Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

बिहार में लोकतंत्र की हत्या पर सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है 👇

41,816 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

Фото профиля pks_12
pks_121 год назад

कांग्रेस कौनसे वोटबैंक के लिए लड़ रही हूं सभी हिन्दुओ को सोचने की जरूरत है

Фото профиля AK
AK1 год назад

सुप्रीम कोर्ट ने अभी अभी लालटेन छाप और पंजा छाप की फाड़ दी है 🤣🤣

Фото профиля DEEPAK
DEEPAK1 год назад

सिब्बल! 🤣🤣🤣🤣 समझ जाओ चमचों फैसला किस तरफ आने वाला है 😂

Фото профиля Premium
Premium1 год назад

Try it. You'll never look back.

Фото профиля prince kumar
prince kumar1 год назад

Evm band kijiye

Фото профиля ranjeet kumar
ranjeet kumar1 год назад

सुप्रीम कोर्ट याचिका खारिज कर दिया है

Фото профиля Yashraaj
Yashraaj1 год назад

जब से देश स्वतंत्र हुआ तब से लोकतंत्र की हत्या ही तो होती आई है।

Фото профиля Shiva India
Shiva India1 год назад

This was Congress lok tantar...What was Sonia Gandhi?

Фото профиля Dharminder Dhillon
Dharminder Dhillon1 год назад

Sab modi ke ha court my foot

Фото профиля पाकिस्तान का काल
पाकिस्तान का काल1 год назад

सिब्बल हुबहू मेरे लौड़े जैसा है

Похожие видео

Breaking News 🚨 सुप्रीम कोर्ट का केंद्र-चुनाव आयोग को नोटिस.... मुख्य चुनाव आयुक्त को आजीवन किसी भी मुकदमे की छूट पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा। क्या राष्ट्रपति से भी ऊपर है चुनाव आयुक्त। मोदी सरकार ने चुनाव आयुक्तों को यह आजीवन संजीवनी दी है, जिसे जनहित याचिका से सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया है। यह खुली छूट देने जैसा है। संसद को ऐसा कानून बनाने का अधिकार कैसे हो सकता है। मसले पर संवैधानिक बहस छिड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून की समीक्षा करने की बात कही है। यह आजीवन कानूनी ढाल लोकतंत्र और चुनावों के लिए बेहद घातक है। #SupremeCourt #Democracy #ElectionCommission

𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣

35,825 просмотров • 7 месяцев назад

बड़ी ख़बर 🔥 लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला का सारा झूठ महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में उघाड़ कर रख दिया। तृणमूल के 20 बागी सांसदों को बैक डेट में नोटिस देना पड़ा ओम बिड़ला को। सुप्रीम कोर्ट ने भी तृणमूल के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने ओम बिड़ला के वकीलों से पूछा है कि तय समय सीमा में नोटिस जारी क्यों नहीं किया? 19 जून को ही तृणमूल ने ओम बिड़ला के समक्ष बागी सांसदों के खिलाफ याचिका दे दी थी। बीजेपी और लोकसभा अध्यक्ष इस पर कोई कार्रवाई नहीं चाहते थे। आज कोर्ट में वकील ने 25 अगस्त की तारीख का नोटिस पेश किया। 2 महीने लटका कर रखने के बाद अचानक 25 अगस्त को ही नोटिस पर हस्ताक्षर क्यों किए गए? सुप्रीम कोर्ट का दबाव बनने के बाद नोटिस सामने आया। बीजेपी ने पूरा खेल रचा है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ने लोकतंत्र की हत्या की।

𝙈𝙪𝙧𝙩𝙞 𝙉𝙖𝙞𝙣

62,099 просмотров • 3 дней назад