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बिहार जैसा ही बाढ़ गुजरात में आया होता तो?
18,725 görüntüleme • 3 gün önce •via X (Twitter)
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I’ve always admired @PrashantKishor for awakening Bihar by raising its burning issues and comparing its development with Gujarat. Why should Bihar lag behind? The step-motherly treatment of Bihar by Modi ji must end. Bihar deserves better.

आपदा किसी राज्य की पार्टी देखकर नहीं आती। जरूरत है राहत, पुनर्वास और ठोस जल-प्रबंधन की—हर जगह, हर सरकार की जवाबदेही के साथ।

Bihar copy Assam paste

पीके रंगा सियार है, बिहार में बाढ आया है एक दिन भी गया उन पीड़ितों की सुध लेने ?, इस पीके से केवल बकचोदी करा लो 😀

Ye sab #modiabind law asar hai

गुजरात की कल्पना छोड़िए, बिहार की हकीकत देखिए। बाढ़ में बिहार सरकार राहत-बचाव के लिए पूरी तत्परता से जुटी है। संकट पर राजनीति नहीं, सरकार के काम की सराहना होनी चाहिए।

Inn gawaro ko kese samjhao ge aap jo baar baar unhi ko vote de rahe hai

कहानी, गाली, बोलबच्चन से आगे बढ़ो ये सब हमलोग व्हाट्सएप्प पर भी सुन लेते हैं। आप अपना एक्शन प्लान क्लियर करो।

Bihar doesn’t trend because its suffering has been normalised.

बिहार के लोगो को इनका जुमला अवश्य याद रखना चाहिए

बिहार की जनता बाढ़ से त्राहि त्राहि कर रही है . इस गंभीर मुद्दे पर सरकार को जितना ध्यान देना चाहिए वह नहीं दिया जा रहा है. बाढ़ की समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाए

@samrat4bjp to ab iske baare m baat bhi ni krte

झूठे केसों पर भी बोलें

BJP n its clowns always does… but ultimately people are fools n dumb

बाढ़ पीड़ितों का दर्द बेचकर सियासत ये है तुम्हारा जन सुराज?

हर बिहारियों को सोचना चाहिए कि क्यों जनसुराज पार्टी बोल रही है बिहार के प्रति क्यों की ये बिहार के निवाशी है जितना इनको फिक्र बिहार के प्रति है दूसरे नेता को नहीं इसी लिए कहते है कि 1बार बिहार के वासियों इनको मौका जरूर दे बिहार के कार्य के लिए

अगर गुजरात में बिहार जैसी बाढ़ आ जाती, तो सबसे बड़ा फर्क यह होता कि वहां के नेता बाढ़ के पानी में सिर्फ टीवी कैमरों के लिए नाव नहीं चलाते, बल्कि यह हिसाब लगाते कि इस विपदा से हमेशा के लिए कैसे निपटा जाए।

बाढ़ पर सवाल उठाना आसान है समाधान देना मुश्किल। पीके सिर्फ आलोचना जानते हैं।
@BJP4India jumla party.. boycott this party

बिहार में बाढ़ पर राजनीति करने से पहले तथ्य देखिए। गुजरात हो या बिहार, प्राकृतिक आपदा पर सियासत नहीं, सरकार की तैयारी, राहत और स्थायी समाधान की बात होनी चाहिए। जनता को तुलना नहीं, काम चाहिए।

खुद कुछ नहीं कर सकते तो गुजरात बिहार की तुलना करके शोर मचाते हो।

बाढ़ जैसी आपदा को लेकर सिर्फ राजनीतिक तुलना करना आसान है, लेकिन जमीनी हालात में राहत और बचाव सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बिना पूरी जानकारी के सवाल उठाने के बजाय किए जा रहे राहत प्रयासों को देखना चाहिए।

बिहार की तरह भ्रष्टाचारी नेता और अफसर शायद गुजरात में नहीं है तभी तो उद्योगपतियों की पहली पसंद है

गुजरात में बाढ़ आती तो क्या होता—इस काल्पनिक सवाल से पहले बिहार में आई बाढ़ पर समाधान बताइए, सियासत नहीं।

बिहार में बाढ़ पर राजनीति करने से पहले तथ्य देखिए। गुजरात हो या बिहार, प्राकृतिक आपदा पर सियासत नहीं, सरकार की तैयारी, राहत और स्थायी समाधान की बात होनी चाहिए। सरकार काम कर रही है, जनता सब देख रही है।

बिहार में बाढ़ राहत कंट्रोल के लिए सुशासन सरकार युद्ध स्तर पर कार्य करें राजनीति कर रहा है

प्रशांत किशोर जी को सवाल उठाने से पहले यह देखना चाहिए कि बाढ़ जैसी आपदा में जमीन पर राहत और बचाव कितना महत्वपूर्ण है। सिर्फ तुलना और राजनीतिक बयानबाजी से पीड़ितों की मदद नहीं होती; सरकार की कार्रवाई और प्रशासनिक तैयारी पर बात होनी चाहिए।

Jumlebaji bahut log krne lge hain ab @BJP4India Kuchh to sharm kro Bihar k liye v kam kro kuchh jo bole the aaplog @AmitShah

प्रशांत किशोर जी को सवाल उठाने से पहले यह समझना चाहिए कि बाढ़ जैसी आपदा के समय राजनीति से अधिक जरूरी राहत, बचाव और प्रभावितों तक त्वरित सहायता पहुँचाना है। केवल तुलना और बयानबाजी से संकट का समाधान नहीं होता। चर्चा सरकार के राहत कार्यों, प्रशासनिक तैयारियों और जमीन पर किए जा रहे प्रयासों पर होनी चाहिए।
