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‘भूरा बाल’ साफ करने के स्वप्नदोष वालों के नाम संदेश
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जय रणवीर ⚔️

@yadavtejashwi ग़लती नहीं करो। रेलाई सुन लो।

ये जातिवादी राजनीति देश को बर्बाद करने की तरफ ले जा रही है नेताओ का क्या उनको तो वोट चाहिए किसी भी कीमत पर ऐसे नेता हिन्दू समाज को खोखला कर रहे है इनको जाती के आधर पर बात कर

भूरा बाल साफ़ करने के चक्कर में कहीं तेजस्वी का ही भोसड़ा ना हो जाए । लालू का तो हो ही गया है ।

भूरा बाल साफ करो" ये नारा सिर्फ़ विरोध नहीं था, बल्कि एक पूरी सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देने वाला एलान था। "भूरा" शब्द बना था बिहार की चार प्रमुख सवर्ण जातियों के नामों से: भ - भूमिहार ऊ - उर्फ़ ब्राह्मण रा - राजपूत का - कायस्थ ये वो जातियाँ थीं जिनका दशकों तक ब्यूरोक्रेसी, राजनीति और शिक्षा पर एकाधिकार रहा। 1990 के दशक की शुरुआत में लालू यादव ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू कर OBC को आरक्षण दिलाया। इसी दौर में "भूरा आंदोलन" उभरा जिसका मक़सद था सत्ता में सवर्ण वर्चस्व को खत्म करना। "भूरा बाल साफ करो" का मतलब था सत्ता, नौकरियों और संस्थानों से सवर्ण एकाधिकार को हटाना। लालू ने इसे "सामाजिक न्याय की लड़ाई" बताया, विरोधियों ने इसे "जातिवाद का ज़हर" कहा। इस आंदोलन ने राजनीति का चेहरा बदला: OBC, दलित, मुसलमानों का गठजोड़ बना सवर्ण वोट बैंक अलग हुआ RJD उभरी, कांग्रेस और BJP को बड़ा झटका लगा लेकिन सवाल भी खड़े हुए: क्या यह आंदोलन सामाजिक बराबरी लाया? या फिर जातिगत ध्रुवीकरण और सत्ता की नई जातियों का कब्जा? आज भले ही नारा गुम हो गया हो, लेकिन "भूरा आंदोलन" ने बिहार की राजनीति में यह बात तय कर दी कि सत्ता अब सिर्फ़ वंश या वर्ण से नहीं, संघर्ष से मिलेगी। और आज 2025 में भी… जब कोई सामाजिक न्याय की बात करता है, तो कहीं न कहीं "भूरा आंदोलन" की गूंज फिर सुनाई देती है।

फिर से ऐसे असंवैधानिक वाक्य के साथ उकसावा दिया जा रहा है, कहां हैं संविधान के रक्षक?अब खतरे में नहीं है संविधान? लालटेन पार्टी द्वारा! भूरा बाल साफ करने का क्या मतलब? सरकार संज्ञान लेगी? लगता तो है!

भूरा बाल साफ करने वाले को 64 मुट्ठो की सलामी बनता है?

अजित भाई भूरा बाल साफ हो ही रहा है। बिहार में उनके लिए रोजगार और व्यवसाय के अवसर समाप्त प्रायः हो चुके हैं। टीचर की 3 लाख नौकरी भी मिलती है तो जेनरल के 56% पुरुषों और 48% महिलाओं की सीटें बाहर राज्य वाले भर देते हैं। ऐसे में लोग पलायन ही करेंगे और भुराबाल साफ होता रहेगा।

कितने गाज़ी आए कितने गाज़ी गए लालू का लटकन कभी भी सत्ता में नहीं आ पाएगा

बिहार में लालटेन की वापसी किसी कीमत पे नहीं होनी चाहिए।
