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Ana Sayfaya Dön

बिहार में जो पोलिंग बढ़ी है उस पर अशोक गहलोत का बड़ा खुलासा - सब हथकंडे अपनाए गए हैं... मेरे पास खबर आ रही है कि जो लाखों प्रवासी आ नहीं पाए उनकी लिस्टें बनकर सब जगह पहुंच गई... उनसे कहा गया कि कोई बात नहीं, आपकी हाजिरी लग जाएगी.

61,509 görüntüleme • 9 ay önce •via X (Twitter)

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र देखिए पहला संदेश यह है कि बिहार ने ऐसा गर्दा उड़ाया कि नीतीश कुमार जी दसवीं बार मुख्यमंत्री बन गए और जो दसवीं पास नहीं कर पाए उनके सितारे गर्दिश में आ गए। बिहार का पहला चुनाव था जो अमृत काल का चुनाव था और यह बड़ा Gen Z वगैरह की जो बात करते हैं अगर देखा जाए तो देश में आज कहा जाता है 35 साल से कम उम्र की आबादी के लोग दो तिहाई हैं। यानी बाय एंड लार्ज वह आबादी जिसने कि इसी दौर में अपना होश संभाला है। तो अगर आप देखें तो अमृत काल में बिहार की जनता ने एक जनादेश दिया है कि विषबेल को फैलाने का कोई भी प्रयास इस अमृत काल में अब सब होने वाला नहीं है और एक नए अमृतमय गौरवमय स्वर्णिम भविष्य की तरफ मार्ग प्रशस्त किया गया है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

32,564 görüntüleme • 9 ay önce

पश्चिम बंगाल से लौटने के पश्चात आज जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत की : बंगाल चुनाव में माहौल को लेकर पूछे प्रश्न पर प्रतिक्रिया : चार तारीख का इंतजार कीजिए। ऐसा माहौल है, अच्छी फाइट हो रही है वहां पर और पहले कहना बड़ा आसान नहीं है। चुनाव इस प्रकार का हो रहा है कि अभी भविष्यवाणी नहीं हो सकती है। देखिए वो लोग धन का इतना दुरुपयोग कर रहे हैं,इतना इलेक्शन कमीशन का दुरुपयोग कर रहे हैं। आजादी के बाद में इस बार जो इलेक्शन कमीशन की भूमिका हुई है बंगाल में, मेरी समझ में इस प्रकार का आतंक कभी देखा नहीं। SIR का आतंक अलग है। नब्बे लाख वोट कट गए, उसमें इकत्तीस लाख वोट सही पाए गए और सुप्रीम कोर्ट ने कहा अब आपको बैठाइए ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को, न्यायाधीशों को, वो टीमें बनी। वो भी इकत्तीस लाख को जांच नहीं कर पाई। आप सोच सकते हो। मेरी दृष्टि में तो चुनाव पोस्टपोन क्यों नहीं किया इलेक्शन कमीशन ने ? उनकी पहली ड्यूटी है डेमोक्रेसी बचाने के लिए। चाहे कोई जीतो, चुनाव निष्पक्ष हो, सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसी की है तो है इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया की है। उसमें कोई ज्यूडिशियरी हो,प्रशासनिक लोग हो, सरकार हो, कोई मायने नहीं रखती। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। डेमोक्रेसी तभी बचती है जब निष्पक्ष चुनाव हो और चुनाव में कोई पार्टी जीते अलग बात है। वहां पर जो सड़कों पर उतारे गए CISF के या CRPF के बंदूकें लगी बख्ताबंद गाड़ियां, तो क्या हो क्या रहा है देश के अंदर। इस रूप में वहां पर डराया गया, धमका गया और पैसे बांटे जा रहे हैं। मतलब कोई ऐसा साधन नहीं है जो उन्होंने नहीं लगाया हो। वो अलग बात है छह महीने पहले लोगों को बैठा दिया। भेज दिया पूरे देश से लोगों को,कोई छह महीने, कोई तीन महीने। उसमें हम लोग उनकी कुछ शिकायत नहीं कर सकते क्योंकि वो तो एक तरीका है चुनाव लड़ने का अलग अलग। उन्होंने अपनाया तरीका एडवांस में कैनवसिंग करने का, घर घर जाने का, मैनेजमेंट करने का। उसमें मुझे कोई शिकायत नहीं है। पर शिकायत इस बात की है बाकी जो हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, धन का दुरुपयोग हो रहा है और क्या सब काम क्या है वो, बख्तरबंद गाड़ी है, सड़कों पर घूम रही थी वहां पर। इसको हम क्या कहें। SIR के माध्यम से लोगों के वोट कट गए हैं कि लोग वोट दे नहीं पा रहे हैं। अगर वोट यहां पैदा हुआ व्यक्ति नहीं दे पाएगा तो इससे बड़ा क्राइम क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट भी यही कह रहा है। यह माहौल में हम क्या बताएं आपको कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है। कोई व्यक्ति मुझे नहीं मिला जो क्लियर कट अपनी बात कह रहा हो कि साहब ये होने जा रहा है। अगर बीजेपी माइंडेड व्यक्ति कोई मिल गया, पत्रकार भी, तो वो उस ढंग से बात कर रहा है। TMC का पत्रकार मिल गया, उस ढंग से बात कर रहा है और कांग्रेस ने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया कि भाई एक बार हमने जानबूझकर सभी सीटों पर चुनाव लड़वाए हैं क्योंकि पहले करीब तीस बत्तीस से राज किया CPM ने। पंद्रह साल से राज कर रही है आपका ममता जी। अब ये BJP घुस जाएगी वहां मान लो, जो हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, चुनाव नाम की चीज तो है ही नहीं। हथकंडे वाला कैंपेन चल रहा है। हथकंडे वाला मैनेजमेंट है चुनाव का। हथकंडे से जीतने का वहां पर षड्यंत्र चल रहा है। अगर उसमें कामयाब हो गए तो सामने आ जाएगा चार तारीख को। फेल हो गए तो ममता जी वापस मुख्यमंत्री बन जाएगी। यह मेरा मानना है। पर चुनाव, जो है इलेक्शन कमीशन के खुद के हारने का जीतने का है। अगर वो जीतेगा तो बर्बाद करके जाएगा ये इलेक्शन कमीशन बंगाल को भी और देश को भी,बर्बादी के रास्ते पर धकेल रहा है चुनाव आयोग देश का। ये मेरा आरोप उनके ऊपर है। और चुनाव आयोग हार गया तो एक सबक मिलेगा चुनाव आयोग को भी। सब कुछ उन्होंने कर लिया तब भी हम जीत नहीं पाए। आप पार्टी के सातों सांसदों के भाजपा में विलय से संबंधित प्रश्न का जवाब : मैंने कहा आपको जो हथकंडे वाले कैंपेन हैं, षड्यंत्र वाले चुनाव हो रहा है तो सोच सकते हो कुछ भी हो सकता है।

