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बहुत सुंदर…
45,106 görüntüleme • 2 yıl önce •via X (Twitter)
10 Yorum

SIR, किताबों का आज भी महत्व कम नहीं हुआ है। वक्त ने करवट ली है, चलन कम नहीं हुआ है। आज भी हमारी गीता और रामायण, किताबों के स्वरूप में ही विद्यमान है, यह कम नहीं हुआ है। शायर की बात और है---कुछ भी बोलते रहते हैं। तराजू खाली ना रहे--कुछ भी तोलते रहते हैं *रामेश्वर चंडक [🙏

वाह वाह ग्रेट लाइन

Bahut hi sundar sir 🙏

अति सुंदर पर आज अगर मोबाइल ना होता तो हम गुलज़ार साब को इतनी आसानी से सुन भी नहीं सकते ! और हा, किताबों की जगह सोश्यल मीडिया ने ले ली है, ristein भी मेसेज एक्सचेंज से बनते है !

No words for all times Gulzarsaab!
Appreciation also should be in Urdu: Bohot khubsurat !

Thora thora samaj meh aya Thora thora samaj meh nahi aya….par…wah wah…wah..wah..

सर लॉ की किताबें पढ़ी, एम ये कि किताबें पढ़ी, बहुत सारी मोटिवेशनल भी पढ़ी, पर आपको पढ़ना उससे भी मुस्किल लगता है । जय हो ।

Bravo! Brave! What a nice poetry about good comparison between books and internet in PC.👏👏🙏🙏

किताबें जो नही पढ़ी जाती है दर्ज़ा पास कर जाने को घोट कर रट जाने को अपने इल्म पर इतराने को और बेबस मशीन बन जाने को किताबें जो पढ़ी जाती है दुनिया देख पाने को तर्क गढ़ पाने को किसी का दर्द अपनाने को आपसी दूरिया मिटाने को और इंसान बन जाने को । "अश्विनी पाटिल"
