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भाजपा दफ्तर से मिली स्क्रिप्ट पर न्यूज प्रोग्राम चलाने वाली Chitra Tripathi जी जब आप पूर्वाग्रह से मुक्त होकर पत्रकारिता करेंगी तभी आपको तस्वीर साफ साफ दिखेगी उम्मीद है आपको तस्वीर दिखने लगी होगी

41,559 просмотров • 7 дней назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

Фото профиля Anshuman Singh
Anshuman Singh7 дней назад

@chitraaum दीदी को सिर्फ गोरखपुर " स्पेन 🇪🇸 " दिखता है उसके आगे कुछ नहीं !

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Mahi beuty7 дней назад

@chitraaum जब एक पत्रकार सपा के काले कारनामे को एक्सपोज करता है तो सपा को दर्द होने लगता है कारण स्पष्ट है सपा के काले कारनामे जनता के बीच जा रही है

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Ankit Yadav7 дней назад

@chitraaum

Фото профиля Neetesh Pandey 🇮🇳
Neetesh Pandey 🇮🇳7 дней назад

@chitraaum

Фото профиля 🇮🇳 Indian 🇮🇳
🇮🇳 Indian 🇮🇳7 дней назад

@chitraaum हाँ नेता जी को कोई लतिया के भी सत्ता लिया था वो भी बतियाना था 😂

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ANAND YADAV7 дней назад

@chitraaum एक नंबर की दलाल है यह 😄😄

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Ajay Maurya7 дней назад

@chitraaum Abe galibaj tu phir aa gya .

Фото профиля Vijay Kumar
Vijay Kumar7 дней назад

@chitraaum पत्रकारिता पर सवाल उठाने से सवालों के जवाब नहीं मिल जाते। चित्रा त्रिपाठी का कार्यक्रम नियमित रूप से अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों और पक्ष-विपक्ष के तर्कों पर बहस कराता है। तस्वीर साफ है, जिसे सवाल पसंद नहीं आते, वह अक्सर पत्रकार पर ही सवाल उठाने लगता है।

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Pankaj Mahajan7 дней назад

@chitraaum Dekh sapai bitiya ghabrai.. ye bhi likh Lo or Esa karna eske baap ki tag line bhi chipka do ladke h Galti ho jate h. Are BSs karo BSs yatra or Khuch or

Фото профиля Jai bharat...
Jai bharat...7 дней назад

@chitraaum Muzaffarnagar,Sambhal me hamaare Hindu jaat gurjar samaj ko khstam karwanne wala se bach ke rahiyo-@BoltaHindustan

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जी न्यूज की महिला पत्रकार राज लवीना इनका काम सिर्फ मुसलमानो के खिलाफ रिपोर्टिंग करना होता है, मुसलमानो से इनका सवाल है कि ईरान को लेकर भारत मे प्रदर्शन क्यों कर रहे हो , लेकिन इन मैडम को नहीं पता जब बांग्लादेश मे दीपू दास पर जुल्म किया गया तो पूरे भारत मे प्रदर्शन हुआ था , लेकिन आप सवाल सिर्फ मुसलमानो से कर रही हो , ईरान मे इंसानियत पर हुए जुल्म के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे है , ठीक वैसे ही जैसे बांग्लादेश के दीपू पर हुए जुल्म के खिलाफ लोगो ने किया था , और ये इंसानियत की पॉलिसी है की जब जुल्म होता है उसके खिलाफ पूरी दुनिया मे आवाज उठाई जाती है , लेकिन आपको पत्रकारिता तो करनी नहीं सिर्फ हिन्दू मुस्लिम करना है , आपको कहा इंसानियत से मतलब होगा , आपकी नज़र मे सब ठीक है, 180 लड़कियों को शहीद कर दिया गया सब ठीक है, गजब पत्रकारिता करते हो Lavina जी ,

Nargis Bano

22,418 просмотров • 6 месяцев назад

संदीप दीक्षित जी, आपने जयप्रकाश अग्रवाल जी के ऊपर जो टिप्पणी की है, वह आपको शोभा नहीं देती है। आप दिल्ली में नजर तक नहीं आते हैं। लोकसभा चुनावों में जब आपको चांदनी चौक से टिकट चाहिए था, तभी ही आप नजर आए थे। आप कार्यकर्ताओं के फ़ोन तक नहीं उठाते हैं। जयप्रकाश अग्रवाल जी को पूरी दिल्ली प्यार करती है और 80 साल उम्र में भी वह आपसे दस गुना ज़्यादा दिल्लीवालों और कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते हैं। चुनाव के दौरान आपने चांदनी चौक से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार पुनर्दीप साहनी के कहने पर अपनी बहन लतिका द्वारा जगत सिनेमा के मालिक के ऊपर मेरा चुनावी कार्यालय हटाने के लिए दबाव डाला था, क्या यह बात सच नहीं है? संदीप जी, आपको ख़ुद के अंदर झांकना चाहिए। जयप्रकाश अग्रवाल जी के ऊपर कमेंट करना आपको शोभा नहीं देता है।

