Загрузка видео...

Не удалось загрузить видео

На главную

भारत में मुस्लिम Minority नहीं, बल्कि 2nd Largest Majority हैं । Uniform Civil Code के आने से सबसे ज़्यादा फ़ायदा Muslim औरतों का ही होगा । भारत में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम है, फिर बहु-विवाह की छूट किसी एक मजहब को क्यों ? UCC द्वारा बहु-विवाह जैसी...

16,043 просмотров • 3 лет назад •via X (Twitter)

Комментарии: 0

Нет доступных комментариев

Здесь появятся комментарии из оригинального поста

Похожие видео

अमेरिका का गेर जिम्मेदार राष्ट्रपति Donald Trump भारत पर 25% Terrif और साथ में Russia से व्यापार करने के लिए पेनल्टी लगानें का ऐलान कर चुके हैं। आश्चर्य होता है की अमेरिका जैसे सुपर देश के पास राष्ट्रपति को सलाह देने वाले सिर्फ एकतरफा आर्थिक पहलू देखकर Trump को भारत पर Terrif लगाने का सलाह देते है या ट्रम्प अपनी मर्जी से फेसले लेते हैं? Canada के Business Tycoon हो - #Pakistan के Arif Jhakariya हो - पाकिस्तानी मिडिया की बेबाक पत्रकार Arzoo Qadri हो - या अमेरिका का राजनेता Nikki Haley हो, पुरा विश्व इस बात पर एक सुर में कह रहा की भारत पर टैरीफ लगाना ट्रम्प को भारी पड़ेगा।। भारत पर टैरीफ लगाने पर को सिर्फ खरोंच आयेगी, भारत का कोइ नुक़सान नहीं होगा किन्तु Asia में अमेरिका का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। आज Chaina पर अमेरिका का दबाव है, वो भारत के सशक्त बनने की वजह से है, अमेरिका अगर भारत को दुश्मन समझेगा तो उनका घाटा होगा। भारत के रुस से तेल खरीदने पर अमेरिका को आपत्ति है, पर नाटो देश आज भी गैस के लिए रुस पर निर्भर है। Trump चाहते हैं की भारत उसके दबाव में आये, लेकिन अमेरिका की Amazon - Microsoft - Google - Apple- Tesla जैसी कंपनियां भी ट्रम्प के दबाव को दरकिनार करके भारत में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है✅ 1965 - 1971 -1974 - 1998 में जब भारत कमजोर था, तब भी अमेरिका का दबाव में भारत नहीं आया था। आजका भारत सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि विश्व में शक्ति के रुप में स्थापित हो चुका है, तब ट्रम्प का ये Tariff Bomb अमेरिका को भारी नुक्सान पहुंचाएगा ।। अंत में सिर्फ इतना ही की भारत पर टैरीफ लगाकर ट्रम्प ने कुल्हाड़ी पर पैर मारा है, ट्रम्प सिर्फ एशिया में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में अप्रासंगिक हो जायेगा। जय हिन्द 🇮🇳

