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भक्ति के लिए भाव का होना ही पर्याप्त है।

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यह है हमारी पूरी स्पीच जिसमे हमने संत समाज के त्याग और पराक्रम तथा बलिदान को महत्व दिया है ना की कोई पोलिटिकल पार्टी के नेता को, जब “दलित हिंदू समाज” के साथ अन्नाय होता है तो उनके राइट्स के लिए हमने सदैव निःस्वार्थ भाव से कार्य किया है, जब “आदिवासी हिंदू समाज” के साथ अन्नाय होता है तो उनके राइट्स के लिए भी हमने सदैव निःस्वार्थ भाव से कार्य किया है और जब हमारे सामने “सामान्य हिंदू समाज” के साथ अन्नाय होगा तब भी हम उसी भाव से कार्य करेंगे जिस भाव से हम SC/ST/OBC हिंदू समाज के लिए कार्य करते आ रहे है, हमारे लिए उनका हिंदू होना ही पर्याप्त है, जातिवाद किसी संत महात्मा या हिंदुओं ने नहीं किया जातिवाद हमेशा नेताओ ने ही किया है।

Kajal HINDUsthani

48,384 views • 4 months ago