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भाग्यरेखाएँ ।

14,844 views • 19 days ago •via X (Twitter)

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आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का कृत्य किया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है, उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं, ये उनके व्यवहार में साफ दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध अपनी मर्यादा की सीमाओं को लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है। हम लगातार कहते आए हैं कि राहुल गांधी आज रचनात्मक विपक्ष की बजाय अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय लोकतंत्र में कुछ पद ऐसे होते हैं, जो किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे देश की जनता की आस्था, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। आज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है। हमने भी वर्षों तक विपक्ष में रहकर अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। जिन मुद्दों को लेकर हमारे छात्र विषय रख रहे हैं, सरकार उस पर चर्चा करना चाहती है। राहुल गांधी ने स्वयं जो शर्तें रखीं, सरकार ने उन्हें भी स्वीकार किया। लेकिन जब संवाद और समाधान का अवसर आया, तो वे अपनी ही शर्तों और अपने ही रुख से पीछे हट गए। यह उनके राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। - माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री Nitin Nabin जी

Sambit Patra

150,503 views • 3 days ago

आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस प्रकार का कृत्य किया है, वह न केवल अशोभनीय है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भी विपरीत और अत्यंत निंदनीय है। नेता प्रतिपक्ष जिस गरिमा का पद है, उस पद को भी राहुल गांधी गंभीरता से नहीं लेते हैं, ये उनके व्यवहार में साफ दिखाई दिया। लोकतंत्र में विरोध करना प्रत्येक विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर होता है। जब विरोध अपनी मर्यादा की सीमाओं को लांघ देता है, तब वह अराजकता का रूप ले लेता है। हम लगातार कहते आए हैं कि राहुल गांधी आज रचनात्मक विपक्ष की बजाय अराजकता के प्रतीक बन कर रह गए हैं। संसदीय लोकतंत्र में कुछ पद ऐसे होते हैं, जो किसी एक दल के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के होते हैं। प्रधानमंत्री केवल किसी राजनीतिक दल के नेता नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि हैं। वे देश की जनता की आस्था, विश्वास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास की ओर जिस प्रकार से माहौल को तनावपूर्ण और अव्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया, वह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और परंपराओं के प्रति असम्मान का परिचायक है। आज की घटना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत के राजनीतिक इतिहास का एक काला दिन है। हमने भी वर्षों तक विपक्ष में रहकर अपनी भूमिका निभाई है, लेकिन कभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं का उल्लंघन नहीं किया। जिन मुद्दों को लेकर हमारे छात्र विषय रख रहे हैं, सरकार उस पर चर्चा करना चाहती है। राहुल गांधी ने स्वयं जो शर्तें रखीं, सरकार ने उन्हें भी स्वीकार किया। लेकिन जब संवाद और समाधान का अवसर आया, तो वे अपनी ही शर्तों और अपने ही रुख से पीछे हट गए। यह उनके राजनीतिक आचरण में अस्थिरता और अपरिपक्वता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। - श्री Nitin Nabin

BJP

306,229 views • 3 days ago

ये वीडियो 18 जुलाई का है जब पुलिस सोनम वांगचुक को उठाकर अस्पताल ले गई थी जिस व्यक्ति को जंतर मंतर पर टॉयलेट जाने के लिए चार लोगों के सहारे की ज़रूरत पड़ती थी, वो अस्पताल पहुंचते ही राहुल गांधी के अंदाज़ में एक हाथ जेल में डाल कर पुलिस से लड़ने लगा मैं पहले दिन से कह रहा हूँ कि सोनम का असली अनशन तो अस्पताल पहुँच कर शुरू हुआ जहाँ तीन दिन भी वो भूख बर्दाश्त नहीं कर पाए और धर्मेंद्र प्रधान का नाम लेना ही छोड़ दिया अकेले में सोनम का पुलिस से बोलने का तरीक़ा देखिये और पब्लिसिटी वीडियो में इनकी बनावटी विनम्रता से तुलना कीजिए भारतीय राजनीति के मंच पर दूसरे केजरीवाल का पर्दापण हो चुका है, ये चिंता की बात है

ANUPAM MISHRA

40,215 views • 3 hours ago

JSSC-CGL मामला वर्तमान में हाईकोर्ट में subjudice है और माननीय न्यायालय ने अपना फैसला रिज़र्व कर रखा है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री जी का आज मंच से यह कहना कि ‘JSSC-CGL पूरी तरह पाक साफ है और हम जल्द ही इसकी नियुक्तियाँ देंगे’, न्यायिक प्रक्रिया के प्रति असम्मान दर्शाता है। संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमंत्री ऐसा बयान दे तो ये पूरी तरह से हास्यास्पद है। जब मामला अदालत के विचाराधीन हो, तब एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री को ऐसी बयानबाज़ी से बचना चाहिए। सरकार का दायित्व न्यायालय की मर्यादा बनाए रखना है, न कि बेतुकी बयानबाजी कर निर्णय को प्रभावित करने की कोशिश करना.. हेमंत जी के बयान से ऐसा प्रतीत होता है मानो उन्हें कोर्ट का फैसला पहले से ही पता हो और उनसे ही पूछ के फैसला लिखा जाएगा। क्या यही पारदर्शिता और संवैधानिक आचरण है जिसकी उम्मीद राज्य की जनता अपनी सरकार से करती है? हम पुनः स्पष्ट करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी और अभ्यर्थियों का संघर्ष न्याय और पारदर्शिता के लिए है। उक्त मामले में फैसला आने से समय से पहले दिया गया बयान न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास है। Hemant Soren Narendra Modi B L Santhosh BJP BJP JHARKHAND Jagat Prakash Nadda Amit Shah PMO India

Babulal Marandi

43,546 views • 7 months ago

मेरे शर्ट के नीचे फटी बनियान हैं आपके स्टूडियो में मै इज्जत ढक के आया हु - नीट टॉपर हर्ष दुबे हमने परमिशन मांगी इस सरकार ने नहीं दिया और आतंकियों को परमिशन एयरपोर्ट पर जाके पहुंचाया जाता है इस देश में 90% बच्चे आत्म हत्या करते है वो सामान्य वर्ग के होते हैं NEET पेपर लीक में जो मरे हैं वो अधिकतर सामान्य वर्ग के है कोई नहीं बात करना चाहता इसपर मेरे साथ पढ़ने वाले जिनके बाप हॉस्पिटल हैं बड़ी बड़ी नौकरी थी उनका सिलेक्शन आधे आधे नंबर पर हुआ आरक्षण केवल जाति आधारित नहीं राज्य अनुसार भी है इस लेवल तक आरक्षण को सिस्टम में घुसा दिया गया है 560 में यूपी बिहार के बच्चों का सिलेक्शन नहीं होगा लेकिन 530-540 में अलग राज्य के बच्चों का सिलेक्शन हो जाएगा अब बताओ सवर्णों तुम्हारे अंदर शर्म की पानी है कि नहीं कब हम बोलेंगे ?

ब्राह्मण साहब 🚩🐯

256,851 views • 1 day ago