अखण्ड भारत संकल्प

21,278 просмотров • 1 год назад

सम्भोग का प्राथमिक अनुभव शरीर से ज्यादा गहरा नहीं होता। लेकिन शरीर के अनुभव पर ही जो रुक जाते हैं, वे सेक्स के पूरे अनुभव को उपलब्ध नहीं होते। उन्हें, मैंने जो गहराइयों की बातें कही हैं, उसका उन्हें कोई भी पता नहीं चल सकता। और अधिक लोग शरीर के तल पर ही रुक गए हैं। इस संबंध में यह भी जान लेना जरूरी है कि जिन देशों में भी प्रेम के बिना विवाह होता है, उस देश में सेक्स शरीर के तल पर ही रुक जाता है, उससे गहरा नहीं जा सकता। विवाह दो शरीरों का हो सकता है, विवाह दो आत्माओं का नहीं। दो आत्माओं का प्रेम हो सकता है। तो अगर प्रेम से विवाह निकलता हो, तब तो विवाह एक गहरा अर्थ ले लेता है। और अगर विवाह दो पंडितों के और दो ज्योतिषियों के हिसाब-किताब से निकलता हो, और जाति के विचार से निकलता हो, और धन के विचार से निकलता हो, तो वैसा विवाह कभी भी शरीर से ज्यादा गहरा नहीं जा सकता। लेकिन ऐसे विवाह का एक फायदा है। शरीर मन की बजाय ज्यादा स्थिर चीज है। इसलिए शरीर जिन समाजों में विवाह का आधार है, उन समाजों में विवाह सुस्थिर होगा, जीवन भर चल जाएगा। शरीर अस्थिर चीज नहीं है। शरीर बहुत स्थिर चीज है। उसमें परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे आता है और पता भी नहीं चलता। शरीर जड़ता का तल है। इसलिए जिन समाजों ने यह समझा कि विवाह को स्थिर बनाना जरूरी है- एक ही विवाह पर्याप्त हो, बदलाहट की जरूरत न पड़े, उनको प्रेम अलग कर देना पड़ा। क्योंकि प्रेम होता है मन से और मन चंचल है। जो समाज प्रेम के आधार पर विवाह को निर्मित करेंगे, उन समाजों में तलाक अनिवार्य होगा। उन समाजों में विवाह परिवर्तित होगा; विवाह स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती। क्योंकि प्रेम तरल है। मन चंचल है। शरीर स्थिर और जड़ है। आपके घर में एक पत्थर पड़ा हुआ है। सुबह पत्थर पड़ा था, सांझ भी पत्थर वहीं पड़ा रहेगा। सुबह एक फूल खिला था, सांझ तक मुर्झा जाएगा और गिर जाएगा। फूल जिंदा है, जन्मेगा, जीएगा, मरेगा। पत्थर मुर्दा है, वैसे का वैसा सुबह था, वैसा ही शाम पड़ा रहेगा। पत्थर बहुत स्थिर है। विवाह पत्थर की तरह है। शरीर के तल पर जो विवाह है, वह स्थिरता लाता है, समाज के हित में है। लेकिन एक-एक व्यक्ति के अहित में है। क्योंकि वह स्थिरता शरीर के तल पर लाई गई है और प्रेम से बचा गया है। इसलिए शरीर के तल से ज्यादा पति और पत्नी का संभोग और सेक्स नहीं पहुंच पाता गहरे में। एक यांत्रिक, एक मैकेनिकल रूटीन हो जाती है। एक यंत्र की भांति जीवन हो जाता है सेक्स का। उस अनुभव को रिपीट करते रहते हैं और जड़ होते चले जाते हैं। लेकिन उससे ज्यादा गहराई कभी भी नहीं मिलती। जहां प्रेम के बिना विवाह होता है उस विवाह में और वेश्या के पास जाने में बुनियादी भेद नहीं है, थोड़ा सा भेद है। बुनियादी नहीं है वह। वेश्या को आप एक दिन के लिए खरीदते हैं और पत्नी को आप पूरे जीवन के लिए खरीदते हैं। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जहां प्रेम नहीं है, वहां खरीदना ही है, चाहे एक दिन के लिए खरीदो, चाहे पूरी जिंदगी के लिए खरीदो। हालांकि साथ रहने से रोज-रोज एक तरह का संबंध पैदा हो जाता है एसोसिएशन से। लोग उसी को प्रेम समझ लेते हैं। वह प्रेम नहीं है। प्रेम और ही बात है। शरीर के तल पर विवाह है इसलिए शरीर के तल से गहरा संबंध कभी भी नहीं उत्पन्न हो पाता। यह एक तल है। दूसरा तल है सेक्स का--मन का तल, साइकोलाजिकल । वात्स्यायन से लेकर पंडित कोक तक जिन लोगों ने भी इस तरह के शास्त्र लिखे हैं सेक्स के बाबत, वे शरीर के तल से गहरे नहीं जाते। दूसरा तल है मानसिक। जो लोग प्रेम करते हैं और फिर विवाह में बंधते हैं, उनका सेक्स शरीर के तल से थोड़ा गहरा जाता है। वह मन तक जाता है। उसकी गहराई साइकोलाजिकल है। लेकिन वह भी रोज-रोज पुनरुक्त होने से थोड़े दिनों में शरीर के तल पर आ जाता है और यांत्रिक हो जाता है। पश्चिम ने जो व्यवस्था विकसित की है दो सौ वर्षों में प्रेम- विवाह की, वह मानसिक तल तक सेक्स को ले जाती है। और इसीलिए पश्चिम में समाज अस्तव्यस्त हो गया है; क्योंकि मन का कोई भरोसा नहीं है। वह आज कहता है कुछ, कल कुछ कहने लगता है। सुबह कुछ कहता है, सांझ कुछ कहने लगता है। घड़ी भर पहले कुछ कहता है, घड़ी भर बाद कुछ कहने लगता है। शायद आपने सुना होगा कि बायरन ने जब शादी की, तो कहते हैं कि तब तक वह कोई साठ-सत्तर स्त्रियों से संबंधित रह चुका था। एक स्त्री ने उसे मजबूर ही कर दिया विवाह के लिए। तो उसने विवाह किया। और जब वह चर्च से उतर रहा था विवाह करके अपनी पत्नी का हाथ हाथ में लेकर घंटियां बज रही हैं चर्च की; मोमबत्तियां अभी जो जलाई गई हैं, जल रही हैं; अभी जो मित्र स्वागत करने आए थे, वे विदा हो रहे हैं; और वह अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर 1/2
0:34