Ashok Gehlot

14,501 görüntüleme • 4 ay önce

SIR एक सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया है और यह 20–22 वर्षों के बाद हो रही है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां जनसंख्या भी सबसे अधिक है, इसलिए तुलनात्मक दृष्टि से नाम कटने वालों की संख्या यहां ज्यादा दिखाई देती है। चुनाव आयोग ने बहुत स्पष्ट रूप से पूरा विवरण दिया है कि कितने लोग मृत पाए गए, कितने लोग दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, कितनों के नाम डबल वोटर के रूप में दर्ज थे और कितने लोग अवेलेबल नहीं हैं। जो यह कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में कितने घुसपैठिए निकाले गए, तो इसे अपने-आप समझना चाहिए कि SIR की प्रक्रिया के बाद जो लोग गायब हैं या सामने नहीं आ रहे हैं, वे घुसपैठिए हैं या कौन हैं। उदाहरण के तौर पर, बिहार में 42 लाख लोगों के नाम कटे, लेकिन 42 लोग भी सामने नहीं आए। मान लीजिए उत्तर प्रदेश में 70 लाख लोग गायब हैं, तो जो लोग अवेलेबल नहीं हैं, उनके नाम पर भी इस बात की संभावना रहती थी कि कोई और आकर वोट डाल दे।जो संभावना अब समाप्त हो गई है । अब SIR की प्रक्रिया में यदि इतने लोग गायब हैं और उनमें से कोई भी दावेदार सामने नहीं आ रहा, तो यह समझा जा सकता है कि ये कौन लोग हैं? जो संदिग्ध और संदेहास्पद परिस्थितियों में वोटर लिस्ट में दर्ज थे, लेकिन वास्तविकता में उनका भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है।

Dr. Sudhanshu Trivedi

14,534 görüntüleme • 7 ay önce