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भरतपुर से आया है यह वीडियो... ज्यादा जानकारी भरतपुर के मित्र दे सकते हैं

78,338 次观看 • 1 年前 •via X (Twitter)

10 条评论

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Ankur Singh1 年前

एक रील की शौकीन महिला ने एक गरीब आदमी की पिटाई करते हुए वीडियो बनाया और बताया की छेड़छाड़ कर रहा है और खुद को बहादुर बेटी बनाने का झूठा प्रचार किया परन्तु तुरंत ही उसकी पोल खुल गई और पीड़ित पुरूष द्वारा जब थाने में शिकायत की गई तो पुलिस का व्यवहार आपके सामने है।

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Dinesh K Gurjar 🇮🇳🙏1 年前

शायद यह ही रवैया आम आदमी की रक्षा के लिए अपराधियों और लुटेरों के साथ रखें तो कुछ हद तक लोगों का जीवन आसान हो सकता हैं। पर दोस्ती की गांठ इतनी मजबूत है की टूटती नहीं।

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DC बौद्ध1 年前

@BharatpurPolice @PoliceRajasthan @RajPoliceHelp इस पुलिस कर्मी के खिलाफ कार्यवाही करे आमजन के साथ सही तरीके से बात नहीं कर रहे औऱ ना ही पेश आ रहा है, क्या यहीं है आमजन में विश्वास?

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The Tribal Voice 🇮🇳1 年前

सरकारी नौकरी है इसकी, कितनी भी कम्प्लेन कर लो कितने भी सबूत ले आये, नौकरी तो जाने से रही तो सुधार क्यों करे ये

महेश ककरोडा 的头像
महेश ककरोडा1 年前

@BhajanlalBjp जी देखिए आपके गृह जिला कि पुलिस का बर्ताव, आखिर कब सुधरेगा आम आदमी व छात्रो के प्रति पुलिस का रवैया??

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Ankur Singh1 年前

कई सामाजिक संगठन अब आगे आए है तब उस गरीब पीड़ित की सुनवाई हुई है और मामला दर्ज कर लिया गया है ये सभी संगठन के ही लोग है।

Rajesh Bunker 的头像
Rajesh Bunker1 年前

@BhajanlalBjp @RajCMO @PoliceRajasthan देखिये पुलिस वालो का तरीका ओर सलीका, आमजन में भय हैँ या विश्वास? थाना आमजन के लिए हैँ लेकिन आमजन को डर सबसे ज्यादा थाने में जाने से लगता है! उच्च अधिकारी मामले की जाँच करें......

Kishor Singh 的头像
Kishor Singh1 年前

पुलिस प्रशासन का इस तरह का व्यवहार भरतपुर को शर्मसार करने वाला Cm भजनलाल को इस पुलिस वाले का सही सलाह देनी चाहिए with punishment

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GOPAL CHOUDHARY1 年前

मध्यम वर्गीय लोगों के साथ पुलिस का यह रवैया हर जगह हैं। राजस्थान सरकार को इस संबध में कार्यवाही करनी चाहिए

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John sharma1 年前

भरतपुर का पुलिस प्रशासन तो राजस्थान में सबसे भृष्ट रहा हैं हमेशा से ही औऱ उसका मुख्य कारण है महाराज साहब क़ी शह...

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मुख्यमंत्री के गृह जिले के ये हाल हैं मंत्री सुरेश सिंह रावत कल भरतपुर में थे और कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर कर जो खरी खोटी सुनाई है, वह वे आगे जाकर बताना पसंद करेंगे या नहीं कोई नहीं जानता। लेकिन इन कार्यकर्ताओं की ये बातें आगे तक पहुंचनी तो चाहिए ही। सुरेश सिंह रावत भरतपुर जिले के प्रभारी मंत्री हैं। कार्यकर्ताओं की पहुंच अधिकतम उन तक ही हो सकती है। बीजेपी के राज में बीजेपी के कार्यकर्ता इतने फ्रस्ट्रेशन में क्यों हैं, इसका जवाब बीजेपी और सरकार दोनों को तलाश करना चाहिए। गनीमत रही कि इस घटनाक्रम के बीच मंत्री जी को कलेक्टर कमर चौधरी जैसे तैसे यहां से निकाल कर ले गए और उनको गाड़ी तक पहुंचाया। बाकी पुलिस तो नहीं निकाल पा रही थी। अब सुरेश सिंह रावत इस जिले का प्रभार रखना चाहेंगे या बदलवाएंगे या ज्यादा कड़े सुरक्षा इंतजाम के साथ भरतपुर ही जाएंगे या कार्यकर्ताओं के बीच जाएंगे या नहीं जाएंगे यह देखने वाली बात होगी। इस तरह जलील होने के लिए तो कोई मंत्री बनता ही नहीं होगा। भरतपुर के लोग बताते हैं कि भरतपुर के भाजपा कार्यकर्ताओं को यह लग ही नहीं रहा कि कोई भरतपुर से मुख्यमंत्री बना है। आमतौर पर जो भी मुख्यमंत्री होता है, उसके गृह जिले में कुछ लोग होते हैं जिनके पास आम लोग और आम कार्यकर्ता आसानी से पहुंच सकते हैं और अपनी बात रख सकते हैं। मुख्यमंत्री के वे विश्वास पात्र होते हैं। उनके कहने से कम हो जाते हैं। भरतपुर में अभी ऐसा कोई भी नहीं है जो मुख्यमंत्री जी का विश्वास जीत पाया हो और लोगों के काम करवा सकता हो। भरतपुर के लोग यह भी बताते हैं कि तीन लोग मुख्यमंत्री जी के बेहद करीबी हैं लेकिन काम उनके खुद के भी नहीं होते। अशोक गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री रहे। उनके दो कार्यकाल के दौरान मैं जोधपुर में रहा। इस दौरान मैंने जो महसूस किया वह यह था कि तीन चार लोग हर बार ऐसे रहे जो कांग्रेस कार्यकर्ताओं के काम करवा सकते थे।

Arvind Chotia

13,694 次观看 • 9 个月前

भाजपा के लोग कैसे संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर उन्हें कमजोर करते हैं इसकी बानगी देखिए। मुख्यमंत्री जी के गृह जिले भरतपुर में 14 महीने से जिला प्रमुख का पद रिक्त पड़ा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में 6 महीने से अधिक कोई पद रिक्त नहीं होना चाहिए, लेकिन 14 महीने से भरतपुर जिला प्रमुख के पद पर प्रशासक लगा रखा है। डेढ साल में 1 बार भी भरतपुर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक नहीं हुई, जिसमें सदस्यों का कोरम पूर्ण हुआ हो। भाजपा की गंदी राजनीति से गांवों के विकास कार्य ठप्प पड़े हैं। राज्य निर्वाचन आयोग 3 बार भरतपुर जिला प्रमुख के चुनाव की तारीखें घोषित कर चुका है, लेकिन मुखिया जी हार के डर से बार-बार चुनाव स्थगित करवा देते हैं। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच 60 दिन में चुनाव कराने का आदेश दे चुकी है, लेकिन सरकार उसके खिलाफ भी स्थगन लेकर आ गई। ये लोग लोकतंत्र का गला घोंटने में लगे हैं, पंचायती राज अधिनियम में 5 वर्ष में पंचायत चुनाव कराना अनिवार्य है लेकिन भाजपा सरकार वहां भी चुनाव रोक कर बैठी है।

Govind Singh Dotasra

13,721 次观看 • 1 年前