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Ana Sayfaya Dön

बिहार में अभी जमीन पर विपक्ष के रूप में सिर्फ प्रशांत किशोर दिख रहे हैं जो मुद्दों पर बात कर रहे हैं। आरजेडी जिद पर है कि वह ख़ुद को नए सिरे से बदलेगी नहीं। कांग्रेस चुनाव का इंतजार करेगी। ऐसे में स्वाभाविक विपक्षी स्पेस प्रशांत किशोर ले रहे हैं।

32,001 görüntüleme • 6 ay önce •via X (Twitter)

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भारत में चुनाव प्रचार-प्रसार को समाजवाद से बाहर निकालकर पूंजीवाद में स्थापित करने वाले,भारत में पोल स्ट्रैटेजिस्ट के पोस्टर ब्वॉय...प्रशांत किशोर,जिन्हें RJD के लोग प्यार से प्रशांत किशोर पांडेय बोलते हैं,कभी लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ होली खेलने वाले प्रशांत आजकल दोनों के रंग में भंग डालने पर उतारू दिख रहें हैं,नरेंद्र मोदी से लेकर सोनिया गांधी के साथ का अनुभव लेकर वापस बिहार आयें हैं और पिछले तीन सालों से जन सुराज पार्टी को राज्य में स्थापित करने लिए गांव-गांव यात्रा कर रहें हैं,इनके लोग दावा कर रहें हैं कि इस बार वो होगा जो पिछले पैंतीस सालों में कभी नहीं हुआ,प्रशांत किशोर पिछले 15 सालों में लगभग 15 अलग-अलग अपने ठिकाने बनाए लेकिन ये उनका कॉर्पोरेट मिजाज था लेकिन अब बीते 3 सालों से राजनीतिक मिजाज के साथ बिहार में जननेता बने हुए हैं,कभी-कभार बीच में कॉर्पोरेट वाला मिजाज दिख जाता है...जिसे बिहार में आमलोग पसंद नहीं करते हैं,कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशांत किशोर ही सबकुछ हैं,आजकल प्रशांत किशोर नेतागिरी के साथ-साथ पोल खोल का काम भी कर रहें हैं,समय-समय पर बिहार के नेताओं का पोल खोलते दिख जाते हैं,प्रशांत किशोर का लक्ष्य क्या है...उसपर अभी पर्दा है,अब देखना होगा कि बिहार में अमेरिकी स्टाइल की पॉलिटिक्स कितना कामयाब होती है,प्रशांत किशोर का ठिकाना चुनाव बाद कहां होगा...उस पर नज़र रहेगी! #Bihar #PrashantKishor

SOURAV RAJ

46,053 görüntüleme • 11 ay önce

वीडियो वर्ष 2018 का है जब प्रशांत किशोर जी जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे शराबबंदी कानून पर उनका पक्ष सैद्धांतिक तौर पर तब भी यही था जो आज है! प्रशांत किशोर और दूसरे नेताओं में बुनियादी अंतर यह है कि प्रशांत जी किसी भी नीति या मुद्दे पर एक व्यापक नजरिये से बात करते हैं। राजनीति उनके लिए चुनाव की हार-जीत भर नहीं है। प्रशांत जी के संदर्भ में अक्सर सायास तौर पर यह भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती है कि क्या उन्होंने तब इसका विरोध किया था? दरअसल ज्यादातर इस तरह के प्रश्नों के मूल में एक मंशा होती है , प्रशांत जी की विश्वसनीयता पर हमला करना। चूँकि अब इस सूचनाओं के अम्बार में एक आम व्यक्ति कैसे खोजेगा कि उन्होंने अभी से 9 वर्ष पूर्व क्या बोला था। लेकिन जो लोग प्रशांत जी को पिछले वर्षों में सुन और समझ रहे होंगे उन्हें इस बात का इल्म होगा कि कभी भी प्रशांत जी कभी भी अति ( extreme) में जाकर बात नहीं करते हैं बल्कि एक व्यापक दृष्टिकोण से ही अपनी बातों को रखते आयें हैं।

Jan Suraaj Overseas

18,758 görüntüleme • 1 yıl önce