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भाई को चारा बनाने की रिहर्सल करते हुए मासूम बच्चे!
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ब्रिगेडियर राठौर ने सही कहा था टाईम बॉ#म है सा#ले

मुहम्मद की औलादों की कुरबानी के नाम पर काफिरों का सर तन से जुदा, बेहतर है एक ही बार में इनकी कुरबानी ले ली जाए, कहानी खत्म

बच्चे नहीं हैं, टाइम बॉम्ब हैं साले 👉🏼💣💥💯

कट्टरपंथ की शुरुआत घर में ही होती है, फिर मदरसा विश्वविद्यालय में कट्टरपंथ की पड़ाई होती है मदरसा के पढ़े-लिखे लोग उत्पात, आगजनी, लूट, पत्थरबाजी, बलात्कार, हत्या, मानव बम आदि के लिए तैयार रहते हैं कोई जीने-और-जीने-देने की नीति नहीं दुनिया भर के मदरसे सभ्यता के लिए खतरा हैं

भाई @grok कभी यहां पर भी ध्यान दे लो। फिर कहोगे की विशेष समुदाय आतंक को बढ़ावा नही देता। शायद आप नहीं समझ पाओगे क्योंकि तुम इंसान नही हो

सरकार ही निकम्मी है कठोर निर्णय लेना ही नहीं चाहते

Aur jab koi bolta hai ki Desh k gaadaro ko.... Goli maro saalo ko... Toh bahut log bilakh jate hain... Desh se upar kuch hai kya?? Chahe koi kitab ho ya Banda ho.... Desh se gustakhi chal jati hai aaram se

जो कौम अपने बच्चों के मन में ऐसी बातें सिखा रही हों उनका भविष्य कैसा होगा, यह तो सभी को मालूम है। ऐसा क्रूर खेल कब तक चलेगा।

@GautamKhattar What is going on
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नाम - मोहम्मद शराफत निवासी - मुज़फ्फरनगर परिवार - 2 बेगम, 13 बच्चे उम्र - 56 वर्ष (लगभग) अपराध - 6 साल की मासूम से दरिंदगी 5 वक्त के नमाजी शराफत ने कमीनीयत की सारी हदें पार करते हुए 6 साल की मासूम को सिर्फ इसलिए रौंद डाला क्यूंकि रमजान में उसकी दोनों बेगम हमबिस्तरी नहीं करने दे रहीं थीं पुलिस ने फिलहाल शराफत को लंगड़ा कर दिया है लेकिन सवाल अब भी वही कि अगर महीना पवित्र है तो सोच दरिंदगी की कैसे ?
Deepak Sharma
265,511 views • 1 year ago