Sensitive content

सम्भोग का प्राथमिक अनुभव शरीर से ज्यादा गहरा नहीं होता। लेकिन शरीर के अनुभव पर ही जो रुक जाते हैं, वे सेक्स के पूरे अनुभव को उपलब्ध नहीं होते। उन्हें, मैंने जो गहराइयों की बातें कही हैं, उसका उन्हें कोई भी पता नहीं चल सकता। और अधिक लोग शरीर के तल पर ही रुक गए हैं। इस संबंध में यह भी जान लेना जरूरी है कि जिन देशों में भी प्रेम के बिना विवाह होता है, उस देश में सेक्स शरीर के तल पर ही रुक जाता है, उससे गहरा नहीं जा सकता। विवाह दो शरीरों का हो सकता है, विवाह दो आत्माओं का नहीं। दो आत्माओं का प्रेम हो सकता है। तो अगर प्रेम से विवाह निकलता हो, तब तो विवाह एक गहरा अर्थ ले लेता है। और अगर विवाह दो पंडितों के और दो ज्योतिषियों के हिसाब-किताब से निकलता हो, और जाति के विचार से निकलता हो, और धन के विचार से निकलता हो, तो वैसा विवाह कभी भी शरीर से ज्यादा गहरा नहीं जा सकता। लेकिन ऐसे विवाह का एक फायदा है। शरीर मन की बजाय ज्यादा स्थिर चीज है। इसलिए शरीर जिन समाजों में विवाह का आधार है, उन समाजों में विवाह सुस्थिर होगा, जीवन भर चल जाएगा। शरीर अस्थिर चीज नहीं है। शरीर बहुत स्थिर चीज है। उसमें परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे आता है और पता भी नहीं चलता। शरीर जड़ता का तल है। इसलिए जिन समाजों ने यह समझा कि विवाह को स्थिर बनाना जरूरी है- एक ही विवाह पर्याप्त हो, बदलाहट की जरूरत न पड़े, उनको प्रेम अलग कर देना पड़ा। क्योंकि प्रेम होता है मन से और मन चंचल है। जो समाज प्रेम के आधार पर विवाह को निर्मित करेंगे, उन समाजों में तलाक अनिवार्य होगा। उन समाजों में विवाह परिवर्तित होगा; विवाह स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती। क्योंकि प्रेम तरल है। मन चंचल है। शरीर स्थिर और जड़ है। आपके घर में एक पत्थर पड़ा हुआ है। सुबह पत्थर पड़ा था, सांझ भी पत्थर वहीं पड़ा रहेगा। सुबह एक फूल खिला था, सांझ तक मुर्झा जाएगा और गिर जाएगा। फूल जिंदा है, जन्मेगा, जीएगा, मरेगा। पत्थर मुर्दा है, वैसे का वैसा सुबह था, वैसा ही शाम पड़ा रहेगा। पत्थर बहुत स्थिर है। विवाह पत्थर की तरह है। शरीर के तल पर जो विवाह है, वह स्थिरता लाता है, समाज के हित में है। लेकिन एक-एक व्यक्ति के अहित में है। क्योंकि वह स्थिरता शरीर के तल पर लाई गई है और प्रेम से बचा गया है। इसलिए शरीर के तल से ज्यादा पति और पत्नी का संभोग और सेक्स नहीं पहुंच पाता गहरे में। एक यांत्रिक, एक मैकेनिकल रूटीन हो जाती है। एक यंत्र की भांति जीवन हो जाता है सेक्स का। उस अनुभव को रिपीट करते रहते हैं और जड़ होते चले जाते हैं। लेकिन उससे ज्यादा गहराई कभी भी नहीं मिलती। जहां प्रेम के बिना विवाह होता है उस विवाह में और वेश्या के पास जाने में बुनियादी भेद नहीं है, थोड़ा सा भेद है। बुनियादी नहीं है वह। वेश्या को आप एक दिन के लिए खरीदते हैं और पत्नी को आप पूरे जीवन के लिए खरीदते हैं। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। जहां प्रेम नहीं है, वहां खरीदना ही है, चाहे एक दिन के लिए खरीदो, चाहे पूरी जिंदगी के लिए खरीदो। हालांकि साथ रहने से रोज-रोज एक तरह का संबंध पैदा हो जाता है एसोसिएशन से। लोग उसी को प्रेम समझ लेते हैं। वह प्रेम नहीं है। प्रेम और ही बात है। शरीर के तल पर विवाह है इसलिए शरीर के तल से गहरा संबंध कभी भी नहीं उत्पन्न हो पाता। यह एक तल है। दूसरा तल है सेक्स का--मन का तल, साइकोलाजिकल । वात्स्यायन से लेकर पंडित कोक तक जिन लोगों ने भी इस तरह के शास्त्र लिखे हैं सेक्स के बाबत, वे शरीर के तल से गहरे नहीं जाते। दूसरा तल है मानसिक। जो लोग प्रेम करते हैं और फिर विवाह में बंधते हैं, उनका सेक्स शरीर के तल से थोड़ा गहरा जाता है। वह मन तक जाता है। उसकी गहराई साइकोलाजिकल है। लेकिन वह भी रोज-रोज पुनरुक्त होने से थोड़े दिनों में शरीर के तल पर आ जाता है और यांत्रिक हो जाता है। पश्चिम ने जो व्यवस्था विकसित की है दो सौ वर्षों में प्रेम- विवाह की, वह मानसिक तल तक सेक्स को ले जाती है। और इसीलिए पश्चिम में समाज अस्तव्यस्त हो गया है; क्योंकि मन का कोई भरोसा नहीं है। वह आज कहता है कुछ, कल कुछ कहने लगता है। सुबह कुछ कहता है, सांझ कुछ कहने लगता है। घड़ी भर पहले कुछ कहता है, घड़ी भर बाद कुछ कहने लगता है। शायद आपने सुना होगा कि बायरन ने जब शादी की, तो कहते हैं कि तब तक वह कोई साठ-सत्तर स्त्रियों से संबंधित रह चुका था। एक स्त्री ने उसे मजबूर ही कर दिया विवाह के लिए। तो उसने विवाह किया। और जब वह चर्च से उतर रहा था विवाह करके अपनी पत्नी का हाथ हाथ में लेकर घंटियां बज रही हैं चर्च की; मोमबत्तियां अभी जो जलाई गई हैं, जल रही हैं; अभी जो मित्र स्वागत करने आए थे, वे विदा हो रहे हैं; और वह अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर 1/2

