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बसपा प्रमुख मायावती अपने भतीजे पर अब पूरी तरह से हमलावर हैं। वह बता रहीं कि पार्टी से निकाले गए लोग पार्टी के नेताओं में यह बात फैला रहे कि बहन जी बहुत बीमार हैं इसलिए बड़े फैसले ट्वीट के जरिए ही ले रही हैं। आकाश को लेकर बहन... show more
10,984 次观看 • 11 天前 •via X (Twitter)
15 条评论

एक बात मैं नोटिस कर रहा हूं जैसे ही इलेक्शन आ रहे हैं नजदिकरिपोर्टर हो या इन्फ्लुएंसर सब बीएसपी कीबात कर रहे हैं जोगलत है जो पार्टी पिछले इतने सालों से चुप थी लोगों के मुद्दे पर और अभी है वो सिर्फ अपनीपार्टी केअंदर हुआ घमासान को दिखा रहे हैं मीडिया में मीडिया को चाहिए बायकॉट करे

स्वाभाविक बात भी मायावती जी को अस्वाभाविक लग रहीं है।

राजनीतिक क्षति के साथ हीं साथ, पारिवारिक रार भी बढ़ा रही है, 2017 चुनाव के समय सपा डूबी थी,ये तो खैर 😴 बहुत पैसा वारे न्यारे हो गया, रसड़ा की कुर्सी के बाद, शायद कुछ असर पड़ गया हो 🙏🏾

मायावती जी को राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए

इनका कुछ नहीं हो सकता कांसीराम साब पर तरस आता है कि बसपा में एक से एक जमीन से जुड़े नेता थे बस यही उनको नजर आयीं थीं? एक गलत फैसले ने एक पूरी जमात जिसमें ओबीसी से लेक दलित आदिवासी भी थे सबका उत्तराधिकारी छीन लिया l

आकाश आनंद के ससुर अखिलेश के साथ मिलकर अपनी राज्यसभा और उसके लिए लोकसभा का बंदोबस्त कर रहे थे। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी दबे मुंह यह बात कर रहे है।

आकाश, आलोक, आनंद, अशोक 😇

पगला गई है बुढ़िया अब घर का मैटर घर में सुलझाइए

Ab ye sab general baaten bhi inko padh kar bolna pad raha hai.

लेकिन समझ नहीं आ रहा बहन जी स्वस्थ है तो लोगों से मिलें जुले क्यों इतना सस्पेंस है

भाई ये तुलना नही करोगे क्या? कैसे अखिलेश यादव ने अपने परिवार से लड़कर समाजवादी पार्टी संभाली। उस दिन एकदम वीडियो डाल दिया था सीएम आदित्यनाथ के बचाव में।

आदरणीय बहन जी आपके फैसलों से ऐसा क्यों लग रहा है कि आप अस्वस्थ है। और ऐसा आपके प्रिय भतीजे को लग रहा है जिसे कभी अपने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।

ये क्या हो गया है बसपा में

इनके परिवार के गॉसिप में जनता को कोई दिलचस्पी नहीं है ये बहन जी खुद समझ जाएं जल्दी वही बेहतर है। अपनी पार्टी का किसी और पार्टी में विलय कर रिटायर होकर बढ़िया बुढ़ापा काटें ।

मायावती जी ने हमेशा बहुत ही परिपक्वता का परिचय दिया है, लेकिन अब उनका व्यवहार राजनीति के अनुरूप है ही है, जिस दौर में पार्टी अपने अंदरूनी मसले सार्वजनिक पटल पर आने ही न देते हो,उस दौर में पार्टी का सबसे बड़ा मुखिया 10 दिन से सिर्फ उसी पर चर्चा कर रहा है.