MUDIT AGARWAL

38,389 просмотров • 1 год назад

राजकुमार भाटी जी ने चित्रा त्रिपाठी को क्यों सैल्यूट किया। चित्रा त्रिपाठी: "9 साल तक आप कहाँ थे? तब याद नहीं था कि जौहर यूनिवर्सिटी अवैध बनी है?" भाजपा प्रवक्ता के.के. शर्मा: "यह विश्वविद्यालय गरीबों की जमीन हड़पकर बनाया गया है। चित्रा जी, आपको इससे इतना भावनात्मक रूप से जुड़ने की ज़रूरत नहीं है।" चित्रा त्रिपाठी: "अगर विश्वविद्यालय से भावनात्मक जुड़ाव नहीं होगा, तो फिर किससे होगा? मुझे लगता है कि बुलडोजर की कार्रवाई भी बेलगाम नहीं होनी चाहिए।" भाजपा प्रवक्ता के.के. शर्मा: "चित्रा जी, देश आपकी भावनाओं से नहीं चलता।" चित्रा त्रिपाठी: "मुझे विश्वविद्यालयों से भावनात्मक लगाव है, क्योंकि मैं अपने विश्वविद्यालय की टॉपर रही हूँ।" भाजपा प्रवक्ता केके शर्मा : 😱😱😱😱 Rajkumar Bhati Chitra Tripathi

Shyam Yadav SP

123,834 просмотров • 2 месяцев назад

आपकी बात से साफ है कि यह स्थिति आपको मानसिक रूप से भारी लग रही है। 40 की उम्र के आसपास शादी न हो पाना कई बार सिर्फ “घरवालों की वजह से” नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अलग-अलग कारण मिलकर काम करते हैं—परिवार की सोच, जिम्मेदारियाँ, रिश्ते न आना, या फिर आपकी अपनी प्राथमिकताएँ और परिस्थितियाँ भी। सबसे पहले एक बात ज़रूरी है: शादी का फैसला अंततः आपका भी होता है, सिर्फ घरवालों का नहीं। अगर आपको सच में शादी करनी है, तो अब आपको “इंतज़ार” से आगे बढ़कर कुछ ठोस कदम सोचने होंगे। आप कुछ व्यावहारिक रास्ते देख सकती हैं: आप घरवालों से सीधी और शांत बातचीत करें—यह पूछें कि असली रुकावट क्या है: रिश्ता नहीं मिल रहा, या वे टाल रहे हैं, या उनकी कोई चिंता है। जब कारण साफ होगा तभी समाधान निकलेगा। अगर रिश्ते नहीं आ रहे, तो आप खुद भी पहल कर सकती हैं—रिश्ते देखने वाले प्लेटफॉर्म, परिचितों का नेटवर्क, या भरोसेमंद मैट्रिमोनियल सेवाएँ। अगर घरवाले भावनात्मक या सामाजिक कारणों से रोक रहे हैं, तो धीरे-धीरे अपनी financial और personal independence बढ़ाना जरूरी हो जाता है, ताकि फैसले आपके हाथ में भी हों। और एक अहम बात—अगर उम्र को लेकर समाज क्या सोचेगा यह दबाव है, तो उसे बहुत ज्यादा वजन देना जरूरी नहीं है। सही जीवनसाथी उम्र से ज्यादा समझ, सम्मान और compatibility पर मिलता है।

RIYA🌸🌸

38,943 просмотров • 3 месяцев назад

आज हम आपको बताएंगे कि देश किस प्रकार तंगहाली और बदहाली से जूझ रहा है पहली तस्वीर यह तस्वीर सुमन की है. सुमन उत्तर प्रदेश के एटा की रहने वाली थी, डेढ़ साल पहले इनके पति की मौत हो गई सुमन अपने 6 बच्चों और एक बूढ़ी सास के साथ रहती थी. उसने घर चलाने के लिए 50 हज़ार का कर्ज़ लिया. एक दिन जब वह रोटी बनाने के लिए गई तो देखा कि जितना आटा है, उसमें सिर्फ 6 रोटियां बनेगी, लेकिन खाने वाले 8 लोग थे जिसके बाद सुमन ने सल्फास खाकर अपनी जान दे दी दूसरी तस्वीर यह तस्वीर झांसी में रहने वाले राम किशन की है, जो एक किसान थे. अपने बेटी की शादी के लिए उन्होंने कुछ कर्ज़ लिया था, जिसको वह चुका नहीं पाए. हालात संभलते न देखकर उन्होंने अपनी जान दे दी तीसरी तस्वीर यह तस्वीर एक युवा दंपत्ति की है, जिनका नाम संचिता और हरीश है. हरीश ने MBA किया था, उसकी नौकरी चली गई. उसने कई जगहों पर नौकरी के लिए प्रयास किया, लेकिन नौकरी नहीं मिली इससे निराश होकर हरीश ने फांसी लगाकर जान दे दी, जब यह ख़बर उसकी पत्नी को मिली तो उसने भी अपनी जान दे दी ये इस देश की हकीकत है, जहां हजारों लोग बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण मरने को मजबूर हैं

Supriya Shrinate

39,152 просмотров • 1 год назад

एक आदमी बेखौफ होकर बैठा है, पीछे दीवार पर नरेंद्र मोदी और ओम बिरला की तस्वीर लगी है। वो आदमी नेता विपक्ष और 25 सांसदों को गोली मारने की धमकी देता है। उसके खिलाफ न FIR हुई है और न ही कोई गिरफ्तारी हुई है। मैं ओम बिरला जी से पूछना चाहती हूं कि ये शख्स खुद को आपका समर्थक बता रहा है- क्या आपको कोई आपत्ति नहीं है? देश के गृहमंत्री क्या कर रहे हैं? आज सत्ता की चुप्पी पर सवाल उठना चाहिए। जब देश के संसदीय कार्य मंत्री और प्रधानमंत्री अनाप-शनाप कहते हैं, तब ऐसे लोगों की हिम्मत बढ़ती है कि वो लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए सांसदों की हत्या की बात करें। : AICC- सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन Supriya Shrinate जी 📍 दिल्ली

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