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भारत के सच्चे मुसलमान ने रोजे में खेली होली कहा होली खेलने से हमारा न रोजा खराब होगा न नमाज परेशानी बस मदरसा छाप अब्दुल और मौलाना को है

238,948 просмотров • 1 год назад •via X (Twitter)

Комментарии: 11

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सौरभ श्रीवास्तव🇮🇳🇮🇳🙋‍♂️🤝1 год назад

सही कहा कट्टर पंथियों के वजहसे ऐसे मुसलमान भी बदनाम हो जाते हैं जो हिन्दू त्योहार से परहेज नहीं करते बड़ा दिल करके हंसी खुशी होली खेलते हैं रंग🎨🎨🎨🎨 के साथ साथियों🙋‍♂️

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SDeshmukh1 год назад

सच्चे मुसलमान कितने होगे?🤔

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Amrendra Bahubali 🇮🇳1 год назад

0.1%

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FCA1 год назад

We all seek fulfillment, but even the greatest achievements can feel empty. In 2025, let’s pursue a GLORY that lasts—a purpose that inspires us to give our all, on and off the field, while sharing love & hope with others. Sign up to receive the tools you need to chase His glory.

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Nandini Chaar1 год назад

Holi khelna koi gunah thore na hai lekin kuch logo ke saitani soch mein ye gunah hai unse main kahna chaungi ki soch badlo aur bhai chara nibhao .

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Shruti Pandey 🚩1 год назад

Sabki apni apni soch hai

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परमार भावना 🇮🇳 🍥1 год назад

हाँ सही बात है, ,ऐसे कोई ही होते है जो ,धर्म कि बात कहते हैं, , आज इक मुस्लीम मेरे स्टॉल पर भी आया और ६० का सामान लेकर गया 👍

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Anamika Soni1 год назад

पता नहीं कैसे विश्वास करें सामने कुछ और और पीठ के पीछे कुछ और करें पर अच्छा लग रहा है ऐसी बातें कहीं इन लोगों ने तो

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Ajitabh1 год назад

शानदार

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Kalpana चौधरी ✨1 год назад

यही तो है असली भाई चारा 👍

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Sanjaybhai ( Hindu) 🇮🇳🚩1 год назад

ऐसे मुस्लिम 1000 मेरे 1 हि होते हैं

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होली किसी एक रंग का नहीं बल्कि हर रंग और प्यार का त्यौहार है। ऐसे में एक निर्वाचित मुख्यमंत्री द्वारा एक पुलिस अधिकारी की सड़क छाप सोच को बढ़ावा देना बेहद निंदनीय है। होली और जुम्मे के बहाने सांप्रदायिक वैमनस्यता को बढ़ावा देने वालों को शायद पता नहीं कि बीते 25 सालों में 6 बार होली और जुम्मा एक साथ आए हैं, शांतिपूर्वक ढंग से मनाए गए हैं, मगर ऐसी कट्टर सोच पहली बार देखने को मिली है। मुग़लों से लेकर अंग्रेज़ों तक और पिछले 75 साल में हर बार होली बड़े उल्लास के साथ मनाई जाती रही है, लेकिन यह पहली बार हो रहा है कि हिंदुओं के स्वयंभू ठेकेदारों की सरकार में ही हिंदुओं का त्यौहार ख़तरे में आ गया। यह कैसे हिंदुओं के ठेकेदार हैं और यह कैसी नकारा सरकार है? क्यों हमें अपने त्यौहारों पर मस्जिदों के सामने ही नाचना है? इस वाहियात सोच का हिंदू संस्कृति में कोई स्थान नहीं है। आज सरकार के अहमक अधिकारियों द्वारा होली पर मुसलमानों को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी दी जा रही है, कल यही अहमक अधिकारी ईद पर हिंदुओं को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी देंगे! यह क्या मज़ाक़ बना रखा है देश का? इनके इन विभाजनकारी मंसूबों को इस देश की तासीर कामयाब नहीं होने देगी। क्योंकि इस देश की सभ्यता और संस्कृति के हज़ारों साल के इतिहास में कई शासक आए और गए, मगर इस देश की सभ्यता और संस्कृति बनी रही, क्योंकि इस देश की तासीर ही इतनी मज़बूत है। आप सब पूरे उत्साह से होली खेलें और किसी के साथ ज़ोर ज़बरदस्ती न होने दें - वो महिलाएँ हों, हिंदू हों, मुसलमान हों या कोई भी हो। मदन गोपाल सिंह जी की मधुर आवाज़ में होली पर बुल्लेशाह जी का यह शानदार कलाम सुनिए। आप सब को होली की बहुत बहुत मुबारकबाद।

Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ

179,451 просмотров • 1 год назад