तृप्त ...🖤

197,819 просмотров • 1 год назад

जर्मनी में राहुल गांधी: “भारतीय आपस में लड़ेंगे। भारत का पतन होगा।” ब्रिटेन में: “केरोसिन फैलाया जा रहा है और भारत आग की लपटों में घिर जाएगा।” इससे पहले: अशांति, अराजकता, पतन और जनरेशन-जेड के दंगों की आशंकाएं। यह आलोचना नहीं है - यह सोरोस द्वारा यूक्रेन और कई अन्य जगहों पर अपनाई गई सत्ता परिवर्तन की रणनीति है। कोई भी भारतीय विदेशी धरती पर अपने देश के पतन की भविष्यवाणी नहीं करेगा। घर में भारत को कमजोर करने से लेकर विदेशों में अराजकता फैलाने तक, राहुल गांधी का एक ही लक्ष्य है: भारत को अस्थिर करना। कांग्रेस एक मजबूत, स्थिर और समृद्ध भारत से डरती है। कांग्रेस हिंदुओं की लाशों पर सत्ता और लूट चाहती है।

ocean jain

50,774 просмотров • 7 месяцев назад

भारत की पहली सुरीली सड़क 🇮🇳 🎶 मुंबई में मरीन ड्राइव से वर्ली के बीच हाल ही में तैयार की गई यह ‘म्यूजिकल रोड’ भारत में अपनी तरह का पहला अनोखा प्रयोग है। इस सड़क पर निर्धारित गति (60 किमी/घंटा) से वाहन चलाने पर टायरों के कंपन से मधुर संगीत सुनाई देता है, जो ड्राइविंग के अनुभव को खास बनाता है। यह पहल न केवल तकनीक और नवाचार का उदाहरण है, बल्कि सड़क सुरक्षा और बेहतर ड्राइविंग अनुशासन को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। सही गति से चलने वाले वाहन ही इस संगीत का आनंद ले सकते हैं, जिससे ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण में मदद मिलती है। यह सुरीली सड़क आधुनिक भारत की सोच को दर्शाती है, जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक अनुभव भी बनता है। 🛣️

