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बस जब भी 🥃 छोड़ने का मन होता है कोई न कोई बाधा आ ही जाती है 👇🤣🤣

29,194 просмотров • 19 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 17

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Ketan Parekh19 дней назад

😂😂😂

Фото профиля सनातनी छोरा 🙏🚩
सनातनी छोरा 🙏🚩18 дней назад

ओ भाई 🤣🤣🤣🤣

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Amitta Agarwal19 дней назад

ये क्या पागल हो गयी है

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Shashi Kant Gangwar19 дней назад

क्या पता क्या पागलपन कर रही है 😅

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मनीष सिंह19 дней назад

🤣🤣✔️

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Raj18 дней назад

😁😁😁

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Malang19 дней назад

सही मतलब निकला आज से पीना शुरू

Фото профиля पहाड़ी गर्ल 🏔️🏔️
पहाड़ी गर्ल 🏔️🏔️18 дней назад

🤣🤣

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Mr Viral19 дней назад

कुत्ता वफ़ादार होता हैं कुत्तों को क्यू बदनाम कर रहें हो

Фото профиля 𝑷𝒓𝒂𝒎𝒐𝒅 𝑺𝒊𝒏𝒈𝒉 𝑹𝒂𝒈𝒉𝒖𝒗𝒂𝒏𝒔𝒉𝒊
𝑷𝒓𝒂𝒎𝒐𝒅 𝑺𝒊𝒏𝒈𝒉 𝑹𝒂𝒈𝒉𝒖𝒗𝒂𝒏𝒔𝒉𝒊19 дней назад

उसके कर्म का फल मिल गया उसी वक्त

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Shashi Kant Gangwar19 дней назад

हाँ यार बताओ इतने पवित्र पदार्थ की बेइज्ज़ती कर रही थी 🙄

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𝑷𝒓𝒂𝒎𝒐𝒅 𝑺𝒊𝒏𝒈𝒉 𝑹𝒂𝒈𝒉𝒖𝒗𝒂𝒏𝒔𝒉𝒊19 дней назад

यह पदार्थ क्या 🙄

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Shashi Kant Gangwar19 дней назад

मदिरा

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𝑷𝒓𝒂𝒎𝒐𝒅 𝑺𝒊𝒏𝒈𝒉 𝑹𝒂𝒈𝒉𝒖𝒗𝒂𝒏𝒔𝒉𝒊19 дней назад

फिर तुमको एक मित्र का जरूरत हैं 😃

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Shashi Kant Gangwar19 дней назад

नहीं भाई कम पड़ जाती है मित्र जितने भी हैं बड़ी स्पीड में समेट देते हैं 😅

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𝑷𝒓𝒂𝒎𝒐𝒅 𝑺𝒊𝒏𝒈𝒉 𝑹𝒂𝒈𝒉𝒖𝒗𝒂𝒏𝒔𝒉𝒊19 дней назад

हमें बुला लो मैं बस देखूंगा 🙈

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Shashi Kant Gangwar19 дней назад

आ जाओ भाई किसी भी दिन मंगलवार छोड़ के।

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व्यक्ति की उपमाएं उसके चरित्र का आईना होती हैं। जिसका मन विधर्मी होता है उसकी वाणी और उपमाएँ भी विधर्मी हो जाती हैं। कोई भी राजनीतिक-प्रशासनिक पद, वो चाहे प्रधान हो या मुख्य, उसे सच्चे साधु-संतों का अपमान करने का अधिकार नहीं होता है। जिन लोगों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है वो भी इस पाप में भागीदार हैं। चुप्पी साध लेना या आपत्ति न करना भी अनुमति और सहमति का प्रतीक होता है। जब अहंकार और घमंड, महात्माओं के निरादर में एक साथ हामी भरें तो समझ लेना चाहिए कि उस राज में न तो सज्जन सुरक्षित हैं, न संस्कृति, न सभ्यता, न समाज। भाजपा का शासनकाल ‘धर्म और राज-धर्म का दोहरा आपातकाल’ है।

Akhilesh Yadav

53,482 просмотров • 8 месяцев назад