मिंदा होना चाहिए, जो भाजपा राज में ‘अमृतकाल’ की बात कर रहे हैं। दरअसल भाजपा अपने भोले भाले समर्थकों के भोलेपन का भी दुरुपयोग, अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए, दुष्प्रचार के लिए करती है। वो पढ़े-लिखे लोग भी एक बार दिल पर हाथ रखकर सोचें कि साम्प्रदायिक राजनीति की घुट्टी पिलाकर भाजपा और उनके संगी-साथियों ने किस तरह उनके ज्ञान और विवेक को बंधक बना लिया है। भाजपा ऐसे लोगों को भी अपने झूठ के प्रचार की खेती में, नफ़रती व्हाट्सएप मैसेज और मिथ्या-संदेशों को आगे बढ़ाने के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करती है। सबसे पहले तो भाजपाई ही ये याद रखें कि ‘भाजपा किसी की सगी नहीं है’ और भाजपा ‘इस्तेमाली’ पार्टी है। भाजपा एक दिन उनको भी इस्तेमाल करके छोड़ देगी, तब वो कहीं के नहीं रहेंगे। भाजपा का साज़िशन फ़ार्मूला ही है : ‘पहले इस्तेमाल करें, फिर बर्बाद करें !’ भाजपा जाए तो खाद आए! किसान कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!

Akhilesh Yadav

81,025 Aufrufe • vor 1 Jahr