BJP

27,597 просмотров • 5 месяцев назад

कट्टर महिला विरोधी, पाखंडी, ढोंगी और झूठे भाजपाई आँख खोल इस सच्चाई को स्वीकार करें तथा अपने तुलनात्मक आँकड़े जारी करे। 👉 लोकसभा चुनाव-𝟐𝟎𝟐𝟒 में 𝐑𝐉𝐃 ने बिहार में सबसे अधिक 𝟐𝟗% महिलाओं को टिकट दिया, 𝐑𝐉𝐃 के 𝟐𝟓% लोकसभा सांसद महिला है। 👉 बिहार विधानसभा चुनाव-𝟐𝟎𝟐𝟓 में भी 𝐑𝐉𝐃 ने ही सबसे अधिक 𝟏𝟕% महिलाओं को टिकट दिया था। 👉 बिहार विधानपरिषद में भी दलों में सबसे अधिक महिलाओं का प्रतिनिधित्व 𝟐𝟏.𝟒% 𝐑𝐉𝐃 का है। 👉 अब तक बिहार की प्रथम और अंतिम महिला मुख्यमंत्री भी 𝐑𝐉𝐃 से ही है। विगत 𝟑𝟎 वर्षों में बिहार से भारत सरकार में अंतिम महिला केंद्रीय मंत्री भी 𝐑𝐉𝐃 से ही रही है। 👉 महिला विरोधी 𝐁𝐉𝐏-𝐉𝐃𝐔-𝐍𝐃𝐀 ने तो आज तक 𝟕𝟓 वर्षों में बिहार के इतिहास में बिहार से एक भी महिला को केंद्रीय मंत्री/मुख्यमंत्री नहीं बनाया है और ये नकली पाखंडी लोग महिला उत्थान की बात करते है?#TejashwiYadav #WomenReservation

Tejashwi Yadav

39,256 просмотров • 3 месяцев назад

अब गांव का विकास, गांव के फैसले से… VB-G RAM G से बदलेगी ग्रामीण भारत की तस्वीर! विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में ग्रामीण भारत को मजबूत बनाने के लिए मोदी सरकार ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (VB-G RAM G) योजना को 1 जुलाई से पूरे देश में लागू कर दिया है। यह सिर्फ रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है। ग्राम पंचायतें अब स्थानीय जरूरतों के हिसाब से योजनाएं तैयार करेंगी— ✅ काम गांव का होगा ✅ फैसला गांव का होगा ✅ विकास गांव का होगा रोजगार भी बढ़ेगा, आय भी बढ़ेगी और गांवों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। 🇮🇳

BJP

37,072 просмотров • 1 месяц назад

क्या आप जानते हैं कि इस वक्त भारत की सबसे बड़ी ताकत क्या है? हमारी ताकत है 25 साल से कम उम्र की युवा आबादी, जिसकी संख्या इस समय पूरी दुनिया में सबसे अधिक भारत में है। ये वक्त है युवाओं की इस अपार ऊर्जा से भारत की अर्थव्यवस्था को ट्रांसफॉर्म करने का और इसी उद्देश्य से हमने ‘थ्री डाइमेन्शनल स्ट्रेटेजी’ बनाई है। - भर्ती भरोसा कानून 30 लाख नियुक्तियों से सिर्फ रोज़गार ही नहीं देगा, बल्कि सरकारी ढांचे की कार्यकुशलता भी बढ़ा देगा। - ‘पहली नौकरी पक्की’ योजना सिर्फ एक लाख रू सालाना की नौकरी भर नहीं है, यह भारत की मौजूदा स्किल्ड वर्कफोर्स की संख्या कई गुना बढ़ा देगी। - और ‘युवा रोशनी’ 5 हज़ार करोड़ के बजट से ज़िले-ज़िले में एंटरप्रेन्योर तैयार करेगी। युवा ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग भारतीय उद्योगों की रीढ़ MSMEs को मज़बूती और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देगा। भारत के अवसर काल का एक महत्वपूर्ण दशक ज़ीरो इकोनॉमिक विज़न वाली सरकार के ‘प्रयोगों’ की भेंट चढ़ चुका है। इसलिए अब पीछे मुड़ कर देखने का नहीं, अपना और अपने देश का भविष्य बदलने का वक्त है। अब ‘रोज़गार क्रांति’ का वक्त है। #PehliNaukriPakki

