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‘भूरा बाल’ साफ करने के स्वप्नदोष वालों के नाम संदेश

63,114 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 10

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शांडिल्य1 год назад

जय रणवीर ⚔️

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Ritesh Ranjan1 год назад

@yadavtejashwi ग़लती नहीं करो। रेलाई सुन लो।

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amrendra Patel1 год назад

ये जातिवादी राजनीति देश को बर्बाद करने की तरफ ले जा रही है नेताओ का क्या उनको तो वोट चाहिए किसी भी कीमत पर ऐसे नेता हिन्दू समाज को खोखला कर रहे है इनको जाती के आधर पर बात कर

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Mission Lotus Bihar -🪷1 год назад

भूरा बाल साफ़ करने के चक्कर में कहीं तेजस्वी का ही भोसड़ा ना हो जाए । लालू का तो हो ही गया है ।

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Rudra Singh Rajput1 год назад

भूरा बाल साफ करो" ये नारा सिर्फ़ विरोध नहीं था, बल्कि एक पूरी सामाजिक व्यवस्था को चुनौती देने वाला एलान था। "भूरा" शब्द बना था बिहार की चार प्रमुख सवर्ण जातियों के नामों से: भ - भूमिहार ऊ - उर्फ़ ब्राह्मण रा - राजपूत का - कायस्थ ये वो जातियाँ थीं जिनका दशकों तक ब्यूरोक्रेसी, राजनीति और शिक्षा पर एकाधिकार रहा। 1990 के दशक की शुरुआत में लालू यादव ने मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू कर OBC को आरक्षण दिलाया। इसी दौर में "भूरा आंदोलन" उभरा जिसका मक़सद था सत्ता में सवर्ण वर्चस्व को खत्म करना। "भूरा बाल साफ करो" का मतलब था सत्ता, नौकरियों और संस्थानों से सवर्ण एकाधिकार को हटाना। लालू ने इसे "सामाजिक न्याय की लड़ाई" बताया, विरोधियों ने इसे "जातिवाद का ज़हर" कहा। इस आंदोलन ने राजनीति का चेहरा बदला: OBC, दलित, मुसलमानों का गठजोड़ बना सवर्ण वोट बैंक अलग हुआ RJD उभरी, कांग्रेस और BJP को बड़ा झटका लगा लेकिन सवाल भी खड़े हुए: क्या यह आंदोलन सामाजिक बराबरी लाया? या फिर जातिगत ध्रुवीकरण और सत्ता की नई जातियों का कब्जा? आज भले ही नारा गुम हो गया हो, लेकिन "भूरा आंदोलन" ने बिहार की राजनीति में यह बात तय कर दी कि सत्ता अब सिर्फ़ वंश या वर्ण से नहीं, संघर्ष से मिलेगी। और आज 2025 में भी… जब कोई सामाजिक न्याय की बात करता है, तो कहीं न कहीं "भूरा आंदोलन" की गूंज फिर सुनाई देती है।

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Raj Ratna premi1 год назад

फिर से ऐसे असंवैधानिक वाक्य के साथ उकसावा दिया जा रहा है, कहां हैं संविधान के रक्षक?अब खतरे में नहीं है संविधान? लालटेन पार्टी द्वारा! भूरा बाल साफ करने का क्या मतलब? सरकार संज्ञान लेगी? लगता तो है!

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आज की हलचल1 год назад

भूरा बाल साफ करने वाले को 64 मुट्ठो की सलामी बनता है?

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Ravi Prakash Singh1 год назад

अजित भाई भूरा बाल साफ हो ही रहा है। बिहार में उनके लिए रोजगार और व्यवसाय के अवसर समाप्त प्रायः हो चुके हैं। टीचर की 3 लाख नौकरी भी मिलती है तो जेनरल के 56% पुरुषों और 48% महिलाओं की सीटें बाहर राज्य वाले भर देते हैं। ऐसे में लोग पलायन ही करेंगे और भुराबाल साफ होता रहेगा।

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Sweta Srivastava1 год назад

कितने गाज़ी आए कितने गाज़ी गए लालू का लटकन कभी भी सत्ता में नहीं आ पाएगा

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Rohit Singh1 год назад

बिहार में लालटेन की वापसी किसी कीमत पे नहीं होनी चाहिए।

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