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भाई ने साहब के झूठ की पोल खोल दीं?
11,648 views • 10 days ago •via X (Twitter)
9 Comments

“नाराज़ फूफा जी” से लेकर “दिमागी नक्सल” तक… “मुजरा” से “मंगलसूत्र” तक… “कांग्रेस की विधवा” से लेकर “₹50 करोड़ की गर्लफ्रेंड” तक… “जर्सी गाय” से लेकर “हाइब्रिड बछड़ा” तक… शब्दों का ऐसा विराट संग्रह देखकर लगता है कि देश में शब्दकोश नहीं, राजनीतिक गालीकोश तैयार हो रहा है। विडंबना देखिए— पद है प्रधानमंत्री का, मंच है देश का, और भाषा ऐसी जैसे कोई चुनावी चौपाल का सबसे उग्र वक्ता माइक्रोफोन पर कब्ज़ा करके बैठा हो। विरोधी दलों पर निशाना साधना राजनीति है, लेकिन हर असहमति को तंज, अपमान और व्यक्तिगत कटाक्ष में बदल देना राजनीति का स्तर नहीं, पतन का स्तर है। और फिर सवाल भी यही है— क्या 140 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री की आवाज़ में देश को गरिमा सुनाई देनी चाहिए या तंज? सत्ता आती-जाती रहती है। पद भी स्थायी नहीं होता। लेकिन प्रधानमंत्री के शब्द इतिहास में दर्ज होते हैं। इतिहास के पन्नों पर क्या दर्ज होना चाहिए—नीति और नेतृत्व, या उपमाओं और अपमानों का संग्रह?

मतलब करो भाई, इन्ही सब के बलबूते तो अंधभक्तों की ज़िंदगी चलती है अगर तुम ऐसे साहब की सारी पोल खोलोगे तो अंधभक्तों के पास अपने Pawpa को डिफेंड करने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं।

झूठों की सरकार जुमले बाजो की सरकार पुरे कार्यकाल में कुछ नहीं किया पिछली सरकार के किए हुए कार्यों का क्रेडिट लेते रहते हैं। जेन जी लाओ देश बचाओं।

Chal ne labde

Timeline of #UPI- Its the 'India stack' component made during ManmohanSingh's tenure made the UPI possible. NPCI, foundation of Aadhar, IMPS launch all done under UPA.

Aadatan hai

तो 2014 तक किया कर रहा था मनमोहन सिंह

@GautamBuddvddl Sun chuze.

Sir Rahul Gandhi versus Modi ji ka debate kriya vaj uthao