Rahul Gandhi

432,086 просмотров • 2 лет назад

देश की हर गरीब महिला को ‘महालक्ष्मी योजना’ बहुत ध्यान से समझने की ज़रूरत है। कांग्रेस ने हर गरीब परिवार की एक महिला को महालक्ष्मी मान कर उनके खाते में साल के 1 लाख रू डालने का संकल्प लिया है। महिलाएं ‘घर का बैंक’ होती हैं जिनके पास गया एक-एक रुपया परिवार को मज़बूत बनाने में ही लगता है और मज़बूत परिवार ही मज़बूत समाज का आधार हैं। महिला को अब किसी के आगे हाथ फैलाने या नज़र झुकाने की ज़रूरत नहीं होगी। पढ़ाई, कमाई और दवाई का बोझ घर की महिला खुद अपने कंधों पर उठाने में सक्षम होगी। महिलाओं के हाथ में एक लाख का मतलब परिवार के सामने अचानक आई किसी विपदा से निपटने का इंश्योरेंस भी है। यह योजना बड़ी संख्या में छोटे निवेश वाले बिजनेस शुरू करने में सहायक बन कर गांव-गांव महिलाओं को उद्यमी भी बनाएगी। कांग्रेस देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए महिलाओं की आकांक्षाओं में निवेश पर विश्वास रखती है। महालक्ष्मी सिर्फ एक योजना नहीं है बल्कि आधी आबादी के बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि की गारंटी है। संघर्ष के दिन खत्म हुए, अब खुशियां आपका इंतज़ार कर रही हैं। #NaariNyay

Rahul Gandhi

434,338 просмотров • 2 лет назад

शिक्षक दिवस पर कुछ दिल की बात - अब वक्त आ गया है कि हमारे देश में शिक्षकों का वेतन देश के किसी भी सरकारी कर्मचारी से, यहाँ तक कि किसी IAS अधिकारी से भी, अधिक होना चाहिए. भारत जैसे देश में जहां हम हज़ारों-हज़ार साल से गुरू को भगवान का दर्जा देते आये हैं, एक शिक्षक की सैलरी किसी भी सरकारी अधिकारी से तो अधिक होनी चाहिए? यहां तक कि 30-35 साल के अनुभवी अध्यापक की सैलरी कैबिनेट सेक्रेटरी, (जोकि 30-35 साल के अनुभवी IAS अधिकारी होते हैं) से अधिक होनी चाहिए। 2047 में अगर विकसित भारत का सपना सच करना है तो उसकी नींव इस पहल से करनी होगी। किसी नेता के सपने देखने या भाषण देने से विकसित भारत का सपना सच नहीं होगा। शिक्षकों को भारत के समाज में वह सम्मान देना होगा जिसकी हम लगातार बात करते हैं. समस्त कर्मचारियों में शिक्षकों की सैलरी का सबसे ऊपर होना, इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा. वैसी भी विश्व के शिक्षकों के मुकाबले भारत में शिक्षकों की सैलरी काफी कम है। विश्व में कई सारे ऐसे देश हैं जहां शिक्षकों की सैलरी वहां के अधिकारियों के मुकाबले अधिक है। जर्मनी में जहां औसतन शिक्षकों का सालाना वेतन 72 लाख है जबकि वहां के अधिकारियों की औसतन सैलरी 71 लाख रुपये सालाना है। इसी तरह कई अन्य देश जैसे बेल्जियम, स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका, जपान सहित बहुत से देशों में वहां के टीचर्स की आय काफी अधिक है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि भारत के गुरूओं को सरकारी अधिकारी से अधिकर वेतन देकर सम्मान दिया जाए। क्योंकि आज के स्कूलों में इन शिक्षकों के हाथों ही तो 2047 का युवा भारत तैयार हो रहा हैं. एक बार पुनः शिक्षक दिवस की शुभकानाएँ.

Manish Sisodia

23,192 просмотров • 1 год назад